क्या आप गड़ा हुआ धन या खजाना हासिल करना चाहते है ? पुराने जमाने से ही लोगो द्वारा धरती में धन को दबा दिया जाता था ताकि समय आने पर इसे इस्तेमाल किया जा सके.
भूगर्भ निधि ज्ञान तंत्र यानि धरती की गहराई में क्या छुपा हुआ है ये अपने सिद्धि के बल पर जानना और धरती में गड़े हुए खजाने को हासिल करने का तांत्रिक उपाय है.
पृथ्वी का एक नाम ‘वसुन्धरा’ भी है. वसु का अर्थ है ‘धन’ और घरा का अर्थ है ‘धारण करने वाली’ अतः पृथ्वी में बहुत स्थानों पर धन गड़ा हुआ है.
पूर्वाचार्यों ने ऐसे गढ़े हुए धन को प्राप्त करने के लिये भगवान शंकर से प्रार्थना की थी और उनकी कृपा से ही इस विषय का ज्ञान भगवान शंकर ने दिया.
हम देखते हैं कि कई लोगों को स्वप्न में यह सूचना मिल जाती है कि ‘अमुक स्नान पर गड़ा हुआ धन है’ और वे उसे प्राप्त करने के लिए प्रयास शुरू कर देते हैं, किन्तु उसके निकालने की विधि का पूरा ज्ञान न होने से वे संकट में पड़ जाते हैं.

धन तो दूर रहा, अपना स्वयं का बहुत-सा नुकसान कर बैठते हैं और कभी-कभी तो प्राणों से भी हाथ धोने पड़ते हैं. इसलिए जिन सज्जनों को ऐसा आभास हो वे इस विधि से लाभ उठाएं.
गड़ा हुआ धन या फिर धरती में किस जगह पर खजाना हो सकता है इसके बारे में जानने के लिए आपको भूगर्भ निधि ज्ञान तंत्र का उपाय करना चाहिए जिसके बारे में हमने इस आर्टिकल में डिटेल से जानकारी शेयर की है.
धनस्थान विचार यानि किस जगह पर गड़ा हुआ धन या खजाना हो सकता है
धनस्थान जानने की इच्छा वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह पहले अपने उत्तम शकुन, उत्तम तिथि, नक्षत्र, वार, योग आदि देखकर यह कार्य आरम्भ करे.
पृथ्वी, जल और आकाश इन तीनों स्थानों में धन के भण्डार हैं. वृक्ष, लता, गौ, कीडे एवं मृग, अन्य जन्तुओं के द्वारा धनस्थान का ज्ञान होता है.
जहाँ धन का भण्डार होता है वहाँ कुछ देवी तत्त्व विद्यमान रहते हैं जिनमें सर्प, भूत, प्रेत आदि भी होते हैं.
पुष्प, काँटे अथवा विशेष प्रकार की झाड़ियों से भी धनस्थान का ज्ञान होता है. इस ज्ञान के लिए कुछ अंजन-प्रयोग, धन खोदने और निकालने की विधि तथा आनेवाले विघ्नों को दूर करने के उपाय समझकर ही यह कार्य करना चाहिए.
सहायक इस कार्य में सहायता करने वाले व्यक्ति प्रामाणिक, और धार्मिक जिनकी संख्या सात, पाँच अथवा तीन होने चाहिए.
सहायक तथा मंत्र की सहायता के बिना यह कार्य न करें. जो व्यक्ति सहायक हों वे दयालु, अहिंसक, निरभिमान, बलवान्, ईर्ष्या न करने वाले, पवित्र, सत्यवादी, आस्तिक तथा उत्तम स्वभाव वाले हों.
गड़ा हुआ धन की तलाश से पूर्व की तैयारी
शकुन – इस कार्य को आरम्भ करने के लिए जाते समय मार्ग में बछड़े सहित गौ, मदिरा, मांस, गोरोचन, दही, चन्दन, जलती हुई धुए से रहित अग्नि, सौभाग्यवती स्त्री, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, दूध, घृत, कुंआरा बालक, गोमय, हाथी, घोड़ा, ध्वज, चंवर, बंसी नगाड़े के शब्द, मोर की आवाज तथा पानी का घड़ा भरकर लाती हुई स्त्री उत्तम शकुन माने गए हैं.
अपशकुन – सिरमुंड्या हुआ संन्यासी, नंगा मनुष्य, हीन जाति का व्यक्ति, खरगोश, कौआ, सर्प, रोगी, दुखो आदि यदि रास्ते में सामने आए, तो उसे अपशकुन माना है.
