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Tuesday, May 26, 2026
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संकल्प और इच्छा-शक्ति को मजबूत कर सम्मोहन सिखने के लिए न्यास ध्यान – घर पर आसानी से कैसे करे ?

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न्यास ध्यान विधि ध्यान /योगासन की वो steps है जिसमे हम अपने शरीर को भावना शक्ति द्वारा ज्यादा से ज्यादा नियंत्रित करते है। इस विधि से मानसिक बल को मजबूत किया जाता है। हम दैनिक कार्यो में इसका लाभ उठा सकते है मसलन अपने तनाव को दूर करना, मन में चलने वाली अनावश्यक शंकाओं को दूर करना, और खुद का आत्मविश्वास मजबूत करना।

ये विधि इतनी कारगर है की अगर सही तरीके से की जाये तो आपको सिर्फ सोचने मात्र से अपने मन को नियंत्रित करने की क्षमता प्रदान करता है।

Nyasa meditation for better control over body and mind in Hindi की आज की इस पोस्ट में जानते है न्यास ध्यान की सबसे आसान विधि वो भी फायदे के साथ.

ये एक ऐसी प्रक्रिया है जो न सिर्फ आपके शरीर बल्कि मन को भी सबसे बढ़िया तरीके से नियंत्रण में लाने में सहायता करती है.

न्यास ध्यान

meditation / yoga इसलिए क्यों की इसमें हम ध्यान की तरह एकाग्रता का अभ्यास करते है और योगासन की तरह इसका अभ्यास करते है।  मेरे खुद के अनुभव में मेने महसूस किया है की इस विधि से हम खुद को एक दम मजबूत विचारो वाला बना सकते है।

अगर आपकी संकल्प शक्ति या इच्छाशक्ति कमजोर है तो आपको सिर्फ एक सप्ताह तक इसका अभ्यास करने की जरुरत है आपको खुद फर्क दिखने लगेगा। इसके अभ्यास से हम खुद को एक ऐसे व्यक्तित्व में ढाल सकते है जो किसी बात को लेकर खुद पर संशय नहीं करता है.

दुसरे शब्दों में कहे तो जो एक बार कह दिया वो ही कर के दिखाने वाली नेचर हमारे अन्दर विकसित होने लगती है.

न्यास ध्यान का अभ्यास

इस meditation / yoga में हम शरीर के सभी ऊर्जा केंद्र को जाग्रत करते है। इससे हम ज्यादा ऊर्जावान बनते है और ज्यादा से ज्यादा सक्रिय रह पाते है। ध्यान से पहले शरीर के उन ऊर्जा केंद्र की पहचान जरुरी है जिन्हे हमें जाग्रत करना है।

हमें भावना द्वारा इन सभी केंद्र में प्राण को सरंक्षित रखना चाहिए एक समय तक के अभ्यास के बाद जब ये केंद्र जाग्रत रहने लगते है तो अपने आप इनमे प्राण का नियमित बहाव बना रहता है। और हमारी प्राण ऊर्जा व्यर्थ के प्रयास में नष्ट नहीं होगी।

हम रात्री में सोते है ताकि शरीर और मन दोनों को आराम मिले. इस दौरान हम प्राण उर्जा को ग्रहण करते है अगले दिन के कामो के लिए. अगर उर्जा केंद्र जाग्रत अवस्था में नहीं होते है तो इस दौरान उर्जा का सरक्षण कम से कम होता है जो की अगले दिन खर्च हो जाती है.

इसके अभाव में आप खुद को बिना उत्साह वाला महसूस करने लगते है, किसी काम को मन से या जोश के साथ करने की इच्छा नहीं रहती है. ऐसे कई लक्षण है जो बताते है की शरीर में प्राण उर्जा और केंद्र के जाग्रत होने की कमी है.

न्यास ध्यान का मुख्य उदेश्य है हमारे शरीर के सभी उर्जा केंद्र को जाग्रत करना और उनमे उर्जा को सरंक्षित करना. इसके अभाव में हम दिनभर के कामो में उस उर्जा को पूरी तरह नष्ट कर देते है जो हम रात्री को को ग्रहण करते है. अगर आपको भी लगता है की आप खुद को बिना उत्साह वाला, कमजोर महसूस करने लगे है तो इस अभ्यास को जरुर करे.

