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Tuesday, May 26, 2026
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क्या आप जानते है सोने और स्वपन के पीछे का मनोवैज्ञानिक सच

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क्या आप जानते है की सपनो का मनोवैज्ञानिक सच क्या है ? सोने के पीछे का मनोवैज्ञानिक सच हमें बताता है की हमारा मस्तिष्क जो लगातार काम करता रहता है उसे हम सोने के बाद सपनो द्वारा आराम दे सकते है।

सपने हमारे मस्तिष्क को मानसिक रूप से ओवरलोड होने से बचाते है।  आपके अवचेतन मन को पूरा वक़्त मिल जाता है की वो पीछे छूट गई यादो को सहेज ले जो आपके चेतनमन से धुंधली होने लगती है। बशर्ते आप हर रोज 8 घंटे की नींद लेते हो।

सपनो का मनोवैज्ञानिक सच

हमें हमारे ज्यादातर सपने याद नहीं होते है क्यों की हमारा चेतन मन हमें एक मीठा सा ख्वाब का अहसास दिला कर उसे याद करने पर ज्यादा फाॅर्स नहीं करने देता है। लेकिन क्या आप जानते है की आपके सपनो में कई बार आपकी समस्याओ के हल भी छुपे हुए होते है।

मान लीजिये अपने आज कोई सपना देखा है कल सुबह आप भूल भी जाते है लेकिन क्या आपका अवचेतन मन उसे भूलता है ? नहीं ! नजदीकी भविष्य में आपके साथ कोई घटना होती है तो ठीक उसी वक़्त आपको आभास होता है की इस घटना को पहले भी देख चुके है।

सपनो का मनोवैज्ञानिक सच

सपने हमारी इच्छाओ का प्रतिक है। हमारा मन क्या सोचता है ये हम सपनो द्वारा महसूस कर सकते है। अगर हमारी किसी भी चीज पर आकर्षण बहुत ज्यादा है तो हम अपने सपने में वो सब करते है जो हम असल जिंदगी में पाना चाहते है।

सपने हमारी इच्छाओ को पूरा करने का माध्यम है। असल जिंदगी में हम भले ही किसी चीज को जिस पर हमारा दिल आ जाता है हासिल नहीं कर पाएंगे मगर आपके सपने में आप जब चाहे अपनी इच्छा पूरी कर सकते है। जैसे की

आपकी तीव्र इच्छा होती है सुपर पावर हासिल करने की और असल जिंदगी में आपके सामने इतनी कठिनाई आती है की आप कभी आगे नहीं बढ़ते है। लेकिन जब भी आप सोते है तो आप सपनो में खुद को इच्छाशक्ति के साथ अभ्यास करते हुए देखते है, धीरे धीरे आप आसानी से सुपर पावर हासिल कर लेते है।

ऐसे में अगर मुश्किल भी होती है तब भी आप उसका डट कर सामना कर लेते है। आखिरकार आप अपने सपने के हीरो जो है।

चेतन मन का प्रलोभन भुला देता है झलकियों को

कुछ लोग इस बात पर गौर नहीं करते है तो कुछ लोग इसे इत्तेफाक समझ कर भूल जाते है। लेकिन आपको बता दू की आपका अवचेतन मन हर सपने को स्टोर कर सकता है।

लेकिन इसके लिए आपको एक लंबी प्रोसेस से गुजरना पड़ता है। चेतन से अवचेतन की ओर झुकना पड़ता है। भविष्य की झलकियों को पकड़ना भी हो सकता है सपनो का मनोवैज्ञानिक सच।

जब हम अपनी जिंदगी में हर तरफ से संतुष्ट होते है तब हमें ज्यादातर अच्छे सपने महसूस होते है जो हमारे उन्माद की निशानी होती है।

इसका उदहारण देखे तो जब आप कुछ नयी चीज लेते है तो उस रात्रि को आप सिर्फ उसी चीज का सपना लेते है। ये आपके चीज को लेने से पहले की रात्रि में भी हो सकता है। ये सब होता है law of attraction की वजह से जिसके बारे हम पहले भी बात कर चुके है।

सपने है हमारी चेतना के प्रतिक :

ज्यादातर लोग मानते है की सपने हमारे चेतन मन की क्रियाओ के परिणाम है। हम क्या सोचते है, क्या ग्रहण करते है या फिर क्या पाते है सब हम दोबारा सपनो में महसूस करते है। इसलिए अगर कहे की :

सपने हमारी इच्छाओ और आकांक्षाओ के प्रतिक है।

तो कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।

सपनो का मनोवैज्ञानिक सच सपनो का बुरा पहलू

हमारे सपने भी हमारी चेतना में आये बदलावों से प्रभावित होते रहते है। जैसे की अनचाहे सपनो का आना। ऐसा तब होता है जब आप अपनों की सुरक्षा को लेकर बहुत ज्यादा सोचने लगते है। ऐसे में जब जब आप बहुत ज्यादा सोचते है तो आपको ऐसे अनचाहे सपने आते ही है जिसमे आप अपनों को खोता हुआ देखते है।

या फिर जब आप एग्जाम के लिए बहुत ज्यादा चिंतित होते है तो अपने सपनो में आप खुद को एग्जाम देने में मुश्किलो का सामना करते हुए देखते है।

इसे उदाहरण से समझे जैसे की सुबह लेट उठना, फिर बस का निकल जाना, ऑटो पकड़ना तब याद आता है की आपका परमिशन लेटर तो पीछे ही रह गया, एग्जाम हॉल में लेट होते है और अंत में आप बहुत कम प्रश्न ही हल कर पाते है क्यों की लेट होने की वजह से आपको सही सोचने का वक़्त नहीं मिला।

ऐसा क्यों ?

सपनो का मनोवैज्ञानिक सच हमें ये भी बताता है की जब हम किसी को लेकर ज्यादा सोचने लगते है तब हमारे मन में सबसे ज्यादा मतभेद चलने लगता है।

ऐसे में अगर आप और ज्यादा सोचते रहते है तो धीरे धीरे आपके मन में वो नकारात्मक विचार घर करने लगते है जो आपको हर कदम पर नकारात्मक सोचने पर मजबूर कर दे।

मेरे साथ हर एग्जाम से पहले ऐसा होता है इसलिए में अपने सभी सामान को एक जगह पहली रात्रि को सहेज कर रखता था और फिर सोता था। असल जिंदगी में ऐसा कभी नहीं होता है।

अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो समझ लीजिये की आपको अपनी समस्या का परफेक्ट समाधान नहीं मिला है। आपका अवचेतन मन आपको जीवन के हर मोड़ पर इशारे देता है ताकि आप अपनी कमियों को दूर कर सके।

जैसे की आपको सपने में जो परेशानी दिखाई देती है। सुबह उठ कर आप उनसे पहले ही बच सकते है सही तैयारी के साथ।

पढ़े  : भगवान महादेव का शक्तिशाली त्रिनेत्र खोलने का मंत्र और साधना का विधान

हमारे सपने और law or attraction :

अगर आप का मन स्थिर है, शांत है, और आपकी इच्छाए आपके नियंत्रण में है तो आपको अच्छे सपने ही आएंगे। जब ऐसा हो तो समझ लीजिये की आपका अवचेतन मन सही से काम कर रहा है। सकारात्मक सपनो का अर्थ है की आप अपने जीवन में सही राह पर चल रहे है।

दोस्तों आज की पोस्ट सपनो का मनोवैज्ञानिक सच सच्चाई को लेकर बनाई गई है। हो सकता है आपके कई विचार पोस्ट में कही गई बातो से मिलते है इसलिए आप भी अपने सपनो को समझ कर अपनी समस्याओ से समाधान पा सकते है।

आज की पोस्ट आपको कैसी लगी हमें जरूर बताये साथ ही हमें सब्सक्राइब भी करे ताकि हमारे नए नए विडियो और पोस्ट से आप अपडेट रहे।

Subconscious Emotions and How to Deal with Them 2021 Hindi Guide

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Subconscious Emotions वे खास message होते है जो Subconscious mind से डिलीवर होते है और इनका productive behavior में एक अहम् role होता है.

आपको ये जान कर हैरानी हो सकती है की ये आपके Subconscious mind की ability or confidence होती है जिसकी वजह से आप कुछ भी कर पाते है. हम जो भी काम करते है उसके लिए पहले हमें उस काम को सीखना होता है.

हमारे subconscious mind programing के लिए couple of suggestions किस तरह रेडी किया जाता है आइये जानते है.

इस पोस्ट में हम Subconscious Emotions के बारे में बात करने वाले है. आपने देखा होगा की विपरीत परिस्थिति में होने के बावजूद हम कभी कभी ऐसी एक्टिविटी कर देते है जो किसी मैजिक से कम नहीं होती है.

कई बार किये गए हमारे unsuccessful conscious efforts के बावजूद अगर काम नहीं बन रहा है तो हमें अपने brain को Calm कर गहरी साँस लेनी है. शांत मन होगा तो solution आपको खुद ढूंढे ऐसी स्थिति बनती है.

Subconscious Emotions and How to Deal with Them

ऐसी स्थिति में जब आप किसी भी solution के लिए ओपन हो जाते है तो आपका Subconscious mind खुद आपको solution provide करने लगता है.

आप अपने अवचेतन मन को program कर सकते है जैसे की सुबह 5 बजे का अलार्म लगाकर सोने की तैयारी करे और साथ ही अपने subconscious mind को कहे की वो आपको 5 मिनट पहले उठा दे. आप देखेंगे की कुछ दिन बाद ही आप तय समय से 5 मिनट पहले बिना किसी अलार्म के उठने लगे है.

इस तरह की process को confidence in your subconscious mind कहते है यानि की आपका अवचेतन मन के प्रति भरोसा.

जब ऐसा होता है तब आप Subconscious Emotions को trigger कर कुछ भी कर सकते है. इमोशन को आप एक मेसेज की तरह ले की किस तरह feelings of fear, anxiety, frustration, anger, envy, or procrastination with joy, peace, and fulfilment जैसे इमोशन को बदल सकते है.

Subconscious Emotions and How to Deal with Them

Subconscious Emotions आपके subconscious mind के खास message होते है जिन्हें हम किसी स्थिति के दौरान खुद में change लाने के लिए इस्तेमाल कर सकते है.

विपरीत परिस्थिति के दौरान हमारा brain एक खास state में कुछ हार्मोन release करता है जिसकी वजह से बॉडी अपनी लिमिट से भी ऊपर काम करना शुरू कर देती है. हमारे काम करने की क्षमता को इमोशन काफी हद तक कण्ट्रोल करते है.

अवचेतन भावनाए हमारे मस्तिष्क को किसी खास स्थिति के लिए रेडी करने का काम करती है जिन्हें आप निचे दिए गए उदाहरण के जरिये समझ सकते है.

भावना शक्ति का अभ्यास

भावना शक्ति का अभ्यास एक निर्देश को बार बार दोहराना ही है. जब हम विचारो के भंवर में फंस जाते है तब हम समझ नहीं पाते है इससे बाहर कैसे निकले तब भावना शक्ति का प्रयोग कर हम बड़ी से बड़ी बढ़ा को दूर कर सकते है.

भावना शक्ति हमें संयम सिखाती है. हमें शांति का मार्ग प्रदान करती है, इन सबके आलावा ध्यान से बढ़ी हुई शक्ति को संजो कर रखती है.

एक उदहारण : कबड्डी का खेल चल रहा था. खिलाडी जी जान से गोल करने में लगे थे. खेल में जीत की उम्मीद सिर्फ एक खिलाडी के गोल पर थी. तभी उसके अंगूठे पर बॉल आकर लगती है और अंगूठे में चोट लग जाती है.

खून बहने लगता है लेकिन वो खिलाडी अपने गोल में इतना मगन था की उसे ध्यान ही नहीं रहा था. जब गोल पूरा हो गया तब उसका ध्यान अपनी पीड़ा पर आया और वो दर्द इतना तेज था की वो बेहोश हो गया. क्या ये दर्द शुरू से इतना ही रहा था.

जी हा दर्द तो तब भी था बस ध्यान नहीं रहा. क्यों की उसके मन में सिर्फ एक ही Subconscious Emotions थी की उसे बस गोल करना है.

एक दूसरा उदाहरण उस बच्चे का जो कभी स्टेज पर नहीं गया. जब वो पहली बार स्टेज पर जाता है तब उसका मन शंकित रहता है मन विचारो से घिरा रहता है की में ये कर पाउँगा या नहीं. लेकिन जब वो बोलना शुरू होता है तब उसे ऐसा लगता ही नहीं की वो पहली बार बोल रहा है.

ये सब एक चमत्कार जैसा लगता होगा लेकिन ये सब भावना का खेल होता है. आँखे बाद कर सब भूल जाना और सिर्फ एक ही बात याद रखना में ये कर सकता हु. फिर देखिये आप कैसे दुसरो को अपने आकर्षण में लाते है.

भावना शक्ति का सबसे बढ़िया उदाहरण छोटा सा बच्चा है जो खेल खेल में चोटिल होता रहता है.

बच्चा खेलते खेलते गिर जाता है और उसे चोट लग जाती है दर्द भी होता है पर तभी माँ अति है और घाव पर मुह से फूंक मारती है और कहती है की बस ये अभी सही हो जायेगा और कुछ देर बाद बच्चा वापस हंस खेलने लगता है. क्या ये कोई चमत्कार नहीं ये माँ की भावना होती है जिसे बच्चे का अंतर्मन स्वीकार कर लेता है और उसकी भावना काम कर जाती है.

भावना शक्ति का दूसरा नाम है आत्मसुझाव

मेने कुछ दिन पहले की पोस्ट पब्लिश की थी जिसमे आत्मसुझाव का जिक्र किया था.

आत्मसुझाव यानि खुद को सुझाव देना. जब लगातार एक वाक्य दोहराया जाता है तो वो सीधा असर करता है. इसलिए आत्मसुझाव आपके विचारो में बदलाव लाने का सबसे अच्छा माध्यम साबित हो सकता है.

अगर आपको सफर के दौरान तनाव महसूस होने लगता है तो आंखे बंद कर खुद को सुझाव दे की आपका मन शांत हो रहा है. कुछ देर बाद आपका मन शांत हो जाता है.

भावना शक्ति को बनाये कैसे रखे

इस संसार में सबसे तेज क्या है ? क्या ये कोई भौतिक रचना है या फिर मनुष्य की कोई कृति ? सबसे तेज है हमारे मन की गति. इसका ईंधन क्या है हमारा आत्मविश्वास जो हमारे मन को गति प्रदान करता है.

जिसका आत्मविश्वास जितना मजबूत होता है हमारे मन की गति और उसकी वास्तविकता उतनी ही सच्ची होती है. हर वो रचना जो आज अपने भौतिक स्वरूप में है बीते हुए कल की कल्पना है और जो आज की कल्पना है वो कल की रचना होगी.

आत्मविश्वास हमारे मन की ऊर्जा है इससे कोई कम नहीं कर सकता है सिवाय खुद आपके आपका एक नकारात्मक विचार आपके मन में खुद के खिलाफ शंका पैदा कर देता है जिससे आपका आत्मविश्वास गिरने लगता है. इसके साथ ही हमारी इच्छा शक्ति, शंकल्प शक्ति और भावना शक्ति पर भी प्रभाव पड़ता है.