दिनशुद्धि आर्द्रा, पुष्य, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद, अनुराधा, ज्येष्ठा, श्रवण, पूर्वा भाद्रपद, अश्विनी, रेवती और रोहिणी ये नक्षत्र, मंगल, सूर्य तथा शनि को छोड़कर अन्य वार, व्यतिपात, वैधृत और क्षयतिथि के अतिरिक्त उत्तम तिथियाँ, आषाढ़ से कार्तिक तथा चातुर्मास का त्याग करके शेष महोनों में यह कार्य करना चाहिए.
धनस्थान नदी, तालाब, कुआँ, बावड़ी और समुद्र में धन रहता है. यह जलस्थानगत धन कहलाता है. विष्णु, शिव, देवी अथवा अन्य देवस्थान, गाँव का मध्य भाग, गांव की सीमा, ब्राह्मण तथा राजा ठाकुर का घर, धनाढ्य लोगों के मकान में, गांव के चौराहे पर मकान के पिछले भाग में, पशु बाँधने के स्थान में, पुराने विशाल वृक्ष के मूल में, श्मशान में धान की कोठी में, ऊजड़ मकान में तथा किले के कोने में गड़ा हुआ धन रहता है.
यह भूस्थान गत धन कहलाता है. पर्वत के शिखर आदि, गुफा, गाँव के दरवाजे, मन्दिर के शिखर आदि स्थानों में धन रहने पर वह आकाश स्थानगत धन कहलाता है.
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ऐसी जगह का चयन जहाँ पर गड़ा हुआ धन हो सकता है
चातुर्मास में प्रायः सर्वत्र मटमैला पानी रहता है. किन्तु जहाँ जलस्थान में धन रहता है वहाँ का पानी निर्मल रहता है. जहाँ ठण्ड के दिनों में गरम पानी हो और गरमी में ठण्डा पानी हो वहाँ भी धन होता है. तथा जिस तालाब में कमल लगे हों और उनमें जो कमल धुएँ के समान दिखाई देता हो वहाँ अवश्य धन रहता हे.

पृथ्वी पर जहाँ धुए जैसा दिखाई दे, छोटे-मोटे पौधे होते हुए भी किसी एक भाग में कोई पौधा न हो वहाँ धन स्थित है ऐसा समझना चाहिए.
आस-पास की जमीन के भागों की अपेक्षा जिस जमीन का एक भाग तेजस्वी लगता हो या फिर जिस जमीन पर रात्रि में प्रकाश दिखाई देता हो वो जगह धन युक्त होती है.
जिस जमीन पर घूमते हुए मन में आनन्द उल्लास का अनुभव हो, जहाँ घी के धुएँ जैसी गन्ध आती हो अथवा वसन्त ऋतु जैसे पुष्पों की गन्ध आती हो.
जिस स्थान पर बिना ऋतु के भी वृक्षों में पुष्प निकलते हों, अथवा जिस पौधे पर पुष्प नहीं लगते हों फिर भी पुष्प आते हों, कँटीले वृक्षों में काँटे न हों, प्रकृति से विपरीत किसी नवीन तत्त्व से युक्त प्राकृतिक वस्तु के होने वाले स्थान पर गड़ा हुआ धन की सम्भावना होती है.
कहीं पत्थर पर परस्पर विरोधी जाति के प्राणियों के चित्र खुदे हुए होने पर उस पत्थर के नीचे धन होने की सम्भावना है.
अन्तरिक्ष धन स्थान
अन्तरिक्ष धनस्थान के सम्बन्ध में यह धारणा है कि जिस शिखर पर अथवा ऊंचे टीले पर किसी देवता की मूर्ति हो, वहाँ धन होगा तथा “उस मूर्ति के अंग पर जहाँ चिह्न होगा वहाँ उसके प्रमाण की गहराई में धन गड़ा हुआ है ऐसा समझना चाहिए.
यदि दो मूर्तियाँ एक-दूसरे के सामने मुख रखकर खड़ी हो, गणपति की मूर्ति यदि उत्तर की ओर मुख रखकर बिठाई गई हो, मूर्ति का पेट बड़ा हो, ऊपर मुख हो किन्तु दृष्टि नीची हो, चेहरे पर रोने का भाव हो, मातृका की मूर्ति हो, विचित्र आकार बने हुए हों, मूर्ति के हाथ में सात पत्तियों वाला कमल हो, मूर्ति के मस्तक में कीला लगा हुआ हो या आकार बना हुआ हो तथा कोई विचित्र ही स्वरूप अंकित हो, वहाँ धन गड़ा हुआ है ऐसा समझना चाहिए.
ऐसे अनेक चिह्न, द्रव्यमान, भूमि की गहराई का मान तथा अन्य आवश्यक जानकारी तंत्र शास्त्रों में प्राप्त होती है जिनका संक्षिप्त परिचय यहाँ दिया गया है.
निर्णय के लिए तांत्रिक प्रयोग
जब हमें यह अनुभव हो कि अमुक स्थान पर द्रव्य है, तो उसका निर्णय करने के लिए नीचे लिखे प्रयोगों में से कोई एक प्रयोग करे.