शरीर के ऊर्जा केंद्र :

शरीर का हर हिस्सा अपने आप में एक ऊर्जा का केंद्र है. मनुष्य के कुल 26 ऊर्जा केंद्र है जो निम्न है

ऊर्जा केंद्रसंख्या
पैरो की तलहटियाँ :2
पिंडलियां2
जंघाएँ2
गुप्त इंद्रिय1
नाभि1
ह्रदय1
फेफड़े2
कंधे2
दाहिना हाथ,पंजा, भुजा3
बायां पंजा,हाथ, भुजा3
आँखे2
कान2
मुख1
नाक1
भ्रकुटी1
कुल26

शरीर में हर हिस्से को अगर आपको प्राणवान बनाना है तो आपको इन केंद्र को हमेशा जाग्रत रखना चाहिए जिससे आपको हमेशा स्फूर्ति का अहसास होता रहेगा। इसके अलावा पुरे शरीर में तेज बहता है।

आपने गौर किया होगा कुछ लोगो का व्यक्तित्व इतना आकर्षक होता है की हम उनकी और बरबस खींचे चले जाते है. ऐसे लोगो के शरीर से आकर्षण शक्ति का प्रवाह हर अंग से होने की वजह से वो लोगो को ज्यादा प्रभावित करते है और इसी वजह से वो खुद को ज्यादा एक्टिव रख पाते है.

अगर आप भी चाहते है की लोग आपकी ओर आकर्षित हो और आपकी personality attractive बन जाए तो आपको महिना भर न्यास ध्यान का अभ्यास करना चाहिए. अगर त्राटक के साथ कर रहे है तो इसका फायदा आपको सम्मोहन में मिलना शुरू हो जाता है.

ये एक ऐसा अभ्यास है जिसके जितने भी फायदे गिना दिए जाए कम ही है. ये किताबी बाते नहीं मेरा खुद का अनुभव रह चूका है. चलिए जानते है की इसकी विधि क्या है और हम इसे घर पर कैसे कर सकते है.

आकर्षक व्यक्तित्व के लिए न्यास ध्यान विधि

शरीर को आरामदायक स्थिति में ले जाकर लेट जाए. इसके बाद खुद को विचारों से रहित बनाने की कोशिश करे न कर पाए तो कोई बात नहीं क्यों की इसमें विचारो को एक जगह केंद्रित कर भी हम विचारो से छुटकारा पा सकते है।

जब मन शांत हो जाये अपना पूरा ध्यान शरीर के निचले हिस्से पर ले जाये। मन ही मन में कल्पना करे की आपके शरीर का सबसे निचला हिस्सा यानि पैरो की तलहटी ऊर्जा से प्रवाहित हो रहा है इस वक़्त अगर आप सिर्फ तलहटी के बारे में सोचते है तो आप सही जा रहे है।

तलहटी पर बार बार विचार करने से आपका पूरा ध्यान सिर्फ उसी जगह केंद्रित हो जाता है। इसके बाद आप निम्न मंत्र का जाप कर सकते है जो सामान्यतः जागरण मंत्र है।

“ॐ चैतन्य चैतन्य स्वाहा”

अगर आपका पूरा ध्यान सिर्फ विचार किये गए हिस्से पर होता है तो इस मंत्र के जाप से आपके उस हिस्से में ऊर्जा के प्रवाह को आप स्पस्ट महसूस कर सकते है।

इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए आप बाकि के केंद्र पर ध्यान लगाए और उन्हें भी ऊर्जा से जाग्रत कर दे। इस को आप भावना या बार बार एक विचार को ही दोहरा कर सफलता पूर्वक कर सकते है।

इस पुरे चरण में आपको 15 मिनट लग सकते है। प्रत्येक केंद्र पर ध्यान 5 से 10 सेकंड काफी है। लेकिन शुरू में एक ही केंद्र पर पूरा ध्यान लगाना मुश्किल होता है इसलिए एक केंद्र पर ही मिनट लग जाती है इसमें परेशान न हो धैर्य से विधि करते रहे।

ध्यान देने योग्य

  • शरीर के ऊर्जा केंद्र पर ध्यान लगाना पढ़ने में जितना सरल लगता है करने में उतना मुश्किल है, कई बार ध्यान नहीं लग पाता है. कुछ देर लगेगा तो बाद में फिर मन भटकने लगता है।
  • इस विधि से मानसिक थकान हो सकती है और बिच में बिना पता चले ही निद्रा भी आ सकती है। इसके लिए आप इस अभ्यास को सुबह या दोपहर में करे जिससे की अगर निद्रा भी आ जाये तो योग निद्रा हो। रात्रि को ये प्रयोग तब करे जब आपको निद्रा ना आने की समस्या हो इससे गहरी निद्रा प्राप्त की जा सकती है।
  • शरीर को शिथिल करना थकाने वाला काम है इसकी वजह से हम सभी केंद्र पर ध्यान नहीं लगा पाते है।
  • ऊर्जा केंद्र पर ध्यान केंद्रित करते वक़्त हमें ऐसे लगता है जैसे सूक्ष्म शरीर से हम पुरे शरीर की यात्रा कर रहे है ये हमारी एकाग्रता को दिखाता है।