सबसे जरुरी है आपका अपने ऊपर विश्वास आपका अपने ऊपर जितना ज्यादा विश्वास रहता है आपके सफल होने के chance उतने ही ज्यादा होते है, इसलिए अगर सफल होना है तो खुद पर विश्वास बनाये रखे कोई भी एक बार में सफल नहीं होता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की बार बार प्रयत्न करने पर सफल नहीं हो सकता है.

कोशिश करने पर ही सफल हो सकते है, इसमें Subconscious Emotions का योगदान हो सकता है. इसलिए अगर आपको भावना शक्ति को मजबूत करना है तो सबसे पहले शंका और दुसरो के नकारात्मक टिप्पणी से प्रभावित होना बंद करना पड़ेगा.

भावना शक्ति का अभ्यास

भावना शक्ति का अभ्यास सिर्फ आपका ध्यान मजबूत करता है. विचारो के भंवर से निकल कर कर आपको एक विचार पर टिके रहने का सामर्थ्य प्रदान करता है.

  • इसके लिए आप सबसे पहले शरीर को शिथिल करने का प्रयत्न करे जो आप लेट कर और हरकत को बंद कर आसानी से कर सकते है. जब शरीर शिथिल हो जाता है तब मन को शांत करना होता है. मन को शांत करने के लिए मन के विचारो को बंद करना होता है जो एकाएक संभव नहीं है.
  • शुरू में आप सिर्फ एक विचार को सोचे की सिर्फ एक विचार ही आपको बार बार दोहराना है.
  • कुछ समय बाद ही आपके मन सिर्फ वह विचार दोहराया जाता है बाकि विचार नहीं आते है.
  • कुछ देर बाद ऐसा लगता है जैसे आपका शरीर बेजान सा हो गया है और मस्तिष्क एकदम खाली खाली सा.

अब आप इसे अपने शरीर पर आजमाए लेट जाये और शरीर को शिथिल कर ले, मन को शांत करने का प्रयत्न करे ये न कर सकते तो कोई बात नहीं अपने मन में सिर्फ एक ही विचार दोहराये जो आपके शरीर से सम्बधित हो जैसे की आपके शरीर का वो भाग जिस पर भावना दी जा रही है वो उस भावना के अनुसार कार्य करने लगा है.

उदाहरण के लिए अपने भावना दी है की आपके पैर की हरकत बिलकुल बेजान हो रही है कुछ देर ये भावना दे आप महसूस करेंगे की आपके पैर की हरकत बंद हो कर बिलकुल बेजान हो गई है.

भावना शक्ति को और मजबूत करे

भावना शक्ति का अभ्यास करते हुए आप भावना दे कर शिथिल पड़े अपने हाथ को हवा में भावना द्वारा उठाये ये शुरू में मुश्किल जरूर है लेकिन अभ्यास से संभव है. इसके लिए आपको अपने शायरी की हरकत को बंद करना होगा और भावना दे की आपके हाथ हवा में उठ रहा है.

Subconscious Emotions के कुछ ही देर बाद आपके हाथ थोड़ा थोड़ा करके हवा में उठ शुरू हो जाता है.

इस समय आपको सिर्फ भावना को बार बार दोहराना है और ध्यान देना की आप हाथ को उठाने के लिए बल का प्रयोग न करे क्यों की इस वक़्त आपकी चेतना और अवचेतना में निर्देश का आदान प्रदान होता है और दोनों ही अपने अपने भाव से आपके आदेश ग्रहण करते है लेकिन आपको सिर्फ भावना शक्ति का अभ्यास पर ध्यान देना है.

उस वक़्त भावना में कोई व्यवधान या फिर निर्देश के प्रशारण में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए .

ये अभ्यास आपके अंतर्मन को मजबूत बनता है जिससे भावना शक्ति तेजी से और पलो में आपको ध्यान की शक्ति का बोध कराती है. और आप ध्यान में तेजी से उतरने लगते है.

सावधानी
  • भावना शक्ति का अभ्यास आपके मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है.
  • उपरोक्त अभ्यास में आपके मस्तिष्क बहुत जल्दी थकने लगता है इसलिए ज्यादा जोर न दे वर्ना अभ्यास के बाद आपको थकान महसूस होने लगती है.
  • हाथ हवा में उठना एक स्वाभाविक प्रक्रिया होनी चाहिए इसके लिए मानसिक बल न लगाये.

How to train your subconscious mind with emotion

आप अपने अवचेतन मन को किसी भी स्थिति के लिए train कर सकते है बशर्ते आपके अन्दर उसे हासिल करने का confidence होना चाहिए. यहाँ कुछ ऐसे टिप्स है जिन्हें आप फॉलो कर सकते है.

  • आपके अन्दर unchangeable change के लिए will power होनी चाहिए.
  • खुद को सफल बनने के लिए परमिशन दे.
  • आपके आसपास के लोगो के डर को अपने काम के बीच ना आने दे.
  • अपने आसपास के positive reinforcement को बनाए रखने की कोशिश करे.
  • आपकी सफलता आपका भविष्य नहीं वर्तमान होना चाहिए.
  • अपने लिए एक vision space बनाए जहाँ आप खुद को नए नए आईडिया के लिए प्लान करे.
  • अपनी प्रतिरोधक-क्षमता को पहचाने और boundaries को भी ताकि आपको ये मालूम रहे की आपकी क्षमता क्या है.
  • अपनी लाइफ को लेकर एक master plan बनाकर रखे.
  • एक gratitude journal बनाना शुरू कर दे ताकि ये आपको एक खास स्टेट में बनने में मदद करे.
  • ये मालूम होने के बाद भी की आप हासिल नहीं कर सकते खुद से सवाल करे की आपको क्या चाहिए.
  • अपने attachment को release करना शुरू करे.
  • खुद को ऐसे लोगो के साथ समय देना शुरू करे जिनमे आपके जैसी क्वालिटी हो.

अपने अन्दर के डर को affirmation and motivation से replace करना शुरू कर दे. धीरे धीरे आप खुद में बदलाव महसूस करना शुरू कर देंगे और पाएंगे की अब आपकी Body and mind को सिर्फ Subconscious Emotions के जरिये आप कण्ट्रोल कर पा रहे है.

आपका subconscious mind आपके बॉडी के अहम् रोल जैसे की body temperature, heartbeat and breathing को control करता है.

Read : एक ही गले से दो आवाज निकलना क्या वाकई ये किसी आत्मा का काम है या कुछ और क्या है सच ?

How Subconscious Emotions Deal with Brain final word

अगर आपने गौर किया हो तो किसी छोटे बच्चे का ध्यान भटकाना बेहद आसान क्यों है ? चोट लगने के बाद जब हम उनका ध्यान भटका देते है तो वो उस दर्द को भूल जाते है. यही हमारे Subconscious Emotions की सबसे बड़ी powers होती है. इसकी वजह है जितना ज्यादा हमारा अपने subconscious mind पर confidence होगा उतना ही बेहतर हम कर पाएंगे.

ये हमें हमारी लिमिट से भी आगे बढ़कर काम करने को motivate करता है. भावनाए हमारे अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डालती है जिसकी वजह से हम बॉडी को उस काम के लिए तैयार कर लेते है. अगर आप इतना जान लेते है तो आपके लिए अपने अवचेतन मन को program करना बेहद आसान हो जाता है.

अगर आपके पास ध्यान से जुडी बढ़िया पोस्ट, जानकारी, अनुभव है तो आप हमारे ब्लॉग पर इसे शेयर कर सकते है. अपनी पोस्ट हमें Email पर भेजे आपकी फोटो और आपके नाम के साथ हम इसे पब्लिश करेंगे. आज की पोस्ट भावना शक्ति का अभ्यास पर कमेंट कर अपनी राय जरूर दे.

ध्यान सिर्फ आपके शारीरिक और मानसिक ही नहीं आध्यात्मिक विकास में भी सहायक है

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क्या आप जानते है की ध्यान का महत्व क्या है ? ध्यान क्यों करते है या फिर हमें क्यों नियमित ध्यान के लिए कुछ वक़्त निकालना चाहिए। आज में आपके सामने कुछ ऐसी बाते रखने जा रहा हूँ, जिनकी वजह से हमें नियमित ध्यान की आदत अपना लेनी चाहिए।

ध्यान के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ क्या है इन सब बातो को आज समझते है। complete personal and spiritual development by meditation in Hindi.

ध्यान क्या है और ध्यान का महत्व क्या है 
सबसे पहले में आपको बता देना चाहूंगा की ध्यान लगाने के लिए कही किसी गुफा, पेड़ या पहाड़ो पर जाने की जरुरत नहीं है।

ना ही हमें अपने सांसारिक कर्म का त्याग करना पड़ता है। ज्यादातर लोग ध्यान के बारे में यही धारण बना लेते है की गृहस्थ व्यक्ति कभी ध्यान में सफल नहीं हो सकता है या फिर इसके लिए हमें सांसारिक जीवन का त्याग करना पड़ता है।

ध्यान क्या है और ध्यान का महत्व क्या है

ध्यान की अलग अलग चरण में अनुभव के अनुसार अलग अलग परिभाषा दी जा सकती है। पर अगर सरल शब्दो में इसे समझे तो ध्यान का मतलब है किसी वस्तु, चीज पर गौर करना, उसे समझना।

साधारण जीवन में हम ज्ञान को समझते है, आध्यात्मिक संसार में हम अपने अंतर के रहस्य को समझते है कैसे ? ये सब ध्यान द्वारा संभव है।

अगर साधारण जीवन में आप पुरे होश में किसी चीज को समझते है तो वो भी ध्यान की ही परिभाषा है। क्यों की ध्यान का दूसरा नाम है होश।

ध्यान लगाने के माध्यम :

ध्यान लगाने के लिए आप सुखासन और पद्मासन की मुद्रा इस्तेमाल कर सकते है। सुखासन में बैठने के बाद अगर आपकी कमर सीधी नहीं हो रही है तो आप बाये पैर को इस तरह लगाए की दाये पैर पर वो सपोर्ट का काम करे। इस तरह करने से आप पाएंगे की आपका कमर सीधा होने लगा है।

सबसे सरल विधि है आंखे बंद कर किसी के विचार पर फोकस होना। जैसे की आपको कुछ याद नहीं आ रहा और आप आंख बंद कर उसके आसपास की गतिविधि के बारे में सोचते है और आपको याद आ जाता है। ध्यान का ये सरलतम अभ्यास है जिसमे हम अपनी समस्या को अच्छे से समझ कर ना सिर्फ उसका समाधान सोच पाते है बल्कि उसके विकल्प भी जो समस्या को बेहतर तरीके से हल करने में मददगार होते है।

दूसरी अवस्था में आप ऊपर के दोनों आसन में किसी का भी चुनाव कर ले और अपने आज्ञाचक्र पर ध्यान केंद्रित करे। तीसरी अवस्था में आप अपनी सांसो पर ध्यान लगा सकते है। माध्यम कोई भी हो आपका मकसद एक ही है फोकस होना।

ध्यान के कई चरण है लेकिन में इन्हें सिर्फ 3 चरण में समझाना चाहूंगा ताकि हम ध्यान की गलत धारण को तोड़ कर अपने लिए उपयुक्त चरण के हिसाब से ध्यान कर सके। ध्यान को 3 चरण में बाँटने से आप उसके रहस्य को समझ सकते है जो निम्न तरह से है :

1.) संसार में रहकर ध्यान की अवस्था

ये चरण उन लोगो पर लागु होता है जो काम इतनी तल्लीनता से करते है की उसे समझ पाना उनके लिए मुश्किल नहीं होता है।

अगर आप किसी काम को अच्छे से समझ लेते है मतलब आपका ध्यान सिर्फ उस काम में था। इस तरह की अवस्था ऐसे लोगो में दिखाई देती है जो अपने काम में माहिर होते है।

2. ) अंतर ध्यान :

जब हम खुद पर विश्वास रखना शुरू कर अपने अंतर्मन से सवाल जवाब करते है और आपका मन आपको गाइड करता है तब समझ ले की अपने अंतर ध्यान द्वारा खुद का स्पिरिचुअल गाइड ढूंढ लिया है। ऐसा गाइड जो आपको कभी भटकने नहीं दे सकता है।

इसे जाग्रत करने के लिए अंतर पर ध्यान लगाना चाहिए। आपका अंतर्मन जाग्रत होता है जब आप अंतर पर फोकस होने लगते है।

3.) अलौकिक ध्यान की अवस्था :

ध्यान की इस अवस्था में हम खुद को समझ लेते है, अपने अंतर को जाग्रत कर लेते है और ऐसे अनुभव करने लगते है जो अनुपान और अलौकिक हो। इस तरह के अनुभव अपने मन के पूर्ण संयम द्वारा संभव है।

मन की स्थिति को स्थिर रख कर जब हम अपने अंदर फोकस होते है तो अवचेतन मन की शक्तिया जाग्रत होने लगे है अगले चरण में आप आयाम की यात्रा कर सकते है। ये सब सुने सुनाये अनुभव है जो एक योगी करता है।

ध्यान का महत्व :

ध्यान को अगर नियमित दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाये तो हमें कई तरह के फायदे होने लगते है।

ध्यान का महत्व अंदाजा हम इस बात से ही लगा सकते है की इसका कुछ मिनट का अभ्यास हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास कर सकता है।

ये फायदे शारीरिक और मानसिक होने के साथ आध्यात्मिक भी होते है आइये जाने वो मुख्य वजह क्यों आपको ध्यान करना चाहिए :

1.) मन और शरीर होता है शांत :

ध्यान से पहले शरीर और फिर मन की गतिविधि शांत होती है।

चंचल मन शांत होता है तो आप खुद को स्थिर महसूस करते है। ये अवस्था ऐसी होती है जैसे आप सबकुछ जानते हुए भी उसे ग्रहण कर रहे हो।

आपका मन जब शांत होगा तो आप बेहतर सोच पाते है, नए नए आईडिया समझ पाते है ये आईडिया और कोई नहीं आपका मन आपको सुझाता है।

2.) ध्यान का महत्व-मानसिक तनाव में कमी :

जब हम ध्यान करते है तो इसका मतलब है हम गतिविधि में विराम ले रहे है। जिससे हम खुद को एकांत में या कही भी दूसरी सभी गतिविधि से दूर कर लेते है।

जब कोई बहरी गतिविधि नहीं होती है तब आंखे बंद होने की वजह से आपका मन ज्यादा नहीं सोच पाता है।

वो धीरे धीरे कम विचारो पर चलता है और अंत में न्यूनतम विचार से शून्य की अवस्था में चला जाता है। इससे हमारा मानसिक तनाव हटता है जो काम या विचारो के बोझ से थक जाता है।

3.) रिचार्ज होने का सबसे अच्छा माध्यम :

रिचार्ज होना मतलब मानसिक और शारीरिक कार्यो के लिए अपने अंदर की ऊर्जा को बढ़ाना।

जब हम नियमित ध्यान करते है तो विचारो के साथ ख़त्म होने वाली ऊर्जा की खपत रुक जाती है और वो फिर से स्टोर होने लगती है। सामान्य रिचार्ज का माध्यम है सोना ( नींद लेना ) पर अगर आप जल्दी से कम वक़्त में दोबारा खुद को तरोताजा महसूस करना चाहते है तो ध्यान करिये।

