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Wednesday, April 22, 2026
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दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास और इसके 5 सबसे बड़े फायदे जो साधना में मिलते है

Dakshinmukhi Bhairav Prayog Sadhna दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास किसी बड़े संकट को टालने के लिए किया जाता है. भैरव को सुरक्षा करने वाले देव के रूप में देखा जाता है इसलिए इनका ज्यादातर प्रयोग किसी दुश्मन को दूर करने, कोर्ट केस जीतने के लिए और संकट को टालने के लिए किया जाता है.

वैसे तो विघ्नहर्ता के तौर पर श्री गणेश जी को सर्वोपरि माना जाता है लेकिन अगर आप भैरव् साधना का प्रयोग करते है तो इसके जरिये आप बड़े से बड़े दुश्मन से भी छुटकारा पा सकते है.

कैसा भी संकट क्यों ना हो भगवान भैरव अपने भक्त को उबार ही देते है इसलिए आज हम उनकी साधना को यहाँ शेयर करने जा रहे है.

कैसा भी कार्य हो -भवन निर्माण, व्यापार-वृद्धि, यज्ञ आदि इनको करने से पूर्व भैरव पूजन अवश्य किया जाता है, जिससे कि उस कार्य में किसी भी प्रकार की कोई बाधा या विध्न उपस्थित न हो सके, क्योंकि भैरव रक्षाकारक देव माने जाते हैं.

अगर आप वर्तमान में किसी संकट की स्थिति में है और उससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है तो इस उपाय को जरूर करे.

दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास करना एक बड़ी साधना की सिद्धि है और अगर आप इस साधना को करते है तो कम समय में ही आप बड़े से बड़े संकट से खुद को बाहर निकाल सकते है.

Basic Reason of Unsuccess in Sadhna
दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास

जब जीवन ज्यादा कठिन और दुर्बोध बन जाय, पग-पग पर कठिनाई आने लगे, अकारण ही शत्रु पैदा होने लगें, शरीर रोग ग्रस्त हो जाय, ऋण नहीं उतर पा रहा हो तब समस्त प्रकार के उपद्रवों की शान्ति के लिए भैरव प्रयोग इस कलियुग में अत्यंत महत्त्वपूर्ण और आवश्यक माना गया है, जो शीघ्र फलप्रद होता ही है.

आइये जानते है कलयुग में शीध्र फल देने वाली इस शक्तिशाली साधना के प्रयोग के बारे में.

दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना

कलयुग में हम सात्विकता से दूर होते जा रहे है और दुर्गुण को अपनाते जा रहे है जिसकी वजह से संघर्ष, स्वार्थ, छल और प्रतिस्पर्धा के बीच खुद के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हम जाने अनजाने में ऐसे शत्रु बना लेते है जिनसे पार पाना कई बार हमारे लिए बेहद मुश्किल हो जाता है.

अगर आप तकलीफ से भरे समय से गुजर रहे है और इससे पार पाना चाहते है तो आपको dakshinmukhi Bhairav Prayog Sadhna / दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास करना चाहिए.

इस साधना को संपन्न कर आप जीवन में आने वाली हर बाधा को दूर कर सकते है. बड़े से बड़े संकट और कोर्ट केस से बाहर निकल सकते है, अपने शत्रु से ना सिर्फ छुटकारा बल्कि उन्हें अपना मित्र बना सकते है.

आप अपने जीवन में आने वाली हर बाधा का डट कर सामना कर सकते है जब भगवान् भैरव आपके साथ होते है. जिनके साथ भैरव होते है उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं होता है. हर कार्य क्षेत्र में वे सफलता प्राप्त करते है.

लाइफ में अगर आगे बढ़ना है तो कलयुग में की जाने वाली साधनाओ में दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास करना अच्छा माना जाता है. आइये इस साधना के फायदे जान लेते है.

भैरव साधना करने के फायदे

भैरव साधना का अभ्यास करने के कई फायदे है खासकर अगर कोई आपको परेशान कर रहे है या फिर बार बार आप ऐसे संकट में फंस जाते है जिससे बाहर निकलना आपके लिए मुश्किल हो रहा है तो आपको इस साधना का प्रयोग करना चाहिए.

भैरव साधना करने के फायदे

इसके सबसे बड़े फायदे निम्न है जैसे की

  • शत्रु बाधा से निजात मिलती है और आप अपने शत्रुओ से छुटकारा पा सकते है.
  • दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास करना आपको बाहरी खतरों से सुरक्षित करता है.
  • लाइफ में किसी भी फील्ड में आप सफलता हासिल कर सकते है.
  • आपके रास्ते में आने वाले किसी भी अवरोध को आप आसानी से दूर कर सकते है.
  • कलयुग में सफल होने वाली साधनाओ में से एक भैरव साधना है जो की आसानी से न सिर्फ सिद्ध हो सकती है बल्कि सर्वोतम साधनाओ में से एक है.
  • आने वाली किसी भी आपदा, तंत्र प्रयोग से आप बचाव कर सकते है.
  • घर में हो रहे कलह, लड़ाई झगड़े और मन मुटाव को दूर किया जा सकता है.

ऐसे ही और कई फायदे है जो आपको भैरव साधना से मिलते है. दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास / dakshinmukhi Bhairav Prayog Sadhna करने के लिए आपको यहाँ दी जा रही प्रयोग विधि को फॉलो करना चाहिए.