न्यास ध्यान के फायदे

न्यास ध्यान या यूँ कहे की योगासन प्राण ऊर्जा के बहाव के लिए सबसे बेहतर विकल्प है। अगर आप आकर्षक बनना है तो इसे जरूर करे। इसके शुरुआत में आपको नींद आ जाएगी पर नियमित अभ्यास से हम चेतन्य रह कर इस अभ्यास में पारंगत हो सकते है। इसके अलावा इसके निम्न फायदे है।

  • हम शरीर को ज्यादा से ज्यादा ऊर्जावान बना सकते है।
  • न्यास ध्यान हमारे मन को शरीर से जोड़ता है।
  • nyas meditation ध्यान की कठिन विधि में से एक जरूर है लेकिन इसके हमारे शरीर को सिर्फ भावना से नियंत्रित करने की शक्ति को देखे तो ये और विधि से ज्यादा बेहतर है।
  • पढ़ने वाले विद्यार्थी, ज्यादा मानसिक श्रम करने वाले, जल्दी परेशान होने वाले व्यक्ति इस विधि से लाभ उठा सकते है।
  • हम विचारो को कही भी ले जा सकते है इसके अलावा अपनी समस्या को बेहतर तरीके से सुलझा सकते है।
  • सम्मोहन के अभ्यास के लिए न्यास ध्यान का अभ्यास एक सहायक अभ्यास की तरह है और इसके फायदे आपको कम समय में ही दिखने शुरू हो जाते है.

न्यास ध्यान की विधि कठिन जरूर है लेकिन इसके फायदे बहुत है जिसकी वजह से हम इसे अपना कर बहुत सी समस्या से छुटकारा पा सकते है। न्यास ध्यान की तरह ही पिरामिड ध्यान हमें ऊर्जावान बनाता है।

Read : आज भी काले जादू के इन 5 प्रकार को सबसे खतरनाक माना जाता है आप इनके बारे में कितना जानते है

सम्मोहन में न्यास ध्यान का प्रयोग – अंतिम शब्द

दोस्तों न्यास ध्यान का प्रयोग आप चाहे त्राटक में करे या ध्यान में करे आपको इसके अद्भुत परिणाम बहुत कम समय से ही मिलने शुरू हो जाते है.

जिन लोगो का मन और शरीर आपस में तालमेल नहीं बिठा पाता है जैसे की हम खुद को किसी चीज के लिए रोक रहे है लेकिन मन बार बार उधर भटक रहा हो तो उन्हें इसका अभ्यास जरुर करना चाहिए.

इसका आत्मनियंत्रण इतना मजबूत है की कुछ ही समय में आप जो बोलते है उसके अनुसार ही आपका दिमाग सुझाव प्रदान करता है.

मन का भटकाव ख़त्म होने लगता है और हम खुद को ज्यादा से ज्यादा स्थिर महसूस करने लगते है. इसके अलावा सूक्ष्म शरीर की यात्रा और योग निद्रा में भी इसका बहुत बड़ा योगदान है.

रिश्तो में तालमेल बिठाना आपके रिश्तो के लिए है जरुरी

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सास और बहू का रिश्ता सबसे खास माना गया है क्यों की हर स्त्री इन दोनों स्टेज से गुजरती है। अगर आप कभी बहु रही है और आपके अनुभव ख़राब रहे तो जरुरी नहीं की आप अपनी बहू को भी वही अनुभव दे। सास और बहू का रिश्ता अगर सामंजस्य बैठ जाता है तो घर के बाकि रिश्ते अपने आप बनने लग जाते है।

अगर सास माँ बन कर बहू को प्यार दे। और बहू सास को बेटी की जगह सम्मान दे तो घर को स्वर्ग बनते देर नहीं लगती है।

शादी के बाद एक लड़की आपके घर की बहू बनती है। उसके लिए सारे रिश्ते नए होते है, अनजान होते है ऐसे में उसे दो ही सहारे सबसे ज्यादा होते है पहला अपने पति का दूसरा अपनी सास का। अगर आप अपनी बहू को बेटी की तरह अपने परिवेश में ढलने में मदद करती है तो उसे आसानी रहती है सभी रिश्ते सँभालने में वक़्त नहीं लगता है।