5.) होता है समस्याओ का समाधान :

खुद की समस्या के समाधान में ध्यान का महत्व बहुत बड़ा है। इंसानी मस्तिष्क हर समस्या को खुद सुलझा सकता है।

बशर्ते इसके सोचने की क्षमता को सही दिशा दे। इंडिया में जुगाड़ू तकनीक किसका कमाल है। मतलब हम मस्तिष्क को जिस दिशा में ले जाना चाहे ले जा सकते है।

अगर आपको अपनी समस्या का अच्छा और बेहतर समाधान चाहिए तो कुछ पल ध्यान में बैठ कर अपनी समस्या पर फोकस होने की कोशिश करे। आपको समस्या से होने वाली समस्या नहीं उसके समाधान के बारे में सोचना है।

अगर हम किसी एक विचार पर या हल पर फोकस होते है तो हमारा मस्तिष्क हमें उसके कई विकप सुझा सकता है। इसके लिए आपको समस्या या बात को अच्छे से समझने की जरुरत है।

Read : Basic of Yin and Yang और ताओवादी ब्रह्मांड विज्ञान

6.) ध्यान है खुद की शक्तियों को उभारने का माध्यम :

ध्यान द्वारा हम अपनी प्रतिभा को निखार सकते है। हमारी विशेषताओ को समझने में उन्हें बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने का ध्यान सबसे अच्छा माध्यम है।

इसलिए अगर आप जानना चाहते है की आपकी काबिलियत क्या है तो कुछ पल एकांत में बैठकर सोचे की आप क्या काम बेहतर तरीके से कर सकते है, आपकी रूचि किसमे है और आप उसे और बेहतर कैसे कर सकते है।

ध्यान के महत्व और उसके चरण और अवस्थाएं मेरे अपने निजी विचार है। क्यों की मेने इसे इस तरह से समझने की कोशिश की है। आज की पोस्ट ध्यान का महत्व आपको कैसी लगी कमेंट में जरूर बताए। अगर आपको लगता है की पोस्ट में कुछ गलती है या सुझाव है तो हमें बताये।

सपनो को हकीकत में बदलना है तो law of attraction को life में इस तरह इस्तेमाल करे

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Law of attraction in hindi यानि अपनी सोच और कल्पना द्वारा अपने लक्ष्य की प्राप्ति। क्या होता है जब आप अपने लक्ष्य के प्रति पुरे समर्पण से काम करते है ? आप खुद देख सकते है की आपके सामने की परेशानिया दूर होने लगती है.

आपका अवचेतन और चेतन मन आपको नए नए आईडिया अपने आप सुझाने लगता है।

अगर आपका लक्ष्य अटल है तो आपका अवचतेन मन आपके सोने के वक़्त भी काम करता है। ऐसे कई उदहारण है जहां पर हमने द्वारा अपनी सोच को अपनी कल्पना को हकीकत का रूप दिया है। आइये जानते है law of attraction tips, quotes and how to use it for love in hindi.

Law of attraction

Law of attraction को हम अगर सरल शब्दो में सोचे तो एक परिभाषा निकल कर सामने आती है जिसके अनुसार :

आपकी सोच को एक जगह फोकस रखने पर उसके जो सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम निकलते है। ये आपके Law of Attraction की वजह से होता है।

हम अपनी सोच को जिस रवैये पर फोकस करते है हमें उसके अनुसार ही परिणाम मिलते है फिर चाहे वो सकारात्मक हो या नकारात्मक। के लिए ऐसे कई साधन हमारे पास है जो हमें अपने लक्ष्य में सफलता हासिल करने में काफी मददगार साबित हो सकते है।

  • आपकी कल्पना-शक्ति
  • आपके आत्मसुझाव
  • आपकी इच्छा-शक्ति / आपकी आपके लक्ष्य के प्रति रूचि

दैनिक जीवन में Law of attraction को कैसे उपयोग में लाये

हम सभी जानते है की दिनभर हमारे मस्तिष्क में हजारो लाखो आईडिया बनते और मिटते है। लेकिन उनमे से कितने आईडिया आपके काम से रिलेटेड होते है या फिर कितने आईडिया आप अपने दैनिक जीवन में उतारते है।

दूसरा नाम ही आपको नए नए आईडिया सुझाना है नए नए अवसर पैदा करना है ताकि आप अपने लक्ष्य में सफलता हासिल कर सके।

दैनिक जीवन में को उतारने से पहले आपको ये समझना होगा की ये काम कैसे करता है इसके बाद ही आप इसका सही उपयोग कर सकते है। जब आप अपने लक्ष्य को निर्धारित करते है तब रूचि और आपके काम की उपयोगिकता ( प्रायोरिटी ) के आधार पर आपका मस्तिष्क पहले क्षण से ही काम करना शुरू कर देता है।

आपके मस्तिष्क में नए नए आईडिया आपको अपने काम को और भी बेहतर बनाने को प्रेरित करते है।

जब आप इसे समझ गए है तो अब आप जान जायेंगे की आप इसका कैसे फायदा उठा सकते है। को और भी बेहतर तरीके से काम करने के लिए आपकी कल्पना शक्ति और आपके आत्मसुझाव ( जो आपको सिर्फ और सिर्फ अपने लक्ष्य के प्रति फोकस करते है ) काफी मददगार है। इन्हें कैसे आजमाए आइये जानते है।

आपकी कल्पना शक्ति Law of attraction

कोई भी काम या वस्तु बगैर कल्पना के अस्तित्व में नहीं आ सकती है। हम जिस चीज का अविष्कार करते है पहले उसके पैरामीटर की कल्पना करते है। कोई भी व्यक्ति किसी भी वस्तु की और तब तक आकर्षित नहीं होता है जब तक की उसकी कल्पना ना हो। ये सामान्य भी हो सकता है जब आप किसी चीज को खरीदते है, ये आपके अवचेतन की कमांड भी हो सकती है जो वक़्त पर आपको कार्य, वस्तु का इस्तेमाल करने को प्रेरित करे।

कल्पना शक्ति को कैसे काम में लाया जाता है

कल्पना शक्ति को हम वस्तु की जरुरत और क्वालिटी के हिसाब के काम में लाते है। जैसे की हमें अगर किसी वस्तु में नया मॉडिफिकेशन चाहिए तो पहले उसके डिजाईन और क्वालिटी की कल्पना की जाती है। इसका सबसे बड़ा उदहारण हमारे आसपास की वस्तुओ में आ रहे बदलाव है।

चीजे ज्यादा से ज्यादा हमारे लिए आरामदायक बन रही है।

इसी तरह आप भी जिस किसी काम को करना चाहते है। शुरू के 10-15 मिनट आप उस कार्य की कल्पना आंखे बंद कर के करे इससे आप पाएंगे की आप उस काम को बेहतर तरीके से समझ पा रहे, साथ ही आपके काम को आप कम समय में बेहतर तरीके से भी कर पाएंगे।

यही नहीं आप काम के दौरान आने वाली अनचाही समस्या से भी निजात पा सकते है।

आत्मसुझाव और Law of attraction

अक्सर देखने में आता है की काम के बिच में हमें बोरियत लगने लगती है, या हमारा काम करने का मन नहीं करता है। लक्ष्य के लिए काम करने के बिच कई मुश्किलें आती है जिनमे सबसे बड़ी समस्या है आपका मन उचटना।

जब भी आप अपने लक्ष्य से भटकने लगे आत्मसुझाव देना शुरू करे। आत्मसुझाव एक वाक्य को बार बार दोहराना है जिससे दूसरे विचार हटने लगते है। और आप वापस अपने काम पर फोकस हो जाते है। आत्मसुझाव के दूसरे प्रयोग भी है जैसे :

अपनी झिझक को दूर करना

हम अक्सर किसी से कुछ बात कहने खासतौर से लड़की से या फिर स्टेज पर जाने या दुसरो से आगे बढ़कर कुछ काम करने में झिझक महसूस करते है। जिससे की हम किसी से ना कुछ कह सकते है ना ही अपने आपको दुसरो से बेहतर योग्य साबित कर पाते है।

क्यों होता है ऐसा

ऐसा होता है हमारे मन में एक विचारो को लेकर तर्क और वितर्क के चलने से।

मान लो मुझे लड़की से बात करनी है और में उससे कुछ कहने लगता हूँ। उसी वक़्त मेरे मन में ख्याल आता है की यार मेरी आवाज सही नहीं है, वो मेरी बात क्यों सुनेगी या फिर में सही कर रहा हूँ या गलत वो उसका गलत मतलब ना निकाल ले। 90% युवा वर्ग इस समस्या से अपने दिल की बात जाहिर नहीं कर पाता है।

क्या करे

ऐसे वक़्त में खुद को शांत करे और सकारात्मक विचार कुछ देर तक दोहराये। कोशिश करे की आपके दूसरे विचार उस वक़्त ना आने पाए। जब एक सकारात्मक विचार ( सुझाव ) दूसरे विचार पर हावी हो जाता है तब आप अपनी बात बेहद बोल्ड तरीके से खुल कर कह पाते है। यकीं ना आये तो करके देखे।

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Law of attraction का सच्चा उदहारण

ये बात पिछले साल की है। में अपने ब्लॉग की डिजाइनिंग खुद कर रहा था। मेने अपना 99% काम पूरा कर लिया था पर एक जगह पर कोड सही नहीं लग रहा था जिससे की ब्लॉग का डिजाईन प्रभावित हो रहा था।

कोड सिखने की मेरी लगन थी और में काफी लंबे समय से इस पर काम कर रहा था। इसके बारे में सोचते सोचते में सो गया तो रात्रि में मुझे सपने में खुद को कोड अप्लाई करते हुए पाया।

मेने सपने में वो गलती पकड़ ली जो कोड को गलत कर रही थी। सुबह उठ कर मेने इसे असल में आजमाया तो पाया की गलती छोटी सी थी और मेने अपना काम पूरा कर लिया। इस तरह मेने के महत्त्व को सुबह जल्दी उठने और खुद के व्यक्तित्व विकास में लगाया। यहाँ तक की लड़कियों से बात करने में भी।

दोस्तों आपके हर सपने को हकीकत में बदल देगा बस इसे सही मौका दो और अपने मन को उसमे लगाओ। सफलता आपको 100% मिलेगी। ये मेरा विश्वास है। आज की पोस्ट Law of attraction पर कमेंट करना न भूले.  you can law of attraction in hindi video download here.

पुरातन भारत के ऋषि मुनि माहिर थे इन अलौकिक साधना की शक्ति और सिद्धियों में

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अष्ट सिद्धि और शक्तिया जो पुरातन ऋषि मुनियो को बल प्रदान करती थी उनके आशीर्वाद और श्राप को शक्ति प्रदान करती थी.

सभी सिद्धिया मन से संचालित है. प्राचीन भारत में रहने वाले सिद्ध ऋषि-मुनियो के पास सिद्धिया होती थी.

वो किसी एक चीज को करने में माहिर होते थे. जैसे की किसी दूसरी देह में प्रवेश करना जो आदि गुरु श्री शंकराचार्य ने कर दिखाया था. इसके अलावा वायु पर विचरण या फिर अग्नि संयम ये कुछ विद्याए थी जिन्हें संयम करने पर कुछ सिद्धिया आती थी.

अष्ट सिद्धि और शक्तिया जो जिनसे ऋषि मुनि प्रभावशाली बनते थे
आज की पोस्ट इन्ही कुछ सिद्धियों का वर्णन करती है.

अगर इन सिद्धियों को अध्यात्म की नजर से देखे तो किसी चमत्कार से कम नहीं लगता है. मगर विज्ञान में ये सिद्ध हो गया है की इन सबके पीछे मन के संयम है.

हम खुद को जो बनाना चाहे बना सकते है. बशर्ते उस चीज का संयम करना आता है.जैसे की एक मजबूत आत्मबल के साथ अगर भावना दी जाये तो हमें कड़ाके की सर्दी में भी गर्मी लग सकती है. ये हमारे मन की शक्ति है.

क्यों की हमने मस्तिष्क की पूर्वनिर्धारित सोच और हमारे शरीर की क्रिया पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता में बदलाव कर लिया. आइये जानते है ऐसी ही कुछ शक्तिया और सिद्धिया जिन्हें प्राचीन समय में हमारे ऋषि मुनि हासिल किये रखते थे.

अष्ट सिद्धि और शक्तिया जो जिनसे ऋषि मुनि प्रभावशाली बनते थे

1.) अणिमा शरीर को जितना चाहे सूक्ष्म बना लेना अणिमा सिद्धि है. लघु होकर इंसान दुसरो की नजरो से अदृश्य भी हो सकता है. इससे इंसान बल और शक्तिशाली बन जाता है.

2.) महिमा शरीर को विशाल और विकराल रूप देने की सिद्धि जो इंसान को विस्तार प्रदान करती है.

3.) लघिमा स्वयं को हल्का बना लेने की शक्ति जो इंसान को वायुमंडल में विचरण के लायक बनाती है.

4.) गरिमा स्वयं को गजराज जैसा भारी बना लेने की सिद्धि जिसमे हम खुद में भारीपन महसूस करते है. कहा जाता है की हाथो में एक नाड़ी का अस्तित्व है जिसमे कूप वायु भर जाने पर भी यही अनुभव होता है.

5.) प्राप्ति जिस चीज की कामना करे वही उपलब्ध हो ये सिद्धि इसे संभव बनाती है.

6.) प्रकाम्य किसी भी रूप की कल्पना मात्र से धारण कर लेना इस सिद्धि का काम है. अष्ट सिद्धि और शक्तिया में ये मायावी सिद्धि है.

7.) इशीता किसी के बारे में भी जान लेना बगैरउसको जाने इशिता सिद्धि का काम है. ये शक्ति / सिद्धि भी मन संचालित है और कहा जाता है की चित पर संयम करने से हम दुसरो के मन की बात जान सकते है.

8.) वशीकरण सम्पूर्ण जगत और प्रकृति पर अपना वश जमाना वशिता सिद्धि का काम है. वशीकरण मोहिनी कला इसका एक उदहारण है.

ये थी अष्ट सिद्धिया अब बात करते है कुछ और शक्तियों की जिसमे हमारे पुरातन काल के पूर्वज और ऋषि मुनि माहिर थे. चलिए अष्ट सिद्धि और शक्तिया के बारे मे और जानते है.

1.) उदान शक्ति

उदानवायु के जीतने पर योगी को जल, कीचड़ और कंकड़ तथा कांटे आदि पदार्थों का स्पर्श नहीं होता और मृत्यु भी वश में हो जाती है.

कंठ से लेकर सिर तक जो व्यापाक है वही उदान वायु है. प्राणायम द्वारा इस वायु को साधकर यह सिद्धि प्राप्त की जा सकती है.

2.) कर्म सिद्धि

सोपक्रम और निरपक्रम, इन दो तरह के कर्मों पर संयम से मृत्यु का ज्ञान हो जाता है. सोपक्रम अर्थात ऐसे कर्म जिसका फल तुरंत ही मिलता है और निरपक्रम जिसका फल मिलने में देरी होती है.

क्रिया, बंध, नेती और धौती कर्म से कर्मों की निष्पत्ति हो जाती है.

3.) स्थिरता शक्ति

शरीर और चित्त की स्थिरता आवश्यक है अन्यथा सिद्धियों में गति नहीं हो सकती.

