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Thursday, May 28, 2026
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जादुई काल का समय 3 से 4 बजे के बीच वास्तव में क्या होता है ?

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सुबह 3 बजे से 5 बजे के बीच का वक़्त जितना ज्यादा spiritual activity के लिए मशहूर है उतना ही witchcraft के लिए भी है. आज भी ऐसी मान्यता है की सुबह 3 बजे से लेकर 4 बजे के बीच इंसानी मस्तिष्क सबसे ज्यादा कमजोर होता है और इस दौरान evil force सबसे ज्यादा शक्तिशाली और सक्रिय होती है.

इस समय को Witching Hour के नाम से भी जाना जाता है. क्या वाकई इस दौरान जादू अपने चरम पर होता है या इसका कोई और महत्त्व भी है आइये जानते है इस आर्टिकल में.

प्राचीन समय से ही ऐसी मान्यता चली आ रही है की सुबह 4 बजे ब्रह्म-महूर्त शुरू हो जाता है लेकिन, इससे ठीक एक घंटे पहले का समय शैतानी शक्तियां अपने चरम पर होती है.

अगर इस दौरान कोई भी Black magic spell casting की जाए तो उसका रिजल्ट मिलता है साथ ही ज्यादातर लोगो के लिए ये समय बाहर निकलने के लिए सही नहीं होता है. गाँव में बचपन से ही बच्चो को डराया जाता है.

witching hour

अगर वे इस समय के बीच नींद से उठते है तो उन्हें 4 बजे तक का इन्तजार करने के लिए कहा जाता है. मुझे आज भी याद है की किस तरह मुझे इस समय के बीच रूहानी अनुभव होते थे.

काला जादू के समय काल की ये धारणा witchcraft in Europe से ली गई है जो की 1535-1835 के समयकाल के मध्य की है. इस दौरान Witch hunts, demonic activity, exorcisms, and rituals के लिए Witching Hour को सबसे सही समय माना जाता था.

ऐसा माना जाता है की Witching Hour के दौरान काली शक्तियां अपने चरम पर होती है तब वे खुले तौर पर हमारे सामने होती है और इसी दौरान एक खास समय तक उनका सामना करते हुए उन्हें रोका जा सकता है.

पौराणिक और धार्मिक तौर पर देखे तो ऐसी कई मान्यताए है नंबर 3 से जुड़ी हुई है. अगर आप एक Spiritual practitioner है तो इस समय का आपके ऊपर क्या असर हो सकता है और आखिर क्यों 3 से 5 बजे का समय इतना ज्यादा विवाद में है आइये जानते है सबकुछ.

What is Witching Hour in Hindi

ऐसी कई folklore और urban legends and long-held beliefs है जो 3 बजे से जुड़ी हुई है. आज भी काफी सारे लोग जब भी अपने साथ हुए अनसुलझे रहस्यों को साझा करते है तो वे इसे 3 बजे से जोड़ते है.

इस बात में कितनी सच्चाई है कोई नहीं जानता है ऐसे में सबसे पहले biology and sleep cycles के बारे में जान लेना जरुरी बन जाता है.

क्या आप जानते है इस समय के बीच हमारी बॉडी के साथ क्या होता है ?

ज्यादातर लोगो के लिए ये समय REM का होता है जो की सबसे deep sleep cycle होता है. इस दौरान मस्तिष्क सबसे कमजोर होता है.

इस दौरान दिल की धड़कन सबसे निम्न होती है, सोचने समझने की क्षमता आसानी से कण्ट्रोल की जा सकती है और काफी सारे जरुरी फंक्शन को लगभग न्यूनतम स्तर पर कर दिया जाता है.

इसकी वजह से जब भी अचानक हम नींद से उठते है Sleep paralysis experience से जूझने लगते है.

इसके अलावा एक मान्यता ये भी है की इस समय प्रकृति और spiritual activity अपने चरम पर होती है ऐसे में हम बेहद कम समय में खुद को universe के साथ connect कर सकते है.

जो लोग witchcraft को follow करते है वे इस दौरान डेविल की पूजा करते है वही आध्यात्म को फॉलो करने वाले इस दौरान यूनिवर्स के साथ खुद को जोड़ते हुए Spiritual experience का आनंद लेते है.

आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन Lucid dream, Astral travel जैसी activity के लिए ये सबसे सही समय होता है.

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वास्तव में ये जादुई समय कब होता है ?

हम अभी तक ये देखते आये है की devil या spiritual दोनों तरह की एक्टिविटी के लिए कोई चुना हुआ समय नहीं होता है ऐसे में क्या Witching Hour यानि 3 से लेकर 5 बजे का समय इतना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है ?

यीशु को दोपहर के ठीक 3 बजे सूली पर लटकाया गया था और इसका विपरीत समय सुबह के 3 बजे होता है.

वैसे तो कई धारणा सुनने को मिलती है लेकिन ये कितनी वास्तविक है कोई नहीं जानता है. अलग अलग जगह के अनुसार ये धारणा बदलती रहती है ऐसे में कुछ ऐसी common धारणा के बारे में जान लेते है जो इस Witching Hour को खास बनाती है.

  • सुबह के ठीक 3 बजे से 4 बजे के बीच का समय जितना spiritual activity के लिए सही है उतना ही devil worship के लिए भी है. इस समय दोनों शक्तियां अपने चरम पर होती है.
  • कई जगह पर 2 AM, 3 AM. 3:33 AM का से witchcraft hour माना जाता है. ऐसा माना जाता है की दोपहर के ठीक 3 बजे ही Christ को crucify किया गया था. उनकी मौत के समय शैतानी शक्तियां अपने चरम पर थी और इसका विपरीत समय सुबह के 3 बजे है.
  • कई जगह मध्य रात्रि के समय जब full moon night हो तब witchcraft के लिए सबसे सही समय माना जाता है. ये एक समय काल होता है जो मध्य रात्रि से सुबह के 3 या 4 बजे के बीच का समय होता है. जब पूरे चाँद की रौशनी धरती पर पड़ती है तब जादू अपने highest form में होता है और इस दौरान की गई कोई भी ritual ज्यादा प्रभावी होती है. आपको याद हो तो love spell इस समय के बीच की जाती है.
  • Be-Witching hour जिसकी धारणा Australia में सबसे ज्यादा फॉलो की जाती है उनके अनुसार मध्य रात्रि से 3 बजे के बीच का समय जादू करने के लिए बेहतरीन समय होता है.
  • Japanese tradition के अलावा भारत के कई जगहों पर संध्या काल के ठीक पहले और बाद का समय जादू करने के लिए सही माना जाता है. ऐसा माना जाता है की इस दौरान छलावा जैसी शक्तियां अपना जादू दिखाती है और उनकी worship करना आपको 100% result देती है.

संध्या काल के दौरान का समय दोनों तरह की शक्तियों के लिए उपयुक्त होता है जिसकी वजह से इस समय ज्यादातर बुजुर्ग आध्यात्मिक गतिविधि पर जोर देते है. चौराहे पर रखे जाने वाले टोने और टोटके इस समय प्रभावी होते है.

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What happens during the “Witching Hour”?

ये वो समय होता है जब जादू अपने strongest form में होता है. इस समय को the Devil’s Hour and the Holy Hour के नाम से जाना जाता है क्यों की अच्छी और बुरी दोनों तरह की शक्तियां इस वक़्त अपने चरम पर होती है.

आइये जानते है की इस समय क्या क्या होता है.

  • Witches, conjurers, and sorcerers या फिर इनके जैसी एक्टिविटी से जुड़े लोग जो spell cast करते है वे आसानी से अपने प्रयोग में सफल होते है. जब सारी दुनिया सो रही होती है तब उन्हें Witching Hour के दौरान प्राइवेसी मिल जाती है.
  • ऐसा माना जाता हाई की ये समय आत्माओ के हमारी दुनिया में सफ़र का होता है. दोनों दुनिया के बीच की दीवार इस समय सबसे कमजोर होती है जिसकी वजह से वे आसानी से हमारी दुनिया में अपने मनचाहे लोगो से सम्पर्क कर सकते है.
  • haunted place इस दौरान और भी ज्यादा भयानक हो जाते है क्यों की paranormal activity इस दौरान बढ़ जाती है.
  • ये समय demonic possessions से भी जोड़कर देखा जाता है. ऐसा माना जाता है की इस समय शैतानी शक्तियां हम पर आसानी से हावी हो जाती है.

ये सभी गतिविधि इसी समय होती है. ज्यादातर मूवी में दिखाया जाता है की घडी में वक़्त अचानक एक वक़्त पर आकर रूक जाता है. Hollywood movie Conjuring में भी समय ठीक 3:07 पर रूक जाता है.

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ये सभी गतिविधि ठीक Witching Hour पर क्यों होती है ?

सुबह के 3 से 4 बजे का वक़्त ही क्यों ? आखिर ये सभी गतिविधि इस वक़्त ही क्यों होती है इसके बारे में सोचा है आपने ?

Witching-Hour-in-Hindi

इसके पीछे कई वजह हो सकती है जो ठीक इसी समय होती है आइये जानते है की इस समय ये गतिविधि होने की वजह क्या है?

  • हम सब biological clock के बारे में जानते है. हमारी बॉडी एक Circadian Circle पर काम करती है. अगर आप इस दौरान किसी लम्बी यात्रा से गुजरते है तो हम “jet lag” syndrome से प्रभावित होने लगते है. इसी दौरान हम Witching Hour से गुजरते है जब हमारा Body temperature सबसे न्यूनतम स्तर पर होता है और हम deepest levels of sleep से गुजरते है.
  • इस समय के दौरान ही सबसे ज्यादा मौत होती है. रिपोर्ट के अनुसार हॉस्पिटल में सबसे ज्यादा मौते 3 बजे से 4 बजे के बीच ही होती है. इसकी सबसे बड़ी वजह हमारे बॉडी का कमजोर होना है.
  • सुबह के इसी समय हम सबसे ज्यादा Psychic sensitive होते है. ऐसा माना जाता है की इस समय हम आसानी से हम आत्माओ से संपर्क और महसूस कर सकते है.
  • इस समय हम आसानी से telepathic message को project कर सकते है.
  • सबसे ज्यादा Sleeping Paralysis experience इसी समय होते है. पुराने समय में superstitious people ऐसा मानते थे की witches and the demons की वजह से ही उनके साथ इस तरह के अनुभव होते है. इस समय वे अपने evil worship को अंजाम देते है और इसका असर दूसरे लोगो पर पड़ता है.

ये सभी वजह काफी है की ज्यादातर लोग Witching Hour के दौरान अलग अलग अनुभव करते है.

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क्या आपकी नींद ठीक इसी वक़्त खुलती है ?

अगर आपकी नींद ठीक 3 के 4 बजे के बीच खुलती है तो witching hour के कई मतलब निकाले जा सकते है. साधक ठीक इसी समय खुद को ब्रह्माण्ड से जोड़ते है.

यही वो समय होता है जब आप खुद को दूसरो से जोड़ते है और ठीक इसी वक़्त होने वाली मौते इस टाइम पीरियड को अलग बना देती है.

अगर आप जल्दी सो जाते है तो इस समय उठ जाना स्वाभाविक है लेकिन, अगर लेट नाईट सोने के बाद भी आपकी नींद इस समय के बीच खुल जाती है तो खुद को वक़्त दे.

आपको अपने Biological clock को समझने की जरुरत है और insomnia जैसे किसी sleep issue पर ध्यान देने की जरुरत है.

Dream journal आपको इसे समझने में हेल्प कर सकता है. Witching Hour के दौरान हम Paranormal, Psychic, Spiritual activity से गुजरते है. अगर आपकी नींद इस वक़्त खुलती है तो आप खुद को इन तीनो गतिविधि में से किसी एक से जोड़ सकते है.

अगर आपकी नींद इस वक़्त खुल जाती है तो वापस सोने की बजाय उस गतिविधि को महसूस करने की कोशिश करे जिसकी वजह से आपकी नींद खुली है.

त्रिलोकी वशीकरण के लिए श्री यंत्र पर त्राटक साधना का सबसे आसान अभ्यास और अनुभव

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Shree yantra tratak meditation in Hindi यानि tratak kriya जब एक यन्त्र पर की जाए तो क्या श्री यंत्र त्राटक साधना से ज्यादा फायदा मिलता है.

अगर हमें sammohan shakti chakra का लाभ लेना है तो shree yantra के किस चक्र पर tratak meditation करना चाहिए.

ऐसे कई सवाल है जो tratak on shree yantra से जुड़े है. Shree chakra वास्तव में श्री यन्त्र के वो लेयर है जो अलग अलग बेनिफिट लिए है. किस चक्र पर tratak meditation कोनसा बेनिफिट दिलाता है आज जानते है.

Tratak sadhna in Hindi में कई तरीको का वर्णन है जो अलग अलग महत्व लिए है. उनमे shakti chakra tratak in Hindi और shree yantra tratak meditation लगभग सबसे ज्यादा powerful माने गए है.

shree yantra tratak meditation

Shree yantra tratak meditation करने से कैसे हमें सही लाभ मिलेगा और tratak benefit को ज्यादा से ज्यादा कैसे हासिल करे ऐसे कई सवालों का जवाब आज हम जानेंगे.

अगर आप त्राटक साधना कर रहे है और आपको आध्यात्मिक अभ्यास में रूचि है तो श्री यंत्र पर त्राटक साधना का अभ्यास करना आपको ज्यादा बेहतर परिणाम दिलाता है.

ये एक आध्यात्मिक अभ्यास है जो साधक की प्राण उर्जा और तेज को मजबूत बनाता है. इसका अभ्यास करना आपको उच्च स्तर के अनुभव करवा सकता है इसलिए बिंदु त्राटक या फिर शक्ति चक्र त्राटक के बाद आपको Shree yantra tratak meditation का अभ्यास जरुर करना चाहिए.

Shree yantra tratak meditation in Hindi

श्री यन्त्र पर त्राटक ध्यान करने से हमें कई अनुभव ऐसे होते है जो आध्यात्मिक रूप से हमें मजबूत बनाते है. श्री यन्त्र की 9 लेयर में हमें सबसे ऊपरी और मध्य की लेयर पर त्राटक करना चाहिए.

इससे ना सिर्फ हमें wealth मिलती है बल्कि त्रिलोकी वशीकरण यानि तीनो जगत का वशीकरण भी मिलता है.

Shree yantra tratak meditation करने से पहले आपको सबसे खास बात जान लेनी चाहिए की श्री यन्त्र कब हमें सही लाभ देगा.

Shree yantra benefit in Hindi की बात करे तो श्री यन्त्र की स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अगर हम shree yantra tratak करे तो हमें vashikaran और wealth यानी धन प्राप्ति होती है.

श्री यंत्र पर त्राटक करने के फायदे काफी सारे है लेकिन, ये तभी होगा जब आप इससे जुड़े सभी नियमो का कड़ाई से पालन करेंगे.

Best way to trataka meditation on shree yantra

Shree yantra tratak meditation kriya vidhi हमारे पूजा पाठ के तरीको से जुडी है. ये एक आध्यात्मिक अभ्यास है इसलिए आप इसका अभ्यास घर के मंदिर में या फिर एकांत कमरे में जो साफ सुथरा हो वहां कर सकते है.

जिस तरह हम देवी देवता की स्थापना करते है उसी तरह से श्री यन्त्र की स्थापना करनी चाहिए.

इसके बाद श्री यन्त्र के सामने दीपक प्रज्ज्वलित कर मानसिक shree yantra tratak meditation करना चाहिए तथा भगवान् शिव और माता पार्वती का ध्यान लगाना चाहिए जिससे की shree yantra me energy flow करने लगे.

Shree yantra par tratak करने के लिए इसके सबसे ऊपर वाली लेयर और मध्य वाली लेयर का चुनाव करे. इसका मंत्र श्रीम है जिसमे श्री लम्बा खिंचाव लिए हुए है. बाकि सभी विधि एक normal bindu tratak जैसी है.

आइये जानते है श्री yantra से जुडी कुछ खास बातो को जिन्हे जान कर ही हमें घर में श्री यन्त्र की स्थापना करनी चाहिए.

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श्री यन्त्र और इसका उपयोग और मह्त्व

Shree yantra एक divine yantra है जो हिन्दू धर्म में symbol of wealth माना जाता है. घर में श्री यंत्र की स्थापना लोग सिर्फ wealth यानि धन प्राप्ति के उदेश्य से करते है फिर भी समय के साथ त्राटक साधना में श्री यंत्र का प्रयोग किया जाने लगा क्यों की इसके experience spiritual थे.

हिन्दू धर्म के सबसे खास यन्त्र यानि श्री यन्त्र की बनावट और इसके डिज़ाइन को समझ कर आप अंदाजा लगा सकते है की ये किस तरह से हमारे लिए खास है. Sammohan Shakti chakra पर त्राटक करना हमें shree yantra benefit दिलाता है.

shree yantra tratak meditation on image design and fact पर ध्यान दे. वशीकरण में इसका काफी महत्त्व है.

