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Wednesday, May 27, 2026
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क्या वास्तव में जिन्नातो की फ़ौज ही असली वजह थी अकबर के इतने बड़े साम्राज्य खड़ा करने में ?

ऐसा माना जाता है की पुराने समय में कुछ राजाओ द्वारा पारलौकिक शक्तियों का इस्तेमाल किया जाता था. इसमें हमने विषकन्या, वैताल, तंत्र मंत्र का दुसरो पर हमला करना शामिल है. पुराने समय में राजाओ के विश्वासपात्र ऐसी किसी शक्ति से अपने राजा को सुरक्षित करने के उपाय करते थे की दुसरे लोगो द्वारा उन को कोई हानि न पहुँच सके.

ऐसी ही कुछ कहानिया अकबर के बारे में सुनने को मिल जाती है. आज की पोस्ट में सच्चे रूहानी किस्से में से एक हम बताने वाले है की क्या वास्तव में अकबर इतने स्ट्रोंग महाराजा थे या फिर उनके पास भी कोई पारलौकिक शक्ति जैसे जिन्नातो की फ़ौज थी?

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सच्चे रूहानी किस्से-अकबर के पास थी जिन्नों की सेना

हम कई बार कुछ लोगो द्वारा ब्लैक और रूहानी शक्तियों के इस्तेमाल की बाते सुनते है। लेकिन क्या आप जानते है की खुद अकबर जिन्नातो की फ़ौज के मालिक थे।

अकबर और रूहानी शक्तियों का एक रहस्य आज में आपको बताने जा रहा हूँ जिसमे कुछ ऐसे रूहानी किस्से है जो इतिहास के पन्नो में आज भी एक रहस्य बने हुए है।

स्थानियो लोगो की मान्यताओ के अनुसार अकबर ने भी अपने विजय अभियान के दौरान जिन्नों की  फ़ौज का इस्तेमाल किया था। पढ़िए कुछ सच्चे रूहानी किस्से जो राजस्थान के कुछ हिस्सो से जुड़े है।

रहस्यमयी दुर्गा पूजा

दक्षिण राजस्थान के महू व मालवा क्षेत्रो से भूत प्रेतो की जितनी कथाये जुड़ी है उनकी तुलना ब्रिटेन के राजघराने के प्रेतो से की जा सकती है। महू के खंडहरों में प्रत्येक अमावस की रात मशाले लिए भुतहा अंगरक्षको और सहस्त्र सैनिको के साथ एक राजपूत राजा सवारी निकलती है।

यह हाड़ौती महू कहलाता है, जहां पृथ्वीराज चौहान की वंश परम्परा के खींची राजपूत शासको का शासन था। पिछले वर्ष तक, इस सवारी को देखने की चेष्टा में 40 लोगो के पागल होने की जानकारी थी।

जनवरी सन 1987 में महू का ही एक साहसी युवा गुलाबचंद सौनी, इस भुतहा काफिले को देखने के फेर में पागल  गया।

इन क्षेत्र के नागरिको ने सेंकडो बार प्रत्येक वर्ष दुर्गा अष्ठमी के दौरान हाड़ौती क्षेत्र के किले के दुर्ग मंदिर में भूतो द्वारा कीर्तन किये जाने और घुंघरू झांझ मंजीरों के साथ पूजा करने की आवाज सुनी है।

सबसे विचित्र बात तो ये है की पुरे दुर्ग में गंदगी और धूल होने के बावजूद दुर्गा मंदिर के आसपास हमेशा सफाई रहती है, और पूजा का दीपक निरंतर जलता रहता है।

दरगाह और बांध का निर्माण कार्य

हाड़ौती महू का यह किला झालावाड़ और कोटा के बिच है। यहाँ जाने के बाघेर की तरफ मंडावर से चलना पड़ता है। तब पूर्वी पहाड़ी के पास महू खंडहर मिलते है। वहां भीमसागर बांध के निर्माण के दौरान तरह तरह की भूत-बाधाए आयी थी।

अंततः मालूम हुआ की ख्वाजा हमीदुदीन चिश्ती की दरगाह बांध के निचे आ रही थी।

जब किसी भी तकनीक को अपनाने के बावजूद वहां निर्माण कार्य जारी रखना मुश्किल हो गया तब स्थानीय लोगो ने बताया की जब तक ख्वाजा की दरगाह का निचला भाग बांध के बराबर नहीं रखा जायेगा निर्माण कार्य नहीं हो सकता है।

इसके परिणामस्वरूप राजस्थान सरकार के पांच लाख रुपये लगाकर दरगाह को ऊँचा उठाकर साथ ही निर्माण कार्य आरम्भ किया गया।

सच्चे रूहानी किस्से-अकबर के पास थी जिन्नों की सेना

अजमेर के ख्वाजा मोइनुदीन चिश्ती के चमत्कारी जिन्नों और रूहो के विषय में अनेको कहानिया सुनाई जाती है। माना जाता है की जब सन 1572 ई. में जब अकबर अपनी सेना के साथ अजमेर होता हुआ अहमदाबाद गया तब उसे देवी आशीष प्राप्त हुआ था।