कूर्मनाड़ी में संयम करने पर स्थिरता होती है. कंठ कूप में कच्छप आकृति की एक नाड़ी है. उसको कूर्मनाड़ी कहते हैं. कंठ के छिद्र जिसके माध्यम से उदर में वायु और आहार आदि जाते हैं उसे कंठकूप कहते हैं.

4.) दिव्य श्रवण शक्ति

समस्त स्रोत और शब्दों को आकाश ग्रहण कर लेता है, वे सारी ध्वनियां आकाश में विद्यमान हैं.

आकाश से ही हमारे रेडियो या टेलीविजन यह शब्द पकड़ कर उसे पुन प्रसारित करते हैं. कर्ण-इंद्रियां और आकाश के संबंध पर संयम करने से योगी दिव्यश्रवण को प्राप्त होता है.

अर्थात यदि हम लगातार ध्‍यान करते हुए अपने आसपास की ध्वनि को सुनने की क्षमता बढ़ाते जाएं और सूक्ष्म आयाम की ध्वनियों को सुनने का प्रयास करें तो योग और टेलीपैथिक विद्या द्वारा यह सिद्धि प्राप्त की जा सकती है.

5.) अष्ट सिद्धि और शक्तिया-कपाल सिद्धि

सूक्ष्म जगत को देखने की सिद्धि को कपाल सिद्धि योग कहते हैं. कपाल की ज्योति में संयम करने से योगी को सिद्धगणों के दर्शन होते हैं. मस्तक के भीतर कपाल के नीचे एक छिद्र है, उसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं.

ब्रह्मरंध्र के जाग्रत होने से व्यक्ति में सूक्ष्म जगत को देखने की क्षमता आ जाती है.

Astral projection guided meditation

हालांकि आत्म सम्मोहन योग के द्वारा भी ऐसा किया जा सकता है. बस जरूरत है तो नियमित प्राणायाम और ध्यान की. दोनों को नियमित करते रहने से साक्षीभाव गहराता जाएगा तब स्थि‍र चित्त से ही सूक्ष्म जगत देखने की क्षमता हासिल की जा सकती है.

6.) प्रतिभ शक्ति

प्रतिभ में संयम करने से योगी को संपूर्ण ज्ञानी की प्राप्त होती है. ध्यान या योगाभ्यास करते समय भृकुटि के मध्‍य तोजोमय तारा नजर आता है. उसे प्रतिभ कहते हैं. इसके सिद्ध होने से व्यक्ति को अतीत, अनागत, विप्रकृष्ट और सूक्ष्माति-सूक्ष्म पदार्थों का ज्ञान हो जाता है.

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7.) निरोध परिणाम सिद्धि

इंद्रिय संस्कारों का निरोध कर उस पर संयम करने से ‘निरोध परिणाम सिद्धि’ प्राप्त होती है.

यह योग साधक या सिद्धि प्राप्त करने के इच्छुक के लिए जरूरी है अन्यथा आगे नहीं बढ़ा जा सकता. निरोध परिणाम सिद्धि प्राप्ति का अर्थ है कि अब आपके चित्त में चंचलता नहीं रही.

निश्चल अकंप चित्त में ही सिद्धियों का अवतरण होता है. इसके लिए अपने विचारों और श्वासों पर लगातार ध्यान रखें. विचारों को देखते रहने से वह कम होने लगते हैं. विचार शून्य मनुष्य ही स्थिर चित्त होता है.

8.) अष्ट सिद्धि और शक्तिया-चित्त ज्ञान शक्ति

हृदय में संयम करने से योगी को चित्त का ज्ञान होता है.

चित्त में ही नए-पुराने सभी तरह के संस्कार और स्मृतियां होती हैं. चित्त का ज्ञान होने से चित्त की शक्ति का पता चलता है.

9.) इंद्रिय शक्ति

ग्रहण, स्वरूप, अस्मिता, अव्वय और अर्थवत्तव नामक इंद्रियों की पांच वृत्तियों पर संयम करने से इंद्रियों का जय हो जाता है. अष्ट सिद्धि और शक्तिया में से एक है अपने पञ्च इन्द्रियों का संयम

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10.) पुरुष ज्ञान शक्ति

बुद्धि पुरुष से पृथक है. इन दोनों के अभिन्न ज्ञान से भोग की प्राप्ति होती है. अहंकारशून्य चित्त के प्रतिबिंब में संयम करने से पुरुष का ज्ञान होता है.

11.) तेजपुंज शक्ति

समान वायु को वश में करने से योगी का शरीर ज्योतिर्मय हो जाता है. नाभि के चारों ओर दूर तक व्याप्त वायु को समान वायु कहते हैं. ये अष्ट सिद्धि और शक्तिया का ही एक भाग है.

12.) ज्योतिष शक्ति

ज्योति का अर्थ है प्रकाश अर्थात प्रकाश स्वरूप ज्ञान. ज्योतिष का अर्थ होता है सितारों का संदेश. संपूर्ण ब्रह्माण्ड ज्योति स्वरूप है. ज्योतिष्मती प्रकृति के प्रकाश को सूक्ष्मादि वस्तुओं में न्यस्त कर उस पर संयम करने से योगी को सूक्ष्म, गुप्त और दूरस्थ पदार्थों का ज्ञान हो जाता है.

14.) अष्ट सिद्धि और शक्तिया-लोक ज्ञान शक्ति

सूर्य पर संयम से सूक्ष्म और स्थूल सभी तरह के लोकों का ज्ञान हो जाता है.

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15.) नक्षत्र ज्ञान सिद्धि

चंद्रमा पर संयम से सभी नक्षत्रों को पता लगाने की शक्ति प्राप्त होती है.

16.) तारा ज्ञान सिद्धि

ध्रुव तारा हमारी आकाश गंगा का केंद्र माना जाता है. आकाशगंगा में अरबों तारे हैं. ध्रुव पर संयम से समस्त तारों की गति का ज्ञान हो जाता है.

17.) परकाय प्रवेश

बंधन के शिथिल हो जाने पर और संयम द्वारा चित्त की प्रवेश निर्गम मार्ग नाड़ी के ज्ञान से चित्त दूसरे के शरीर में प्रवेश करने की सिद्धि प्राप्त कर लेता है. यह बहुत आसान है, चित्त के स्थिरता से शूक्ष्म शरीर में होने का अहसास बढ़ता है.

शरीर से बाहर मन की स्वाभाविक वृत्ति है उसका नाम ‘महाविदेह’ धारणा है. उसके द्वारा प्रकाश के आवरणा का नाश हो जाता है. परकाया प्रवेश प्रभावशाली अष्ट सिद्धि और शक्तिया में से एक है.

Astral projection through meditation

स्थूल शरीर से शरीर के आश्रय की अपेक्षा न रखने वाली जो मन की वृत्ति है उसे ‘महाविदेह’ कहते हैं. उसी से ही अहंकार का वेग दूर होता है. उस वृत्ति में जो योगी संयम करता है, उससे प्रकाश का ढंकना दूर हो जाता है.

18.) सर्वज्ञ शक्ति

बुद्धि और पुरुष में पार्थक्य ज्ञान सम्पन्न योगी को दृश्य और दृष्टा का भेद दिखाई देने लगता है. ऐसा योगी संपूर्ण भावों का स्वामी तथा सभी विषयों का ज्ञाता हो जाता है.

19.) भाषा सिद्धि

हमारे मस्तिष्क की क्षमता अनंत है. शब्द, अर्थ और ज्ञान में जो घनिष्ट संबंध है उसके विभागों पर संयम करने से ‘सब प्राणियों की वाणी का ज्ञान’ हो जाता है.

20.) समुदाय ज्ञान शक्ति

शरीर के भीतर और बाहर की स्थिति का ज्ञान होना आवश्यक है. इससे शरीर को दीर्घकाल तक स्वस्थ और जवान बनाए रखने में मदद मिलती है. नाभिचक्र पर संयम करने से योगी को शरीर स्थित समुदायों का ज्ञान हो जाता है अर्थात कौन-सी कुंडली और चक्र कहां है तथा शरीर के अन्य अवयव या अंग की स्थिति कैसी है.

21.) पंचभूत सिद्धि

पंचतत्वों के स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अन्वय और अर्थवत्तव ये पांच अवस्‍था हैं इसमें संयम करने से भूतों पर विजय लाभ होता है. इसी से अष्टसिद्धियों की प्राप्ति होती है.

अष्ट सिद्धि और शक्तिया में यहाँ संयम का अर्थ है जिस चीज या वस्तु का संयम हम करने जा रहे है उसकी गुण-धर्म और प्रकृति को अपनाना.

ऐसा करने से हमारे अंदर उसकी प्रकृति बनने लगती है. जैसे चंद्रमा संयम से मन शीतल और शांत बनता है वही अग्नि संयम से मन उग्र. आज की पोस्ट अष्ट सिद्धि और शक्तिया आपको कैसी लगी कमेंट के माध्यम से जरूर बताये. हमें subscribe करना ना भूले.

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बच्चो को बताए रिश्तो की अहमियत ताकि आगे चलकर आपको पछताना न पड़े

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रिश्तो की अहमियत आजकल की लाइफस्टाइल में सिर्फ एक फॉर्मेलिटी बन कर रह गई है। हर कोई बस अपने आप में ही मस्त रहना चाहता है।

उसे किसी और से कोई मतलब नहीं है। अगर आपके घर कोई रिश्तेदार भी आ जाये तो आप ज्यादा से ज्यादा कुछ घंटे ही उनके आने की ख़ुशी जाहिर करेंगे उसके बाद तो आप मन ही मन दुआ मनाने लगते है की कब वो जाने का कहे और कब आप का उनसे पीछा छूटे।

इसका सीधा असर आपकी आने वाली पीढ़ी यानि आज का भविष्य पर पड़ रहा है आपके बच्चे आपसे क्या सीखते है ?

मै, मेरा, मुझे….. आपने भी अक्सर कई बच्चो को ऐसी भाषा का प्रयोग करते सुना होगा। वे ना तो अपने खिलौने किसी के साथ शेयर करना पसंद करते है ना ही किसी से ज्यादा बात करना और घुलना, मिलना। घर में कोई रिश्तेदार या सगे संबंधी आ जाये तो वो अपने कमरे में रहना पसंद करते है।

कैसे सिखाये रिश्तो की अहमियत

किसी की शादी या सम्मलेन की बजाय गेम जोन में जाना ज्यादा पसंद करते है। बच्चो को समझाए रिश्तो की अहमियत कैसे आइये जाने

कई बार तो ये भी देखने में आता है की छोटे बच्चे भी रिश्तेदार से मिलना जुलना पसंद नहीं करते है। उनके इस व्यव्हार की उनके माता-पिता भी अनदेखी करते रहते है। जबकि अपनों से दुरी बनाना बच्चो के भविष्य के लिए खतरनाक है।

ऐसे में आपके लिए ये और भी आवश्यक है की बच्चो को रिश्तो की अहमियत समझाए और खुद भी सचेत रहे ताकि आगे चल कर उन्हें इसके दुष्परिणाम न झेलने पड़े।

कैसे सिखाये रिश्तो की अहमियत

कहते है माँ बच्चे का पहला गुरु और उसका खुद का घर उसकी पहली पाठशाला होती है। हमारे संस्कृति में बच्चे की पढ़ने की उम्र 5 साल से शुरू होती है जब वो गुरुकुल में प्रवेश करता है।

लेकिन एक बालक नन्ही उम्र में किताबी ज्ञान ग्रहण नहीं करता है बल्कि अपने आसपास के वातावरण से सीखता है यानि जो आप करते है, कहते है, जिस तरह का व्यव्हार आप अपनाते है आपका बच्चा वो सभी गुण बचपन से ग्रहण करता है।

ऐसे में आप चाहे तो बचपन से ही उसमे अच्छी आदते डाल सकते है। अगर आपका बच्चा गलती, शैतानी करता है तो उसे इसका नुकसान समझाए ना की मारपीट करे। बात करते है बच्चो को रिश्तो की अहमियत कैसे समझा सकते है।

अकेलेपन का कितना नुकसान

अगर बच्चे लोगो से घुलते-मिलते नहीं, रिश्तो से दूर भागते है तो आने वाले वक़्त में उन्हें अकेलेपन से लड़ना पड़ सकता है। यह अकेलापन कई अन्य बुरी आदतों में बदल जाता है जैसे विडियो गेम खेलना, सोशल मीडिया को ही अपना सब कुछ बना लेना।

इससे आगे बढ़ने पर नशे की आदतों में भी तब्दील हो सकता है। ऐसे बच्चे लोगो पर भरोसा भी नहीं कर पाते है।

अपनों का साथ और रिश्ते देंगे बहुत कुछ. आज के समय में जो बच्चा लोगो से मिलता जुलता है, रिश्तेदारो के बिच रहता है उसके अंदर व्यक्तित्व के कुछ गुण विकसित होते है।

जैसे लोगो का अभिवादन करना, बड़ो के सामने तर्कपूर्ण बात रखना, अच्छा व्यव्हार और दोस्त बनाने की काबिलियत, बेहतर सवांद कौशल, रिश्तो को निभा पाना के साथ साथ लोगो को साथ लेकर चलना जैसे गुणो का विकास होता है।

ऐसे बच्चे आगे चलकर खुद का कामयाब करियर बनाने में भी कामयाब होते है क्यों की उन्हें ये गुण कही से कोचिंग या सिखने की जरुरत नहीं पड़ती वक़्त के साथ उनमे इनका विकास होता रहता है।

मिलकर सुलझाए समस्याओ को

आमतौर पर बच्चे रिश्तो को तब तक नहीं समझते जब तक उन्हें रिश्तो पर भरोसा नहीं होता है।

इसी कारण वो इनसे दूर भागते है। इस भरोसे को भरने की शुरुआत आप कर सकते है। जब बच्चा माता-पिता पर पूरा भरोसा और सम्मान करता है तभी वह बाहर के लोगो से जुड़ने को तैयार होता है।

इसका आसान तरीका यही है की बच्चे की किसी समस्या या शिकायत को अनदेखा ना किया जाए बल्कि उनका साथ देकर उसका निवारण किया जाए।

जैसे बच्चा माँ के पास आकर कहे की माँ मेरा खिलौना नहीं मिल रहा है, क्या आपको पता है। इस पर अक्सर जवाब होता है नहीं मुझे नहीं पता, अभी मुझे परेशान ना करो।

खुद ढूंढो। यह तरीका गलत है। इस बात को दो नजरिये में लेकर देखते है। पहला आपका बच्चा आपसे यही सवाल करता है और आप उसे डांट देते है तो क्या होता है :

सोच का नजरिया लाता है बहुत बड़ा बदलाव

आपका बच्चा अब अगली बार जब अपनी किसी चीज को खोएगा तो वो आपसे मदद नहीं मांगेगा क्यों की उसके मन में नकारात्मक विचार भर चूका है की आप उसे मना कर देगी। हो सका है ये आपके लिए आराम का मामला हो क्यों की आपका बच्चा अब आपको डिस्टर्ब नहीं कर रहा है पर क्या होगा

जब वो एक चीज को ढूंढने के चक्कर में 10 चीजे उलट पलट कर देता है या फिर सामान ढूंढने के चक्कर में खुद को चोट पहुंचा देता है क्यों की ऐसा होना आम बात है।