Shree yantra को symbol of wealth यानि धन का प्रतिक माना गया है. ज्यादातर लोग अपने घर और पर्स में श्री यन्त्र की स्थापना करते है ताकि धन का प्रवाह बना रहे.

Shree yantra tratak meditation image design की बात करे तो इसमें 9 खास चक्र होते है जिसके मध्य में त्रिपुरा-सुंदरी निवास करती है.

ये चक्र अलग अलग benefit लिए होते है. Shree chakra tratak in Hindi में हमें किस चक्र पर त्राटक करना चाहिए आइये जानते है अलग अलग लेयर यानि चक्र के महत्व को.

9 chakra in shree yantra

Shree yantra के ये 9 layer अलग अलग personality benefit से जुड़े है.

  • shree yantra tratak meditation की पहली लेयर लाल रंग की है जिसका मंत्र श्रीम है और अगर हम इस लेयर पर त्राटक करते है तो धन की प्राप्ति होती है ऐसा जानकारों का मानना है.
  • दूसरी लेयर या चक्र हमारे समृद्धि से जुड़ी है जिसके अनुसार इस पर नियमित मैडिटेशन करने से wealth और health में इजाफा होता है साथ ही हम जो चाहे वो पा सकते है.
  • तीसरा चक्र : shree yantra tratak meditation की तीसरी लेयर में बीमारियों को रोकने की क्षमता होती है.
  • चौथा चक्र सभी प्रकार के दोष का निवारण करता है.
  • पांचवा चक्र आपके सभी रुके हुए काम सिद्ध करता है.
  • Sixth layer of shree yantra आपके भविष्य को ज्यादा बेहतर बनाती है.
  • Seventh layer of shree yantra आपके चारो और से negativity को दूर करती है.
  • Eighth layer आपकी सभी इच्छाओ की पूर्ति करती है.
  • नौवे नंबर की लेयर यानि centre of shree yantra पर त्राटक करना आपको त्रिलोकी वशीकरण की सिद्धि देता है.

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श्री यंत्र पर त्राटक साधना से पहले स्थापना का सही तरीका

श्री यंत्र की स्थापना करने से पहले आपको कुछ खास बातो का ध्यान रखना होता है क्यों की श्री यन्त्र पर त्राटक से पहले इसको ऊर्जावान बनाना बेहद जरुरी है.

Shree yantra image की स्थापना किस तरीके से करे

श्री यन्त्र की प्राण प्रतिष्ठा में ध्यान रखने योग्य कई ऐसी बाते होती है जिन्हे ध्यान ना दे पाने पर हम shree yantra को सही तरह से प्राण प्रतिष्ठित नहीं कर पाते है. इसके लिए निम्न 4 बातो का ध्यान रखे.

Shree yantra tratak meditation को energetic बनाने के लिए shree yantra meditation यानि पूर्व ध्यान करे जिससे आपकी ऊर्जा श्री यन्त्र से जुड़ जाए.

श्री यन्त्र की स्थापना घर में ऐसी जगह करे जो मंदिर लायक हो, अगर आप shree yantra par tratak in Hindi करने की सोच रहे है तो घर में ऐसी जगह इसकी स्थापना करे जहा पर एकांत हो और स्थापित किया जा सके.

shree yantra mudra

Shree yantra image की स्थापना के बाद अगर आपके घर में किसी तरह की लड़ाई झगड़ा या मीट और शराब का सेवन होता है तो श्री यन्त्र निस्तेज हो जाता है जिससे की इसका प्रभाव नहीं रहता.

श्री यन्त्र की स्थापना ही नहीं प्राण प्रतिष्ठा भी बेहद आवश्यक है और ये हम भी कर सकते है लेकिन बेहतर होगा किसी शुभ मुहूर्त में ऐसे व्यक्ति जैसे पंडित से श्री यंत्र प्राण प्रतिष्ठा करवाई जाए जो ये विधि जानता हो.

श्री यंत्र के ऊपर हमेशा पीला कपड़ा रखे अगर मंदिर में स्थापित है तो इसके ऊपर पीला पर्दा हो. कही आने जाने में अगर श्री यन्त्र लाना ले जाना पड़े तो साफ पिले कपड़े से ढक कर लकड़ी के बॉक्स में इसे रखे.

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श्री यन्त्र से जुड़े फैक्ट – fact about shree yantra

श्री यन्त्र की स्थापना के बाद शुक्ल पक्ष के बुधवार, पूर्णिमा और होली दीवाली जैसे त्यौहार और खास दिन इसकी स्पेशल पूजा या ध्यान होना बेहद जरूरी है क्यों की इन दिनों में इसका प्रभाव और लाभ दोनों बढ़ जाते है. ये आपको Shree yantra tratak meditation में फायदे दिला सकता है.

सबसे पहले श्री yantra को साफ करना बेहद जरुरी है इसके लिए सबसे पहले गुरु ध्यान करते हुए यन्त्र के सामने दीपक प्रज्ज्वलित करे और फिर शिव तथा माता पार्वती का मानसिक ध्यान करे.

Shree yantra tratak करने के लिए यन्त्र के मध्य पर tratak meditation करे और इसके बाद सूक्त पाठ भी. अगर ये नहीं कर सकते और यंत्र पूजा नियमित न हो तो बुधवार पूर्णिमा को जरूर करे.

Shree यन्त्र के 9 layer और 45 त्रिभुज अलग अलग 45 देवी देवताओ का प्रतिनिधित्व करते है. इस लिए अगर आप इसकी स्थापना घर में करते है तो पहले घर के माहौल को कण्ट्रोल कर ले.

Shree yantra की समय समय पर पूजा पाठ ना कर पाने से negative effect भी होने लगते है इसलिए अगर आपके घर में कोई इसकी टाइम पर पूजा न कर पाए तो इसकी स्थापना न करे.

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श्री यन्त्र सिद्धि

Shree yantra ki siddhi के लिए सिल्वर श्री यन्त्र को अपने पास रखे और इस पर त्राटक करते हुए

Om Shrim Hring Shrim Mahalakshmaye Shrim Hring Shrim Namah

मंत्र का 108 बार जाप करे. 125, 000 बार जाप सिद्ध माना गया है, जो शुभ है. Shree yantra और shakti chakra tratak अलग नहीं है दोनों ही most powerful tratak है.

बदलाव सिर्फ माध्यम का है की हम किस माध्यम को ज्यादा मानते है यहाँ भावनाए हमें प्रेरित करती है की हम किस पर ज्यादा देर फोकस रह पाते है.

जैसी हमारी भावनाए त्राटक के दौरान रहती है वैसे ही हमें अनुभव होते है. इसलिए जो माध्यम आपको बेहतर लगता है त्राटक उसी पर करना चाहिए.

shree yantra tratak की आज की ये पोस्ट आपको कैसी लगी हमें जरूर बताए साथ ही लेटेस्ट अपडेट के लिए हमें सब्सक्राइब करे.

कर्ण पिशाचनी साधना का सच्चा अनुभव जानिए क्या होता है और क्यों ये साधना नहीं करनी चाहिए

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एक बार एक जगह से कर्ण पिशाचनी साधना अनुभव को जानने के मौका मिला. ये अनुभव एक Astrologer का था जिन्होंने इस साधना को सफलतापूर्वक किया था वो भी सात्विक तरीके से और आज एक अच्छी ज्योतिषी करते है.

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास काफी पुराना है और माना जाता है की ये हमारे आसपास के dimension में भटकने वाली Negative and positive energy entity होती है. आज जिसे देखो वो कर्ण पिशाचिनी की कहानी को बढ़ा चढ़ा कर बताता है लेकिन वास्तव में इस साधना को दोनों ही तरह से किया जा सकता है.

इस पोस्ट में हम कर्ण पिशाचिनी शाबर मंत्र को शेयर करने वाले है साथ ही तामसिक विधि से कर्ण पिशाचिनी की सिद्धि कैसे की जाए इसके बारे में भी एक साधना डाल रहे है.

साधक अपने मर्जी से इसका चुनाव कर सकते है लेकिन विवेक से इसका चुनाव करे क्यों की ये साधना बाद में साधक को पछताने का मौका नहीं देती है.

सिर्फ सिद्ध गुरु ही इस सिद्धि को तर्पण कर सकते है.

कर्ण पिशाचनी साधना

कर्ज से डूबे लोग अक्सर इसकी साधना करते है क्यों की ये साधक के कान में त्रिकाल की घटनाओ के बारे में जानकरी देती है.

Karna Pishachini Sadhana siddhi के बाद साधक को धन की कमी नहीं रहती है क्यों की पिशाचनी उसकी इस कमी को दूर करती है लेकिन इस साधना की कीमत साधक की उर्जा होती है.

साधक की उर्जा पर ये शक्ति अपना निर्वाह करती है और शक्तिशाली बनती है इसलिए वो हमेशा साधक को भ्रमित करने की कोशिश करती है ताकि लालच में फंस कर वो शक्ति के अधीन हो जाए.

अगर आप ये साधना करना चाहते है तो इस साधना से जुड़े हर पहलू के बारे में पहले जान ले और फिर इसका चुनाव करे.

जहाँ तक संभव हो इस साधना को ना करे तो ही बेहतर है क्यों की इसके ज्यादातर प्रयोग सात्विक नहीं है. किसी भी negative energy को attract करना काफी आसान है लेकिन उससे पीछा छुड़ाना और कण्ट्रोल करना बेहद मुश्किल है.

कर्ण पिशाचनी साधना

कर्ण पिशाचनी की साधना के बारे में आप सब ने सुन रखा होगा की ये उन साधनाओ में से एक है जो साधक को भूत की जानकारी देती है. ज्यादातर तांत्रिक इसमें सिद्धि हासिल करते है और इसके अलावा ज्योतिष यानि Astrologer भी इसी के जरिये कई बार भूतकाल की जानकारी देते है.

कुछ तांत्रिक लोगो का मानना है की Karna Pishachini Sadhana के जरिये वे अपने आसपास की negative entities को control करते है और उनके जरिये काम लेते है.

हमारे आसपास दोनों ही तरह की शक्ति है और किसी भी Positive energy को control करना आसान नहीं होता है इसलिए हमारा रुझान negative energy की तरफ बढ़ता है.

किसी भी negative energy को कण्ट्रोल करना और उससे काम लेना सिर्फ वही साधक कर सकता है जिसे how to complete the Sadhana के बारे में complete guide पता होता है. बगैर पूरी जानकारी के साधक का किसी भी साधना को करना मुमकिन नहीं, इसलिए पूरी जानकारी लेने के बाद ही शुरुआत करनी चाहिए.

कर्ण पिशाचनी साधना के बारे में आप सब ने पहले से जान रखा होगा की जिस negative energy entity को इस साधना के जरिये control किया जाता है वो लालची, काम-वासना से भरी हुई होती है. साधना 3 दिन की है और इसके पूर्ण होने के बाद साधक को Karna Pishachini की pleasure शांत करनी होती है.

सुनने में ये किसी fantasy की तरह लग सकता है लेकिन, जो साधना करता है उसे इसका बाद में पछतावा होता है.

ये कोई Spiritual energy नहीं होती है बल्कि Highly negative energy होती है. जैसे ही आपकी साधना पूर्ण होती है ये बगैर किसी वस्त्र के किसी इन्सान के तरह आपके सामने प्रकट होती है. कई बार साधक के मनोबल की कमी की वजह से ये प्रकट नहीं होती है लेकिन अपने होने का अहसास करवा देती है.

इसमें साधक के शरीर के साथ खेलना है और उसे excited करना शामिल है.

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कौन है कर्ण पिशाचिनी़?

तंत्र और मंत्र शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार Karna Pishachini अपार शक्तियों से भरी एक अद्भुत स्त्री रूप होती है.

उसके वशीभूत होते ही वह न केवल बीते काल की घटित घटनाओं के बारे में बताती है, बल्कि मौजूदा समय में चल रही परिस्थितियों से भी अगाह करवाते हुए मार्ग-दर्शन कर भविष्यवाणी भी करती है. इस दौरान व्यक्ति खुद को आत्मविश्वास से भरा हुआ और अद्भुत शक्ति-संपन्न बन जाता है.

यह कहें उसमें दैवीय शक्ति आ जाती है और इच्छापूर्ति संभव हो पाती है. कर्ण पिशाचनी साधना सिद्धि अगर श्मशान में अधोरी के द्वारा या उसकी मदद से की जा सकती है तथा इसके मंत्र को त्रिकालदर्शी मंत्र कहा गया है.

demonic ritual secret

कहते हैं इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन हर सूक्ष्म से सूक्ष्म और छिपी हुई घटनाओं का पता चल जाता है. उन घटनाओं के आधार पर जीवन के बारे मे सकारात्मक विचारों का विश्लेषण कर समास्याओं का समाधान निकाला जाता है.

कर्ण पिशाचनी को यक्षिणी और पिशाच योनी से माना जाता है. ये हमारे आसपास के dimension में विचरण करने वाली शक्ति होती है जिनका अपना कोई स्वरूप नहीं होता है.

मंत्रो की शक्ति से इन्हें आकर्षित कर साधक अपनी कल्पना से एक रूप देता है या फिर ये साधक की उर्जा पर अपना रूप निर्मित करती है. मंत्र जप पूर्ण होते होते इनमे रूप धारण करने की शक्ति आ जाती है और ये साधक से जुड़ जाती है.

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किसे करनी चाहिए कर्ण पिशाचनी साधना

जिन साधको का मूलाधार चक्र जाग्रत होता है सिर्फ उन्हें इस साधना को करना चाहिए. एक सामान्य व्यक्ति के काम वासना का स्तर बेहद निम्न होता है जिसके लिए इस तरह की Negative energy की जरुरत को पूरा करना संभव नहीं.

ये शक्ति आपके उर्जा को चूसती रहती है जिसके कारण आप पहले शारीरिक और फिर मानसिक स्तर पर कमजोर होते जाते है. आप जितना इस शक्ति का इस्तेमाल करते है उतना ही ज्यादा ये आपको कमजोर करती है.

एक तरीके से आप इसे इसके काम की फीस मान सकते है. जितना काम उतना ही आपको चुकाना होता है.

ज्यादातर देखा गया है की लोग धीरे धीरे अपने विवेक को खोते जाते है और लालच में फंस कर सब कुछ गँवा देते है और अंत में खुद का पतन कर लेते है. अगर आप कर्ण पिशाचनी साधना करना चाहते है तो 2 चीजो का कण्ट्रोल होना बेहद जरुरी है.

  • आपका मूलाधार चक्र जाग्रत हो ताकि काम भावना आपको परेशान ना कर सके.
  • आपका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा हो और आप लालच को महत्त्व न देते हुए विवेक से शक्ति का इस्तेमाल करे.

Karna Pishachini Sadhana के जरिये हमें सिर्फ भूतकाल की जानकारी मिलती है या फिर ये हमें वर्तमान और भविष्य की जानकारी भी देती है इसे लेकर काफी मतभेद फैला हुआ है.

शायद साधना के तरीके और उर्जा के बदलाव के साथ हमें इसमें बदलाव देखने को मिलते हो जैसे की कर्ण पिशाचनी की सात्विक साधना जिसमे साधक को ज्यादा जानकरी मिलती है. इसकी वजह उस उर्जा का ज्यादा शक्तिशाली होना है.

इस आर्टिकल में हम कर्ण पिशाचनी साधना को करने से पहले कुछ आवश्यक कंडीशन के बारे में भी बात करेंगे और सात्विक तरीके से की जाने वाली Karna Pishachini Sadhana के बारे में भी बात करेंगे.

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कर्ण पिशाचिनी प्रयोग

Karna Pishachini Sadhana व्यक्तिगत, पारिवारिक या सामाजिक समस्याओं से मुक्ति के लिए वशीकरण या सम्मोहन से संबंधित वैदिक, Tantra mantra rituals साधनाओं के प्रयोगों की तुलना में कर्ण पिशाचनी साधना प्रयोग बहुत ही अलग और खास असर देने वाला होता है.

तांत्रिक विद्वान के सानिध्य में घोर साधना और मंत्र जाप के जरिए इस अदृश्य शक्ति का ही vashikaran कर लिया जाता है.

karn pishachni tamsik sadhna

कर्ण पिशाचनी साधना जो स्त्री रूप में एक यक्षिणी होती है. उसे ही ‘Karna Pishachini’ कहा गया है।

उसके वशीभूत होते ही वह सीधे कान में आकर घटनाओं और समस्याओं का समाधान बताती है और मुश्किलों से छुटकारा मिलाता है. यही नहीं पिशाचिनी की कृपा से उस दौरान मुहंमांगे वरदान की पूर्ति भी हो जाती है. पूछे गए किसी भी प्रश्न का जवाब कान में बताती है.