यही वजह रही की बिना जंग के उसका अहमदाबाद पर कब्ज़ा हो गया। भड़ौच बड़ोदा और सूरत पर मिर्जो का अधिकार मिटाने हेतु कुल 200 सेनिको की छोटी सी सेना के साथ नाव के जरिये माही नदी पार कर  मिर्जाओ के गढ़ को नेस्तनाबूत कर दिया था।

सूरत में, जनश्रुतियो के अनुसार अकबर की सेनाओ  के आगे जिन्नातो की फ़ौज चल रही जब वह गुजरात को विजय कर वापस लौट रहा था। वहां मिर्जाओ  के संकेत पर समर्थको में बगावत फ़ैल गई। अकबर को जब यह पता चला तो मात्र 3000 सैनिको के साथ 30 हजार बागियो को कुचल दिया।

सुनने में ये भी आता है की बागी सैनिको का मानसिक संतुलन गुजरात तक वापस पहुँचने से पहले  गड़बड़ा चूका था जिसकी वजह से उन्हें भूतहा अनुभव हुए।

राणा प्रताप और अकबर को मारने का प्रयास

सन 1576 ई. में अकबर फिर अजमेर गया। उसने पांच हजार सैनिको को राजा मानसिंह के साथ भेज कर राणा प्रताप का दमन करने की अनुमति दी थी। अकबर अपने खेमे में ही रहा। उधर राणा प्रताप ने अजमेर से चितौड़ तक के पुरे इलाके के जल तथा रशद स्त्रोत को नष्ट करवा दिए।

कुम्भलगढ़  के मार्ग में हल्दीघाटी की जंग से पूर्व राणा प्रताप ने एक रात सोते हुए अकबर को मारने योजना बनाई।

लेकिन जब राणा प्रताप अपने जाबांज के साथ अकबर के खेमे में पहुंचा तो पाया की  अकबर के चारो ओर पारदर्शी मानवो जैसी परछाईया पहरा दे रही थी। राणा प्रताप ने उसे प्रणाम किया और वापस लौट गए।

यह भी माना जाता है की सन 1585 ई. तक निरंतर राणा प्रताप के पीछे अपनी पूरी शक्ति लगाकर युद्ध करने वाले अकबर ने 1585 के बाद कोई आक्रमण नहीं किया।

इसकी वजह अकबर का राणा प्रताप की तरफ दयालु होना नहीं था बल्कि खुद ख्वाजा का उसे सपने में आदेश देना था की अब राणा प्रताप से मत उलझो वर्ना पंजाब तुम्हारे हाथ से निकल जायेगा।

सच्चे रूहानी किस्से-सपनो का सच

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार 1585 के बाद अकबर 12 वर्षो तक लाहौर में रहा और उसने अपनी राजधानी भी अस्थायी तौर से वहां बना ली थी।

जब कभी उसका मन राणा प्रताप से लड़ने का बना तब तब उसे सपने आये जिनमे उसे राणा प्रताप से ना लड़ने की सलाह दी गई थी,और उसके बाद कभी राणा प्रताप से लड़ने का मन नहीं बनाया।

राणा प्रताप की रहस्यमयी मौत

सच्चाई कुछ भी हो लेकिन वास्तविकता तो यही है की अकबर के लाहौर से लौटने के बाद सन 1597 ई. में केवल 51 वर्ष की आयु में एक सख्त धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय रहस्यमयी ढंग से अंदरूनी चोट लगने की वजह से राणा प्रताप की मौत हो गई। राणा प्रताप की मौत सच्चे रूहानी किस्से में से एक है।

अंतिम शब्द

दोस्तों आज भी हमें अक्सर बड़े लोगो द्वारा रूहानी शक्तियों के इस्तेमाल की खबरे पढ़ने को मिल जाती है जिसमे कुछ समय कंगना जो मशहूर बॉलीवुड एक्टर है के द्वारा ब्लैक मैजिक करने की खबर सबसे खास रही थी।

में ये तो नहीं कहता की इनका कोई पुख्ता सबूत है लेकिन कुछ लोग अपनी जरूरतों को आराम से और बिना किसी खास मेहनत के पूरा करने के चक्कर में ब्लैक मैजिक और रूहानी शक्तियों का प्रयोग करते है।

आज की पोस्ट सच्चे रूहानी किस्से जो भूत प्रेतो की सच्ची कहानिया का एक भाग है जो भारत के कई जगह पर की गई रिसर्च के आधार पर लिखी गई है।

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3 COMMENTS

  1. sir mai sadhna karna chahta hun par koi guru nahi aur kisi par aise vishwas nahi hota kya aap mujhe kisi aise guru ke bare mein bata sakte hai jo mujhe diksha dein.

  2. आपके सभी पोस्ट बहुत ज्ञानवर्द्धक और उपयोगी होते हैं।

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