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घर पर रहते हुए भैरव साधना का प्रयोग करने का तरीका

दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना को संपन्न करने के लिए आपको महाभैरव यंत्र, तंत्रोक्त नारियल और तीन काल गुटिका की आवश्यकता होगी. इसके अलावा सरसों के दाने, काली मिर्च, आम की सूखी लकड़ी, घी, सिंदूर और हवन सामग्री भी होना जरुरी है. इन सब चीजो को साधना की शुरुआत से पहले ही जुटा लीजिये.

ये साधना मार्ग शीर्ष कृष्ण पक्ष की भैरव अष्टमी या फिर किसी सिद्ध योग में की जा सकती है.

दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना को करने का सबसे उचित समय रात्रि के 10 बजे से लेकर 12 बजे तक का है. साधना का अभ्यास आपको इसी समय करना चाहिए.

साधना में आपको काले रंग का आसन लेना है और दक्षिण की तरफ मुख कर बैठना है. काले रंग की धोती और चादर ओढ़ ले और सामने एक छोटी सी चौकी पर चावल की ढेरी बनाकर महाभैरव यंत्र की स्थापना कर दे.

यंत्र स्थापना के बाद उसके सामने तीन ढेरी और बनाए. इन ढेरी पर तीनो काल गुटिका की स्थापना कर दीजिये. ये गुटिकाए अकाल मृत्यु, राज भय और शत्रु भय नाशक है.

ॐ सर्व भयनाशय भें नम:” इस मंत्र का उच्चारण करते हुए काल गुटिका पर कुमकुम का तिलक करे.

अक्षत छिड़काव प्रक्रिया

ॐ अकाल मृत्युहराय नमः

ॐ सर्वविघ्नोपशान्ताय नमः

ॐ दुरित नाशाय नमः

ॐ भवभीतिहराय नमः

ॐ शान्तोपद्रवाय नमः

इन मंत्रो का जप करते हुए अक्षत को यंत्र पर चढ़ा दे.

पुष्प

अब यंत्र पर पुष्प की वर्षा करे और निम्न मंत्र का जप करते हुए अपने सुख और सोभाग्य की कामना करे.

ॐ भैरवाय नमस्तुभ्यं सर्वसौभाग्यदायिने । पुष्पांजलिर्मया दत्ता स्वीकुरुष्व दयार्णव ।।

नमस्कार

दोनों हाथ को जोड़कर भैरव को नमस्कार करे

ॐ तीक्ष्णदंष्ट्र महाकाय कल्पान्तदहनों पम । भैरवाय नमस्तुभ्यं सर्व कायार्थ सिद्धिदः ।।

इसके बाद छोटा सा हवन कुंड बनाकर उसमे आम की सूखी लकड़ी जलाए. हवन सामग्री में घी मिला दे और निम्न मंत्र की 108 आहुति दे.

ॐ भं भैरवाय नमः

अंत में 5 आहुति काली मिर्च की और 11 आहुति सरसों के दाने की दे और तंत्रोक्त नारियल को सिंदूर से रंग कर मौली बांध दे. 21 बार मूल मंत्र को पढ़कर आहुति दे.

।। ॐ भ्रं भ्रं भ्रं भैरवाय नमः ।।

खड़े हो जाइये और 10 मिनट तक एकाग्रचित होकर मंत्र का जप करे. मंत्र जप के बाद आपकी साधना संपन्न हो चुकी है. अगले दिन यंत्र, गुटिका और अक्षत, पुष्प को नदी में विसर्जित कर दे.

घर आ जाइये और किसी काले कुत्ते को रोटी खिला दे. दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास पूरा हो गया है.

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गृहस्थ जीवन में इस साधना को करने की खास वजह

गृहस्थ जीवन में रहते हुए हम दिनभर में अलग अलग लोगो से मिलते है. इस दौरान अलग अलग स्थिति से गुजरने के बाद तरह तरह के भय से गुजरते है. लाइफ में कामयाब होने के लिए हम ऐसे काम करते है जो हमें नहीं करने चाहिए.

जाने अनजाने दुश्मन बन जाते है जिसकी वजह से हमें मुश्किल हालात से गुजरना शुरू कर देते है.

ऐसी स्थिति में हमारे मन में हमेशा भय की स्थिति बनी रहती है. इन सबसे बाहर निकलने के लिए कलयुग में की जाने वाली सर्वोतम साधनाओ में से एक दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास है.

इस साधना का अभ्यास करने के बाद हम लाइफ में न सिर्फ हर फील्ड में कामयाब होना शुरू हो जाते है बल्कि अपने दुश्मनों से छुटकारा भी पा सकते है.

दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास निष्कर्ष

कलयुग में एक तरफ हम हर समय भय की स्थिति से घिरे हुए रहते है वही दूसरी और जाने अनजाने में बनाए गए दुश्मन हमें आगे बढ़ने से रोकते है.

अगर आप जल्दी फल देने वाली dakshinmukhi Bhairav Prayog Sadhna / दक्षिणमुखी भैरव प्रयोग साधना का अभ्यास करते है तो आपको लाइफ के हर फील्ड में आगे बढ़ने में हेल्प मिलती है. भगवान भैरव अपने साधको की खुद सुरक्षा करते है.

अगर आप ऐसे दुश्मन से परेशान है जिन्हें छुटकारा पाना आपके लिए बेहद मुश्किल हो रहा है तो आपको भगवान भैरव की साधना करनी चाहिए. इनकी साधना करने से हम कोर्ट केस में भी जीत हासिल कर सकते है.

dakshi mukhi bhairav sadhna pryog

Spiritual Shine
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