वही अगर आप उसके समस्या को सुनकर उसकी मदद करते है तो अगली बार वो आपसे सकारात्मक उम्मीद रखेगा। हो सकता है की उसे इस बात का अहसास भी हो की उसकी गलती से आप को परेशानी हो रही है फिर भी आप उसकी मदद कर रहे है। तो वो अपनी जिम्मेदारी न सिर्फ समझेगा बल्कि इस बात की कोशिश करेगा की वो अपनी चीजे संभाल कर रखे।

रिश्तो की अहमियत में बने बच्चो के लिए प्रेरणा

घर से बाहर जब भ जाए बच्चो को साथ ले जाए। इससे उनकी आदत में ही घुलना मिलना आ जायेगा। यदि बच्चा छोटा है तो उसे कोई छोटी मोटी फायदे की बात समझा कर मना सकते है। पर ये भी ध्यान रखे हर बार अपनी बात मनवाने के लिए लालच देना अच्छा नहीं।

इसके आगे चल कर कई बुरे परिणाम झेलने पड़ सकते है।

क्यों की बचपन में अगर आप बच्चो को काम के बदले लालच देते है तो वक़्त के साथ उनके लालच में बढ़ोतरी होती चली जाती है हो सकता है आगे चलकर वो ऐसी चीजो की डिमांड कर दे जो आपकी हैसियत / बूते से बाहर हो। जैसे महंगा फोन या अन्य कोई ऐसी चीज जो आप दोनों के लिए फायदेमंद ना हो।

ऐसे में कोशिश यही रखे की लालच देने की बजाय बच्चो को इसके फायदे बताए क्यों की हम वही काम करना पसंद करते है जिसमे या तो हमारा लालच हो या फायदा।

सकारात्मक माहौल व्यक्तित्व विकास की पहली सीढ़ी है

बेहतर परवरिश के लिए सकारात्मक माहौल भी जरुरी है। सकारात्मकता यानि आपकी बातो में किसी के लिए भी नकारात्मकता न हो, कम से कम बच्चो के सामने तो बिलकुल न हो। घर में अक्सर माता-पिता दुसरो की बुराई करते रहते है, या फिर अपने वर्तमान में कमिया गिनाते हुए मिलते है।

अगर आप ऐसा कर रहे है तो आप अपने बच्चे में नकारात्मकता का विकास कर रहे है उससे आगे चलकर अपनी जिंदगी संघर्ष लगने लगती है जिससे वो हमेशा दूर भागने की कोशिश करेगा।

वो भी अपने आसपास के लोगो के प्रति वैसी ही सोच रखने लगता है जो आप उसके सामने बयां करते है। क्या आप जानते है मानव मस्तिष्क और ब्रह्मांड से जुड़े आश्चर्यजनक तथ्य

ऐसे में बाहरी लोगो से जुड़ाव कर पाना उसके लिए और भी मुश्किल बन जाता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखे की बच्चो के सामने किसी रिश्ते की बुराई न करे। आप अपने रिश्ते की खटास को बच्चे की जिंदगी में ना उतरने दे।

तय करे मन का माहौल मिले

बच्चे अपनी पसंद के माहौल में जल्दी ही घुलते मिलते है ऐसे में आपको ये देखना और भी जरुरी हो जाता है की आप उनकी आदत और पसंद दोनों जाने और उनके पसंद के माहौल को तैयार करने और ढलने में उनकी मदद करे।

अगर उन्हें अपनी पसंद के अनुसार माहौल नहीं मिलेगा तो उन्हें आपके साथ कही जाने में मजा नहीं आएगा और वो किसी से मिलना जुलना शायद ही पसंद करे। ऐसे में आप उन्हें वहां ज्यादा से ज्यादा ले जाये जहा उनका मन लगे और वो अपनी उम्र के लोगो से मिले जुले। जब उनका मन लगने लगेगा तब वो अपने आप बाकि के रिश्तो की ओर मुड़ने लगेंगे।

आपके बच्चे आपसे दूरिया बनाते है क्यों ?

अगर आप भी अपने थोड़े से मजे या प्राइवेसी के चलते अपने बच्चो को इग्नोर कर रहे है या थोड़ा बहुत लालच देकर उन्हें किसी ऐसी चीजो में उलझा रहे है जो आगे चलकर उनकी स्थाई जिंदगी का हिस्सा बन जाता है तो संभल जाइए क्योकि आपका बच्चो को आज इग्नोर करना आपके बच्चो द्वारा आपको आगे चलकर इग्नोर करने का कारण बन सकता है।

इसलिए उन्हें सही माहौल देने की कोशिश घर से करे अपने आप से करे। रिश्तो की अहमियत अगर बच्चो को समझा पाने में कामयाब रहेंगे तो आपकी जिंदगी में ये बदलाव जरूर आएंगे। यकीन मानिये जब आप ऐसा कर लेंगे तो

बच्चो के दोस्त बनने पर मिलेंगे ये बदलाव

  • कोई बेटा अपनी पत्नी के कहने पर आपको अपने से दूर वृद्धाश्रम नहीं जाने देगा।
  • कोई भी बच्चा आपका या आपके रिश्तेदार और बुजुर्गो का अपमान या इग्नोर नहीं कर पायेगा।
  • आपके बच्चे आपसे कोई बात नहीं छुपायेंगे ना ही वो खुद को अकेला महसूस करेंगे।
  • आपको इस बात की फिक्र नहीं रहेगी की आपका बच्चा बाहर के माहौल में ढल पायेगा या नहीं।
  • आपके बच्चे किसी गलत संगत में नहीं पड़ेंगे। खासतौर से जिन्हें लगता है की उनकी बेटी या बेटा प्यार व्यार को छुपा रहा है, आपको ऐसी परिस्थिति से गुजरना नहीं पड़ेगा।
  • उन्हें रिश्तो की अहमियत का अहसास होगा तो वो कभी गलत कदम नहीं उठाएंगे और अगर गलती होगी तो आपसे छुपायेंगे नहीं क्यों की वो जानते है की आपसे बेहतर उनकी मदद कोई और नहीं कर सकता है।

आज इस बात पर गौर जरूर करना की क्यों 13-14 साल की उम्र में आते आते हर लड़का लड़की प्यार को अपना सबकुछ मान लेता है, क्यों वो आपसे ये छुपाते है ? क्यों आपकी बेटी या बेटा किसी के बहकावे में आकर आपकी बदनामी की भी परवाह नहीं करते है। इन सभी का समाधान है बच्चो की समय समय पर अच्छी परवरिश और रिश्तो की अहमियत।

दोस्तों ये थी मेरी एक छोटी सी कोशिश आपको ये समझाने की की क्यों आपके बच्चे आपसे दूर होते जा रहे है और आज तो प्यार का दिन मनाया जा रहा है। हर माँ बाप के मन में ये सवाल जरूर है की कही उनकी बेटी या बेटा छुपकर कोई गलत काम तो नहीं कर रहा। आप सिर्फ उन्हें अच्छी परवरिश दे वो आपको कभी धोखा नहीं देंगे ये मेरा विश्वास है।

आज की पोस्ट रिश्तो की अहमियत अगर अच्छी लगे तो शेयर जरूर करे। कमेंट और सब्सक्राइब करना न भूले।

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shangri la ghati ka secret -धरती की ऐसी जगह जहा महामुनि तपस्या में आज भी लीन है

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shangri la ghati in hindi का secret आज भी एक अजूबा है। संग्रीला घाटी के बारे में हम सबने कही न कही सुना ही होगा। कुछ लोगो के अनुसार यही सिद्धाश्रम है तो कुछ लोग मानते है की धरती पर दूसरे आयाम की एक कड़ी है संग्रीला घाटी। हमने कई बार सुना है की हिमालय में आज भी एक ऐसी जगह है जो आमजन से बिलकुल परे है और सामान्य इंसान वहां तक पहुँच नहीं सकता सिर्फ 3 तत्वो से युक्त शरीर या कोई योगी और सिद्ध ही वह तक पहुँच सकता है।

सच बहुत कम लोग जानते है मगर जिन लोगो ने kaal vigyan in hindi ki book me इसका अनुभव किया है उनके अनुसार “shangri la ghati धरती पर वह स्वर्ग है जहा पर उम्र थम जाती है। दूसरे आयाम के साथ ही ये सिद्धाश्रम है जहा पर उच्च श्रेणी के सभी संत आज भी तपस्या रत है।”

shangri la ghati ka secret

shangri la ghati के बारे में हम बात करते है तो हमारे मन में ये सवाल होना लाजमी है की आखिर धरती पर दूसरे आयाम जैसा कुछ कैसे है जो सामान्य दृस्टि से ओझल है। संग्रीला घाटी का रहस्य हमारे धरती पर ही स्थित है भारत और तिब्बत के मध्य एक गुप्त स्थान है जहाँ पर आज भी सभी दिव्य जड़ी बूटिया विद्यमान है।

प्राचीन काल में जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे तब श्री हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लायी गई थी वो भी संग्रीला घाटी का ही एक भाग था इस हिसाब से अनुमान लगा सकते है की ये हिमालय का ही एक भाग है जो वर्तमान में तिब्बत और भारत की सीमा पर है। सबसे बड़ी बात चीन भी शायद इस बात से अनभिज्ञ नहीं है इसीलिए वो इस पर कब्ज़ा ज़माने के लिए आजकल भारत पर दबाव बना रहा है।

shangri la ghati का secret आमजन से है बिलकुल छुपा हुआ

जिस प्रकार वायु मंडल में बहुत से स्थान हैं जहाँ वायु शून्यता रहती है,उसी प्रकार इस धरती पर अनेक ऐसे स्थान है जो भू हीनता के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। भू हीनता और वायु शून्यता वाले स्थान चौथे आयाम से प्रभावित होते हैं। ऐसे स्थान देश और काल से परे होते हैं। यदि उनमें कोई वस्तु या व्यक्ति अनजाने में चला जाय तो इस तीन आयाम वाले स्थूल जगत में उसका अस्तित्व लुप्त हो जाता है। वह वस्तु इस दुनिया से गायब हो जाती है।

ऐसी ही तिब्बत और अरुणांचल की सीमा स्थित shangri la ghati है। लेकिन भू हीनता और fourth dimension से प्रभावित होने के कारण वह घाटी अभी तक रहस्यमयी बनी हुई है। वह इन चर्म चक्षुओं से दिखाई नहीं देती है। ऐसा माना जाता है कि इस घाटी का सम्बन्ध अंतरिक्ष के किसी लोक से है।

इस विषय से सम्बंधित एक प्राचीन पुस्तक है-काल विज्ञान। तिब्बती भाषा में लिखी यह पुस्तक तवांग मठ के पुस्तकालय में विद्यमान है। काल विज्ञान के अनुसार इस तीन आयाम वाली दुनियां की हर चीज़ देश,काल और निमित्त से बंधी हुई है। लेकिन संग्रीला घाटी में काल नगण्य है। वहां प्राण,मन और विचार की शक्ति एक विशेष सीमा तक बढ़ जाती है। शारीरिक क्षमता और मानसिक चेतना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

shangri la ghati का रहस्य-उम्र जैसे थम जाती है

काल की नगण्यता के फलस्वरूप वहां आयु अति धीमी गति से बढ़ती है। यदि किसी व्यक्ति ने उसमे 25 वर्ष की उम्र में प्रवेश किया है तो उसका शरीर लंबे समय तक युवा बना रहेगा।

स्वर्गीय वातावरण में डूबी हुई यह घाटी एक कालंजयी की इच्छा सृष्टि है। जो लोग इस घाटी से परिचित हैं उनका कहना है कि प्रसिद्द योगी श्यामा चरण लाहिड़ी के गुरु अवतारी बाबा जिन्होंने आदि शंकराचार्य को भी दीक्षा दी थी, संग्रीला घाटी के किसी सिद्ध आश्रम में अभी भी निवास कर रहे हैं। जब कभी आकाश मार्ग से चल कर अपने शिष्यों को दर्शन भी देते हैं।

shangri la ghati में है तीन मठो का अस्तित्व

यहाँ के तीन साधना केंद्र प्रसिद्द हैं। पहला है-“ज्ञानगंज मठ”, दूसरा है-“सिद्ध विज्ञान आश्रम” और तीसरा है-” योग सिद्धाश्रम”। यहाँ पर दीर्घजीवी,कालंजयी योगी अपने आत्म शरीर से निवास करते हैं ।सूक्ष्म शरीर से विचरण करते हैं और कभी कदा स्थूल शरीर भी धारण कर लेते हैं। स्वामी विशुद्धानन्द परमहंस जो सूर्य विज्ञान में पारंगत थे ज्ञानगंज मठ से जुड़े हुए थे।

इस संग्रीला घाटी में रहने वाले योगी आचार्य गण संसार के योग्य शिष्यों को खोज खोज कर इस घाटी में लाते हैं और उन्हें दीक्षा देकर पारंगत बना कर फिर इसी संसार में ज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए भेज देते हैं।

इन तीनों आश्रमों के आलावा वहाँ तंत्र के भी अनेक केंद्र हैं जहाँ उच्च कोटि के कापालिक और शाक्त साधक निवास करते हैं। इसी प्रकार बौद्ध लामाओं के भी वहां मठ हैं। उनमें रहने वाले साधक स्थूल जगत के निवासियों से अपने को गुप्त रखे हुए हैं।

shangri la ghati में real life experience:

एक योगी के अनुभव के अनुसार जब उसने संग्रीला घाटी में प्रवेश किया तब वहां पर ना सूर्य का प्रकाश ना चंद्रमा की लालिमा। वहां पर वातावरण में एक दूधिया प्रकाश फैला हुआ है जिसके बारे में कोई नहीं जानता है।

मेने वहां पर लामा ( तिब्बती साधु ) के साथ जब प्रवेश किया तब वहां पर मुझे एक दिव्य प्रकाश की अनुभूति हुई और अचानक ही दर्जनों युवतियां प्रकट हो गई।

उनकी उम्र जैसे थम ही गई थी। सभी के चहरे अपूर्व तेज से दमक रहे थे और एक विलक्षण शांति छाई थी वहां पर “युवतियों के हाव भाव से ऐसा लग रहा था कि वे किसी के आने की प्रतीक्षा कर रही हैं। मेरा अनुमान गलत नहीं था।

थोड़ी ही देर बाद देखा की एक तेज पुंज सहसा वहां प्रकट हुआ। अद्भुत था वह प्रकाश पुंज! प्रकाश पुंज धीरे धीरे आश्रम के भीतर के ओर जाने लगा। युवतियां भी उसके पीछे पीछे चलने लगीं। मेरे उस लामा से पूछने पर उसने बताया कि यह आत्म शरीर है। योगियों का आत्म शरीर ऐसा ही होता है। ये युवतियां योग कन्यायें हैं।

कई जन्मों की साधना के बाद इन्होंने इस दिव्य अवस्था को प्राप्त किया है। योग में इसी को कैवल्य अवस्था कहते हैं। ये सब भी आत्म शरीर धारिणी हैं। लेकिन विशेष अवसर के कारण इन्होंने भौतिक देह की रचना कर ली है।”

आत्म शरीर को उपलब्ध योगत्माएँ इच्छा अनुसार कभी भी भौतिक देह की रचना कर सकती हैं।ये था उस योगी का अनुभव जिसने वहांपर प्रवेश किया। माना जाता है की सभी दिव्य, उच्च श्रेणी के संत और योगी अपनी उम्र जीने के बाद संग्रीला घाटी में प्रवेश करते है। हम अग्नि त्राटक के बाद सिद्धाश्रम / संग्रीला घाटी में प्रवेश कर पाने योग्य बन जाते है।

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संग्रीला घाटी का रहस्य क्या है सिधाश्रम :

सिद्धाश्रम के बारे में हम सबने प्राचीन सिद्धियों के किस्सो में जरूर सुना होगा। ऐसा कहा जाता है की अपना जीवन पूरा होने के बाद सिद्ध योगी और ऋषि अपना शेष जीवन ( जब तक उन्हें मोक्ष या लक्ष्य न मिल जाता ) वह बिताते है।

वो कभी भी वहां से भौतिक संसार में विचरण कर सकते है। एक दिव्य संसार जहा कोई दुःख नहीं कोई चिंता नहीं उम्र का कोई पड़ाव नहीं है तो चारो तरफ बस शांति और दिव्यता जिसमे हम अपने आप को ज्यादा से ज्यादा दिव्य बनाते है।

दोस्तों आज की पोस्ट आपको कैसी लगी। हमारा भारत देश वाकई काफी गौरवमय इतिहास लिए हुए है। हमें सब्सक्राइब करना न भूले और आज की पोस्ट shangri la ghati का रहस्य पर अपनी राय जरूर दे।

How to Astral Travel in Dreams top 5 Working tips and safety Guide

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Astral projection dream travel में हम आज बात करेंगे How to astral travel? हम क्या अनुभव करे जिससे हमारी पहली यात्रा सफल रहे. Astral travel in dreams के दौरान सामान्य इंसान को क्या क्या अनुभव होने चाहिए. क्या हम हमेशा एक सही अनुभव कर पाते है.

