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Saturday, April 18, 2026
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दिव्य अंजन और शक्तियां पाने के लिए नटी यक्षिणी मंत्र साधना के अभ्यास की गुप्त विधियाँ

आपने पारलौकिक रहस्यों के बारे में तो पढ़ा ही होगा. हमारे धार्मिक ग्रंथो में दिव्य शक्तियों जैसे यक्ष यक्षिणी और पिशाचनी साधनाओ के बारे में तो सुना ही होगा. साधक की भौतिक सुविधाओ जैसे धन संपदा, शक्ति और रहस्य को जानने के के लिए की गई साधना कई तरीको से की जा सकती है.

यक्षिणी साधनाओ में रूप यौवन और दिव्य अंजन के लिए Nati yakshini mantra sadhana एक ऐसी साधना है जिसे साधक अपने विवेक से कर सकता है.

यक्षिणी साधना आमतौर पर दिव्य वस्तुओ और धन स्वर्ण आदि की प्राप्ति के लिए की जाती है. इसके अलावा कुछ लोग पारलौकिक शक्ति की प्राप्ति के लिए भी इस साधना को करते है.

यक्षिणी की साधना के लिए अशोक वृक्ष या फिर शीशम के पेड़ के निचे की जाती है. पृथ्वी के मंडल में सबसे नजदीक होने की वजह से ये साधनाए बेहद जल्दी अपना रिजल्ट दिखाती है.

Basic Reason of Unsuccess in Sadhna
Nati yakshini mantra sadhana

ऐसी कई पारलौकिक शक्तियां है जो बेहद कम समय में अपना असर दिखाती है. कर्ण पिशाचनी और काम पिशाचनी की साधना नकारात्मक साधना मानी जाती है लेकिन बेहद कम समय मे फलीभूत होती है.

इन साधनाओ में पहले साधक को ऐसा लगता है मानो उसकी हर मनोकामना पूर्ण हो रही है लेकिन, जल्दी ही ये अहसास होता है की जिसे हम अपना लाभ समझ रहे थे वो हमसे कितनी बड़ी कीमत बदले में हो रहा था.

आइये जानते है नटिनी यक्षिणी की साधना के 2 तरीको के बारे में जिन्हें करने के बाद साधक को न सिर्फ दिव्य अंजन की प्राप्ति होती है बल्कि और भी बहुत कुछ मिलता है.

Nati yakshini mantra sadhana in Hindi

यक्षिणी साधना में से एक नटी यक्षिणी की साधना होती है जिसके माध्यम से हम दिव्य अंजन की प्राप्ति कर सकते है. Nati yakshini mantra sadhana के बाद ये अंजन हमें दिव्य दृष्टी देता है, गड़े धन को देखने की क्षमता और यहाँ तक की आने वाले भविष्य के गुप्त रहस्यों को जानने में भी मदद कर सकता है.

नटि यक्षिणी का अर्थ एक्ट्रेस यानि रुपवती और इसकी साधना करने के पीछे एक उदेश्य रूप और यौवन की प्राप्ति करना भी है.

ऐसा माना जाता है की इस साधना को करने से हम कामदेव की साधना के अनुरूप ही रूपवान और यौवन से भरपूर बन सकते है.

अगर आप यक्षिणी साधना करते है तो आपके यौवन में बदलाव तो आते ही है साथ ही साथ आप कई तरह की Magical and supernatural चीजो के मालिक बन सकते है.

नटिनी यक्षिणी साधना करने वाले साधक को धन संपदा के साथ साथ यक्षिणी का आशीर्वाद भी मिलता है इसलिए अगर आपका उदेश्य साधना के बदले आप भौतिक मूल्य की प्राप्ति करना है तो आप इस तरह की यक्षिणी साधना कर सकते है.

Nati yakshini mantra sadhana Guide in Hindi / नटी यक्षिणी की साधना की कई सारी मंत्र विधि है जिन्हें किया जा सकता है इसलिए हम इस पोस्ट में कुल 3 तरीको के बारे में जानेंगे.

नटी यक्षिणी मंत्र साधना की विधि

ये साधना करने के लिए आपको उपयुक्त माहौल और समय के साथ साथ शुभ महूर्त का भी चुनाव करना होता है.

  • ये साधना हमें पूर्णिमा यानि पूरे चाँद की रात को करनी होती है.
  • साधना का अभ्यास हमें अशोक वृक्ष के निचे बैठ कर करना है.
  • साधना से पहले अपने चारो ओर गोल मंडल की रचना करे. जहाँ तक हो सके ये एक यंत्र की तरह होना चाहिए.
  • इसके बाद आपको धूप और दिया जलाना है और इसके बाद चन्दन की माला से निचे दिए गए मंत्र का 1000 बार जप करना है.

नटी यक्षिणी साधना मंत्र

ॐ नटि नटिनि स्वाहा 

दूसरी किसी साधना की तरह इसमें भी कोई फिक्स समय नहीं है. आपको साधना को तब तक जारी रखना है जब तक की आपको इसका असर दिखना शुरू न हो जाए.