Things you must be aware before do Karna Pishachini Sadhana

साधना को करने से पहले आपको कर्ण पिशाचनी साधना और इतिहास के बारे में जरुरी जानकारी का होना बेहद जरुरी है.

ऐसा इसलिए ताकि अभ्यास के दौरान आपको इसमें किसी तरह के side effect से ना गुजरना पड़े. कुछ जरुरी बाते निम्न है जैसे की

  • 3 दिन की इस साधना में आपको खुद का urine पीना होता है और मल खाना होता है. ( सिर्फ तामसिक तरीके से की जाने वाली साधना में )
  • साधना के पूरा होने के बाद ये शक्ति साधक के सामने बगैर किसी वस्त्र के प्रकट होती है. वो आपको हर तरीके से टच करती है लेकिन आपको नहीं करना है आपको इस दौरान पूरी तरह काबू रखना होता है. अगर आपने ऐसा कुछ किया तो साधना भंग हो जाती है.
  • कर्ण पिशाचनी साधना के बाद Karna Pishachini आपकी पार्टनर बनकर रहती है ऐसे में आप न तो शादी कर सकते है ना ही किसी और के साथ संबध बना सकते है. अगर ऐसा कुछ करते है तो कर्ण पिशाचनी उसे ख़त्म कर देती है. पूरी जिंदगी आपको इस शक्ति की जरुरत को पूरा करना पड़ता है.
  • अगर आप कर्ण पिशाचनी साधना के बाद परेशान होकर खुद की लाइफ को ख़त्म करते है तो आप भी पिशाच योनी में फंस कर रह जाते है जिससे आपकी गति संभव नहीं.
  • इस साधना को तब तक ना करे जब तक की आपके पास कोई और option न बचे क्यों की अगर आपने इसे सिर्फ लालच के चलते किया तो ये आपकी जिंदगी बर्बाद कर देगी.
  • साधना 3 दिन की है लेकिन आपको 2 दिन पहले और 2 दिन बाद तक इसी क्रम को फॉलो करना चाहिए ताकि सफलता को पक्का किया जा सके.

तामसिक कर्ण पिशाचनी साधना का मंत्र

Om Aim Hreem Shreem Dum Hum Phat Kanak Vajra Vaidurya Mukta Alankrat Bhushne Ahe Ahe Aagachh Aagachh Mam Karne Pravishya Pravishya Bhoot Bhavishya Vartmaan Kaal Gyan Door Drishti Door Shravanam Broohi Broohi Agni Stambnam Shatru Stambnam Shatru Mukh Stambnam Shatru Gati Stambnam Shatru Mati Stambnam Paresham Gatim Matim Sarva Shatrunaam Vaag Aarambh Stambnaam Kuru Kuru Shatru Karya Hani Kari Mam Karya Sidhi Kari Shatrunaam Udyog Vindhwans Kari Veer Chamundani Hatakdharini Nagri Puri Pattansthan Sammohini Asadhya Sadhini Om Shreem Hreem Aing Om Devi Han Han Hum Phat Swaha

हिंदी में

ॐ ऐं ह्रीं श्रीम दम हम फट कनक वज्र वैदुर्य मुक्त अलंक्रत भुश्ने आहे आगाच्छ आगाच्छ मम करने प्रविश्य प्रविश्य भूत भविष्य वर्तमां काल ज्ञान दूर दृष्टि दूर श्रवणम ब्रूही अग्नि स्तंबनाम शत्रु स्तंबनाम शत्रु स्तंबं शतरु मुख् वाग आरंभ स्तम्भनाम कुरु कुरु शत्रु कार्य हनी कारी मम कार्य सिद्धि कारी शत्रुनाम उद्योग विंधवांस कारी वीर चामुंडानी हटकधारिणी नगरी पुरी पट्टनस्थान सम्मोहिनी आध्याय साधिनी ओम श्रीम ह्रीं आइंग ओम देवी हन हम फट स्वाहा

कर्ण पिशाचनी साधना विधान

  • रात के ठीक 12 बजे इस साधना की शुरुआत करनी चाहिए.
  • पूरी तरह एकाग्र होकर ऊपर बताये गए मंत्र का जप पूरा करे.
  • इस दौरान आपको अपने कानो से सुनने वाली आवाजो पर फोकस होना होगा.
  • 3 दिन तक रोज 2 से 3 घंटे तक इस मंत्र का जप करे. कई बार 5 घंटे तक का अभ्यास चलता है. ये सब आपके संकल्प पर निर्भर है.

साधना को सिद्ध होने में कम से कम 3 दिन का टाइम लगता है और इसके बाद आपको आवाजे सुनाई देना शुरू हो जाता है.

Read : जानिए क्यों तंत्र साधना में रूचि रखने वालो के पास Maha indrajaal in Hindi होना बेहद जरुरी है

Karna Pishachini Sadhana siddhi second method

कर्ण पिशाचनी साधना की ये सिद्धि सात्विक तरीके से संपन्न की जाती है और इसे आप घर पर आसानी से कर सकते है. इसका मंत्र निम्न है.

ॐ नमो कर्णपिशाचिनी अमोघ सत्यवादिनी

मम कर्णे अवतर-अवतर सत्यं कथय-कथय

अतीत अनागत वर्तमान मम दर्शय दर्शय

कथय-कथय ह्नों कर्ण पिशाचिनी स्वाहा ।

प्रातःकाल स्नान कर उत्तर की ओर मुँह कर ऊन का आसन व ऊन का ही वस्त्र व ऊनी कम्बल ही ओढ़े.

वेशर चन्दन व कस्तूरी का तिलक करे, गुग्गुल का धूप करे, गाय घृत का दीपक करे. 12 दिन तक रोज दस माला का जाप करे. एकाशन करना, खीर व गेहूँ की रोटी खानी चाहिये.

गेहूँ के आटे की एक टिकड़ी बनाए उसको घृत में तल ले. जाप करते समय उसे मुह में रखकर जाप करे. अन्तिम दिन खीर की 108 आहुति देनी चाहिए

कर्ण पिशाचनी साधना हवन आहुति मंत्र

ह्रीं कर्ण पिशाचिनी स्वाहा ।

ॐ वः वः कम्बली के गंद पिंड पिशाचिनी स्वाहा

साधना संपन्न होने के बाद साधक को कानो में आवाज सुनाई देना शुरू हो जाती है. ये एक सात्विक तरीके से की जाने वाली साधना है जो सकारात्मक उर्जा को आकर्षित करती है.

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कर्ण पिशाचनी साधना की सिद्धि का अनुभव अंतिम शब्द

कर्ण पिशाचनी साधना की सिद्धि करना आसान है क्यों की ये हमारे मंडल से Negative energy entity को attract करती है.

Karna Pishachi Sadhana के जरिये वशीकरण, सम्मोहन और मारण जैसे कर्म को पूरा किया जा सकता है लेकिन ये सिर्फ तांत्रिक क्रिया करने वाले ही कर सकते है.

माना जाता है की Tantra mantra ritual करने वाले इस शक्ति को अपने काबू में कर लेते है और इसे दूसरो पर छोड़कर काम को अंजाम देते है.

वैसे कर्ण पिशाचनी साधना सिद्धि को नहीं करना चाहिए क्यों की गलत काम से की गई साधना कभी सुख नहीं देती है और अगर सिद्ध गुरु ना हो तो इनसे छुटकारा पाना भी सम्भव नहीं होता है.

तंत्र क्रिया के अलावा Astrology में भी इस साधना के जरिये अच्छे परिणाम हासिल किये जा सकते है. अगर आप ये साधना करना चाहते है तो पहले इसकी सावधानी और जरुरी जानकारी को जान ले और फिर शुरू करे.

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सबसे शक्तिशाली शारीरिक सुरक्षा वशीकरण की 3 विधि जो आपको बुरी नजर और काले जादू से सेफ रखती है

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शारीरिक सुरक्षा वशीकरण या फिर सुरक्षा कवच का निर्माण करने की विधि ये हमें बाहरी खतरों से सेफ रखता है. मनुष्य का जीवन असुरक्षित है. पहले भी असुरक्षित था, अब भी असुरक्षित है. केवल खतरों का रूप बदल गया है.

प्रश्न यह उठता है कि क्या हम इन खतरों से तांत्रिक क्रियाओं और मंत्रों से सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं?

इस संबंध में हम पहले भी बहुत कुछ बता चुके हैं. यहां हम फिर एक बार बताना चाहते हैं कि यदि हम सिद्ध मंत्रों या तांत्रिक अनुष्ठानों के द्वारा अपने शरीर या किसी अन्य व्यक्ति के शरीर को अभिमंत्रित करके उसकी आंखों में झांकते हुए मंत्र पढ़ते हैं तो वह खतरों से सुरक्षित रहता है.

इसके लिए अनेक विधियां हैं.

आधुनिक विज्ञान के जानकारों में यह एक प्रवृत्ति बन गई है कि वे बिना जाने आलोचना करने बैठ जाते हैं.

चूंकि वे इस विद्या के तकनीकी क्षेत्र से अनजान हैं, इसलिए इस विद्या के मामले में उन्हें अज्ञानी मानकर उनकी नासमझी पर क्रोध नहीं करना चाहिए.

शारीरिक सुरक्षा वशीकरण

यहाँ शेयर किये जाने वाला शारीरिक सुरक्षा वशीकरण आपको बुरी नजर, किसी तरह की मानसिक असुरक्षा या फिर काले जादू से बचाता है.

वस्तुतः हम अपने शरीर और उसकी ज्ञानेंद्रियों पर इतना भरोसा करते हैं कि उससे परे सोच ही नहीं सकते. लेकिन सत्य तो यह है कि हमारे शरीर का सिस्टम ज्ञानेंद्रियों पर आधारित नहीं हैं. ये तो उसके रूटीन कार्यों के लिए है.

जब हम किसी व्यक्ति को अभिमंत्रित करते हैं, तो उसके मस्तिष्क की संग्राहक तरंगें उस आदेश को ग्रहण करके संग्रहीत कर लेती हैं. इस आदेश के अंतर्गत वह अपनी अतींद्रिय तरंगों को वातावरण में छोड़ने लगता है.

इससे उसे खतरे का अहसास पूर्व में ही हो जाता है और वह व्यक्ति अपने बचने का उपाय कर लेता है. यह क्रिया कई तरह से होती है. लेकिन हर बार छठी इंद्रिय ही संकेत देती है और आदमी खतरे से निकल जाता है.

शारीरिक सुरक्षा वशीकरण

विधि : यदि आपने रुद्र, दुर्गा, काली या विष्णु के किसी मंत्र को सिद्ध कर रखा है तो आपको किसी अन्य मंत्र की सिद्धि की आवश्यकता नहीं है.

यदि इनमें से किसी मंत्र की सिद्धि नहीं है तो निम्नलिखित मंत्रों की सिद्धि उसके साथ दी गई विधियों के अनुसार कर लें. फिर शारीरिक सुरक्षा वशीकरण प्रयोग विधि अनुसार करें

  1. मिट्टी का एक दीपक लें. उसमें गाय का घी, अंकोल का तेल, तिल का तेल, सरसों का तेल, इंद्रायण का तेल और कपूर डालकर कपास या कपास के कपड़े की बाती डालें.

दीपक को जला लें. उसे ईशान कोण पर स्थापित करके उसकी ओर मुख करके बैठें. यह क्रिया कृष्णपक्ष की पहली रात से प्रारंभ करें. प्रतिदिन 1080 मंत्रों का जाप करते हुए दीपक की लौ को देखते हुए ध्यान-मग्न हो जाएं.

इस समय या इससे पूर्व चिड़चिड़ी की झाड़ों की समिधा जलाकर उसमें घी और जौ की आहुति दें. यह मात्र 108 मंत्रों से दी जाती है और प्रतिदिन दी जाती है. इस प्रकार 1188 मंत्र का जाप प्रतिदिन करना होता है. यह क्रिया 21 दिन तक करें.

शारीरिक सुरक्षा वशीकरण मंत्र जाप का समय अर्द्धरात्रि है.

मंत्र : ओऽऽऽऽऽम् नमः देवी चामुंडाय दक्षिण कालिके ओऽऽऽऽऽम् क्ली क्लीं क्लीं फट् स्वाहा

  1. शीर्षासन लगाएं और इस अवस्था में प्रतिदिन 108 बार शिव मंत्र का जाप करें. यह जाप 108 दिन करें.

मंत्र : ओऽऽऽऽऽम् अ अ अ अं अं अं नमः शिवाय

  1. किसी ऊंचे स्थान पर दोनों पैर लटकाकर बैठ जाएं. नितंब एवं इंद्रियों भर भार स्थान (पलंग, चट्टान, मचान) पर रखें. शरीर को सीधा रखें.

सामने शिव के क्रोधित रूप (रुद्र) की तस्वीर रखें या ध्यान लगाएं. इस समय जीभ को उलट कर जितना अन्दर ले जा सकते हैं, ले जाएं और निम्नलिखित मंत्र का 108 बार मानसिक जाप करें. शारीरिक सुरक्षा वशीकरण की यह क्रिया रात के तीसरे प्रहर में गेरुआ पहनकर की जाती है. इसे 108 दिन करें.

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मंत्र : ओऽऽऽऽऽम् ॐ ॐ ॐ ॐ ड्रॉ ड्रॉ ड्रॉ मं मं मं रुद्राय नमः

  1. जो लोग दुर्गा या मां शेरांवाली पर विश्वास रखते हैं, उन्हें तगर, लौंग और पत्रक पीस कर स्वाधिष्ठान पर लेप करना चाहिए (एकइंचगोलाई में) इसमें कपूर भी मिला सकते हैं. ईशान की ओर मुख करके बारह से तीन बजे मध्य रात्रि में आसन लगाएं. आसन के सामने जौ या गेहूं डालकर उसके ऊपर जल भरा मिट्टी का कलश स्थापित करें. इसमें आम का पल्लव डालकर घृत का दीपक जलाएं.

Read : कम समय में कुंडलिनी जागरण की सर्वोत्तम क्रिया योग की विधि जिसके अनुभव अलौकिक है

108 मंत्रों से आक एवं चिरमिटी (चिड़चिड़ी) की झाड़ी की समिधा में घृत, लाल चंदन, सिंदूर, कपूर और दूध को मिलाकर चुटकी चुटकी भर आहुति दें. तत्पश्चात् दीपक की लौ में दुर्गा या मां शेरांवाली की छवि स्थापित करके मंत्र जाप करते हुए उसमें उतरने का प्रयत्न करें. यह जाप प्रतिदिन 108 के हिसाब से किया जाता है.

शारीरिक सुरक्षा वशीकरण मंत्र जाप आश्विन शुक्लपक्ष की प्रथमा से दशमी तक करें. दशमी को देवी को द्रव्य अर्पित करके प्रणाम करें.

दुर्गा के कलश का जल अपने आवास के चारों ओर छिड़क दें. प्रयत्न यह करें कि दीपक में समय-समय पर घृत पड़ता रहे, जिससे वह जलता रहे. बुझ जाए तो निराश न हों. उसे फिर जला लें.

मंत्र : ओऽऽऽऽऽम् वं वं वं वं वं दुर्गाय / मां शेरांवाली / वरुणाय नमः ( तीनो में से कोई भी एक नाम का जप कर सकते है )

शारीरिक सुरक्षा वशीकरण सुरक्षा विधि दाहिने हाथ की हथेली में जल लें. जिस देवी या देवता का शारीरिक सुरक्षा वशीकरण मंत्र सिद्ध कर रखा है, उनका ध्यान करते हुए तीन बार मंत्र पढ़ें और बाएं पैर से शुरू करके एक बार में एक अंग पर जल डालें.

इस प्रकार पैरों, पिंडली, टांगों, घुटनों, जंघाओं, नितंबों, इंद्रिय, पैर, रीढ़ की हड्डी, पीठ, छाती, कंधों, बांहों, हाथों, हथेलियों, अंगुलियों, गर्दन, कंठ, कानों, नाक, आंखों, मुंह ललाट, सिर और चांद पर जल डालें.

हर बार शारीरिक सुरक्षा वशीकरण मंत्र को तीन बार पढ़ें और मन में एकाग्र होकर देवी-देवता से प्रार्थना करें कि वे आपकी एक निश्चित अवधि तक एवं एक निश्चित समय में सुरक्षा करें. उनसे निवेदन करें कि वे घर-बाहर, सीते-जागते, उठते-बैठते में आपकी सुरक्षा करें.

यह निश्चित जानिए कि आपके ईष्टदेव आपकी सुरक्षा करेंगे.

