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Sunday, July 26, 2026
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मस्तिष्क को शांत करने के लिए आजमाइए इन अचूक टिप्स को

Mind को शांत करना शायद ज्यादातर के बस के बाहर है। क्यों की आजकल की लाइफस्टाइल में हम इतना सोचते है जिसका आधा भी हमारे काम का नहीं होता है। ये जरुरत से ज्यादा सोचना ही Mind को शांत करना में सबसे बड़ी परेशानी का कारण है। अक्सर ऐसा होता है की हम दिनभर विचारो से घिरे रहते है चाह कर भी मस्तिष्क को शांत नहीं कर पाते है।

दिनभर कार्य का दबाव तनाव पैदा करता है, ऐसे में अगर मस्तिष्क को आराम न दिया जाये तो तनाव, अनिद्रा, और काम करने में व्यवधान जैसी समस्या होती है। ऐसे में हम अगर ठीक से सो भी ना पाते है तो मस्तिष्क दोबारा काम करने के लिए तैयार नहीं हो पाता है, अगर योगनिद्रा का अभ्यास सुबह सुबह किया जाये तो ऊर्जा में काफी सरंक्षंण किया जा सकता है।

Mind को शांत करना

आइये कुछ ऐसे अभ्यास जानते है जिनसे हम मस्तिष्क के दबाव को ना सिर्फ कम कर सकते है बल्कि खुद को भी संतुलित कर सकते है। विचारो की बाढ़ को हम आसानी से दूर कर सकते है।

Mind को शांत करना इतना आसान नहीं तो मुश्किल भी नहीं है बस इसकी समस्या को समझे और समाधान सामने है। सबसे पहले बात करते है मस्तिष्क को ज्यादा से ज्यादा परेशान करने वाली वजह जिनसे हम  सबसे ज्यादा प्रभावित होते है।

आकर्षण का सिद्धान्त – LAW OF ATTRACTION

आकर्षण का सिद्धान्त हमें उन कार्यो के लिए प्रेरित करता है जो हमारे लिए फायदेमंद है। आकर्षण के सिद्धान्त से आपका मस्तिष्क इस तरीके से कार्य करता है। की ये आपको उन कार्य के लिए ही प्रेरित करता है जो आपको पसंद है। और कार्य को पूरा करने के नए नए आईडिया सुझाता है।

सपनो के संसार में भी आप उन चीजो को देखते है जो आपको पसंद है इसका फायदा उठाकर आप सपनो में ऐसे विचारो को बढ़ावा दे सकते है जो आपको सही कार्य करने में सहायक है।

विचारो को अंतर्मुखी बनाना

हम ऐसे समाज में रहते है जहा अह्म ( अहंकार ) और किसी एक चीज को ज्यादा महत्त्व दिया जाता है। कई बार हम दुसरो के विचारो से तालमेल नहीं बैठा पाते है इसलिए उनसे खुद को दूर कर लेते है।

हमारा वक़्त मनोरंजन के साधनो ने छीन लिया है जिसकी वजह से हम दूसरे लोगो से जुड़ने की बजाय खुद को फेसबुक और व्हाटसअप जैसी चीजो में व्यस्त कर लेते है। इस वजह से हमारे अंदर अहंकार, ईगो जैसे तत्व जन्म ले लेते है।

अगर हम दुसरो से जुड़ कर उनके साथ वक़्त बिताते है तो समस्या को सुलझाने के नए तरीको को समझते है। और दुसरो के साथ हमारे रिश्ते अच्छे बनते है। जिससे हम दुसरो पर भरोसा करना सीखते है ये हमें समस्या को सुलझाने में सहायता करते है।

परेशान करने वाले विचार घूमना

फेसबुक व्हाट्सएप्प जैसी मीडिया से हम ना सिर्फ दुसरो से दूर भागने लगते है बल्कि जल्दी ही बात बात पर चिढ़ने लगते है। क्यों की ये हमे वास्तविकता से दूर ऐसे विचारो में घेरने लगती है जो हकीकत में कोई मायने नहीं रखते या फिर जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं होता है।

उदाहरण के लिए रात्रि को सोते वक़्त अगर हम डरावने कार्यक्रम देखते है तो सो नहीं पाते है और मस्तिष्क में उलटे सीधे विचार उमड़ते है वो अलग। इनकी वजह से हमारा मस्तिष्क शांत नहीं रह पाता है और बिना मतलब की शंकाओ से घिरने लगता है।