नहीं क्यों की कोई भी काम जब शुरू में किया जाता है तो बिना किसी Path decide के किया जाता है. यही वजह है की एक और जहा ज्यादातर को असफलता मिलती है वही दूसरी ओर बहुत कुछ सिखने को मिलता है. इसलिए ज्यादातर को अपना पहला अनुभव याद रहता है.

Astral travel tips में हम आज कुछ बेसिक तथ्य की बात करेंगे की हमें Dream travel astral projection के दौरान किन बातो का ध्यान रखना चाहिए, किन किन बातो की उम्मीद करनी चाहिए और किन बातो को समझना चाहिए जिससे हमारा पहला अनुभव एक यादगार अनुभव बन जाये. आइये जाने बेसिक astral travel tips के बारे में.

Astral Travel in Dreams

लेकिन क्या कुछ ऐसा उपाय है जो हमारी success के शत प्रतिशत सफलता की hope बढ़ा दे. हालाँकि sure success के लिए बहुत सी बातो का knowledge पहले से होना जरुरी है लेकिन ये संभव नहीं क्यों की शुरुआत हमेशा अधूरे ज्ञान से होती है जो सफलता का सही मार्ग दिखाती है.

निर्देश और मन की कल्पना सपनो को साकार बनाती है. इसके लिए static mind और शांत मन का होना बेहद जरुरी है. आज की पोस्ट में हम बात करेंगे की कैसे निर्देशो का ध्यान रख कर हम सूक्ष्म की यात्रा को यादगार अनुभव बना सकते है.

How to Astral Travel in Dreams

Astral projection एक ऐसी psychic ability होती है जिसमे हमारी spirit इस physical body को छोड़ कर universe में कही भी घूम सकती है. कुछ लोग meditation or trance states जैसी अवस्था में अपने शरीर से बाहर विचरण का अनुभव करते है जो की एक लम्बे समय के अभ्यास के बाद आता है.

वही कुछ लोग इसे सपनो की दुनिया के दौरान भी अनुभव करते है. ये अवस्था Lucid dream की होती है जिसमे उन्हें ये पता नहीं होता है की वे क्या कर रहे है.

अगर आप astral travel in dreams का अनुभव करते भी है तो भी सुबह उठने के बाद आपको कुछ याद नहीं रहता है. इसकी वजह है आपका उठने के बाद रिकॉल ना करना. हम इसी वजह से सपनो को भूल जाते है या फिर रात को सपने में क्या देखा ये सब चीजे भूल जाते है.

ऐसे कई tips है जिन्हें follow करते हुए आप Unconscious Astral Projection in Dreams की प्रक्रिया को समझ सकते है.

आपके सपने hyper-real quality के हो सकते है लेकिन अगर आप सोने के बाद खुद को कही किसी जगह गया हुआ और लोगो से बाते करता हुआ महसूस करते है तो ये संकेत है आपके Out of body experience का. अगर इस दौरान आपको लोगो की जगह light body, शरीर के चारो और प्रकाश दिखे तो ये भी एक संकेत है.

कई बार हमें ऐसा महसूस होता है की हम किसी अनजानी जगह पर है और घूम रहे है. अचानक ही हम खुद को बिस्तर पर पाते है. हमें लगता है की ये हमारा सपना है लेकिन हकीकत में ये Dream travel astral projection का एक अनुभव होता है.

पहली बार अभ्यास के दौरान क्या उम्मीद रखनी चाहिए

अगर आप पहली बार अभ्यास कर रहे है तो इसे लेकर बहुत ज्यादा उम्मीद न रखे. इस दौरान जितना हो सके शांत रहे और पलो को महसूस करे. आपके आसपास क्या हो रहा है उन सभी गतिविधि को अनुभव करते रहे. First time astral projection के दौरान आपको क्या उम्मीद रखनी चाहिए अपने आप से पहला सवाल पूछे की

  • क्या आप इस क्षेत्र में एक्सपर्ट है ?
  • क्या आप सूक्ष्म शरीर को कही भी भेजने में सक्षम है ?

पहली बार Astral Travel in Dreams के अभ्यास के लिए बैठे और मन में एक्सपर्ट होने की धारण बैठा ले ये हमारी पहली गलती है. चूँकि एक वक़्त ऐसा भी आता है जब आप सक्षम भी होते है और expert भी, मगर शुरू से ये धारण बनाने से बचे. खुद स्वीकार करे की आपका ये पहला experience है और इसे आप बेहद एन्जॉय करने वाले है.

Astral travel के लिए right time सुबह उठते ही या फिर सोते वक़्त होता है. क्यों की इसी वक़्त आपका मन सबसे ज्यादा शांत होता है. इसका अभ्यास बैडरूम में करे तो सबसे अच्छा रहता है. इसके लिए आपका शरीर जितना हो सके शांत रहना चाहिए और माइंड पूरी तरह एक्टिव तभी आप सही से अनुभव कर पाएंगे.

पहली बार अनुभव कैसा रहता है

जब आप पहली बार feel करते है तब आप खुद को बेहद relax महसूस करते है. आप चीजो को चलते, घूमते हुए और प्रकाश के तीव्र घेरे महसूस कर सकते है. हालाँकि हर इंसान को अनुभव अलग अलग होते है जिसके लिए उनकी mentality और मन की अवस्था responsible होती है.

इसके negative experience भी हो सकते है. इसलिए शुरू में अपने मस्तिष्क पर अनावश्यक दबाव ना डाले.

कपड़ो का रखे ध्यान

जब आप astral travel in dreams शुरू करे तो ध्यान रखे की आपने कपडे ढीले पहन रखे हो. कोशिश रखे की जहा तक हो सके कम से कम कपडे हो या पहले ही नहीं. जब आप सोते है तो आपके शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा निचे चला जाता है इसलिए आप एक सूती कम्बल जरूर ओढ़ ले. आपका पूरा शरीर इस दौरान किसी तरह की कसावट में नहीं होना चाहिए.

जितना ज्यादा आप खुद को रिलैक्स रख पाते है आपका अनुभव उतना ही बेहतर बन जाता है. एक बेहतर Out of body experience के लिए आपको अपने body को maximum level तक relax रखना होता है जबकि आपका मस्तिष्क पूरी तरह active होगा.

यात्रा से पहले के निर्देश

जब आप Astral Travel in Dreams के अनुभव करते है उस वक़्त आपका भौतिक शरीर और चेतन मन पीछे रह जाता है सूक्ष्म की यात्रा के दौरान आपके खुद के vibration, experience, test होते है. इसलिए ये harmful नहीं है क्यों की कुछ लोगो का मानना होता है की सूक्ष्म यात्रा के दौरान आपके भौतिक शरीर में कोई अन्य प्रवेश कर सकता है.

इस बात को मन से निकाल दे सुबह कोई भी आपके physical body में enter नहीं कर सकता है सिवाय आपके. जब भी आपको कुछ ऐसा महसूस होने लगता है आपका Astral body वापस Physical body में प्रवेश कर लेता है.

शांत रहे मगर सोये नहीं

खुद को शांत रखना सूक्ष्म की यात्रा का महत्वपूर्ण कदम है जिसके लिए लिखे हुए निर्देश काफी सहायक रहते है जब तक की ये आपकी आदत ना बन जाये. इसके लिए instruction को लिख कर तब तक दोहराना जब तक की वो हमारे daily routine में शामिल न हो जाये. जब साँस लेते और छोड़ते है इस वक़्त भी मन को शांत रखे, ध्यान रखे सो ना पाए.

आपकी आंखे बंद होने लगती है और आप सोने की इच्छा करने लगते है. जब Astral Travel in Dreams की शुरुआत करे तो अपने सूक्ष्म के vibration महसूस करने की कोशिश करे. सूक्ष्म के शुरुआती अनुभव में जब आप अपनी सूक्ष्म में आंखे खोलने का प्रयास करते है तो इसके प्रत्युत्तर में भौतिक शरीर की भी आंखे खुलती है.

मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का पथ. सूक्ष्म की यात्रा से मानसिक और आध्यात्मिक शांति सुख के नए नए अनुभव होते है. इसलिए अपने लिए वक़्त निकालिये और अनुभव करे आप वहां होंगे जहा आप खुद को देखना चाहते है.

How to Consciously Travel

Conscious dreaming यानि जागते हुए भी सपने देखना. इसे हम Lucid dreaming के नाम से भी जान सकते है और ये सुनने में मुश्किल लग रहा है लेकिन बहुत से लोग है जो लगातार अभ्यास के जरिये खुद को जागते हुए सपने के दौरान अपनी मर्जी से ये Physical body छोड़कर Astral plane में कही भी ट्रेवल कर लेते है.

Astral travel का अनुभव हम जागते हुए भी कर सकते है और सपने के दौरान सोते हुए भी कर सकते है. ये निर्भर करता है की आप खुद को सोने के बाद कितना control और गाइड कर पाते है. आइये कुछ ऐसे खास पॉइंट के बारे में जान लेते है जो अभ्यास के दौरान आपके काम आएंगे.

Practice with intentional travel and lucid dreaming separately

Astral travel and lucid dreaming ये दोनों अलग अलग skills है इसलिए सबसे पहले आपको इन दोनों में फर्क पता होना चाहिए. आप इन दोनों को अलग अलग सीख सकते है बशर्ते आप दोनों को मिक्स ना करने लगे. सबसे पहले तो आपको जागते हुए astral travel का अनुभव करना है और फिर जब सोने का टाइम आये तब आप खुद को lucid Dreaming के लिए ready कर ले.

Astral Travel in Dreams का अनुभव हमेशा unconsciousness state में होता है और जरुरी नहीं की ये स्थिति तभी बनती है जब आप सो जाते है. जागते हुए भी इसका अभ्यास किया जा सकता है क्यों की Consciousness में एक state ऐसी भी आती है जब हम खुद को जागते हुए Trance state में लम्बे समय तक बनाए रख पाते है.

जागते हुए इस अवस्था को हम meditation, trance, or hypnosis के दौरान प्राप्त कर सकते है. ये वो अवस्था है जिसमे हमारा अवचेतन मन ज्यादा से ज्यादा फ्री हो जाता है. इस अभ्यास को तब तक दोहराए जब तक की आप दोनों को अलग अलग करने में सफल ना हो जाए.

State your intention every night before sleep

एक बार जब आपको दोनों अभ्यास को अलग अलग करने में सफलता मिल जाए तो अब बारी है दोनों ही अभ्यास को एक साथ जोड़ने की. ऐसा करने के लिए जब भी रात को सोने जाए तब एक Intention सेट कर ले. जब भी सोने से पहले आप खुद को पूरी तरह relax कर ले इस तरह की सोच को दिमाग में डालना शुरू कर दे. आपको एक सोच बनानी है जैसे की

आज की रात में पूरी चेतना के दौरान सपनो में astral travel करूँगा

 ऐसा आपको कई बार दोहराना है ताकि आपका Unconscious mind इस बात को accept कर ले. ऐसा सिर्फ एक या दो रात में करना काफी नहीं है. आपको इसके लिए काफी अभ्यास करना होगा. आप चाहे तो मैडिटेशन या फिर दिनभर के कामो के दौरान जब भी आप खुद के लिए समय निकाले ये भावना दे सकते है.

Once in your lucid dream, leave your body

एक बार आप lucid dreaming state में enter कर जाए तब आपको अपने लिए उस बेस्ट तरीके की तलाश करनी है जो Astral Travel in Dreams में आपकी मदद करेगा. इसके लिए आपको सिर्फ कुछ attempt करने की जरुरत होगी.

जब आप lucid dream state में होते है तब आपके लिए ये मुश्किल नहीं रह जाता है क्यों की lucid dream की अवस्था में हम जो सोचते है वो पूरी तरह हमारी चेतना पर निर्भर होता है.

यही एक वजह है की जल्दी ही आप Astral projection dream travel  का अभ्यास आसानी से कर पाते है.

Top 5 Astral travel tips

सूक्ष्म की यात्रा पहली बार जो इंसान अनुभव करता है वही अनुभव एक अनुभवी इंसान करता है इन दोनों के बिच फर्क सिर्फ इतना सा है की beginner experience में हमें स्थिति का पता नहीं होता है की अनुभव किया कैसे जाये और experience को handle कैसे करे.

पांचवे आयाम के इस रोचक अनुभव की यात्रा करने से पहले ये जरूरी है की आपको basic knowledge का और instruction का ज्ञान हो. आइये जानते है उन 5 बातो को जिन्हें ध्यान में रख कर आप भी यादगार सूक्ष्म का अनुभव कर सकते है.

प्रक्रिया को समझना

ज्यादातर लोग शुरुआत करते वक़्त कोरे कागज की तरह होते है. उन्हें प्रक्रिया का सिद्धान्त तक पता नहीं होता है इसलिए यात्रा करने से पहले इससे संबधित आवश्यक जानकारी जुटाना जरुरी है अगर किसी कार्य की बुनियादी बाते पता चल जाये तो अनुभव में आसानी रहती है.

वही दूसरी ओर अगर आपने बिना किसी जानकारी के Astral Travel in Dreams की शुरुआत एक adventure समझ कर की तो हो सकता है की आप फ़ैल हो जाये या फिर किसी मुसीबत में फंस जाये.

सही ज्ञान / निर्देश की पहचान

किसी भी ज्ञान के लिए गुरु की जरुरत होती है. ज्यादातर लोग समझते है की सिर्फ पढ़ लेने मात्र से वो किसी काम में सफल हो सकते है. ये असफलता का सबसे बड़ा कारण है. आपको ये बात अच्छे से समझनी होगी की ये एक कला है हुनर है जिसके लिए आपको गंभीरता से मन और शरीर दोनों की लंबे वक़्त तक अभ्यास की जरुरत होगी.