Read : यक्षिणी साधना से जुडी मुख्य गुप्त बाते और उदेश्य पूर्ति हेतु सावधानिया जिनका आपको पता होना चाहिए

सुरक्षा वशीकरण के दौरान किस तरह की सावधानी रखनी चाहिए

चेतावनी: एक इसी तंत्र विधि में नहीं, तमाम तांत्रिक विधियों में विश्वास का अटूट होना आवश्यक है. इस शरीर के ऊर्जा तंत्र की तकनीक ही विश्वास पर आधारित है. यदि आपको किसी कार्य की सफलता का विश्वास नहीं है तो आपका तमाम परिश्रम व्यर्थ जाएगा, वह काम सिद्ध नहीं होगा.

यह तकनीक ही ऐसी है कि विश्वास ही कर्म और एकाग्रता को उत्पन्न करता है. विश्वास न हो तो मन एकाग्र न होगा और उचित रूप से कर्म भी नहीं हो पाएगा. ऐसे में किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिलेगी, तंत्र अनुष्ठान तो दूर की चीज है.

विशेष : शारीरिक सुरक्षा वशीकरण मंत्रों द्वारा उपर्युक्त विधि से दूसरे की भी सुरक्षा की जा सकती है. सब कुछ उसकी आंखों में झांकते हुए करें.

5 Powerful पीर पैगम्बर और जिन्न से जुड़ी कुछ खास मुसलमानी साधना और अमल जिन्हें कोई भी इन्सान कर सकता है

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पीर पैगम्बर साधना, जिन्न को बुलाने का मंत्र या अमल ये सब मुसलमानी साधना और अमल के अंतर्गत आता है. पीर बाबा का मंत्र या फिर सरल शाबर मंत्र साधना की इस कड़ी में हम बात करने जा रहे है कुछ सात्विक साधनाओ के बारे में.

कुछ ऐसी मुसलमानी साधना और अमल जिन्हें कोई भी व्यक्ति जो नियत का पाक और सात्विक भावना रखने वाला हो कर सके. अगर आपकी life में बुरा वक़्त चल रहा है तो उसे टालने के लिए इस तरह की साधना कर सकते है.

क्या आपने कभी इस तरह की मुसलमानी साधना और अमल करने की कोशिश की है ? आपको पहली बार में सफलता मिली या नहीं ? ज्यादातर लोगो का मंत्र साधना की तरफ बेहद कम रुझान होता है क्यों की उन्हें इसमें पहली बार में ही सफलता नहीं मिलती है.

बार बार कोशिश कोई करना नहीं चाहता है. ऐसे में मुसलमानी साधना खासकर किसी पीर या पैगम्बर की साधना की जाए तो संभव है की आपको सफलता मिल जाए.

मुसलमानी साधना और अमल

जिन्न या जिन्नात की साधना को तभी करे जब आपका मन भयमुक्त हो चूका हो. जिन्न को बुलाने का मंत्र भी यहाँ शेयर किया गया है जिसका उदेश्य एक सहायक के रूप में उन्हें प्राप्त करना है.

अगर आप साधना के बिच में होने वाले अनुभव से डरकर साधना छोड़ने वाले है तो बेहतर होगा इस तरह की साधना न ही करे.

इसकी बजाय किसी तरह की पीर, पैगम्बर की साधना करे ताकि आपकी समस्या का समाधान हो सके और आप की जिंदगी में आ रही समस्या का समाधान हो जाए.

मुसलमानी साधना और अमल

पीर पैगम्बर से जुड़ी जितनी भी मुसलमानी साधना और अमल है उन सबका इस्तेमाल साधक अपने सुरक्षा और लोगो के भले के लिए करता है. इन साधनाओ को सात्विक और पाक माना है. सामान्य तौर पर मेरा मानना है की इस तरह की साधना का इस्तेमाल बुरे कामो की बजाय खुद को संकट से बाहर निकालने के लिए किया जाना चाहिए.

अगर आपकी life में कभी कोई बड़ी प्रॉब्लम आती है तो आपको इस तरह की साधना को आजमाना चाहिए. हिन्दू धर्म के लोग इस तरह की साधना नहीं कर सकते ये बात सरासर गलत है. मुसलमानी साधना में नियम कड़े नहीं होते उनका पालन कड़ाई से करना होता है.

मुसलमानी साधना में जिन्न को बुलाना और उसे अपना सहायक बनाना, परी का आवाहन करना  और एश्वर्य की प्राप्ति करना, तलिस्मान की रचना, पीर बाबा की सहायता प्राप्त करना जैसी कई बाते शामिल है. कोई भी पाक दिल व्यक्ति इन साधनाओ को कर सकता है जरुरी नहीं की एक मुस्लिम ही इन साधना को कर सकता हो.

अगर आपके काम बिगड़ते जा रहे है या फिर life में काफी सारी प्रॉब्लम से रूबरू होना पड़ रहा है तो पीर पैगम्बर की साधना करके देखे. आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे और सभी समस्या दूर होने लगेगी.

मुसलमानी साधना से जुड़ी खास बाते जिनका आपको पता होना चाहिए

  • मुसलमानी साधना गुरुवार या शुक्रवार से शुरू की जानी चाहिए.
  • साधना में काले हकिक की माला का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है.
  • तेल का दिया जलाया जाता खासतौर से सरसों, चमेली या फिर तिल का तेल.
  • इस्लामिक साधना कर रहे है तो इत्र का प्रयोग जरुर करे.
  • काले या सफ़ेद वस्त्र और सर पर रुमाल या टोपी का इस्तेमाल करना अनिवार्य है.
  • लोबान या गूगल की धूप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल साधना में किया जाता है.

ये कुछ सामान्य जानकारी है जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए. किसी भी पीर पैगम्बर की साधना करते समय इन बातो का ध्यान रखा जाए तो साधना में सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है.

पीर पैगम्बर को बुलाने की मुसलमानी साधना

यहाँ आज कुछ मुसलमानी साधना और अमल शेयर किये जा रहे है जो पीर पैगम्बर साधना के अलावा जिन्न को अपना दोस्त बनाने के लिए भी है.

इन साधनाओ का इस्तेमाल अच्छे कार्यो में ही करना चाहिए.

मुख्य रूप से यहाँ इन्हें शेयर किये जाने का एक ही उदेश्य है. ऐसी साधना शेयर करना जो साधक को न सिर्फ मदद करे बल्कि उसके हर कार्य को भी संभव करे.

अगर आपको किसी तरह की समस्या से झूझना पड़ रहा है या फिर life में बहुत ज्यादा परेशान है तो इन साधना का अमल जरुर कर के देखे. इनके 100 % रिजल्ट साधक की मंशा और उसके कर्म पर निर्भर करते है.

1. हजरत पैगम्बर अली की चौकी

दुनिभर के पीर मुसलमानी साधना और अमल में इसे सबसे ज्यादा महान बताया गया है. इस साधना के जरिये सुरक्षा, भविष्य जानना और सात्विक कार्य सिद्धि को सरलतापूर्वक किया जा सकता है.

याही सार सार सार | 

जिन्न देव पारी नवसंकफारएक खाय दुसरे को फाड़ 

चंहु ओर अमिया पसार

मलायक अस चार   | दुहाई दस्त्खे जिब्राइल

बाई वै खेई मिकाइल   | दाई दसन दसन

हुसैन पीठ खड़े खई   | आमिल कलेजे राखे इजराइल

दुहाई मुहम्मद अलीलाह इल्लाह की  | कंगुर लिल्लाह की खाई

हजरत पैगम्बर अली की चौकी  | नखत मुहम्मद रसूल्लिलाह की दुहाई

विधि : इस अमल को सिद्ध करने की जरुरत नहीं है. अगर आप कही जा रहे है और मन में आशंका चलती है तो इस अमल को सिर्फ 11 बार बोले और फूंक मार दे. इससे आपके मन की शंका खर्म होकर भय का नाश होगा. अगर आप इसके पथ के बाद किसी को झाडा भी लगाते है तो वो भी काम करेगा.

हजरत पैगम्बर अली की चौकी से जुड़ी खास बाते

इस अमल की सबसे बड़ी खास बात ये है की अगर नियमित रूप से इसका 108 बार पाठ होता है तो व्यक्ति में भूत भविष्य और वर्तमान जानने की शक्ति आ जाती है.

ऐसा करने से वहां पर हजरत की चौकी लगने लगती है और फिर उस चौकी के माध्यम से व्यक्ति को सब हाल पता चलता है.

अगर आप इस अमल को करने की सोच रहे है तो बता दे की इस्लामिक अमल को पढने से पहले आपको इससे जुड़े नियम भी जान लेने चाहिए.

इन नियम में पाक पवित्र होना, सात्विक होना सबसे बड़ा नियम है जिसका पालन आपको करना ही पड़ता है.

पीर पैगम्बर की साधना की सबसे बड़ी खास बात में से एक है किसी भी तरह के तांत्रिक व्यभिचार से बचाव.

अगर आपको लगता है की किसी तरह का तांत्रिक प्रयोग आप पर या आपके आसपास किया जा रहा है तो इस अमल के जरिये चौकी लगा दे. जितने स्थान पर चौकी लगती है वहां की सुरक्षा होती है.

हजरत की चौकी लगने के बाद आपके लिए ये सावधानियां और भी बढ़ जाती है क्यों की पैगम्बर अली खुद आपके गद्दी में विराजने लगते है इसलिए इस तरह की अमल को करने से पहले खुद के स्तर की जाँच जरुर कर ले.

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2. मुठी पीर साधना

बिस्मिल्लाह अर्रहमान निर्रहीम

साह चक्र की बावड़ी गले मोतियन का हार

लंका सो कोट समुन्द्र सी खाई

जहाँ फिरे मोहमद वीर की दुहाई

कोन वीर आगे चले

सुलेमान वीर चले दर्शनी वीर चले

नादिरशाह वीर चले मुठी पीर चले

नहीं चले तो हजरत सुलेमान की दुहाई

शब्द सांचा पिंड काँचा

मंत्र फुरो इश्वरोवाचा

विधि : इस अमल को गुरुवार के दिन से शुरू करते है. पीपल के पेड़ के निचे सूर्योदय से पहले ये अमल 40 दिन करना होता  है. इन 40 दिन में कभी भी पीर दर्शन दे सकते है.

फायदे :

  • पीर को प्रसन्न कर मनचाहा कार्य पूर्ण करवाया जा सकता है.
  • पारलौकिक शक्तियों से सुरक्षा कवच प्रदान होता है.
  • मुश्किल कार्य को आसानी से सिद्ध किया जा सकता है.

3. वीरो का जंजीरा

बहुत सारे वीर या जिन्न को एक साथ सिद्ध करना हो तो ये मुसलमानी साधना और अमल बेहद शक्तिशाली है.

ये एक बहुत ही शक्तिशाली मुसलमानी साधना और अमल में से एक है जिसके जरिये हम वीरो का आवाहन करते है.

इस साधना में कब कौनसा वीर या जिन्न दर्शन देगा कोई नहीं जानता लेकिन, जो भी जिन्न या वीर आपको दर्शन देगा आपके मनचाहे कार्य के लिए बाध्य होगा.

इस मुसलमानी साधना और अमल को शक्तिशाली इसलिए भी कहा गया है क्यों की इसके जरिये किसी भी मुश्किल कार्य को अंजाम दिया जा सकता है.

अगर आपकी जिंदगी में कोई कार्य बहुत कठिन है तो ये कार्य इनके द्वारा आसानी से किया जा सकता है.

लाइलाहाईलल्लाह

हजरत वीर की सल्तनत को सलाम

वी आजम जेर जाल मशवल कर

तेरी जंजीर से कौन कौन चले

बावन भैरो चले चौषठ योगिनी चले

देव चले विशेष चले

हनुमंत की हांक चले नरसिंह की धाक चले

नहीं चले तो सुलेमान के बखत की दुहाई

एक लाख अस्सी हजार पीर पैगम्बर की दुहाई

मेरी भक्ति गुरु की शक्ति

फुरो मंत्र इश्वरोवाचा

वीरो का जंजिरा मुसलमानी साधना विधि : इस मुसलमानी साधना और अमल को गुरुवार या शुक्रवार से इस साधना को शुरू को शुरू किया जाता है. 21 दिन हर रात को 10 बजे बाद आपको 21 माला का जप करना है. इसके अमल साधना में आपके वस्त्र सफ़ेद रंग के होने चाहिए.

साधनाकाल के समय साधक का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो.

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साधना के लाभ : इस मुसलमानी साधना और अमल के जरिये हम किसी भी वीर या जिन्न को बुला सकते है.

उनके जरिये किसी काम को पूरा करवाया जा सकता है और अपने ऊपर आने वाले किसी भी संकट को टाला जा सकता है. इस मुसलमानी साधना और अमल की खास बात ये है की इसमें हम किसी भी जिन्न या पीर का अवाहन कर उनसे मनचाहा कार्य करवा सकते है.

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ध्यान दे : इस अमल को कमजोर दिल वाले ना करे. साधनाकाल में आपको कई तरह के पारलौकिक घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है. अगर आप साधना को बिच में छोड़ते है तो ये आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है.

4. शोहा वीर जिन्न मुसलमानी साधना और अमल

जिन्नातो के सभी प्रकार में शोहा वीर जिन्न को बेहद शक्तिशाली माना जाता है. ऐसा कोई भी कार्य नहीं जो शोहा वीर पूरा न कर सके.

शोहा वीर जिन्न को साधने वाले के मन में भय के लिए किसी तरह का स्थान नहीं होना चाहिए. अगर ऐसा हुआ तो साधक को ही नुकसान पहुंचा सकता है.

शोहा वीर को सहायक के रूप में भी सिद्ध किया जा सकता है और सुरक्षित रहा जा सकता है.

इस साधना को करने से पहले आप अपने अन्दर के भय को कण्ट्रोल कर ले क्यों की ये साधना उग्र मानी गई है.

सोह चक्र की बावड़ीडाल मोतियन का हार

पद्य नियनि निकरी |  लंका करे निहार

लंका सो कोट समुन्द्र सी खाई | चले चौकी हनुमंत वीर की दुहाई

कौन कौन वीर चले |  मरदाना वीर चले

सवा हाथ जमीन को सोखंत करना |  जल का सोखंत करना करना

पय का सोखन्त करना |  लौंग को सोखन्त करना

पलना को | भूत को | पलीत को

अपने वरी को सोखन्त करना |  मेवत उपात भाकी चन्द्र क्ले नाही

चलती पवन मदन सुतल करे | माता का दूध हराम करे

शब्द सांचा पिंड काँचा  | फुरो मंत्र इश्वरो वाचा

विधि : वीरवार से इस मुसलमानी साधना और अमल की शुरुआत करे. हर रोज 51 माला 21 दिनों तक जपनी है.

धूनी लगाकर जप करना है. धूनी लगाने के लिए गूगल और लोबान इस्तेमाल करे. जप के बाद में घी और बताशे धूनी में लगाए.

शोहा वीर अमल के लाभ

  • इस मुसलमानी साधना और अमल की सबसे खास बात यही है की इसके जरिये आप कोई भी कार्य पूरा करवा सकते है.
  • शोहा वीर जिन्न बहुत ही शक्तिशाली होता है इसलिए ये किसी भी कार्य को 100% पूरा कर सकता है फिर चाहे वो कार्य सिद्धि हो, मारन हो या फिर उच्चाटन.
  • इस साधना के बाद साधक भयमुक्त हो जाता है. शोहा वीर हर विपरीत हालात में उसकी रक्षा करता है.

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5. जिन्न को बुलाने का अमल

काली काली महाकाली

इंद्र की बेटी ब्रह्मा की सालीबालक की रखवाली

काले की जै काली भैरो कपाली

जटा रातो खेले | चंद हाथ कैडी मठा

मसानिया वीर चौह्ठे लडाक  | समानिया वीर | बज्रकाया

जिह करन नरसिंह धाया  | नरसिंह फोड़ कपाल चलाया

खोल लोहे का कुंडा मेरा तेरा बाण फटक  |भूगोल बैढन

काल भैरो बाबा नाहर सिंह | अपनी चौकी बठान

शब्द सांचा पिंड कांचा | फूरो मंत्र इश्वरो वाचा

जिन्नात को बुलाने के अमल विधि

  • ये अमल 21 शनिवार और रविवार का है.
  • रात 10 बजे इस अमल की 51 माला जाप करनी है.
  • जब जिन्नात प्रकट हो तब उसे वचन में बांध ले.
  • जिन्न साधना के लाभ

इस मुसलमानी साधना और अमल को को मनचाहे कार्य की सिद्धि में प्रयोग किया जाता है. जिन्न को वचन में बांध लेने के बाद आप जैसा कहते है वो वैसे ही करता है.