- चमेली के फूलों को दही में भिगोकर उस स्थान में 5-6 जगह अलग-अलग उन्हें रखना. दूसरे दिन प्रातः यदि दही का पीला, काला अथवा लाल रंग हो जाए, तो वहाँ अवश्य धन है ऐसा जानना चाहिए. अथवा हल्दी दूध मिलाकर छींटना और दूसरे दिन रंग बदला हुआ मिले, तो वहाँ धन है यह जानना.
- कई स्थानों पर पत्थर लगा हुआ होता है उस पत्थर को दूर हटाने की अपेक्षा उस पर गरमाला की जड़, अर्जुन वृक्ष के पत्ते, बरगद की छाल, लोध, मजीठ, कुलथी और तुलसी इन सबको पीस कर चूर्ण बना लें और उसे भैंसे के मूत्र में मिलाकर चुपड़ दें. ऐसा करने से पत्थर टूट जायेगा और धन का लाभ होगा.
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धन दर्शन
कई बार ऐसा होता है कि अपने प्रारब्धवश धन होते हुए भी दिखाई नहीं देता है. ऐसी स्थिति में पारद, मधु, कपूर, पीलू के फूल तथा सूरजमुखी के बीजों को समभाग में मिलाकर सर्वा जन तैयार करें और उसे लगाकर देखें और नीचे लिखे मन्त्र का जप करें-
सत्यं दर्शय भौमेयं दिव्यं सत्येन दर्शय.
यदि भूमिगतं द्रव्यमात्मानं दर्शय स्वयम्
अंजन लगाने का मन्त्र
ॐ ॐ गक्ष श्रं लोकिनि निधिनि लोकिनि स्वाहा
भूमि पूजनादि विधान
ॐ भू भूमि ॐ ॐ ॐ अग्नये नमः
ॐ धं धनाध्यक्षाय नमः
नमो-ऽस्तु देवदेवाय शूलपाणये अत्रागच्छतु ठं स्वाहा
भूमि का खनन करते समय इस मन्त्र का जप करें
ॐ नमो भगवते रुद्राय दुदुन्दुभिषः
स्थान की रक्षा के लिए मन्त्र
ॐ नमो योगीश्वराय नमो मातृभ्यो
नमो विश्वरूपिणीभ्यः प्रतिगन्तु सिद्धये
इमं बाल गृह्णगृह्ण ठं ठं स्वाहा
बलि देने का मन्त्र
ॐ नमो रुद्राय योगीश्वराय नमोऽनन्त
वासुकि-तक्षक नागादिभ्यो नमो नागगणेभ्यो नागगणाः
प्रतिगन्तु सिद्धये इमं बलगलग हूण स्वाहा
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गड़ा हुआ धन निकालने की विधि
उत्तम दिन देखकर स्नान एवं प्रातः नित्य क्रिया से निवृत्त होकर विधिपूर्वक पृथ्वी और बराह भगवान् की पूजा करें तथा सर्पादि के उपद्रव से बचने के लिए नीचे लिखे अनुसार पादलेप लगायें.

आक की जड़, कनेर की जड़ और फनस की जड़ इन सबको समभाग में लेकर चूर्ण बनाए तथा पैरों पर लगाए.
फिर धन- स्थान पर जाकर सात अंगुल के खैर की लकड़ी के आठ कीले दिशाओं में गाड़ दें और
ॐ नमो भगवते रुदाय हर हर हज हंज स्फुटि स्फुटि निस्रवे स्वाहा‘
इस मन्त्र से चारों ओर से कुछ-कुछ जमीन खोद लें. पानी, गन्ध, पुष्प, अक्षत, धूप दीप और नैवेद्य से कीलों की पूजा करें तथा वहीं बलि के लिए दही, चावल, सरसों आदि चढ़ा दें.
बाद में गहराई से खोदने पर गड़ा हुआ धन प्राप्ति होगी.
क्या गड़ा हुआ धन निकालना चाहिए ?
आमतौर पर देखा जाता है की कई लोगो के मन में गड़े हुए धन को निकालने की इच्छा होती है खासकर पुराने समय के खजाने और राजा महाराजा काल के गड़े हुए धन जिन्हें वक़्त के साथ भुला दिया गया.
लेकिन, क्या गड़ा हुआ धन या खजाना निकालना इतना आसान है ?
नहीं ! इस धन की सुरक्षा में सर्प, भूत-प्रेत, कलावा, यक्ष करते है. अगर आप जबरदस्ती इस धन का प्रयोग करने की कोशिश करते है तो ये आपके सम्पूर्ण नाश की वजह बन सकता है क्यों की ये धन श्रापित होता है.
विधिवत पूजा और शांति के बाद ही आप गड़ा हुआ धन हासिल कर सकते है.