आपके संयम की असली परीक्षा सही मायने में होती है तब तक जब तक की सही अनुभव ना होने लगे. इसके लिए योग्य गुरु का चुनाव करे जो आपको सही रास्ता दिखा कर पथ प्रदर्शक का कार्य कर सके.

सही निर्देशो का चुनाव करे

सूक्ष्म के अनुभव की प्रक्रिया को तेज करने के लिए आप कुछ माध्यम का चुनाव कर सकते है. Astral travel tips में शुरुआती अनुभव करने वाले निर्देशित आवाज को सुन कर मस्तिष्क को सही दिशा दे सकते है. इसके लिए आप खुद की रिकॉर्ड की गई आवाज को सुन सकते है.

निर्देशो को सही तरीके से मस्तिष्क तक पहुंचा कर आप प्रक्रिया को गति प्रदान कर सकते है. सोने की अवस्था में निर्देशो को सुनकर आप मस्तिष्क में उठने वाले अनावश्यक विचारो को भी दूर कर सकते है.

सुने सुनाये अनुभव करने से बचे

ज्यादातर लोग जब अभ्यास करते है तो उम्मीद करते है की ये अनुभव हो. दुसरो के अनुभव आपको कैसें हो सकते है क्यों की हर इंसान की मानसिकता उसकी समझ अलग स्तर की है. Astral Travel in Dreams ही नहीं किसी भी अभ्यास में असफलता के सबसे बड़े कारण में से एक यही कारण है.

जब भी आप अभ्यास में ये सोचते है की ये अनुभव हो आप वापस भौतिक शरीर से जुड़ जाते है. अनुभव में देखे तो

हमारा अनुभव बुलेट ट्रैन की तरह होता है जिसकी गति तो बहुत तेज होती है मगर एक बटन दबाते ही उसकी गति रुक जाती है हमारे साथ इसे देखे तो ट्रैन की गति हमारे अवचेतन मन से जुडी है और जब विपरीत विचार ( चेतन मन ) या तर्क उत्पन होता है तो आप वापस वही आ जाते है जहा से सब शुरू किया था.

ये अनुभव त्राटक में हर किसी के साथ होता है.

सूक्ष्म निर्देशक को सुनने की कोशिश करे

जिस तरह से काम करते वक़्त आपका मस्तिष्क / मन / दिल आपके लिए पथ प्रदर्शक का कार्य करता है ठीक वैसे ही हर किसी का एक सूक्ष्म निर्देशक होता है आवश्यकता है तो बस उसे पहचानने और सुनने की. अपने निर्देशक को Astral Travel in Dreams के अभ्यास के दौरान ढूंढे और पांचवे आयाम में यात्रा का आनंद ले. ज्यादतर निर्देशक आपको बताते है की कैसे अपने लिए सही निर्देशो का चुनाव करे और सही रास्ता चुने.

अब तो आप समझ ही गए होंगे की कोई भी अभ्यास बिना सही निर्देशो के करने की कोशिश कितनी खतरनाक हो सकती है. बिना सही निर्देशो के सफलता के आसार सिर्फ 1% हो सकते है लेकिन नुकसान 100% होता है.

इसलिए अपने लिए खुद सही निर्देशो का चुनाव करे How to dream become true में मेने निर्देशो को साकार करने के उपाय बताये है जिनसे आपको काफी सहायता मिलेगी. खुद भी निर्देश बना सकते है जिन्हें दोहराकर आप बेहतर अनुभव कर सकते बशर्ते कॉपी की कोशिश ना की गई हो.

lucid astral projection dreams

Astral projection dream travel के अभ्यास के दौरान आपको कुछ सावधानियां रखनी होगी. ज्यादातर लोग Out of body experience के खिलाफ होते है क्यों की उनकी नजर में demonic possession या फिर Astral plane में खो जाने का डर हमेशा बना रहता है.

इस तरह का होना न के बराबर है. हम कई बार सोते समय जाने अनजाने में इसका अनुभव करते है फिर चाहे हमें उसके बारे में पता हो या ना हो. इसलिए इस बात को दिल से निकाल दे की शरीर से बाहर विचरण के दौरान आप वापस नहीं आ पाएंगे.

Astral projection पूरी तरह से safe process है क्यों की जब भी कुछ गलत होता है या फिर हमें वापस शरीर में जाने की जरुरत महसूस होती हम उसी पल वापस लौट आते है.

इसका एक side effect या यू कहे की negative effect देखा जा सकता है. जो लोग इस अनुभव को बार बार करते है उनके लिए भौतिक संसार के मायने बदल जाते है.

आपने देखा होगा की अभ्यास के बाद हम भौतिक दुनिया में खुद का जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते है. बार बार मन उसी astral plane, Trance state में लगा रहता है. ऐसा होना सही नहीं है. आप अभ्यास करते हुए उससे कितना प्रभावित होते है ये पूरी तरह से आपका फैसला है.

When Dream Travel Isn’t Astral Travel risk

ज्यादातर लोगो द्वारा Astral Travel in Dreams के दौरान  की जाने वाली सबसे बड़ी गलती यही होती है की वे lucid dream और astral travel में फर्क पता नहीं कर पाते है. dream travel एक अलग concept है और astral travel उससे कही अलग अभ्यास है. आप सपनो में चल सकते है लेकिन ये Astral projection experience नहीं होगा.

अगर आप सपने के दौरान उन यादो को देखते है जो आपके साथ हो चुकी है जैसे की किसी तरह की यात्रा का अनुभव तो ये आपका सपने में यात्रा है ना की सूक्ष्म शरीर की यात्रा.

  • इस तरह के सपने जो बार बार बदलते न हो.
  • आपने जिस जगह लम्बा समय बिताया हो ऐसी जगह को देखना astral projection नहीं हो सकता है.
  • अगर आप ऐसे लोगो को देखते है जिन्हें आप लम्बे समय से देखते आ रहे है और वे जरा सा भी बदले नहीं है तो इसका मतलब आप सपने देख रहे है.
  • daily life की एक्टिविटी को करते हुए खुद को महसूस करना सिर्फ आपका सपना है.
  • अगर आप एक जगह से दूसरी जगह आने जाने के लिए किसी ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे है.
  • अगर आपका बात करने का तरीका सपने में भी वैसा ही है जैसा normal life में है तो भी आप सिर्फ सपने में है.

ये सब संकेत है की जो आप अनुभव कर रहे है वो सिर्फ आपका सपना है ना की किसी तरह का कोई अनुभव. इसका आकलन कर आप आसानी से ये पता कर सकते है की जो अपने देखा था वो क्या था.

Read : भगवान महादेव का शक्तिशाली त्रिनेत्र खोलने का मंत्र और साधना का विधान

Traveling in Your Dreams final conclusion

Dream travel on the astral plane एक अद्भुत अभ्यास है. ये हमें खुद को समझने का मौका देता है. हम वो सब समझते है जिसे सामान्य जिंदगी में समझना संभव नहीं होता है. इसका मतलब ये नहीं की आप भौतिक लाइफ को ignore करना शुरू कर दे.

Dream travel astral projection के अभ्यास के बाद लाइफ को देखने का नजरिया जरुर बदलता है लेकिन Astral Travel in Dreams का आपके daily लाइफ पर कोई negative impact नहीं पड़ना चाहिए.

जितना महत्त्व आपका अध्यात्मिक होने का है उतना ही आपके इस भौतिक संसार में रहने का है.

Spiritual path पर आगे बढ़ना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन आपको अपनी लाइफ से भागना भी नहीं चाहिए. अगर आप इन tips को follow करते हुए अभ्यास करते है तो यक़ीनन आपका अभ्यास न सिर्फ सही तरीके से होगा बल्कि अनुभव भी अच्छे होंगे.

सफलता के लिए विद्यार्थियों को ध्यान रखनी चाहिए आठ बातें!!

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सफलता के लिए चाणक्य नीति मेंऐसी कई बातो का जिक्र किया गया है जो हर विद्यार्थी के लिए सफलता का पहला और मुख्य कदम होता है।

हमें सफलता के लिए इन बातो को ध्यान रखना चाहिए। चाणक्य नीति में हर विनय विषय पर कुछ ऐसी बातो का वर्णन मिलता है जो  इंसान के उन्नति और पतन का कारण बनती है।

आइये जानते है सफलता के लिए चाणक्य नीति की कुछ ऐसी ही बातो को।

सफलता के लिए चाणक्य नीति

इन नीतियों का पालन करके कोई भी विद्यार्थी उत्तम तथा सही रूप से शिक्षा प्राप्त करने में सफल हो सकता है और अपनी जिंदगी में हर मुकाम हासिल करने की काबिलियत हासिल कर सकता है।

इन्ही नीतियों में से एक के बारे में हम विस्तार से आपको बताएँगे ताकि आप इन्हें अच्छे से समझ सकें और इन्हें अपना कर अपनी जिंदगी में अहम् बदलाव ला सकें :

“कामक्रोधौ तथा लोभं स्वायु श्रृड्गारकौतुरके।

अतिनिद्रातिसेवे च विद्यार्थी ह्मष्ट वर्जयेत्।।”

अर्थात- विद्यार्धी के लिए आवश्यक है कि वह इन आठ दोषों का त्याग करे:

  • 1. काम,
  • 2. क्रोध
  • 3. लोभ
  • 4. स्वादिष्ठ पदार्थों या भोजन
  • 5. श्रृंगार
  • 6. हंसी-मजाक
  • 7. निद्रा (नींद)
  • 8. और अपनी शरीर सेवा में अधिक समय न दे।

इन आठों दोषों के त्यागने से ही विद्यार्थी को विद्या प्राप्त हो सकती है। अब इन दोषों के बारे में थोडा विस्तार से जानते हैं ताकि आप इन्हें ठीक से समझ सकें :

सफलता के लिए चाणक्य नीति-विद्यार्थी याद रखे इन बातो को

सफलता के लिए चाणक्य नीति मे विद्यार्थी को कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए। प्राचीन काल में जब गुरुकुल की परम्परा थी तब इन नियम का कड़ाई से पालन किया जाता था। पर बदलते वक़्त और शिक्षा के परिवेश में ये सब बाते नए मायने में बदल दी गई। आइये जानते है सफलता के लिए चाणक्य नीति में कुछ ऐसी बाते जो विद्यार्थी को ध्यान रखनी चाहिए।

1. काम भावनाओं से बचें

जिस व्यक्ति के मन में काम वासना उत्पन्न हो जाती है, वह हर समय अशांत रहने लगता है। ऐसा व्यक्ति अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए सही-गलत कोई भी रास्ता अपना सकता है। कोई विद्यार्थी अगर काम वासना के चक्कर में पड़ जाए, तो वह पढ़ाई छोड़कर दूसरे कामों की ओर आकर्षित होने लगता है। उसका सारा ध्यान केवल अपनी काम वासना की पूर्ति की ओर लगने लगता है और वह पढ़ाई-लिखाई से बहुत दूर हो जाता है। इसलिए विद्यर्थियों को ऐसी भावनाओं के बचना चाहिए।

2. क्रोध से करे तौबा और संयम रखना सीखे

क्रोध में आदमी अँधा हो जाता है, उसे सही गलत की पहचान नहीं रह जाती है, और जो व्यक्ति क्रोधी स्वभाव है और छोटी से छोटी बात पर भी गुस्सा होकर कुछ ऐसा कर बैठता है जिसके लिए आगे जाकर पछताना पड़े वैसे लोग क्रोध आने पर किसी का भी बुरा कर बैठते है।

ऐसे स्वभाव वाले व्यक्ति का मन कभी भी शांत नहीं रहता।

विद्या प्राप्त करने के लिए मन का शांत और एकचित्त होना बहुत जरूरी होता है। अशांत मन से शिक्षा प्राप्त करने पर मनुष्य केवल उस ज्ञान को सुनता है, उसे समझ कर उसका पालन कभी नहीं कर पाता।

इसलिए शिक्षा प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी होता है।

3. कभी भी दूसरी चीजो के पीछे लोभ ना करे

लालच बुरी बला है, हम सबने से सुना और पढ़ा है, लालची इंसान अपने फायदे के लिए किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और किसी के साथ भी धोखा कर सकते हैं।

ऐसे व्यक्ति सही-गलत के बारे में बिलकुल नहीं सोचते।

जिस व्यक्ति के मन में दूसरों की वस्तु पाने या हक़ छीनने की भावना होती है और हमेशा उसे पाने की योजना बनाने में ही लगा रहता है।

ऐसा व्यक्ति कभी भी अपनी विद्या के बारे में सतर्क नहीं रह सकता और अपना सारा समय अपने लालच को पूरा करने में गंवा देता है। विद्यार्थी को कभी भी अपने मन में लोभ या लालच की भावना नहीं आने देना चाहिए।

4. जिव्हा के स्वाद का गुलाम ना बने

जिस इंसान की जीभ उसके वश में नहीं होती, वह हमेशा ही स्वादिष्ठ व्यंजनों की खोज में लगा रहता है।

ऐसा व्यक्ति अन्य बातों को छोड़ कर केवल खाने को ही सबसे ज्यादा अहमियत देता है। कई बार स्वादिष्ठ व्यंजनों के चक्कर के मनुष्य अपने स्वास्थ तक के साथ समझौता कर बैठता है।

विद्यार्थी को अपनी जीभ पर कंट्रोल रखनी चाहिए, ताकी वह अपने स्वास्थय और अपनी विद्या दोनों का ध्यान रख सके।

5. श्रृंगार (सजना-सवरना) और अपनी शरीर सेवा में अधिक समय न दे

जिस विद्यार्थी का मन सजने – सवरने में लग जाता है वह अपना ज्यादातर समय इन्ही बातों में गवां देता है।

ऐसे व्यक्ति खुद को हर वक्त सबसे सुन्दर और अलग दिखने के लिए ही मेहनत करते रहते हैं, और इसी वजह से हमेश उनके दिमाग में सौंदर्य, अच्छे पहनावे और रहन -सहन से जुडी बातें ही घुमती रहती हैं।

सजने-सवरने के बारे में सोचने वाला व्यक्ति कभी भी एक जगह ध्यान केंद्रित करके विद्या नहीं प्राप्त कर पाता। विद्यार्थी को ऐसे परिस्थितियों से बचना चाहिए।

6. हंसी-मजाक में समय व्यर्थ न करें :

किसी अच्छे विद्यार्थी का एक सबसे महत्वपूर्ण गुण होता है गंभीरता। विद्यार्थी को शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में सफलता पाने के लिए इस गुण को अपनाना बहुत जरूरी होता है। जो विद्यार्थी अपना सारा समय हंसी-मजाक में व्यर्थ कर देता है, वह कभी सफलता नहीं प्राप्त कर पाता।

विद्या प्राप्त करने के लिए मन का स्थित होना बहुत जरूरी होता है और हंसी-मजाक में लगा रहना वाला विद्यार्थी अपने मन को कभी स्थिर नहीं रख पाता।

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7. निद्रा : आवश्यकता से अधिक सोने से बचें

अमूमन स्वस्थ मनुष्य के लिए 6-7 घंटे सोना आवश्यक होता है, विद्यार्थोयों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वे आवश्यकता से अधिक निद्रा से बचें।

अत्यधिक निद्रा से शरीर में हमेशा थकान बनी रहती है और अगर शरीर थका हो तो ध्यान केन्द्रित करना मुश्किल हो जाता है, और अध्ययन के लिए दिमाग का केन्द्रित होना अत्यंत आवश्यक होता है।

आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गयी इन नीतियों को अपना कर हर विद्यार्थी अपने सपने साकार कर सकता है। यह लेख आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं।

प्राचीन समय में विद्यार्थी को शील और संयम सिखाया जाता था। और आज भी इस एक गुण पर सभी बाते निर्भर करती है। ऐसी ही पोस्ट के लिए हमें सब्सक्राइब जरूर करे और आज  की पोस्ट सफलता के लिए चाणक्य नीति पर कमेंट में अपनी राय दे। धन्यवाद !