एक बार Nati yakshini mantra sadhana सिद्ध हो जाए तो नटी यक्षिणी साधक को एक magical sarva karya siddhi anjan प्रदान करती है.

इस अंजन के कई दिव्य प्रयोग होते है. साधक के किसी भी कार्य को पूरा करने में इस अंजन की सहायता ली जा सकती है.

दिव्य अंजन की सहायता से जमीन में गड़ा खजाना देखने की शक्ति मिलती है, पारलौकिक शक्तियों की दुनिया का ज्ञान होता और सबसे बड़ी बात हम आने वाले कल को भी देख सकते है. दूसरे शब्दों में कहे तो दिव्य अंजन हमें third eye, sixth sense जैसी Psychic ability को activate करने में मदद करता है.

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यक्षिणी साधना की दूसरी विधि

Nati yakshini mantra sadhana / यक्षिणी साधना की एक और विधि भी है जो की पहली विधि की तरह ही की जाती है. इस मंत्र का जाप भी उपर की विधि की तरह ही किया जाता है.

एक महीने तक लगातार दिन में सिर्फ एक बार भोजन ग्रहण करना चाहिए. रात्रि में मंत्र साधना के बाद फिर एक बार भोजन करे और साधना को इसी तरह पूर्ण करे.

ॐ ह्रीं क्रीं नटि महानटि रूपवति स्वाहा

इस मंत्र की साधना भी पहली विधि की तरह ही है. नटि यक्षिणी की ये साधना दिव्य अनुभूति करवाने वाली मानी जाती है.

यक्षिणी साधना की शुरुआत करने के लिए शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का चुनाव करे. गाय के गोबर का चबूतरा बनाए और फिर उस पर चन्दन का लेप करे.

यक्षिणी यन्त्र का स्थापना करे और फिर फिर धूप बत्ती और दीपक जलाकर पूजन शुरू करे. प्रसाद और फूल द्वारा भोग अर्पण करे और साधना को हर रोज इसी तरह पूरी करे.

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यक्षिणी साधना में रहे सावधान

यक्षिणी की साधना दिव्य साधनाओ में नहीं आती है जिनके सात्विक कर्म होते है. हालाँकि सभी तो नहीं लेकिन ज्यादातर यक्षिणी साधना साधक की मनोकामना की पूर्ति हेतु की जाती है इसलिए ऐसी शक्तियां पहले साधक की परीक्षा लेती है.

जब साधक Nati yakshini mantra sadhana के अनुकूल खरा उतरता है तो ही ये दिव्य शक्तियां उन्हें अपने स्वरूप का दर्शन देती है.

yakshini

जो भी परी, यक्षिणी और अन्य दिव्य शक्तियों की साधनाए होती है उनमे साधक के धेर्य की परीक्षा होती है. साधना कितने समय में पूरी होगी ये तय नहीं होता है क्यों की साधक की कड़ी परीक्षा के बाद ही उसकी मनोकामना की पूर्ति होती है.

ऐसा माना जाता है की इन साधनाओ का जैसे की Nati yakshini mantra sadhana Guide का कोई नुकसान नहीं होता है लेकिन फिर भी अगर आप ये साधना कर रहे है तो बेहतर होगा की आप पहले किसी योग्य गुरु का चुनाव करे और फिर इस साधना को निर्देशन में करे.

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Nati yakshini mantra sadhana – final thought

दोस्तों हम कई बार जल्दबाजी में ऐसी साधनाओ का चयन कर लेते है जो बेहद कम समय में साधक को फल प्रदान करती है. शुरू शुरू में हमें ऐसा लगता है की हमने न सिर्फ बेहद कम समय में साधना को सफलतापूर्वक पूरा किया है बल्कि उससे हमें लाभ भी मिल रहे है.

जल्द ही जब साधक खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर पाता है तब उसे ये अहसास होता है की वो जिसे अपना फायदा समझ रहा था वो असल में उसके लिए सबसे बड़ा नुकसान था.

Nati yakshini mantra sadhana in Hindi या फिर किसी भी तरह की पारलौकिक शक्तियों की पूजा करना साधक को बेशक कम टाइम में उसकी मनोकामनाओ की पूर्ति करने में मदद करता है लेकिन ऐसी शक्तियां साधक की मानसिक उर्जा के बल पर खुद को पोषित करती है.

जब हम खुद को मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगते है तब हमें अहसास होता है और उस स्थिति से बाहर निकलने की कोशिश करना शुरू कर देते है.

कई बार ऐसा भी होता है की हम साधना तो किसी और शक्ति की करते है लेकिन बाद में पता चलता है की हमने अनचाहे में ही पारलौकिक शक्ति जैसे की कोई Negative energy को साध लिया है और वो हमारी उर्जा का निरंतर क्षरण कर रही है.

गुरु का चयन और उसके सानिध्य में साधना करना आपको इस तरह की समस्याओ से बचाता है.

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