Read : क्या वाकई मेन्टलिज़्म मानसिक शक्ति है या सिर्फ एक जादूगरी का खेल

6. मोहमद पीर साधना

ॐ नमो हाँकत युगराज फाँटत कायाजिस कारण युगराजा में तोको ध्याया

हुंकारत युगराज आया

गांजत आया | घोरन्त आया

सर के फूल बखेरन्त आया

और की चौकी उठावंत आया  | अपनी चौकी बैठावंत आया

और का किवाड़ तोडंत आया  | अपना किवाड़ भेड़ता आया

बाँधी बाँधी किसको बांधी | भूत को बांधी | प्रेत को देव दानव को बांधी

उडंत उडंत योगिन बांधी | चौर चिरनागार को बांधी

त्रिसठ कलुआ को बांधी  | चौसठ योगिनी को बांधी

बावन वीर को बांधी  | द्वार को बांधी

हाट को बांधी | गले को बांधी  | गिरारे को बांधी | किया को बांधी | कराय को बांधी

अपनी को बांधी | पराई को बांधी  | मैली को बांधी | कुचैली को बांधी | पिली को बांधी | स्याह को बांधी

सफ़ेद को बांधी | काली को बांधी | लाली को बांधी

बांधी बांधी रे गढ़ गजनी के मोहम्मदा पीर

चले तेरे संग सतर सौ वीर  | जो बिसरी जाय तो सौ राजा हलाल जाय

उलटी मार | पलटी मार | पछाड़ मार | धर मार

कब्ज़ा चढ़ाय | सुडिया हलाय | शीश खिलाय

शब्द सांचा पिंड काँचा | फुरो मंत्र इश्वरो वाचा

मोहमद पीर साधना की विधि : निर्जन स्थान पर नदी या नाहर के किनारे मुसलमानी साधना और अमल का पाठ करना है.

हर रोज 21 माला 21 दिनों तक. अगर ऐसा न कर सके तो सूर्य ग्रहण में पुरे सूर्य ग्रहण के समय इसे करे. ( ऐसा संभव नहीं क्यों की India में सूर्य ग्रहण बहुत कम होता है ) पीर उस समय दर्शन देंगे.

लाभ

  • किये कराये की तोड़ करने के लिए सबसे शक्तिशाली साधना है.
  • भूत प्रेत या किसी भी तरह की बाधा हो पूर्ण इलाज होता है.
  • मोहमद पीर को सिद्ध करने के बाद वो आपके साथ सहायक की तरह रहते है.
पीर पैगम्बर साधना से जुड़ी मुसलमानी साधना और अमल – अंतिम विचार

हम सभी की जिंदगी में बुरा वक़्त आता है. कुछ लोग इसके लिए गलत रास्ते का चुनाव करते है तो कुछ समझदारी से उसे टालते है. कम समय में फायदा देने वाली पारलौकिक शक्तियां भी है जिनसे आपको फायदा मिल सकता है लेकिन उसके आगे चलकर नुकसान है.

इसके बजाय अगर इस तरह की मुसलमानी साधना और अमल का प्रयोग करते है तो सम्भव है की पीर पैगम्बर की आपको सहायता मिल सके.

मुसलमानी साधना और अमल को करने के लिए सिर्फ नियम की पालना करना और सात्विक रहना सबसे ज्यादा जरुरी है. अगर आपको लगता है की आप ऐसा कर सकते है तो इन साधनाओ को अमल कर सकते है.

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नोट : ध्यान दे यहाँ शेयर की साधनाए सिर्फ ज्ञान के लिए है. किसी तरह के प्रमाण की अनुपस्थिति में हम इसकी सफलता का दावा नहीं करते है.

यक्षिणी साधना से जुडी मुख्य गुप्त बाते और उदेश्य पूर्ति हेतु सावधानिया जिनका आपको पता होना चाहिए

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यक्षिणी साधना का महत्व एक साधक के जीवन में बिलकुल वैसे ही जैसे एक गृहस्थ के जीवन में नारी का. सुनने में आता है की यक्षिणी या परी साधना साधक को धन धान्य से भरपूर तो रखती है.

उसकी वासनाओ की भी पूर्ति करती है. यही वजह है की बहुत से लोग यक्षिणी साधना के पीछे पागल रहते है.

आज की पोस्ट में हम यक्षिणी साधना और शाहतूर परी साधना के बारे में जानते है.

हालाँकि ये किसी का अनुभव नहीं है पर किताबो और वेब से लिया हुआ एक अंश है. Yakshini sadhna vidhi or anubhav in Hindi की इस पोस्ट में हम सबसे पहले कुछ खास बाते जो basic guide है के बारे में जानते है.

Yakshini sadhna vidhi vidhan

Yakshini upasana, Yakshini strotam और Yakshini mantra पर ब्लॉग में कई पोस्ट है आप basic guide यहाँ से ले सकते है. Yakshini sadhna आज भी की जाती है ज्यादातर धन के लिए या फिर भविष्य देखने के लिए.

Yakshini sadhna हम ज्यादातर धन और अन्य इच्छाओ की पूर्ति के मकसद से करते है.

लेकिन क्या आप ये जानते है की यक्षिणी होती कितने प्रकार की है. सबसे पहले जानते है की यक्षिणी कितने प्रकार की होती है और उनके महत्व क्या है.

Yakshini sadhna in Hindi

यक्षिणी साधना करने से पहले हम ये जान लेते है की वास्तव में ये होते क्या है?

यक्ष और यक्षिणी धरती के सबसे पास के लोक में अन्य शक्तियों जैसे गन्धर्व, देव, नाग जैसी दिव्य शक्तियों वाले प्राणी होते है.

चूँकि कलयुग के प्रभाव और मन्त्र किलन से ज्यादातर मंत्र सुप्त हो चुके है और शक्तिया हम तक पहुँच नहीं पा रही है ऐसे में यक्षिणी साधना करना साधक को बेहतर परिणाम दे सकता है.

साधक इसे प्रेमिका स्वरूप में सबसे ज्यादा सिद्ध करने की कामना रखते है जो की उनके पतन का कारण भी बन जाती है.

यक्षिणी साधना को धन, ऐश्वर्य और भोग के उदेश्य से सिद्ध करने की मंशा रखने वाले लोगो की कमी नहीं है और कई लोगो ने इसके प्रत्यक्ष सिद्धिकरण का दावा भी किया है. सबसे पहले हम बात करते है की यक्षिणी और उनकी केटेगरी क्या है?

मुख्य प्रकार की यक्षिणी और उनका महत्त्व

यक्षिणी कितने प्रकार की होती है और किस उदेश्य की पूर्ति के लिए कौनसी यक्षिणी को सिद्ध करना उचित रहता है. इनके पास कुछ ऐसी शक्तिया होती है जिनकी मदद से वो अपने साधक की हर संभव मदद करती है.

  • दिव्य रसायन पूर्ति करने वाली Yakshini sadhna
  • चण्डवेगा यक्षिणी : दिव्य रसायन पूर्ति.
  • विशाला यक्षिणी : दिव्य रसायन.
  • लक्ष्मी यक्षिणी : दिव्य रसायन देने वाली.
  • ऐश्वर्य प्रदान करने वाली Yakshini sadhna
  • काल कर्णिका यक्षिणी : ऐश्वर्य प्रदान करने वाली.
  • शोभना यक्षिणी : भोग और कामना पूर्ति करने वाली.
  • दिव्य अंजन प्रदान करने वाली यक्षिणी
  • वटवासिनी यक्षिणी : वस्त्र, अलंकार और दिव्यंजन साधक को प्रदान करती है.
  • हंसी यक्षिणी : पृथ्वी में गड़ा धन दिखाने वाले अंजन की पूर्ति करने वाली.
  • नटी यक्षिणी : अंजन और दिव्य भोग प्रदान करने वाली.

अन्य Yakshini sadhna

  • विभ्र्मा यक्षिणी
  • रतिप्रिया यक्षिणी : धन धन्य से भरपूर करने वाली यक्षिणी.
  • सुरसुन्दरी यक्षिणी : धन और दीर्घायु की पूर्ति हेतु.
  • अनुरागिणी यक्षिणी : स्वर्ण मुद्रा से इच्छापूर्ति करने वाली.
  • जलवासिनी यक्षिणी : उत्तम कोटि की रत्न इच्छा पूर्ति करती है.
  • महाभया यक्षिणी : सभी प्रकार के रत्न प्रदान करने वाली.
  • चन्द्रिका यक्षिणी :अमृत प्राप्ति के लिए.
  • रक्तकम्बला यक्षिणी : मृत में प्राण डालने वाली और मूर्तियों को चालयमान करने वाली.
  • विधुज्जिव्हा यक्षिणी : भूत वर्तमान और भविष्य का ज्ञान बताने वाली.
  • कर्णपिशाचिनी यक्षिणी : समाचार देने वाली ( काल ज्ञान )
  • चामुंडा यक्षिणी :
  • चिंचीपिशाची यक्षिणी : स्वपन में कालज्ञान देने वाली यक्षिणी.
  • विचित्रा यक्षिणी : मनवांछित फल प्रदान करने वाली.
  • पघिनी यक्षिणी : दिव्य भोग और रत्न प्रदान करने वाली.

Yakshini sadhna करने के नियम

  • Yakshini sadhna में साधक को भोग और वासना द्वारा भटकाने का प्रयास किया जाता है.
  • साधक को मायावी दृश्य द्वारा डराने का भी प्रयास किया जा सकता है. इसलिए साधक के लिए कुछ नियम होते है जिनका कड़ाई से पालन करना अति-आवश्यक है.
  • हमेशा कम समय में फायदा देने वाली शक्ति की पूजा के चक्कर से बचे.
  • एकाग्रचित से यक्षिणी का ध्यान करना : वैसे तो यक्षिणी की कोई मूरत नहीं लेकिन कल्पनाओ द्वारा इन्हें रूप दिया गया है.
  • जिस उदेश्य के लिए आप यक्षिणी का आवाहन कर रहे है, उन्हें उसी रूप में ध्यान करे.
  • ये स्वरूप एक माता, प्रिया प्रेमिका या पत्नी का हो सकता है. उच्च कोटि के साधक यक्षिणी में स्वरूप या तो माँ स्वरूप लेते है या पुत्री स्वरूप.
  • मांसरहित भोजन का त्याग कर दे और सात्विक भोजन का आहार ले.
  • प्रातः कल स्नान करके मृग चर्म पर बैठ जाये और किसी का स्पर्श न करे.
  • एकांत में मंत्र जप करे जब तक यक्षिणी प्रकट न हो जाए.
  • मंत्र सीमा के समय आपकी इच्छाशक्ति भी प्रबल होनी चाहिए ताकि मंत्र का प्रभाव बढ़ता रहे.

Read : कम समय में कुंडलिनी जागरण की सर्वोत्तम क्रिया योग की विधि जिसके अनुभव अलौकिक है

यक्षिणी साधना में सफलता कितनी पक्की होती है

यक्षिणी साधना में मंत्र जप, आपके नियम और कुछ गोपनीय तथ्य जिनका अनुसरण किया जाये तो सफलता अवश्य हासिल होती है.

लेकिन अगर आप वेब या किताब से ज्ञान हासिल कर के साधना कर रहे तो सफलता ना के बराबर मिलती है. इसकी वजह है सही ज्ञान और मार्गदर्शन का अभाव.

अगर आप नए है तो टॉप 5 सरल शाबर मंत्र साधना कर सकते है.

हम अपने ब्लॉग पर पब्लिश की गई किसी भी साधना का पुख्ता प्रमाण नहीं दे सकते है क्यों की हमने ये साधनाए नहीं की. परंतु जान ज्ञान और उत्सुकता के चलते इस तरह की जानकारी उपलब्ध करवाते रहते है और रहेंगे.

Yakshini sadhna vidhi vidhan in Hindi

वक़्त के साथ अगर अनुभवी साधक हमसे जुड़ते है तो हम कोशिश करेंगे इससे आप लोगो को फायदा मिले.

यक्षिणी साधना के सफलता के नियम : यक्षिणी साधना में वैसे तो कुछ ज्यादा कड़े नियम नहीं होते है लेकिन इनकी सफलता के लिए शुभ महूर्त और घडी का बेहद प्रभाव पड़ता है.

Read : नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र साधना सिद्धि विधान जो एक दिवस में सिद्ध होती है 5 Powerful Effect

शाहतूर परी Yakshini sadhna विधि

शुक्रवार की रात्रि को 11 बजे से इस साधना को प्रारम्भ करे. सबसे पहले कुए के जल से स्नान कर लुंगी धारण कर ले.

इसके बाद सर पर जालीदार टोपी धारण कर एकांत वाले कमरे में नमाज पढ़ने की अवस्था में बैठ जाए.

शरीर पर हीना और इत्र लगाए.

इस साधना में यन्त्र का महत्व है जिसे आपको पहले से बनवा कर रखना चाहिए.

यन्त्र पर हीना और इत्र लगाए. लोबान की धूनी देकर निम्न मंत्र का जप करे

मंत्र

ॐ नमो विस्मिल्लाही रहिमान रब्बे इन्नी मंगल फंतसीर

9 वे दिन शाहतूर परी प्रकट होती है.

शाहतूर परी के प्रकट होने के लक्षण

शाहतूर परी जब प्रकट होती है तो वातावरण सुंगंधित और शीतल हो जाता है.

शाहतूर परी के शरीर से हीना और इत्र की खुशबु पुरे वातावरण में फ़ैल जाती है.

यही वो वक़्त होता है जब साधक का मन विचलित होने लगता है. उसकी वासनाएं जागने लगती है और साधना के अंतिम पल में वो हार जाता है.

इसलिए संयम रखना बेहद जरूरी है. अपने पास गुलाब की फूलो की माला रखे और जप के समाप्त होने पश्चात् उसके गले में डाल दे.

ये साधना आपको भौतिक सुविधा भी देती है और ऐश्वर्य की प्राप्ति भी.

Read : hamjad sadhna के बारे में जुड़ी ये खास जानकारिया आपकी साधना को बना देगी आसान

यक्षिणी साधना में सावधानी

यक्षिणी हमारे निकट लोक की शक्ति है जो कम प्रयास में ही सिद्ध हो सकती है. काफी सारे साधक शुरुआत में ही यक्षिणी जैसी शक्ति को सिद्ध करने की कोशिश करते है लेकिन, साधना के दौरान उनके अन्दर ना तो संयम होता है न ही कोई अनुभव जिसकी वजह से वे साधना में फ़ैल हो जाते है.

  • अगर आप बगैर किसी सुरक्षा कवच के ये साधना करते है तो आपकी जान का खतरा हो सकता है.
  • आपके मंत्र जप के प्रभाव से ये पहले ही प्रकट होकर साधक को डरावने द्रश्य या आवाज द्वारा डराने की कोशिश करती है.
  • इत्र की खुशबु से जिन्नात भी आकर्षित हो सकते है और आपको नुकसान पहुंचा सकते है. इसलिए साधना से पहले गुरु का मार्गदर्शन और सुरक्षा कवच दोनों के लिए तैयार रहे और साधना में सावधानी बरते.
  • अगर आप पहली बार साधना कर रहे है तो शुरुआती 15 मिनट ध्यान का अभ्यास करे या आपके चित को स्थिर रहने में मदद करेगा.
  • यक्षिणी की साधना 14-25 दिन के मध्य काल में सिद्ध होना शुरू हो जाती है. हो सकता है आपको साधना सिद्धि प्रत्यक्ष ना हो लेकिन इसका ये मतलब नहीं है की साधना सफल नहीं हुई है. कई बार शक्ति अप्रत्यक्ष भी आपके साथ रहना शुरू कर देती है.

अगर आप एक साधक है और पहले से ही ध्यान का नियमित अभ्यास करते आ रहे है तो इस बात के चांस बढ़ जाते है की आपको साधना में जल्दी अनुभव मिले.

ध्यान की वजह से आपके शरीर और मस्तिष्क के बीच सही कनेक्शन बनता है, उर्जा का प्रवाह सुचारू होता है और साथ ही आप अपने चित को किसी भी परिस्थिति के दौरान स्थिर रख पाते है.

Read : कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र और Top 5 Powerful effect से करे मनचाहा वशीकरण और पाए खोया हुआ प्यार

Yakshini sadhna in Hindi final conclusion

दोस्तों हर किसी की लालसा जीवन में ऐश्वर्य और भोग विलास की होती है लेकिन उसके लिए साधनाओ का गलत मार्ग चुनना आपके लिए नुकसानदायी हो सकता है.

अगर आप धन भोग विलास जैसे विषय के लिए यक्षिणी की साधना कर रहे है जो की ज्यादातर साधक का प्रथम उदेश्य होता है तो अपने चित को स्थिर रखे और संयम के साथ यक्षिणी साधना में आगे बढे.

कई बार Yakshini sadhna vidhi vidhan in Hindi के मालूम होने के बाद भी हमें अनुभव नहीं मिलते है. इसका मतलब है की आपने साधना में कही न कही कमी रखी है.