टीवी पर दिखाए जाने वाले विज्ञापन में उत्पाद को बेचने के लिए ऐसे विज्ञापन तैयार किये जाते है जो होते तो आम ही है पर आपके अवचेतन मस्तिष्क पर प्रभाव डालते है।

जिससे आप उन पर निर्भर होकर उन्हें खरीदने के लिए मजबूर हो जाते है।Mind को शांत करना है तो सोशल मीडिया से अधिकतम दुरी बनाये रखना शुरू कर दे।

समय ही संपदा है संपदा ही समय है

हम ज्यादातर सुनते रहते है की वक़्त अनमोल है इसलिए इसका एक एक सेकंड अमूल्य है। हमारा अवचेतन मन इस बात को गहराई से अपना लेता है जो की हमें जरुरत से ज्यादा काम में इस बात को ध्यान में रखकर करने को मजबूर कर देती है और जल्दबाजी में काम करने से हड़बड़ाहट ही रहती है।

हम ना तो खुश रहने का वक़्त निकाल पाते है ना ही खुद को प्रकृति से जोड़ पाते है ना ही ध्यान कर सकते है क्यों की मस्तिष्क में एक ही बात चलती है की वक़्त का हर सेकंड अनमोल है।

यही वजह है की हमारा मस्तिष्क ऐसे विचारो से भरने लगता है जो परेशान करने वाले होते है. हमारे अंदर अवचेतन मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है जो टीवी की दिखाई जाने वाली कल्पना को सच मानने पर मजबूर कर देता है. हालाँकि मस्तिष्क का दूसरा भाग हमें अभी भी हकीकत दिखाने की कोशिश करता है जो इसके ठीक विपरीत होती है।

इस वजह से हमारा मस्तिष्क इस भ्रम से बाहर ही नहीं निकल पाता है की ये जो दिखाया जा रहा है उसे माने या फिर वो जो मस्तिष्क बताता है।

और फिर मस्तिष्क विचारो के जंजाल में ही फंसता जाता है। टीवी मीडिया हमें प्रकृति से जुड़ने ही नहीं देता है ना ही प्रकृति की वास्तविकता दिखा पाता है। प्रकृति ही है जो दिल, दिमाग, और आत्मा को जोड़ती है।

समाज में घुलने मिलने का डर

समाज में दुसरो से मिलने पर किसी व्यक्ति को लगता है की वह दुसरो द्वारा तय किया जा रहा है। इस वजह से वह दुसरो से मिलने जुलने में डरने लगता है और मस्तिष्क में ऊलजलूल विचार चलने लगते है। अगर कोई आपको जज करने लगता है तो इसका मतलब है वो आपके साथ असुरक्षित महसूस करता है।

ऐसे में वो खुद पर ध्यान ना देकर आपकी और मुड़ने लगते है और आपको निशाना बनाने लगते है। वो उनका मुद्दा है आपका नहीं।

इस परिस्थिति को हैंडल करने का सबसे अच्छा तरीका है अपने आप को ऐसे प्रभाव से दूर रखना जिसके लिए खुद को एक ऐसे दर्पण की तरह मानना जो हर नकारात्मक विचार को प्रभाव को वापस सामने वाले पर भेज देता है। इस तरह आप उनसे प्रभावित ही नहीं हो सकते है।

Mind को शांत करने के तरीके

व्यस्तता को ख़त्म कीजिये : हमारा मस्तिष्क परेशान क्यों होता है अगर इसके सवाल का जवाब ढूंढते है तो जवाब मिलता है पैसे की समस्या या फिर जीने के लिए हमारी अर्थव्यवस्था जो हमारे जीवन को नियंत्रित करती है।

हो सकता है ये वक़्त हमारे नोकरी को बदलने का है और ऐसी नोकरी ढूंढने का है जिसे हम वास्तव में अपने दिल से करे।

सबसे आसान तरीका अपने दिल से पूछे की आपको क्या करना पसंद है। अगर पैसा महत्वपूर्ण नहीं है तो आपको क्या करना चाहिए ? मौज मस्ती के बाद हम वही करते है जो हमें दिल से पसंद है।

ऐसे में वो काम करे जिससे आपको नफरत है क्यों की जब आप फ्रेश हो जाते है तब काम करते वक़्त कुछ नया ही सीखते है.