और समाज में भी आपके रिश्ते की तारीफ और मिशाल बनती है।

सास और बहू का रिश्ता

हम अपने आसपास के माहौल से सबसे ज्यादा प्रभावित होते है। खासतौर से सोशल मीडिया जिसमे टीवी भी शामिल है आप सुबह भले ही कितने ही अच्छी सोच के साथ उठे लेकिन शाम ढलते ढलते टीवी, सोशल मीडिया और आपके आसपास का माहौल आपके दिमाग की सोच बदल कर रख देता है।

अगर आप अपने रिश्तो को वैसे ही नजरिये से देखते है जैसा आपको दिखाया जा रहा है तो सावधान हो जाइये क्यों की आपके रिश्ते टूट सकते है। इसलिए अपने विवेक और समझदारी से रिश्तो को समझे ना की घटने वाली घटनाओ पर आंख मूँद कर विश्वास करे

सास और बहू का रिश्ता – आजकल के टीवी सीरियल

आजकल टीवी में जितने भी पारिवारिक सीरियल है सबमे सास को एक गुस्सेल, विलेन टाइप की औरत की तरह पेश किया गया है। सीरियल वालो के लिए ये एक मनोरंजन हो सकता है पर इससे सबसे ज्यादा हमारे समाज में सास और बहु का रिश्ता प्रभावित हुआ है।

हर सास सोचती है की उसे ऐसी चालक बहु ना मिले वही एक लड़की ये सोचती मुझे ऐसी सास के साथ रहना ही नहीं है।

आपस में सामंजस्य रखना तो कही नहीं दीखता इसी वजह से रिश्ते कमजोर होते जा रहे है। आज एक कहानी के जरिये आपको बताने की कोशिश की गई है की रिश्तो में सामंजस्य रखने के लिए किसी एक का झुकना जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। सास और बहू का रिश्ता असल में वैसा नहीं होता है जैसा दिखाया जाने लगा है।

सास और बहू का रिश्ता-विवाह निमंत्रण

सुनंदा और उसके पति अपने बहु के मायके विवाह में आए थे। सुनंदा घर के प्रांगण में ही लगे अशोक के वृक्ष के निचे मेहमानों के लिए लगी कुर्सी पर बैठी थी। अचानक सड़क पार सामने के घर के अहाते में धूप में बैठी वृद्धा को उसने देखा।

प्रातः काल का समय था। उसने देखा एक छोटी बालिका ने प्लेट में नाश्ता लेकर मुस्कुराते हुए उसे दिया। थोड़ी देर उसके पास बैठी, फिर उठकर चली गई और पानी का गिलास लेके वापस लौट आई। वृद्धा ने फिर उसके सर पर स्नेह से हाथ फेर और दोनों मुस्कुराई। यह देख सुनंदा ने सोचा ये शायद उसकी पोती होगी। दोनों का मित्रवत स्नेह देख वह गदगद हो गई।

उसका ध्यान तब भंग हुआ जब उसकी बड़ी बहु अपनी बहनो और परिवार वालो को अपने पड़ोस में नाश्ते के निमंत्रण पर आवाज देकर बुलाने लगी। सभी मेहमानों को इकट्ठा कर उन्हें नाश्ते के लिए ले चली। इतने में बड़ी बहु की छोटी बहन जो अभी अविवाहित थी, ने टोका दीदी वो आपकी सासु जी बैठी है उन्हें भी ले चले।

बड़ी बहु बोली, अरे रहने दे, उन्हें कहाँ ले चलेंगे ? अच्छा नहीं लगेगा। सुनंदा की उपेक्षा कर वो सब चल दी। सुनंदा चुपचाप उन सब को जाते हुए देख रही थी। थोड़ी देर बाद सब पडोसी के घर से मुस्कुराते हुए लौट रही थी।

सास और बहू का रिश्ता न बरते लापरवाही

घर में प्रवेश करते ही बड़ी बहु ने घोषणा कर दी की सबने नाश्ता कर लिया है अब दोपहर का खाना ही बनेगा।

सुनंदा ने ये सब सुना तो अवाक् रह गई। उसने कल उपवास रखा था वह कल भी भोजन नहीं कर पाई थी। सुबह से उसे चाय भी नसीब नहीं हुई थी।

सुबह दो घंटे घूमकर सुनंदा के पति वापस आए। उसके पास जाकर बोले नाश्ता-वाश्ता आया की नहीं, में तो बाजार से कर आया हु। सुनंदा मायूस होकर बोली, भूख के मारे मेरा जी घबराने लगा है। बारह बज गए है।

घर पर तो हम दस बजे ही खाना खा लेते है। कल उपवास की वजह से कुछ खा-पी भी नहीं पाई थी।

सुनंदा के पति को सारा माजरा समझ आ गया। आजकल की सोच के अनुसार ‘सास’ यानि उपेक्षा योग्य व्यक्तित्व। कुछ सासो या कहे की कुछ भारतीय टेलीविजन सीरियल वाली सासो के कारण सबको एक श्रेणी में रखा जाने लगा है।