साधना के दौरान ज्यादा से ज्यादा समय दे और जितना हो सके संयम के साथ आगे बढे.

किसी भी Yakshini sadhna को बगैर दिशा निर्देशन के नहीं करना चाहिए क्यों की ये नुकसान दायीं होता है और आपके आसपास की नकारात्क शक्तियों को सबसे पहले आकर्षित करता है.

दोस्तों आज की पोस्ट यक्षिणी साधना आपको कैसी लगी हमें जरूर बताए.

कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र और Top 5 Powerful effect से करे मनचाहा वशीकरण और पाए खोया हुआ प्यार

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आपने कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र और उपाय के बारे में सुना ही होगा. वशीकरण के सबसे आसान उपाय में कामदेव मोहन वशीकरण मंत्र का नाम भी लिया जाता है. ये मंत्र साधना सिद्ध करने के लिए गुरु की आवश्यकता नहीं होती है. आप श्रधा भाव से बिना किसी गुरु के भी साधना को सिद्ध कर सकते है.

अगर आपको सबसे ज्यादा बाहरी लोगो से मिलना जुलना रहता है तो आप कामदेव मोहन माला सिद्धि प्रयोग को घर पर कर सकते है. अभी कुछ समय पहले राजस्थान में एक जौहरी के यहाँ जाना हुआ. उनके व्यव्हार और वाणी को देखकर हर कोई उनसे प्रभावित हो जाता है.

जब समय मिलना तब उनसे इस बारे में बात की तो पता चला की उन्होंने मोहिनी सिद्धि की है. इसके प्रभाव से वे कितने भी गुस्से से भरे व्यक्ति को आसानी से कुछ ही देर में शांत और अपने प्रभाव में ला सकते है.

कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र

उनके गले में एक माला हर समय रहती है जिसे वे शाम को पूजा के समय ही उतार कर मंदिर में रखते थे और दूसरे दिन सुबह पूजा पाठ के बाद फिर से धारण कर लेते है. उन्होंने बताया की कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र और फायदे कोई भी ले सकता है.

अगर आप कामदेव वशीकरण मंत्र का प्रयोग घर पर करना चाहते है तो एक आसान साधना सिद्धि प्रयोग कर सकते है. ये साधना ज्यादा से ज्यादा 21 दिन तक चलती है और आपको इसके 2 हफ्ते में ही अनुकूल परिणाम मिलना शुरू हो जाते है.

कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र

वशीकरण के ऐसे कई प्रयोग है जो बेहद आसानी से सिद्ध किये जा सकते है. कामदेव मंत्र के फायदे बताये नहीं जा सकते है ये तो साधक स्वय अनुभव कर सकता है. अगर आप किसी को अपने वश में करना चाहते है तो एक आसान कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र का प्रयोग सिर्फ 21 दिन सुबह के समय हर रोज करे.

कामदेव वशीकरण मंत्र के जप प्रभाव से आप न सिर्फ खुद में बदलाव को महसूस कर सकते है बल्कि सामने वाले को भी प्रभावित कर सकते है.

आकर्षण के देवता कामदेव है और सम्पूर्ण सृष्टि में उनके बिना आकर्षण नहीं किया जा सकता है. अगर आप खुद में किसी तरह की कमी महसूस कर रहे है खासकर आत्मविश्वास और पौरुष तत्व की तो आपको कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र का जप हर रोज करना चाहिए. आइये जानते है कामदेव मोहन माला सिद्धि प्रयोग के बारे में.

कामदेव मोहन माला सिद्धि प्रयोग के लिए सामग्री

अगर आप माला सिद्ध करना चाहते है तो इसके लिए आपको स्फटिक की माला का चयन करना होगा. कामदेव वशीकरण मोहन प्रयोग के लिए आपको निम्न सामग्री की आवश्यकता होगी.

  • 108 मनको वाली 2 स्फटिक माला एक जप के लिए और और एक सिद्धि के लिए.
  • सफ़ेद रंग का आसन.
  • पूर्व दिशा का चयन साधना के लिए.
  • साधना काल के दौरान आपको 51000 जप में साधना को पूरा करना होगा.
  • साधना अवधि जो भी आप सिद्धि के लिए रखना चाहते है.

51000 का जप एक ही दिन में कर पाना मुश्किल है और आज की लाइफ स्टाइल में एक ही दिन में कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र को पूरी एकाग्रता के साथ कर पाना संभव नहीं है. आप इसके लिए 7-14-21 दिन का समय रख सकते है.

कामदेव वशीकरण मोहन प्रयोग

कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र का प्रयोग आप किसी भी रविवार के समय कर सकते है. सबसे पहले एक लाल कपड़ा बिछा ले और उस पर स्फटिक माला रख दे. इसकी पूजा कुमकुम से करे और पुष्प अर्पण करे. अब दूसरी माला से जप शुरू करे और पूरे 51000 बार दिए गए मंत्र का जप करे.

ॐ ऐ त्रिपुर देवी महादेवी मम् स्वरूपे आकर्षण देहि देहि मम् कार्य सिद्ध करि करि स्वाहा

जप के दौरान आपकी नजर कपड़े पर रखी माला पर रहनी चाहिए. जैसे ही आपका कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र जप पूर्ण होता है ये माला सिद्ध हो जाती है और धारण करने के लिए तैयार है.

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इस माला के सामने जो भी व्यक्ति आएगा वो इसके आकर्षण में बंध जाता है. इस बात का खास ध्यान रखे की सामने वाले व्यक्ति की नजर आपके गले में पड़ी माला पर एक बार जरुर जाए. जैसे ही उसकी नजर माला पर जाएगी माला का प्रभाव उस पर होना शुरू हो जायेगा.

इस माला को सिद्ध कर आप अधिकारी वशीकरण कर सकते है, किसी से अपना काम निकलवा सकते है, मनचाहा लव वशीकरण कर सकते है.

कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र और फायदे

कामदेव मोहन वशीकरण मंत्र के ऐसे अनगिनत फायदे है जो इसे खास बनाते है. कामदेव को प्यार का देवता माना जाता है. आकर्षण बढाने की कोई भी साधना मोहिनी या कामदेव की साधना के बगैर अधूरी है. आइये जानते है कामदेव मोहन वशीकरण मंत्र के फायदे के बारे में.

  • कामदेव वशीकरण मंत्र का हर रोज एक माला का जप आपको आकर्षक बनाता है.
  • अगर आपके अन्दर पौरुष तत्व की कमी है तो उसे भी मदन कामदेव मोहन प्रयोग से सम्पूर्ण किया जा सकता है.
  • अगर आप किसी को पसंद करते है लेकिन वो आपको पसंद नहीं करता है तो उसके मन में आपके लिए आकर्षण पैदा करने के लिए कामदेव मोहनी वशीकरण का प्रयोग करना चाहिए.
  • कम से कम 21 दिन कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र का जप एक माला जप रोज करने से आपके अन्दर आकर्षण शक्ति पैदा होती है और आप किसी को भी प्रभावित कर सकते है.
  • कामदेव वशीकरण मंत्र का जप हर रोज सुबह पवित्र होकर करना चाहिए. ये जल्दी सिद्ध होता है और आपको इसके परिणाम 2 हफ्ते में ही दिखाई देने लगते है.

ऐसा माना जाता है की प्राचीन काल में नर्तकी अपने दर्शको को लुभाने के लिए कामदेव मोहन वशीकरण मंत्र का जप किया करती थी ताकि वे दूसरो को अपने आकर्षण में बांध सके.

पढ़े : hamjad sadhna के बारे में जुड़ी ये खास जानकारिया आपकी साधना को बना देगी आसान

कामदेव मोहन वशीकरण मंत्र कितना प्रभावशाली है?

अगर आप कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र और उपाय की असली शक्ति के प्रभाव को परखना चाहते है तो 21 दिन का नियम बनाकर ऊपर शेयर किये गए कामदेव वशीकरण मंत्र का जप करे. आपको 2 हफ्ते में ही अनुकूल परिणाम मिलने शुरू हो जायेंगे.

ये मंत्र साधना ना सिर्फ आसान है बल्कि इसके ऐसे कई फायदे है जो वशीकरण में सबसे खास साधनाओ में से एक बनाते है. कामदेव वशीकरण मंत्र की साधना को पूर्ण कर आप खुद को आकर्षक बना सकते है, मनचाहे प्यार को अपने आकर्षण में बांध सकते है और अपने आसपास के किसी भी व्यक्ति से अपना कार्य सिद्ध कर सकते है.

कामदेव की साधना करने वाले साधक का आकर्षण और मोहन आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता है क्यों की बाहरी नहीं आन्तरिक वशीकरण होता है. जब आप किसी पर वशीकरण कर ही नहीं रहे है तो इसकी काट कैसे संभव है.

अगर आप भी Online vashikaran specialist baba ji को पैसा देकर थक चुके है तो फ्रॉड से बचने के लिए कामदेव मोहिनी वशीकरण मंत्र का प्रयोग को करे. आपको जल्दी ही इसके मनचाहे परिणाम मिलना शुरू हो जायेंगे.

क्या वाकई मेन्टलिज़्म मानसिक शक्ति है या सिर्फ एक जादूगरी का खेल

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mentalisam tricks एक प्रदर्शन कला है जिसमें इसके अभ्यासी, जिन्हें मानसिकवादी के रूप में जाना जाता है , अत्यधिक विकसित मानसिक या सहज क्षमताओं का प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं.

प्रदर्शनों में सम्मोहन , टेलीपैथी , क्लेयरवोयंस , अटकल , पूर्वज्ञान , मनोविश्लेषण , माध्यमता , मन पर नियंत्रण , स्मृति करतब, कटौती और तेजी से गणित शामिल हो सकते हैं.

मानसिकवादी एक नाटकीय कार्य करते हैं जिसमें ऐसे प्रभाव शामिल होते हैं जो मानसिक या अलौकिक शक्तियों को नियोजित करने के लिए प्रकट हो सकते हैं लेकिन वास्तव में “साधारण संयुग्मन साधनों” द्वारा प्राप्त किए जाते हैं, प्राकृतिक मानवीय क्षमताएं (अर्थात शरीर की भाषा पढ़ना, परिष्कृत अंतर्ज्ञान, अचेतन संचार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता), और मानव मनोविज्ञान या अन्य व्यवहार विज्ञान से प्रमुख सिद्धांतों की गहन समझ.

mentalisam tricks को आमतौर पर जादू की उपश्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और जब एक मंच जादूगर द्वारा किया जाता है, तो इसे मानसिक जादू भी कहा जा सकता है.

हालांकि, आज कई पेशेवर मानसिक चिकित्सक आमतौर पर जादूगरों से खुद को अलग कर सकते हैं, इस बात पर जोर देते हुए कि उनकी कला एक अलग कौशल का लाभ उठाती है.

mentalisam tricks

“मैजिक ट्रिक्स” करने के बजाय, मानसिकवादियों का तर्क है कि वे मन और कल्पना के लिए मनोवैज्ञानिक अनुभव पैदा करते हैं, और मनोविज्ञान, सुझाव और प्रभाव की खोज के साथ वास्तविकता का विस्तार करते हैं.

मानसिकवादियों को अक्सर मानसिक मनोरंजनकर्ता भी माना जाता है, हालांकि उस श्रेणी में मानसिक पाठक और विचित्र जैसे गैर-मानसिक कलाकार भी शामिल हैं..

mentalisam tricks यानि मानसिक शक्तियों के अभ्यास में से एक कला जिसका प्रदर्शन कर कई जादूगर लोगो को आश्चर्य में डाल देते है. मेन्टलिज़्म की कला हमारी मानसिक शक्तियों पर निर्भर करती है. इस कला में 2 चीजे होती है पहली माध्यम जिस पर मेन्टलिज़्म कला का प्रदर्शन किया जाता है और दूसरा इसे करने वाला.

ये हमारी कल्पना शक्ति पर काम करती है जिसमे हमें सामने वाले के मन में चलने वाले विचारो को भांप कर समझना पड़ता है. इसे दूसरे शब्दों में हम सम्मोहन, टेलीपैथी और दिमाग को कण्ट्रोल करने की कला का मिश्रण कह सकते है.

How doest mentalisam tricks works?

How to do mentalisam tricks यानि दिमाग को कैसे पढ़ा जाए? Mentalism एक ऐसी कला है जिसमे हर उस कला को जोड़ा गया है जो हमारे मानसिक अभ्यास में आती है.

ऊपर बताया जा चूका है इस अभ्यास में हमें पैनी नजर और आत्मविश्वास से भरी प्रकृति का बनना आवश्यक है तभी हम इसमें कामयाब बन सकते है. देखा जाए तो मेन्टलिज़्म की पूरी कला सिर्फ और सिर्फ व्यक्ति के आत्मविश्वास और उसके द्वारा लोगो के सामने illusion पैदा करने पर टिकी हुई है.

इसमें बैकग्राउंड म्यूजिक भी शामिल है जो लोगो के दिमाग को हर पल बिजी रखता है.

mentalisam tricks की कला में 3 बाते होती है पहला माध्यम की हरकतों पर गौर करते रहना. दूसरा उसे मिस-गाइड करना और उसे मन में सोचने वाली बातो से अलग ले जाना या मन की बातो को जुबान पर ले आना तीसरा और महत्वपूर्ण हिस्सा है माध्यम पर आत्मविश्वास के साथ हावी होना.

इसमें medium को लगने लगता है की आप जो कह रहे है वही सही है.

किसी के मन की बात को उसे पहले से बताना, ताश के पत्तो से माध्यम का सोचा हुआ पता दिखाना और भी इसी तरह की ट्रिक्स है जो इस कला के माध्यम से की जाती है. इन सबमे आपके विचार और मनोभाव पर हर पल नजर राखी जाती है जिससे की वो आपको पकड़ सके.

मेन्टलिज़्म की सफलता के सबसे खास राज

3 Biggest Mental-ism Secrets जो इस अभ्यास को सफल बनाते है इनके बारे में जानने पर आपको अच्छे से समझ आ जायेगा की mentalisam tricks का अभ्यास कैसे काम करता है. क्या वाकई किसी के दिमाग को पढ़ा जा सकता है?

बिलकुल और ऐसा संभव है जब आप निम्न 3 बातो में से किसी 2 पर अपनी अच्छी पकड़ बना लो.

माध्यम के होंटो (Lips) की हरकतों को पहचाने : आपने देखा होगा की ताश के पत्तो के या फिर नंबर के चुनाव के खेल में आपसे किसी एक पत्ते या न नंबर को चुनने को बोला जाता है.

जब आप ऐसा करते है तब आपसे एक बार फिर से उस नंबर को याद करने को बोलते है.

mentalisam tricks के लगभग 70% मामले में आप यही पर पकडे जाते है क्यों की ऐसा करने के पीछे मेंटलिस्ट की मंशा आपके जुबान पर उस नंबर को बुदबुदाने की है जो आप सोचते है.

आपको यही लगता है की आप उस नंबर को फिर से अच्छे से याद कर रहे है.

लेकिन वास्तव में वो आपके मन को पकड़ने की सबसे पहली चाल है. कई बार ऐसा होता है की मेटलिस्ट आपको 2 से ज्यादा बार भी ऐसा करने को कहते है.

सोच से हटाना सबसे बड़ी उपलब्धि है : आप अपने मन में लाख ऐसा सोच कर मेंटलिस्ट के सामने जाते है की वो आपको पकड़ नहीं पायेगा लेकिन वो आसानी से आपको अपने मायाजाल में फंसा लेता है.

दरअसल लोगो की मानसिकता ये है की अगर उन्हें बार बार पुरे आत्मविश्वास के साथ कहा जाए की क्या आप अपनी बात पर कायम है तो ये जानते हुए भी की उनकी बात सही है वो दोबारा सोचने पर मजबूर हो जाते है.

यही समय है जब मेंटलिस्ट आपकी सोच को हटा कर उन बातो को आपके दिमाग में बिठाता है जो उसके दिमाग में होती है. इसी वजह से वो आसानी से आपकी सोच को पकड़ लेता है.

मान लीजिये की आप कई लड़कियों के साथ चक्कर रखते है. mentalisam tricks की कला के एक्सपर्ट को इसका शक हो जाता है और आप चाहते है की आप उसके जाल में ना फंसे.

जब मेंटलिस्ट आपसे सवाल करता है तब वो कुछ ऐसे शब्दों पर जोर देता है जिनसे आपके मन में भ्रम की स्थिति पैदा होने लगती है.

जैसे आपको पता था की आपने कल क्या देखा. लेकिन वो कहता है की क्या आपको लगता है की आपने वाकई वह सब देखा जो आप बता रहे है.