हो सकता है आपको वो काम ही पसंद आने लगे इसकी वजह है हम वो कार्य पूर्ण कर चुके है जिसकी इच्छा मस्तिष्क में चलती है और फिर पीछे बचता है सिर्फ काम जिसे आप अच्छे तरीके से करेंगे ये मेरा विश्वास है तो आज ही इसे आजमाए और फर्क खुद देखे।

टीवी देखना बंद कर दे

खाली वक़्त हम सबसे ज्यादा जो काम करते है वो है टीवी देखना। हम सोचते है की इससे हमारा दिमाग रिफ्रेश होता है हम खुद को तरोताजा महसूस करते है लेकिन असल में टीवी हमारी सोच को ही नियंत्रित करने लगता है।

क्यों की काम के बाद मस्तिष्क को आराम दिया नहीं और टीवी देखने लग गए इस वजह से मस्तिष्क लगातार विचारो का आदान प्रदान करता रहता है।

अमेरिका में टीवी, रेडियो,न्यूज़ पेपर और मनोरंजन की किताबो के मध्य आपस में समझौता है जो उन्हें आपस में बांधे हुए है और वो आसानी से लोगो की सोच को नियंत्रित कर लेते है।

आप क्या है, कोई काम क्यों कर रहे है, क्या पहन रहे है ये सब मीडिया द्वारा नियंत्रित किया जाता है। आपका मस्तिष्क विचारो के तर्क वितर्क में ही उलझ कर रह जाता है.

इन सबसे बचने के लिए टीवी पर निर्भरता ख़त्म करनी होगी। जितना वक़्त आप टीवी देखते है उतना ही मीडिया द्वारा प्रभावित होकर उत्पाद खरीदने पर मजबूर होते है दूसरे शब्दो में आपका खाना पीना, पहनना और रहना सब मीडिया द्वारा कण्ट्रोल होने लगता है.

Mind को शांत करना है तो टीवी पर निर्भरता ख़त्म कर दे क्यों की ये मनोरंजन का साधन नहीं है आपके मस्तिष्क की सोच को नियंत्रित करने माध्यम है।

Mind को शांत करना है तो ध्यान है सबसे अच्छा माध्यम

ज्यादातर लोग ध्यान न कर पाने का सबसे ज्यादा बहाना बनाते है की वक़्त नहीं है। एक सर्वे के अनुसार ज्यादातर लोग जब खाली होते है टीवी देखते है जो उनका कम से कम तीन घंटे की खपत करता है।

जब की वो पडोसी से मिलना पसंद नहीं करते है। ये सर्वे बताता है की टीवी हमारे खाली वक़्त को कैसे खपत करता है कैसे हम इस पर निर्भर रहते है. इसके हिसाब से हम वक़्त नही होने का बहाना तो कर ही नहीं सकते है।

दूसरा लोग कहते है की ध्यान करे तो कैसे करे मस्तिष्क से विचार कम ही नहीं होते है मस्तिष्क शांत हो तो ध्यान करे !

ध्यान की अनेको विधिया है आपको हर विधि को आजमा कर अपने लिए श्रेष्ठ विधि का चुनाव करना चाहिए।

ध्यान के लिए सबसे अच्छा है त्राटक क्यों की इससे हम ना सिर्फ मस्तिष्क की गतिविधि को विराम दे सकते है बल्कि उन्हें नियंत्रित भी कर सकते है। ये हमें आत्मिक शांति प्रदान करता है।

खुश रहना है तो Ego दूर भगाए

ज्यादातर लोग दुसरो से इसलिए तालमेल नहीं बैठा पाते है क्यों की इसमें उनके ईगो बाधक बनने लगते है।

किसी के विचारो से प्रभावित ना होने की कोशिश एक तरह का ईगो है जो हमे दुसरो को समझने से रोकते है. Mind को शांत करना है और ईगो से छुटकारा पाना है तो दुसरो की भावनाओ को समझन शुरू कर दे.

खुद को दुसरो की जगह रखकर उन बातो को महसूस करना जिससे आपको परेशानी होती है। इससे आपको पता चलता है की आप दुसरो को जो कहते है अगर वही आपके साथ हो तो आपको कैसा लगेगा। ये तरीका अपने आप आपका अहम ख़त्म कर देगा।

आपका शरीर आपका मंदिर है

खाने में मीठे की अधिकता और उत्तेजक पदार्थो का सेवन आपके सोचने की शक्ति को प्रभावित करता है। नशीले पदार्थ का सेवन आपके सोचने की शक्ति ख़त्म कर देता है आप एक ही विचार को बड़ा करके उसमे फंस जाते है।

आपका खानपान आपके विचार को प्रभावित करता है इसलिए खानपान को लेकर सचेत रहे उल्टा सीधा खाने की बजाय अपने लिए वक़्त निकाले और अच्छा सात्विक खाना खाये।

आपका शरीर क्या चाहता है ये भी महत्वपूर्ण है अगर आपके शरीर की जरुरत है अम्लीय खाना और आप खा लेते है क्षारीय तो आपका शरीर इसे स्वीकार नहीं कर पाता है जिससे हमारा शरीर और मस्तिष्क सही तरीके से काम नहीं कर पाता है।

अगर दिनभर काम करके थक गए है Mind को शांत करना है तो सबकुछ भुला कर एक झपकी ले ले आपका शरीर वक़्त पर आपको बताता रहता है की इसे क्या चाहिए जरुरत बस उसे समझने की है.