सास और बहू का रिश्ता – टीवी सीरियल ने बदला इसका अभिप्राय

सास शब्द का एक ही अर्थोपकर्ष हो गया। यह सोचते हुए सुनंदा के पति ने उससे कहा, ये लो आधा गिलास पानी एक एक घूंट करके पी लो तब तक में कॉलोनी की दुकान से कुछ नाश्ता लेकर आता हूं। ये कह कर वे चल दिए थोड़ी ही देर में वे लौट आये।

सुनंदा के पास खड़े होकर स्वयं की ओट अपने बैग में छुपकर लाई हुई नाश्ते की पुड़िया उसे दे दी। सुनंदा नाश्ता कर ही रही थी की बड़ी बहू की दादी इधर आ गई। वो सुनंदा के पास जाकर बोली, अरे ! ब्याणजी बहुत देर बाद नाश्ता कर रही हो, अब तो खाने का वक़्त हो गया है।

सुनंदा बोली हां आ गया था। बहू पड़ोस में नाश्ता करने गई थी। वहां से ले आई थी। रखा था, अब खा रही हूं अच्छा ठीक है में आपके लिए चाय लाती हूँ.

यह कह कर दादी तो चली गई सुनंदा के पति ने कहा ‘सुनंदा तुमने झूठ क्यों बोला ? जब की तुम्हारी बहू तो तुम्हे टालकर चली गई थी।’

सुनंदा बोली अच्छा नहीं लगता। बहू की दादी क्या समझेगी की उसकी पोती कितनी लापरवाह है वह बहू से कहेगी,परिवार में बात फैलेगी और बहु फिर बहू भी नाराज हो जाएगी। छोटी सी बात से अगर आपस में तनाव फैलता है तो झूठ बोल देना कही ज्यादा बेहतर है। मेरे एक झूठ बोलने से कोई परेशानी भी नहीं हुई, और किसी बात का कोई बतंगड़ भी नहीं बनेगा। और फिर कोई कहेगा सास तो ऐसी ही होती है।

शिक्षा

दोस्तों अक्सर ये कुछ घरो में देखने को मिल जाता है की शादी के बाद परिवार में रिश्ते किस तरह बदलने लगते है। रिश्तो के मायने बदलने लग जाते है। ऐसे में अगर हम अपने रिश्तो को सँभालने पर ध्यान ना दे आपस में सामंजस्य ना बैठा पाए तो रिश्ते टूटने लगते है आपस में दरार बढ़ने लगती है।

क्यों की हमारा विश्वास अपनों से ज्यादा बाहरवालों पर होने लगता है। ऐसे में हमें चाहिए की हम आपस के रिश्तो को सुधारने का वक़्त निकाले। अपनी ख़राब छवि को सुधारे और सब मे प्यार प्यार बांटे हमें प्यार ही मिलेगा।

यही हाल हमारे दोस्ती में अच्छे रिश्ते में होता है। अगर किसी दूसरे को पता चल जाये की आपके आपके अपने के साथ मन मुटाव है तो वो इस दरार को ओर बढ़ाने की कोशिश करता है। आपको महत्वपूर्ण बताएगा और आपके अपने की कोई अहमियत नहीं है ऐसा दिखाने की कोशिश करता है।

बेहतर होगा रिश्तो को बचाने के लिए उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति के साथ शेयर न करे जो आपको सिर्फ आपको ही खास और महत्वपूर्ण दिखाने की कोशिश करता है। पहले घर के बड़े रिश्तो को सुलझा दिया करते थे पर एकल परिवार की वजह से अब आपके आसपास के लोग ये मौका छोड़ते नहीं है।

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चन्द्र त्राटक साधना और भविष्य को देखने वाली अद्भुत क्षमता को विकसित करने का प्रभावशाली अभ्यास

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Bindu trataka meditation के बाद ऐसी कई सारी Trataka Technique है जो spiritual enlightenment से जुड़ी है. ये Hatha Yoga का एक भाग है जिसमे हम fixed gazing पर खुद को एक ही स्थिति मे रखते हुए साधते है.

आज की पोस्ट मे हम Moon Gazing Meditation यानि Chandra trataka in Hindi के बारे मे बात करने वाले है. चन्द्र त्राटक के आध्यात्मिक लाभ की बात करे तो ये उत्तम कोटि की साधना होती है.

चंद्र त्राटक अभ्यास त्राटक के उच्चतम अभ्यास में से एक है. त्राटक को लौकिक और अलौकिक दोनों श्रेणी में भी समझा जाता है और स्टेप by स्टेप अभ्यास द्वारा भी पूर्णता हासिल की जाती है.