एक बार जब आपके मन में शंका उत्पन हो जाती है तब वो आपके हावभाव समझ कर आपको मिस-गाइड करता है जैसे की वहा पर आपने ये देखा होगा या ये वहा पर होगा. जब वो कहता है उसी वक़्त माध्यम के मन में उस स्थिति से जुड़े विचार बनने शुरू हो जाते है जो वास्तव में मेंटलिस्ट के विचार थे.

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शब्दों का जाल और इसके मायने

mentalisam tricks को गहराई से सोचने पर अगर उदहारण के जरिये समझे तो मान लीजिये आप मेंटलिस्ट के सामने जाते है वो आपसे पूछता है की आपने कल सुबह क्या खाया था सोच लीजिये जब आप सोचते है तो आपके मनोभाव को पढ़ने के साथ साथ वो ये कोशिश करता है की वो आपको मिस-गाइड कर सके या अपनी बातो में उलझा सके.

अब वो बाते करते करते ये दिखावा करता है की वो आपके दिमाग को पढ़ रहा है और साथ ही साथ ऐसे शो करता है की आपने शायद ये खाया था नहीं नहीं ये खाया होगा तब आप के मन में फिर से वही चीज घूमने लगती है जो आपने कल सुबह खाई थी.

ये सब mentalisam tricks का एक हिस्सा होता है.

जब वो बोलता है तब आपकी आंखे उसके कण्ट्रोल में होती है उसकी नजर आपके लिप्स की हरकतों पर और वो गेस करते करते आपके मन की ही बात को आपको बता देता है.

शब्दों के जाल में फंसने के बाद आपके होंठ खुद-ब-खुद वो शब्द बुदबुदाने लगते है जो आपके मन में है. ऐसा इसलिए क्यों की आपको लगता है की ऐसा कर आप अपने विश्वास को बढ़ा रहे है लेकिन वास्तव में मेंटलिस्ट को मौका दे रहे है खुद को पढ़ने का.

top 5 mental-ism trick to do

mentalisam tricks की कला पर आधारित कुछ खेल ऐसे है जिनसे आप अपने दोस्तों को आश्चर्यचकित कर सकते है. Mentalism secret technique में कुछ ट्रिक्स शामिल की गई जिन्हे आप mental-ism tricks for beginner यानि मेन्टलिज़्म के शुरुआती अभ्यास के तौर पर कर सकते है.

Mentalism-Tricks-main

कार्ड रीडिंग ट्रिक्स

सबसे आसान और ज्यादा से ज्यादा की जाने वाली mentalisam tricks जिसे आप दोस्तों के साथ कर सकते है.

mentalisam tricks के इस खेल में आपके माध्यम ताश के पातु में से एक पत्ते का चुनाव करते है और वापस उसे गड्डी के साथ मिला लिया जाता है.

बाद में कुछ देर बाद जब माध्यम को पत्ते दिखाए जाते है तब संभावित कुछ पत्ते उसे दिखाते है और उस दौरान उसके हावभाव को पढ़ कर सही पत्ते को बताया जाता है.

ये ऐसा खेल है जिसे आप अपने हिसाब से भी खेल सकते है.

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मेन्टलिज़्म की कला-नंबर ट्रिक्स

इस mentalisam tricks में आप माध्यम को नंबर की लिमिट में से एक नंबर के चुनाव के लिए कहते है.

जब वो ऐसा सोच लेते है तब उन्हें 2-3 बार उस नंबर को मन ही मन दोहराने के लिए कहते है. ऐसा करने के बाद आप उन्हें कुछ अन्य बातो के जाल में फंसा लेते है जो की सोचे गए वास्तविक नंबर को पकड़ने की ट्रिक में शामिल है.

जब ऐसा होता है तब माध्यम के जुबान पर वो नंबर बार बार आता है और मेंटलिस्ट द्वारा समझ लिया जाता है.

सोच को शब्दों पर उकेरना की ट्रिक्स

ये ऐसी mentalisam tricks है जो शातिर दिमाग वाले के लिए बनी है. इस खेल में आपको सामने वाले पर बहुत गहरी नजर रखनी पड़ती है.

आपके सामने कई नामो से भरी एक लिस्ट होती है जिसमे से किसी एक शब्द का चुनाव माध्यम करता है.

इस खेल में आप उसकी नजर को लिस्ट में से पकड़ कर कुछ हद तक अंदाजा लगा सकते है.

लेकिन वास्तविक शब्द को पकड़ने के लिए आपको माध्यम के मन में उस शब्द से जुड़े विचार पैदा करने पड़ते है.

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सेल फोन कार्ड ट्रिक

क्या किसी सेल फोन से आप माध्यम के सोचे गए कार्ड को पहचान सकते है ?

ज्यादा सोचिये मत ये सिर्फ mentalisam tricks का एक हिस्सा है जिसमे हम ताश के पत्ते में से एक मनपसंद पत्ते का चुनाव माध्यम द्वारा करवाते है.

इसके बाद सेल फोन को पत्ते के पास रख कर सेल द्वारा खेल खेलते है जिसमे माध्यम के हावभाव को पढ़ने के लिए आपको समय मिल जाता है.

इस खेल का राज सिर्फ इतना ही है की पत्ते के चुनाव के वक़्त माध्यम के हावभाव क्या रहते है खासतौर से तब जब वो दोबारा उसके सामने आता है.

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कोल्ड रीडिंग गाइड सबसे मजेदार mentalisam tricks

इस mentalisam tricks में हम लोगो के बिच बोलते बोलते ये शो करते है की हम उनका मस्तिष्क पढ़ रहे है.

लेकिन वास्तव में हम सिर्फ शब्दों के जाल फेंक कर उनके मन में सोची गई बातो को पढ़ने की कोशिश करते है.

जब आप शब्दों का जाल फेंकते है तब माध्यम अपनी सोची गयी बात को मन में दोहराने लगता है और इसी दौरान वो मेंटलिस्ट की पैनी नजर का शिकार बन जाता है.

इन तकनीक खासतौर से mentalisam tricks की कला को समझने के लिए आप Now you see me Hollywood मूवी देखा सकते है जिसमे अच्छे से इस कला को दिखाया गया है.

तो दोस्तों कैसा लगा आपको आज का पोस्ट मेन्टलिज़्म की कला उम्मीद करता हूँ कुछ नया जानने को मिला होगा.

ये पोस्ट ब्लॉग के रीडर की डिमांड पर लिखी गयी है और अगर आप भी चाहते है की आपको सच्ची-प्रेरणा पर आपके मनपसंद आर्टिकल मिले तो हमें मेल करना ना भूले आप कमेंट के माध्यम से भी हमें बता सकते है की आप किस तरह के आर्टिकल चाहते है.

अगर आप मेन्टलिज़्म पर आधारित बुक सर्च कर रहे है तो you can download mentalism pdf book here ये आपको शुरुआती तकनीकी समझने में काफी मदद कर सकती है.

hamjad sadhna के बारे में जुड़ी ये खास जानकारिया आपकी साधना को बना देगी आसान

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hamjad sadhna मन की साधना है या तंत्र मंत्र की ? क्या हमारा मन साधनाओ और सिद्धियों का जनक है ? ऐसे कई सवाल आपके मन में कभी न कभी आये होंगे.

साधना के क्षेत्र में जब हम आगे बढ़ते है तब हमें कुछ  ऐसी साधनाओ का ज्ञान मिलता है जो हमारे अंदर की होती है.

साधनाओ द्वारा मन की शक्तियों को उभारा जाता है. हम सभी जानते है की हमारे मन की शक्ति असीमित है और इससे भी असीमित है उन्हें जाग्रत करना. ऐसा माना जाता है की सभी साधनाये इंसानी मन से जुड़ी है उसकी जैसी वृति होती है वो उन्ही साधनाओ में आगे बढ़ता है.

जैसे उग्र स्वभाव वाला तामसिक और तांत्रिक साधनाओ में तथा सात्विक विचार वाला अच्छी साधनाओ में. chaya purush darshan कैसे कर सकते है. chaya purush sadhna sidhhi mantra ढूंढ रहे है तो यहाँ आपको saral hamjad sidhhi mantra मिलेगा.

hamjad sadhna

नेट पर या किताबो में पढ़ कर अक्सर हम घर पर कुछ ऐसी साधनाओ को करने लगते है जिसकी पूरी जानकारी किताबो में या नेट पर नहीं है. क्यों की जिनके अनुभव है वो इन सबसे दूर भलाई या स्वार्थ सिद्ध करने में लगे रहते है.

अगर आप तंत्र और मंत्र की साधनाओ में आगे बढ़ना चाहते है तो सही गुरु का चुनाव जरूर कर ले ताकि अगर आप साधना में कोई गलती भी करे तो वो आपको उस स्थिति से निकाल ले.

हमारी आज की पोस्ट ऐसी ही एक साधना के बारे में है जिसे हमजाद या परछाई साधना कहते है.

ये पोस्ट बहुत से लोगो के सहयोग से तैयार हुई है और इसमें विधि के साथ साथ अनुभव भी है. जिससे आप सुनिश्चित कर सके की आपको ये साधना करनी चाहिए या नहीं.

hamjad sadhna amal in hindi

hamjad sadhna का amal अलौकिक और दैवीय है या शैतानी ये आपके मन में तब आता है जब आप इसके बारे में लोगो से सुनते है.

दरअसल हमजाद साधना आपकी परछाई या फिर आपके अंतर की ऊर्जा का ही रूप है.

अगर आप अवचेतन मन के बारे में सामान्य से थोड़ा बहुत भी ज्यादा जानते है तो आप इस तथ्य को नकार नहीं सकते की

हमारा अवचेतन मन इतना शक्तिशाली है की ये हर उस कल्पना या विचार को हकीकत में बदल सकता है जो आप सोच सकता है. बशर्ते इसके काम करने का सही तरीका आपने जान लिया हो.

ये बात सही भी है क्यों की हमारी परछाई या हमारी अंतर ऊर्जा जो लगभग निष्क्रिय होती है एक सामान्य इंसान के जीवनकाल में तो उसमे भला इतनी शक्ति कहा से की वो असंभव को भी पूरा कर दे.

chaya purush sidhhi sadhna का मूल

हमारे अंतर की ऊर्जा जो सकारात्मक या नकारात्मक दोनों हो सकती है को जब हम अपनी परछाई से जोड़ देते है तो वो भी सजीव जैसा बर्ताव कर सकती है.

सुनने में अजीब जरूर लगेगा पर ये सच है. आइये जानते है hamjad sadhna / shadow person / हमजाद साधना का मूल क्या है.

hamjad sadhna का मूल आपकी ऊर्जा और आपकी परछाई या छाया है. जब हम अपने विचारो की शक्ति से अपनी परछाई में विश्वास करने लगते है तो वो भी सजीव हो जाती है.

ऐसे लोग जो अपना ज्यादातर वक़्त एकांत और अलग थलग बिताते है वो खुद से बड़बड़ाते हुए दिखाई देते है.

लेकिन आप ये विश्वास नहीं कर पाओगे की उनकी परछाई या उनका अंतर कई बार उन्हें प्रतुत्तर भी देता है. ये सभी के साथ नहीं होता है.

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hamjad sadhna kaise ki jati h?

hamjad sadhna हमारे अंतर / छाया को सिद्ध करने का नाम है इसके लिए हमारे पास 2 माध्यम है.

  • पहला दूसरी दुनिया का द्वार यानि आईना / दर्पण
  • दूसरा दीपक या मोमबत्ती

इन 2 माध्यम से आप अपनी परछाई को सिद्ध कर सकते है.

आईना इतना बड़ा होना चाहिए की हमारा पूरा शरीर उसमे दिखाई दे हालाँकि कई लोगो का मानना है की सिर्फ चेहरे तक का आईना भी सही काम करता है फिर भी जो आपकी सुवीधा हो आप ले सकते है.

स्थान और समय का चुनाव

hamjad sadhna के लिए आपको ऐसे कमरे की जरुरत है जहा पर और कुछ भी सामान ना हो और सामान्य रूप से सफ़ेद या आसमानी रंग किया हुआ हो.

साथ ही उस कमरे का दूसरे कामो के लिए इस्तेमाल न हो और कोई भी साधना के दौरान उस कमरे में ना जाए आपके अलावा इस बात का खासतौर से ध्यान रखे क्यों की हर इंसान की ऊर्जा उस जगह फैलने लगती है और आपकी ऊर्जा को साधने में वक़्त लग सकता है.

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hamjad sadhna with mirror

एक साफ कमरे में दर्पण लगवा दे जिसमे दक्षिण की ओर चेहरा रहे आपका. इसके बाद रात्रि के 10 के बाद या सुबह 5 बजे से पहले आप आसन लगा ले और दर्पण की और देखते रहे आपको कुछ नहीं करना है बस उसे ( आपके चेहरे को ) देखते रहना है हालाँकि कुछ लोग मंत्र जाप की सलाह भी देते है.

shadow people

और कुछ लोग भावना की क्यों की ये साधना और दर्पण साधना ज्यादा अलग नहीं है. आप चाहे तो मंत्र जाप भी कर सकते है जैसा की एक वेब Unseen hari  पर दिया हुआ है. या फिर सामान्य रूप से ये भावना दे की

 “मेरी परछाई जाग्रत हो रही है और मेरी ऊर्जा उसमे समाहित हो रही है.”

इस अभ्यास में कुछ समय के बाद आपको सिर्फ ऊर्जा स्वरूप दिखाई देने लगता है और जैसा की दर्पण त्राटक में होता है डरावने द्रश्य भी दिखाई दे सकते है सब आपके अंतर के जाग्रत होने की निशानी है.

इसमें जब आपके विचार अनुसार दर्पण में चमकीली ऊर्जा में बदलाव या हरकत हो तो समझ ले की आप सफल है.

ऐसा भी माना जाता है की जिस व्यक्ति की जैसी ऊर्जा होती है सात्विक और तामसिक दर्पण में उसे वैसी ही ऊर्जा दिखाई देती है.

Hamzad sadhna with candle or lamp

इस अभ्यास में आपको दीपक त्राटक की तरह ही रखना है एकांत कमरे में दीपक या मोमबती जला ले और उसकी तरफ पीठ कर बैठ जाए. कमरे में एक तरफ दीपक हो और दूसरी और दीवार पर आपकी परछाई.

आपको दीपक से इतनी ही दूरी बनानी चाहिए जितने में की आपकी परछाई आपके बराबर रहे ना आपसे बड़ी न छोटी.

आपको सिर्फ उस परछाई के ऊपर फोकस होना है और मन में प्रबल भावना बनानी है की आपकी परछाई सजीव हो रही है. मंत्र जप और भावना दोनों ही माध्यम है. और ऊपर के विधान जैसा ही इसका अभ्यास है.

जब आपको अभ्यास करते हुए 10 दिन से ऊपर हो जाते है तो आप अपनी परछाई में शुरुआत में हरकत महसूस करेंगे फिर उसका बड़ा छोटा होना और अंत में उसका विचरण और गायब होना.

ये अनुभव डरावना भी हो सकता है. अगर अपने इसकी पूरी विधि पढ़े बिना और गुरु के बगैर करने की कोशिश की तो आपको नुकसान होने की सम्भावना बढ़ जाती है.

इसके लिए आपको निचे कुछ सच्चे अनुभव भी दिए गए है जिसके बाद आप इसे करने से पहले सोचेंगे जरूर.

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Hamzad sadhna real story and experience

बात करते है hamjad sadhna के कुछ वास्तविक अनुभव की हालाँकि ये अनुभव पूर्ण नहीं है. किसी कारणवश इन्हें बिच में रोकना पड़ा जिसकी वजह थी अधूरा ज्ञान और गुरु का अभाव. जिससे हमजाद जाग्रत तो हुआ पर कण्ट्रोल से बाहर रहा.

यहाँ जिन अनुभव के बारे में बात करने जा रहे है वो मेरे शुरुआती समय की साधनाओ में से एक है और एक अन्य अनुभव किसी और जगह का है. इन अनुभव को यहाँ शेयर करने का सिर्फ इतना ही मकसद है की आपको कुछ जानने को मिले.

कृपया दूसरो के अनुभव से खुद को कभी भी जोड़ कर न देखे ये आपकी साधना के पथ को प्रभावित कर सकता है.

मेरा वास्तविक अनुभव

दोस्तों मेने यह साधना त्राटक के अभ्यास के बिच में की थी. जिसमे मेने दीपक / मोमबत्ती का चुनाव किया था. मेने ये साधना 2 सप्ताह तक की थी. जिसमे मुझे हमजाद या यू कहे की मेरी परछाई में कम्पन और साइज के बढ़ने घटने का अनुभव हुआ.

ये सब भय का संचार करने लग गया था और रात्रि में जिस कमरे में ये अभ्यास किया वहां नकारात्मक ऊर्जा पहले से वास कर रही थी.

इसका पता मुझे गणेश पूजन पर पता चला. मेने इससे आगे ये अभ्यास नहीं किया. त्राटक और देव पूजन के नियमित क्रिया से मेने इसके बाद कुछ भी गलत अनुभव नहीं किया.