Mind को शांत करना है तो करे नियमित व्यायाम

व्यायाम आपके मस्तिष्क और शरीर दोनों को सही तरीके से काम करते रहने के लिए जरुरी है इसलिए नियमित व्यायाम हमेशा ध्यान रखे।

अपने लिए वक़्त चुराना सीखे

दुसरो के लिए काम करते करते हम अपने लिए वक़्त ही नहीं निकाल पाते है जिस वजह से परेशान रहने लगते है क्यों की अपनी जरुरत को भी सभी तरीके से समझ नहीं पाते है। Mind को शांत करना है तो इसके लिए दिन में थोड़ा सा सही पर खुद को एकांत दे इससे आप खुद को बेहतर बना सकते है। खुद को समझ सकते है और दोबारा काम के लिए तैयार हो जाते है।

मौज मस्ती को जीवन का हिस्सा बनाये :

अगर विचारो में बदलाव लाना है तो ऐसे काम करे जिन्हें करने में आपको ख़ुशी मिलती हो। जिन कामो को करने से ख़ुशी मिलती है वो आपको सही सोचने के लिए प्रेरित करते है।

सबकुछ आपके नियंत्रण में रहे जरुरी नहीं

ज्यादातर लोग ये चाहते है की सबकुछ उनके नियंत्रण में रहे वे अकसर सोचते है की अगर वो उन्हें नियंत्रित नहीं कर सकते तो वो अपने आप पर भीं नियंत्रण खो देंगे जो की सत्य नहीं है. अवसर सबकी जिंदगी में आते है और जाते है चाहे आप उन्हें कण्ट्रोल करे या नहीं। आपकी जरूरते आपकी क्रियाओ की प्रतिक्रिया है। जब आप दुसरो को कंट्रोल करने की कोशिश करते है तो खुद के लिए और ज्यादा क्रिया पैदा करते है। Mind को शांत करना है तो दुसरो से उम्मीद ही ना रखे दुसरो पर जितना कम निर्भर रहेंगे उतना ही कम आपके विचारो में विवाद होगा।

खुद को शब्दो में उकेरने की कोशिश करे

अगर हम नियमित डायरी लिखने की आदत डालते है तो खुद को ज्यादा से ज्यादा सकारात्मक रखते है क्यों की इसमें हम अपने अच्छे अनुभव उतारते है जो हमें आगे बढ़ने में मदद करते है और बुरे अनुभव जिनसे हम कुछ सीखते है। इससे हम नकारात्मक विचारो से दूर हो जाते है।

वर्तमान में रहना सीखे :

भुत में हम जो कर चुके है उसे बदल नहीं सकते है और ना ही भविष्य में जो होने वाला है उसे देख सकते है तो फिर इनकी फ़िक्र क्यों आज में रहे और खुश रहे। क्यों की अगर आज अच्छा है तो आने वाला कल और अच्छा होगा। Mind को शांत करना है और खुश रहना है तो  बीते हुए कल की यादो में और आने वाले कल की चिंता में आज को बर्बाद मत करे। वर्ना कुछ हासिल नहीं होगा।

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खुद को प्रकृति से जोड़ना सीखे :

खुद के लिए वक़्त निकाले और बगीचे में घूमने जाये खुद को प्रकृति के बिच महसूस करे उससे जुड़ने की कोशिश करे। जब आप प्रकृति के बिच हो अपने दैनिक जीवन को भुला दे। ये आपका ना सिर्फ तनाव ख़त्म करता है बल्कि आपको सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण करता है जो किसी कार्य के लिए आवश्यक है।

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2 COMMENTS

  1. मस्तिक को शांत रखने के बहुत बढिया टिप्स है ये। शेयर करने के लिए धन्यवाद।

  2. अगर हम दिमाग को शांत करना सीख जाएँ तो जीवन में बहुत कुछ achieve कर सकते हैं. nice article

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