चंद्र त्राटक Moon Gazing Meditation उनके लिए सर्वश्रेष्ठ है जो शीतल प्रभाव के है क्यों की fire gazing meditation, candle and mirror gazing meditation जैसे अभ्यास में कई बार मन के उग्र प्रवृति के होने की घटना सामने आती है.

संयम के वक़्त हमें हमारे मन और प्रक्रिया दोनों को संतुलित रखना जरुरी है. Chandra tratak exercise हमें शांत, सौम्य और व्यवहार-कुशल बनाता है.

Moon Gazing Meditation in Hindi

Moon Gazing Meditation / चंद्र त्राटक का अभ्यास रात्रि चयन, ऋतु चयन के आधार पर करना चाहिए.

इस बात का खास ख्याल रखे की चन्द्रमा आपको स्पस्ट रूप से दिखाई देता हो. मौसम साफ और वातावरण आपके अनुकूल हो. हालाँकि अगर आपका अभ्यास तीव्र होने लगता है तो आप अपनी will power से किसी भी मौसम में चंद्रमा के दर्शन कर सकते है.

different kind of tratak meditation practice में से एक चंद्र त्राटक के बारे में तो ये भी वर्णित है की इस अभ्यास में आप अमावस की रात्रि में भी चंद्र दर्शनकर सकते है. ये सब आपकी मानसिक और इच्छाशक्ति पर निर्भर होता है.

Moon Gazing Meditation in Hindi

त्राटक के श्रेणी में आगे बढ़ते हुए बात करते है चन्द्रमा त्राटक की वैसे तो हम किसी भी चीज पर जो आँखों को सहज लगे और स्थिर हो पर त्राटक कर सकते है.

लेकिन आध्यात्म में उतरने के लिए trataka के शुरुआती चरण पार करने के बाद जब हम fire tratak practice और mirror trataka करना शुरू करते है तब हमें ज्यादा आध्यात्मिक अनुभव होने शुरू हो जाते है. इसलिए इन त्राटक का अपना महत्त्व है.

चन्द्र त्राटक का अभ्यास से पहले कुछ basic guideline for trataka meditation को समझ लेते है.

  • Moon trataka का अभ्यास सुबह ब्रह्ममुहूर्त में करना चाहिए.
  • त्राटक के दौरान आपका मन शांत होना चाहिए जिससे की त्राटक के वक़्त Psychological and Mental pressure ना पड़े इसके लिए बेहतर होगा 15 मिनट पहले शरीर और मन दोनों को शांत कर लिया जाये.
  • अभ्यास हमेशा Dot gazing Trataka Practice से शुरू करना चाहिए ये आपको त्राटक में आने वाली शुरुआती परेशानी से बच जाते है. और त्राटक के अनुभव के लिए मानसिक रूप से तैयार भी हो जाते है.
  • Trataka का अभ्यास हमेशा तय वक़्त पर और नित्य होना चाहिए जिससे अभ्यास में सततता बनी रहे.
  • Moon Gazing Meditation का अभ्यास करते वक़्त बिंदु त्राटक से बढ़ते हुए क्रम में करे एकदम से दर्पण और ज्योति त्राटक शुरू न करे इससे नुकसान ज्यादा होने की सम्भावना होती है.

ये कुछ basic guideline है जिन्हे ध्यान मे रखते हुए अभ्यास की शुरुआत की जाये तो अनुभव सही रहते है.

Chandra trataka practice step by step Guide

Moon Gazing Meditation का अभ्यास आप चन्द्र को देखते हुए करते है जिसमे हम छत पर या कोई भी ऊँची जगह जहां शांति से अभ्यास कर सके और आपको परेशान करने वाला कोई न हो. छत पर बैठ कर पहले मन को शांत कर ले.

इसके बाद धीरे धीरे चन्द्रमा को देखे. ये त्राटक रात्रि में 10-11 बजे के बाद करना चाहिए.

tratak ke vastvik anubhav

इसके अभ्यास में एक बात ध्यान रखे त्राटक का अभ्यास चन्द्र के घटने से बढ़ते हुए क्रम में करे जैसे की शुरू में चन्द्रमा छोटा हो से चन्द्र पूर्णिमा का हो के क्रम में.

ज्यादातर लोग इस बात को नहीं जानते की चन्द्रमा हमारे मन पर सीधा प्रभाव डालता है. इसलिए अभ्यास में ध्यान रखे की आप त्राटक की शुरुआत किस रात्रि से कर रहे है.