कॉलेज और स्कूल में आप भी गुजरते है इन पलो से

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आकर्षक व्यक्तित्व कौन नहीं चाहता है। आप दुसरो के बिच खास है और सब आपकी तारीफ करते है इस तरह का ख्याल आपके मन में भी आया होगा।

अक्सर देखने में आता है की ग्रुप में एक बंदा सबका चहेता होता है लडकिया उससे बाते करती है और लड़के उसके साथ घूमना पसंद करते है कुल मिला कर हर कोई सिर्फ उसके साथ अपनी बात शेयर करना चाहता है। ऐसे में हम सबमे ये बात कही ना कही सोचने लायक होती है की यार उस बन्दे में ऐसा क्या है जो हमारे अंदर नहीं है।

तो दोस्तों ज्यादा मत सोचिये आज की पोस्ट में में कुमार आपको कुछ ऐसी बाते बताने जा रहा हूँ जो जानते सब है और पहले भी सुन रखी है पर उन्हें अमल में नहीं ला पाए है। हो सकता है की उन्हें इस तरह का बदलाव ज्यादा परेशान करता हो क्यों की एक व्यक्तित्व से दूसरे व्यक्तित्व में ढलना या फिर अपनी इमेज में बदलाव लाना इतना आसान नहीं है।

आकर्षक व्यक्तित्व

अक्सर लोगो से मिलने के बाद या कुछ एक बार आपको आजमाने के बाद आपकी एक इमेज लोगो के बिच बन जाती है जिसे बदल पाना बहुत मुश्किल होता है। खासतौर से तब जब बात आपकी कमियों को लेकर की जा रही हो।

दोस्तों में भी आप लोगो की तरह ही स्कूल और कॉलेज लाइफ से गुजर चूका हु और मेने इस दौरान बहुत से बदलाव महसूस किये है जो हर स्कूल और कॉलेज लाइफ में हम एक्सपेक्ट करते है।

पर ऐसा क्या होता है की हम उन सपनो को पूरा नहीं कर पाते है जो कॉलेज और स्कूल में देखते है। खासतौर से लड़कियों के बिच मशहूर होना। या फिर यूँ कहे अपनी क्लास में अपनी खुद की खास पहचान चलिए आज की पोस्ट में बात करते है कुछ ऐसे अपनों की जो हमने स्कूल और कॉलेज में देखे।

यार हमें तो कुछ नहीं आता है टीचर हमसे पूछ ना ले

कही न कही आपको भी अपनी क्लास का वो दिन याद आ गया न जब आप क्लास में बिना तैयारी के गए थे पहले दिन हम मस्ती में भूल गए की हमें अमुक चैप्टर या टॉपिक याद भी करना है। दूसरे दिन हम ऐसा शो करते है जैसे टीचर की बाते सीधे हमारे दिमाग में जा रही है पर अंदर से हम रहते है बिलकुल खाली !

है ना ! इसी वक़्त टीचर ने हमसे कुछ सवाल कर लिया तब ऐसे सोचेंगे की पता नहीं कितना बढ़िया उत्तर सोच रहे है और इसके सवाल की इतनी अच्छी व्याख्या देंगे की सर हमसे खुश हो जायेंगे। हकीकत में हम डरते है की टीचर हमसे ही कुछ पूछ ना ले।

यार तू तो स्मार्ट है

क्लास में दोस्त इतने कमीने होते थे की पूछो ही मत। बचपन में याद है जब में स्कूल में था मेरे दोस्त मेरी काफी टांग खिंचाई करते थे।

असल में हम सब नए थे और लड़कियों को छेड़ने के उदेश्य से उनसे बात करते थे। मेरे दोस्त मुझे हमेशा लड़कियों से कुछ न कुछ लेने के लिए कहते थे।

क्यों की लड़कियों से बात करना उनके बस की बात नहीं थी। इसका मुझे एक फायदा हुआ में लड़कियों से बात आराम से करने लगा था। तो अगर आपके साथ भी ऐसा हो तो डरिये मत ना ही नकारात्मक सोच रखे ये टांग खिंचाई आपको लड़कियों के बिच कूल बनाने में मदद करेगी।

भाई वो तुझे ही देख रही है

ये वाकया तो स्कूल और कॉलेज में हर किसी के साथ हुआ ही होगा।

लडकिया कभी दोस्ती की नजर से तो कभी किसी मकसद से लड़को की ओर देखती है और अगर आपका दोस्त उस लड़की को चाहता है तो वो सबसे पहले आपको अपने रास्ते से हटाएगा।

क्यों की कुछ कमीने दोस्त पहले आपकी इमेज उस लड़की के सामने ख़राब करेंगे ताकि आप उस लड़की का ख्याल दिमाग से ही निकाल दो।

कुछ केस में ये इसलिए भी होता है क्यों आपके कमीने दोस्त आपको लव में देखना पसंद करेंगे। खुद का भी काम निकल जायेगा और लड़की पट गई तो हमारा भी भला हो जायेगा ऐसी सोच रखने वाले आपके दोस्त आपको आगे करते है क्यों की उनकी हिम्मत नहीं है।

इसलिए जब भी ऐसा हो आप दिल खोल के उस लड़की से दोस्ती वाले ख्याल रखते हुए बाते करे। अगर लव जैसा कुछ है तो पता भी चलेगा ना भी है तो क्या हुआ दोस्त तो है ना !

वक़्त निकलने के बाद उस पल का अफ़सोस

अक्सर ऐसा सबके साथ होता है की जब हम स्कूल में एंटर होते है तो कुछ आदते और बदलाव हमें काफी परेशान करते है। जैसे हमारी क्लास और क्लास की यूनिफार्म या फिर नियमित खेल या यु कहे की स्कूल में होने वाली खास गतिविधियां।

इन सबमे हम पहले पहल बोझ महसूस करते है मगर एक वक़्त आता है की हम उन पलो को सिर्फ ख्यालो में जीते है। जैसे आपके स्कूल में हुआ कोई मैच जिसमे आप पहले पार्टिसिपेट करते नहीं है और जब मैच होता है तब आपको लगता है की यार ! में होता तो मैच में कुछ अच्छा ही करता।

या फिर साल भर में होने वाली फेयरवेल जिसमे हम पार्टिसिपेट नहीं करते है ज्यादातर शर्म के मारे फिर हमें अफोसोस होता है क्यों की जिसमे पार्टिसिपेट किया वो सबका खास बन जाता है।

और लड़के लडकिया उसे ज्यादा चाहने लगते है। तब आपको कही ना कही ये महूसस हुआ होगा की काश में भी कुछ ऐसा करता जो मेरी पहचान सबके सामने होती।

दोस्तों मेरे बारे में तो इन बातो को सोच रहे है तो बता दू की में बोल्ड किस्म का हूँ। और अगर कोई कुछ कहता है तो उसे करता भी हूँ। हां लास्ट वाली बात का मुझे भी अफ़सोस है क्यों की में सिर्फ पढ़ने में आगे था। खैर अब बात करते है की आजकल लड़को के बिच लड़कियों को लेकर परेशानी क्यों होती है।

क्यों कुछ लड़के लड़कियों के खास बन जाते है और कुछ हीन भावना में जीने की वजह से उनसे दूर भागते है।आकर्षक व्यक्तित्व वाले हमेशा हर फील्ड में आगे रहते है।

मन की बात को दुसरो के सामने बयान ना कर पाना

अक्सर देखने में आया है की हम अपने मन में बहुत कुछ सोचते है दूसरे से शेयर करने के लिए। या फिर जब हम लड़के लडकिया बाते करते है तो बहुत कुछ हमारे दिमाग में चलता रहता है पर उसे शेयर करने में संकोच करते है।

ये सोच कर की दूसरे इस पर क्या रियेक्ट करेंगे या फिर क्या सोचँगे मेरे बारे या फिर ये बात बोलने लायक है भी या नहीं।

ऐसा इसलिए होता है की हम ज्यादा से ज्यादा सोचते रहते है ये बात सही है की हमें सोच समझ कर ही बोलना चाहिए मगर इतना भी क्या सोचना की बात का ही कोई और मतलब निकल जाए। अगर आपके साथ ऐसा होता है तो आपके साथ ये बाते जरूर होती होगी।

आप ग्रुप में बहुत कम ही बोल पाते है और आपके विचार कोई और बोल कर सामने अच्छा इम्प्रैशन बना लेता है।

ऐसा ही क्लास में टीचर का हमसे सवाल पूछते वक़्त होता है। और हमारा जवाब सही होने के बावजूद हम बोल नहीं पाते है। आप मन ही मन ये सोचने लगते है की यार क्या बोले मुझे तो हर कोई इग्नोर करता जा रहा है और मेरा यहाँ कोई मायने ही नहीं है।

आकर्षक व्यक्तित्व के लिए लिए न रखे निम्न सोच

ये सब आपके मन की सोच है। दूसरे लोग ऐसा कुछ नहीं सोच सकते जब तक आप खुद को कमजोर साबित नहीं कर देते। इसलिए इस तरह की दुविधा से बचे और अपनी बात जाहिर करना सीखे।

इसके लिए आप अपने कुछ कमीने ( दोस्त और किस काम के है ) दोस्तों की मदद ले सकतेहै जो आपका हौसला बढ़ाये और आपकी बाते सुने।

आपका मनोबल बढ़ाये। लेकिन इसमें आपको दोस्तों का चयन भी सावधानी से करना चाहिए क्यों की कुछ दोस्त आपको पहले तो झाड़ पर चढ़ा देंगे और ऐन टाइम परआपकी फजीहत का मौका भी नहीं छोड़ेंगे।

तो दोस्तों ये तो थी कुछ बाते जो आपकी बचपन की यादो को ताजा करती है अब बात करते है उन टिप्स की जो आपको आकर्षक व्यक्तित्व के लिए मददगार है। आकर्षक व्यक्तित्व के लिए ध्यान रखे इन बातो का

आकर्षक व्यक्तित्व के लिए सकारात्मक आदतों को अपनाए

हमेशा मुस्कुराते हुए दुसरो की बाते सुने और उन्हें इस बात का अहसास करवाये की आप उनकी बातो में रूचि ले रहे है। जिनसे वो आप के साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त बिताएंगे और अपने दिल की हर बात आपके साथ शेयर करना पसंद करेंगे।मानव मनोविज्ञान के अनुसार :

हम उसी व्यक्ति के साथ वक़्त गुजरना पसंद करते है जो हमारी बातो को तवज्जो देता है और हमारी बातो को सुनना चाहता है।

दुसरो को ना गिनाये अपनी मुश्किलें

अक्सर हमारे ग्रुप में ऐसा एक बन्दा मिल ही जाता है जो मिलते ही अपनी परेशानिया गिनाने लगता है ऐसे बन्दे से लोग धीरे धीरे मिलना जुला बंद कर देते है और ग्रुप में भी उससे कोई बात करना पसंद नहीं करता है।

उनके चेहरे में वो बात भी नहीं होती है क्यों की वो हींन भावना से ग्रस्त होता है।

अगर आप ऐसा करते है तो सावधान हो जाइये ऐसा करना आपको ग्रुप से बाहर कर सकता है।

आकर्षक व्यक्तित्व के लिए हमेशा दयालु रहे

देखने में ये भी आता है की कुछ लोग दुसरो के लिए वक़्त निकाल ही लेते है अगर आप भी बिजी रहने के बावजूद दुसरो की दिल से सहायता करते है तो आप उनके लिए महत्वपूर्ण हो सकते है।

ऐसे में वो अपनी समस्या आपसे खुल के शेयर करना पसंद करेंगे। लोगो की मदद करना सीखे उनकी सहायता करने से आप उनके लिए आदरणीय बनेंगे और आपकी छवि भी अच्छी बनेगी।

आकर्षक व्यक्तित्व चाहिए तो ईमानदार बनिए

अगर आप अपने दोस्तों के प्रति ईमानदार रहते है तो आप उनके लिए अच्छे दोस्त साबित हो सकते है इसलिए किसी की मज़बूरी का फायदा ना उठाए, अगर आप एक दोस्त के राज जानते है तो उसे दुसरो के सामने जाहिर ना करे एक अच्छा दोस्त वही होता है जो आपके राज को अपने तक सिमित रखे, चुगली ना करे, और आपको दुसरो के सामने शर्मिंदा ना करे।

अगर आप ऐसा कर पाते है तो एक बेहतर दोस्त साबित तो होंगे ही साथ ही आपका सम्मान भी बढ़ेगा।

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थैंक्स बोलना सीखे

अगर आप दुसरो द्वारा की गई सहायता के प्रति उनके कृतार्थ है तो आप इस बात को बेहतर समझ सकते है।

आप खुद कैसा महसूस करते है जब  कोई आपको अच्छा बताता है बिलकुल वैसे ही जब आप आप किसी को थैंक्स कहते है तो वो भी ये अनुभव करता है की उसने जिसकी मदद की वो सही कदम था।

आकर्षक व्यक्तित्व के लिए ये छोटा सा अनुभव बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। आकर्षक व्यक्तित्व पर नीचे कुछ अनमोल विचार दिये है :

नाम में क्या रखा है? जिसे हम गुलाब कहते है उसे हम दुसरे नाम से जिसकी सुगंध मधुर हो भी कह सकते है। –William Shakespeare

इंसान के विचारो की दिशा उसके व्यक्तित्व के समान होती है। उसका पूरा बाहरी जीवन उसके दिमाग के आंतरिक विचार और गुणों पर निर्भर करता है। –Erich Sauer

 निश्चित रूप से यह दुर्लभता की दुनिया है। लेकिन दुर्लभता सिर्फ लोहे के अयस्क और मौजूदा जमीन तक ही सीमित नही है। बल्कि सबसे बड़ी दुर्लभता तो अपने चरित्र और व्यक्तित्व को बनाने में है। –William R Allen

खुद को दूसरो को बेचने का सबसे अच्छा रास्ता दूसरो को खुद को बेचना है। खुद के बेचने से पहले अपने चरित्र, अपने गुणों और अपनी योग्यताओ के बारे में जरुर सोचे। –Unknown

दोस्तों आकर्षक व्यक्तित्व पर आज की पोस्ट हमारे बचपन के स्कूल और कॉलेज की यादो से जुडी हुई है अगर आपका भी ऐसा कोई यादगार लम्हा बिता है तो आप हमें भेज सकते है। हमें कमेंट के माध्यम से आज की पोस्ट पर अपने विचार भेजे।