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परछाई साधना का अन्य अनुभव

hamjad sadhna का ये अनुभव भी मेरे वास्तविक अनुभव जैसा ही उन्होंने भी इसे इसी तरह ही किया. फिर कुछ दिन बाद जब वो हनुमान मंदिर में पूजन के लिए गए तो आरती के दौरान बैचेनी महसूस करने लग गए जैसे कोई उनके अंदर मचल रहा है.

ये असर पूजन तक रहा और फिर जब आरती समाप्त हुई वो सामान्य हो गए. बाद में पता चला की ये उनके अंदर का हमजाद था जो उन्हें भयभीत कर रहा था.

काफी पूजन और अभ्यास के बाद उन्हें इससे छुटकारा मिला.

एक बात दोनों में कॉमन है और वो ये की hamjad sadhna / हमजाद साधना भयभीत करने वाली होती है.

खासतौर से तब जब इसे अधूरा छोड़ दिया जाये. कुछ का मानना है की ये नकारात्मक ऊर्जा से भरी होती है. इसलिए इससे बचना चाहिए.

hamjad sadhna करना सही या गलत

हमजाद साधना किस लिए की जाती है ये बहुत मायने रखता है अगर आप अपनी ही ऊर्जा को गलत कामो में या स्वार्थ सिद्धि के लिए इस्तेमाल करते है तो आपका ही नुकसान होता है. इसलिए स्वार्थ के चलते इसकी सिद्धि न करे और गुरु का चुनाव कर उनसे आज्ञा और दीक्षा लेकर इसकी शुरुआत करे परिणाम और सफलता अच्छी मिलेगी.

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hamjad sadhna benefit

  • हमारा मन बहुत शक्तिशाली है और इसकी शक्ति असीमित इसलिए हमजाद के लिए कुछ भी असंभव नहीं.
  • ज्यादातर आपके शत्रु पर वशीकरण, डराने और भय के लिए इसका प्रयोग किया जाता है.
  • मन की बात जानने के लिए.

आपकी इच्छाओ और वासनाओ की पूर्ति के लिए इसका यूज़ किया जाता है. हालाँकि कुछ लोग भलाई के काम भी करते है पर ज्यादातर तामसिक प्रवृति के लोग इसका गलत इस्तेमाल करते है.

दोस्तों आज की पोस्ट में हमने साधना के कुछ प्रभावो को बताने की कोशिश की है अगर इस साधना को लेकर आपके मन में भी कोई सवाल है या फिर कोई अनुभव तो आप यह कमेंट बॉक्स में जरूर रखे ताकि दूसरे लोगो को कुछ सिखने को मिले.

आगे की पोस्ट में हम आपको मानस सिद्धि यानि मानसिक ऊर्जा से मानस रूप का निर्माण करना जिसे उच्च साधना में कृत्या के नाम से जाना जाता है, पर चर्चा करेंगे.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र साधना सिद्धि विधान जो एक दिवस में सिद्ध होती है 5 Powerful Effect

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Nabhi Darshana Apsara Sadhana in Hindi नाभि दर्शना अप्सरा साधना बेहद आसान है. इसलिए इसे करने के लिए अधिकतर लोग लालायित रहते हैं. आपने कई ऐसी नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र सिद्धि के बारे सुना होगा जो आसानी से सिद्ध हो जाती है और साधक की हर इच्छा को पूरा करती है.

मुख्य रूप से इस तरह की साधना का उदेश्य समृद्धि और यश पाना होता है.

नाभि दर्शना अप्सरा साधना पूर्ण विधि काफी आसान भी होती है और लम्बे समय तक चलने वाली साधना भी ये आप पर निर्भर है की आप कौनसी साधना करना चाहते है. अप्सरा सिद्धि के बाद कभी भी प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देती है. ये आपको अपने होने का अहसास करवाती है.

आप नाभि दर्शना अप्सरा की साधना के पूर्ण होने के बाद अप्सरा का अहसास अपने आसपास कर सकते है क्यों की ये जहाँ भी होती है वहां का माहौल सुगंधमय हो जाता है.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र की साधना के दौरान सबसे बड़ी मुश्किल होती है नाभि दर्शना अप्सरा यंत्र की स्थापना की अगर नाभि दर्शना अप्सरा यंत्र आपके पास ना हो तो आप अष्टदल पद्म के ऊपर चावल की ढेरी बनाकर उसके ऊपर सुपारी रखकर उस शक्ति का आवाहन कर सकते हैं.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र

नाभि दर्शना अप्सरा मंत्र में 21 माला का विधान है. एक दिवसीय साधना होने की वजह से ये साधना जितनी आसान लगती है उससे कही ज्यादा खतरनाक इसके दुष्प्रभाव है. अप्सरा साधना के बाद साधक को जो अलौकिक रहस्यों की समझ होती है वो उसके Third eye activation की वजह से होती है.

पारलौकिक जगत के रहस्य को देखने के बाद साधक मानसिक संतुलन रख पाता है या नहीं ये उसके मस्तिष्क की स्थिरता पर निर्भर करता है. अगर आप इस तरह की साधना कर रहे है तो सावधान रहे क्यों की आसान दिखने वाली साधनाओ के अपने खतरे होते है.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र

एक शब्द में कहे तो ये एक दिवसीय साधना है और जो साधक ये साधना कर लेता है उसे सुख, यौवन की प्राप्ति हो जाती है. जब कोई साधक शुरुआती स्तर पर होता है और उसे अप्सरा सिद्धि हो जाती है तो वो अपना जीवन खुशियों से भर सकता है.

अप्सरा साधना सिद्धि बेहद आसान है लेकिन, ये साधक के स्थिर चित पर निर्भर करती है की उसे अप्सरा की प्राप्ति होती है या नहीं.

ऐसा माना जाता है की अप्सरा साधना करने के बाद साधक का जीवन वासना से परे हो जाता है और वो भोग से ऊपर उठकर साधना में आगे बढ़ना शुरू कर देता है. यहाँ शेयर किया गया नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र एक दिवसीय साधना का भाग है.

अगर आप अप्सरा साधना विधि विधान के साथ पूरा करना चाहते है तो इस साधना से शरूआत करे. आपको अलौकिक रहस्यों के अनुभव भी होंगे और साधना मार्ग में आगे बढ़ने का मौका भी मिलेगा.

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कौन हैं अप्सरा?

अप्सराओं की उत्पत्ति के सम्बन्ध में यह निश्‍चित तथ्य है कि समुद्र-मंथन में पहले रम्भा अप्सरा की उत्पत्ति हुई, और उसके पश्‍चात् अमृत घट और तत्काल पश्‍चात् भगवती लक्ष्मी प्रकट हुईं, इसलिए अप्सराओं का महत्व अन्य रत्नों की अपेक्षा अत्यधिक है.

रूप, रस और जल तत्व प्रधान होने के कारण ही इनका नाम अप्सरा पड़ा और इनके गुण देवताओं के गुणों के समान ही पूर्ण रूप से प्रभावशाली हैं.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र की साधना को पूरा करने वाले साधक में अलौकिक रहस्यों को समझने की समझ आ जाती है.

ये भी कहा जाता है कि इन्द्र ने 108 ॠचाओं की रचना करके इन अप्सराओं को प्रकट किया.

रम्भा के अलावा जिन अन्य अप्सराओं का वेदों और पुराणों में जिक्र आता है, उनके नाम हैं उर्वशी, मेनका, और तिलोत्तमा. नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र की उत्पति भी इसी समय हुई थी.

साधना-पथ में साधक अपने मन पर नियंत्रण चाहता है जिससे कि वह अपने अंतर्मन में उतर कर मनन कर सके, पर मन में तो कामनाएं बसती हैं और वे मूलतः प्रेम-जनित होती हैं. अब हृदय अर्थात् उर में जो बस जाती है, उसे उर्वशी कहते हैं और उर्वशी तो हम सबके मन में है.

उर्वशी-जनित भाव के कारण ही तो प्रेम की तरंगें मन में उठती हैं और प्रीत में किसी प्रकार की बंदिश नहीं होती.

शरद पूर्णिमा की रात जब आसमान से चांदनी की शीतल किरणें भी प्रेम में संतप्त युगलों को दग्ध कर देती हैं, उस रात्रि में नाभि दर्शना अप्सरा साधकों के आह्वान पर सुरपुर से धरती पर आती है.

ब्रह्म साधना से भी आवश्यक और उसे करने से पूर्व अप्सरा साधना साधक को करनी चाहिए.

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नाभि दर्शना अप्सरा की साधना

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र को सिद्ध करने के पीछे कई रहस्य है. सौन्दर्य की साक्षात् प्रतिमूर्ति, वय में षोडशी और कोमलता से लबालब कमनीय शरीर जो अपने यौवन से इतराया और प्रेम से सिंचित है. प्रतिपल भीनी खुशबू में नहाया तन नाभि-दर्शना के आने की सूचना देता है.

इस अप्सरा की काली और लम्बी आंखें, लहराते हुए झरने की तरह केश और चन्द्रमा की तरह मुस्कुराता हुआ चेहरा, कमल नाल की तरह लम्बी बांहें और सुन्दरता से लिपटा हुआ पूरा शरीर एक अजीब सी मादकता बिखेर देता है.

इन्हें इन्द्र का वरदान प्राप्त है कि जो इसके सम्पर्क में आता है, वह पुरुष पूर्ण रूप से रोगों से मुक्त होकर चिर यौवनमय बन जाता है, उनके शरीर का कायाकल्प हो जाता है, और पौरुष की दृष्टि से वह अत्यन्त प्रभावशाली बन जाता है.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र साधना विधान

  • इस साधना को आप शरद पूर्णिमा, रमा एकादशी, रूप चतुर्दशी अथवा किसी भी शुक्रवार को सम्पन्न करें.
  • यह रात्रिकालीन साधना है, इस साधना को रात्रि में 10 बजे के पश्‍चात् सम्पन्न करना चाहिये.
  • नाभिअप्सरा साधना साधक अपने घर में या किसी भी अन्य स्थान पर एकांत में सम्पन्न कर सकता है.
  • इस साधना में बैठने से पूर्व साधक स्नान कर सुन्दर, सुसज्जित वस्त्र पहनें एवं अपने वस्त्रों पर सुगन्धित इत्र का छिड़काव करें.
  • साधक उत्तर दिशा की ओर मुंह कर आसन पर बैठें.
  • इस साधना में सुगन्धित पुष्पों का प्रयोग करना चाहिये. साधक साधना से पहले ही दो सुगन्धित पुष्पों की माला की व्यवस्था कर लें.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र की शुरुआत में सर्वप्रथम अपने सामने लकड़ी के बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर गुरुचित्र स्थापित कर, पंचोपचार गुरु पूजन सम्पन्न करें. गुरुदेव से साधना में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त कर, मूल साधना सम्पन्न करें

बाजोट पर एक ताम्र पात्र में अद्वितीय ‘नाभि दर्शना महायंत्र’ को स्थापित करें. केशर से यंत्र पर तिलक कर यंत्र का सुगन्धित पुष्पों, इत्र, कुंकुम इत्यादि से पूजन करें. यंत्र के सामने सुगन्धित अगरबत्ती एवं शुद्ध घृत का दीपक लगावें.

इसके बाद हाथ में जल लेकर संकल्प करें, कि मैं अमुक नाम, अमुक पिता का पुत्र, अमुक गौत्र का साधक नाभि दर्शना अप्सरा को प्रेमिका रूप में सिद्ध करना चाहता हूं, जिससे कि वह जीवन भर मेरे वश में रहे, और मुझे प्रेमिका की तरह सुख आनन्द एवं ऐश्‍वर्य प्रदान करे.

इसके बाद ‘नाभि दर्शना अप्सरा माला’ से नाभि दर्शना अप्सरा मंत्र जप सम्पन्न करें, इसमें 21 माला नाभि दर्शना अप्सरा मंत्र जप उसी रात्रि को सम्पन्न हो जाना चाहिए.

॥ ॐ ऐं श्रीं नाभिदर्शना अप्सरा प्रत्यक्षं श्रीं ऐं फट्॥

अगर बीच में घुंघरूओं की आवाज आवे या किसी का स्पर्श हो, तो साधक विचलित न हों और अपना ध्यान न हटावें, अपितु 21 माला मंत्र जप एकाग्रचित्त होकर सम्पन्न करें, इस साधना में जितनी ही ज्यादा एकाग्रता होगी, उतनी ही ज्यादा सफलता मिलेगी.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र के 21 माला मंत्र जप पूरी एकाग्रता के साथ सम्पन्न करने के पश्‍चात् अप्सरा माला को साधक स्वयं के गले में डाल दें. तथा सुगन्धित पुष्पों की एक माला को यंत्र पर चढ़ा दे तथा दूसरी माला भी स्वयं के गले में डाल दें.

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साधना में सिद्धि के संकेत

मंत्र जप की पूर्णता पर साधक को यह आभास या प्रत्य होने लगता है कि अप्सरा घुटने से घुटना सटाकर बैठी है.

जब साधक को यह आभास या प्रत्य हो जाएं तो साधक नाभि दर्शना अप्सरा से वचन ले लें कि मैं जब भी अप्सरा माला से एक मंत्र जप करूं, तब तुम्हें मेरे सामने उपस्थित होना है.

नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र के दौरान मैं जो चाहूं वह मुझे प्राप्त होना चाहिए, पूरे जीवन भर मेरी आज्ञा का उल्लंघन न हो.

तब नाभि दर्शना अप्सरा साधक के हाथ पर अपना हाथ रखकर वचन देती है, कि मैं जीवन भर आपकी इच्छानुसार कार्य करती रहूंगी.

तब इस साधना को पूर्ण समझें, और साधक अप्सरा के जाने के बाद अपने साधना स्थल से उठ खड़ा हो.

साधक को चाहिए कि वह इस घटना को केवल अपने गुरु के अलावा और किसी के सामने स्पष्ट न करें, क्योंकि साधना ग्रन्थों में ऐसा ही स्पष्ट उल्लेख आया है.

साधना सम्पन्न होने पर नाभि दर्शना अप्सरा महायंत्र को अपने घर में किसी गोपनीय स्थान पर रख दें, जो गले में अप्सरा माला पहनी हुई है, वह भी अपने घर में गुप्त स्थान पर रख दें, जिससे कि कोई दूसरा उसका उपयोग न कर सके.

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नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र में सफलता के बाद जब भी नाभिदर्शना अप्सरा को बुलाने की इच्छा हो, तब इस महायंत्र के सामने अप्सरा माला से उपरोक्त मंत्र की एक माला जप कर लें. अभ्यास होने के बाद तो यंत्र या माला की आवश्यकता भी नहीं होती, केवल मात्र सौ बार मंत्र उच्चारण करने पर ही प्रत्य प्रकट हो जाती हैं.

नाभि दर्शना अप्सरा साधना मंत्र को स्त्रियां भी सिद्ध कर सकती हैं, नाभि दर्शना अप्सरा के रूप में उन्हें अभिन्न सखी प्राप्त हो जाती है, और उस सखी के साहचर्य से साधिका के शरीर का भी कायाकल्प हो जाता है, और ऐसी साधिका अत्यन्त सुन्दर, यौवनमय और सम्मोहक बन जाती हैं.

वास्तव में ही यह साधना बालक या वृद्ध किसी भी वर्ण या जाति का व्यक्ति या स्त्री सम्पन्न कर सकते हैं, और यदि विश्‍वास एवं श्रद्धा के साथ इस साधना को सम्पन्न करें, तो अवश्य ही पूर्ण सफलता मिलती है.

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नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र साधना सिद्धि विधान अंतिम शब्द

अगर आप अप्सरा साधना में रूचि रखते है तो आपको सबसे आसान और एक दिवसीय नाभि दर्शना अप्सरा शाबर मंत्र की साधना के विधान को जरुर पूरा करना चाहिए. कलयुग में जहाँ सात्विक साधना को सिद्ध करना बेहद मुश्किल है वही अप्सरा और यक्षिणी साधना को सिद्ध करना बेहद आसान है.

ये दोनों ही शक्तियां पृथ्वी के वायुमंडल में सबसे करीब है. अगर आप नाभि दर्शना अप्सरा साधना पूर्ण विधि को फॉलो करे तो आपको अप्सरा सिद्धि हो सकती है. ध्यान रहे की गुरु के बगैर ये साधना कर रहे है तो अपने विवेक और चित को स्थिर रखे.

कई बार हम जोश जोश में साधना की शुरुआत तो कर लेते है लेकिन, आगे बढ़ने पर जैसे ही हमें अलौकिक रहस्यों के दर्शन होने लगते है हम अपना विवेक खो देते है. ऐसे में ये साधना खतरनाक हो सकती है.