चंद्रमा दिखाई न दे तो क्या करे

अगर आप Moon Gazing Meditation को खुले आसमान मे करते है तो वो सबसे बढ़िया अभ्यास है लेकिन कई बार ऐसा होता है की हमे किसी रात मे या मौषम मे खराबी की वजह से moon appearance मिलनी मुश्किल होती है या दिखाई नहीं देता है.

ऐसी स्थिति मे आप एक फोटो ले सकते है जिसमे पूरे चाँद की फोटो हो.

अब ऐसे कमरे का चुनाव करे जो बिलकुल dark room हो और meditation के लिए सबसे बेहतर जगह हो. अगर changing cycles of the moon की बात करे तो ये हमे life cycle के दौरान आने वाले उतार चढ़ाव को बताता है.

ज़्यादातर लोग Moon Gazing Meditation की spiritual practice का चुनाव इस वजह से करते है क्यो की इससे हम subtle psychic energy and dream functions को activate कर सकते है.

कुछ लोगो के अनुसार Moon Gazing trataka की वजह से हम सपनों मे आने वाले कल, lottery and lotto number जैसी शक्ति हासिल करते है क्यो की ये हमारे अंदर की psychic ability को trigger करती है.

Psychological effect on human behave

आपने ऐसी कई मूवी देखी होगी जिसमे इंसान चन्द्रमा को देखते देखते भेड़िया बन जाता है या फिर कोई और जानवर. ऐसा क्या होता है जिससे हमारे मन में चन्द्रमा से बदलाव आता है. ( precognition psychic ability with trataka )

चलिए Moon Gazing Meditation के पीछे के विज्ञानं को समझे चन्द्रमा की किरणे पृथ्वी पर जब गिरती है तब इसके आकर्षण के प्रभाव से समुन्द्र में ज्वार और विपरीत आकर्षण से भाटा उत्पन होता है.

ज्वार-भाटे की वजह से पानी में उतार-चढाव आता है यही बात अगर मानव शरीर से जोड़ कर देखे तो मानव शरीर 70% पानी से बना है. इसलिए आप खुद अनुभव कर के देखे पूर्णिमा की रात्रि को आपका मन सबसे ज्यादा चंचल होता है.

ग्रहण के वक़्त बाहर ना निकलना या फिर उसकी किरणों के प्रभाव से बचना ये अन्धविश्वास नहीं है इन सबके मध्य विज्ञान है जो चन्द्रमा और मानव मन का अध्ययन कर इनसे नतीजे निकलता है.

चंद्र त्राटक का अभ्यास और अनुभव

त्राटक करते वक़्त शुरू में आपको Moon Gazing Meditation के दौरान मन में अधीरता महसूस हो सकती है लेकिन जैसे जैसे आपका अभ्यास बढ़ता जाता है वैसे ही आपका मन इसकी किरणों के प्रभाव को सोखना शुरू कर देता है.

जिसके कारण बाद में चन्द्रमा की किरणों का आपके मन पर प्रभाव नहीं पड़ता है.

इसके अलावा Chandra tratak meditation आपको ऐसे अनुभव करवाता है जो आपकी समझ से परे हो सकती है.

जैसे की चन्द्र को देखते देखते चन्द्रमा का आपके पास आने का आभास, चन्द्रमा का बढ़ना घटना, या फिर उसकी किरणों को अपने शरीर पर महसूस करना क्यों की इसके trataka meditation से आपको इसकी attraction power प्राप्त होने लगती है.

km time me tratak ka sahi anubhav

इसलिए अगर आपका मन शुरू से चंचल है तो आप Moon Gazing Meditation अभ्यास को करने से पहले अपने मन को स्थिर करना शुरू कर दे.

ध्यान रखे की इस संसार में जो कुछ भी आप देखते है आपके अवचेतन मन की रचना है इसलिए कुछ भी आपके लिए आपके लिए नया नहीं हो सकता है और जब मन स्थिर होना शुरू हो जाता है तब कुछ भी आपको विचलित नहीं कर सकता है.

Super Moon Gazing

अगर आप किसी trataka meditation center जाते है तो वे आपको super full moon gazing trataka के बारे मे बताते है. ये एक ऐसा अभ्यास है जो हमारी attention को लंबे समय तक catch करने मे सक्षम है. आप देखते है एक bright moon और black background जिसमे टिमटिमाते तारे शामिल है.

Moon पर gazing practice को करते करते जब तक आंखो मे पानी ना आने लगे तब तक अभ्यास करते रहे. आंखो से बहता पानी सिर्फ आपकी आंखो को ही नहीं बल्कि inner vision को भी cleanse करता है.

कुछ समय बाद आपको Moon Gazing Meditation के दौरान बहुत ज्यादा bright नजर आने लगता है, चाँद एक से ज्यादा नजर आने लगते है और आपका vision बार बार shift होने लगता है.

बहुत ज्यादा देर तक object को न देखे बल्कि कुछ देर बाद जब आंखो से पानी बहने लगे तब आंखे बंद कर कुछ देर ऐसे ही बैठे रहे. अब बंद आंखो से उसी तरह त्राटक करने की कोशिश करे जैसे आप खुली आंखो से कर रहे थे.

शुरू शुरू मे आप ऐसा सिर्फ कुछ पलो के लिए ही कर पाते है. जैसे जैसे अभ्यास बढ़ता है आपको खुली आंखो की बजाय बंद आंखो से object को देखने की कोशिश करनी है.

खुली आंखो से त्राटक सिर्फ आपकी attention को एक जगह लाने का काम करता है. जब आंखे बंद होती है तब हम असली अनुभव करना शुरू करते है और 15 minute तक किया गया moon gazing tratak का अभ्यास आपको mystical experiences करवाना शुरू कर देता है.

पढे : दर्पण त्राटक साधना करने से पहले जान ले इसके छिपे हुए खतरों के बारे में

Mystical experiences of moon gazing tratak

भारत जैसे देश मे Swami Satyananda Saraswati जो की एक master yogi थे उन्होने इस अभ्यास के बारे मे काफी कुछ बताया है. उनके अनुसार हमारे nervous system मे ऐसे कई center है जो information को transfer करते है ज़्यादातर center अपनी normal condition मे inactive होती है.

trataka meditation के जरिये न सिर्फ हम function of perception को active करते है बल्कि उन center को भी active करती है जो अपने अंदर information store रखती है.

Moon Gazing Meditation के दौरान जब ये center active होते है तब हम उन घटनाओ को देखने लगते है जो हमे लगता है की paranormal है लकिन हमने dreams मे उन्हे देख लेते है. दूसरे शब्दो मे कहे तो superman-like qualities हमारे अंदर develop होने लगती है वो भी fixed gazing trataka meditation से.

daily life मे हम power of healing and clairvoyance को experience करते है.

इसके अलावा curing eye diseases, spiritual healing, acquiring knowledge of certain events और knowledge of the future जैसी ability हासिल कर सकते है.

क्या त्राटक से सपनों मे कोई मदद मिलती है

Moon Gazing Meditation का सबसे बड़ा effect हमे dream’s vision पर देखने को मिलता है. normal condition मे हम various types of dreams को experience करते है लेकिन जब हम fixed gazing meditation का अभ्यास करते है तब tamasic mind से जुड़ी problem दूर होती है.

तामसिक से जब राजसिक मस्तिष्क की अवस्था मे जाते है तब हम खुद को better stable महसूस करना शुरू कर देते है.

इस अवस्था मे हम true vision को dream करना शुरू कर देते है. अगर सोने से कुछ 30 minute पहले त्राटक किया जाता है तो हम दिन भर की थकावट और परेशानी को दूर कर सकते है.

Reading books for relaxation या फिर watching television से बेहतर है त्राटक का अभ्यास करना.

पढे : खोये हुए प्यार और आकर्षण को वापस जगाने के लिए इस्लामिक वजीफा

Health benefit of moon gazing tratak

त्राटक ध्यान से हमे कई ऐसे लाभ मिलते है जिन्हे scientific way मे explain नहीं किया जा सकता है लेकिन ऐसे कई benefits of moon gazing meditation है जो हम अभ्यास के बाद खुद मे महसूस करने लगते है.

  • Insomnia की problem से relief मिलता है
  • Remarkable concentration abilities
  • Moon Gazing Meditation से हम कई तरह की eye problems जैसे की myopia, farsightedness और early stages of cataracts जैसी आंखो की समस्या दूर होती है
  • third eye and intuitive abilities development मे इसका अहम योगदान है
  • Chandra tratak meditation हमे Deep relaxation experience करवाता है और ऐसे ही Regular meditation benefit हमे मिलते है.

चंद्रमा पर त्राटक का अभ्यास करने से हमे ज़्यादातर ऐसे लाभ मिलते है जो psychic ability या फिर spiritual enlightenment से जुड़े हुए है.

Precautions to trataka

अगर आप tratak meditation का अभ्यास कर रहे है तो ऐसे कई suggestion है जो नए अभ्यास करने वाले साधक को guide कर सकते है. इसमे कई तरह की सावधानी है जो हमे रखनी चाहिए जैसे की

trataka on mobile or laptop screen

  • त्राटक के दौरान आंखो से कुछ बूंद पानी गिरना सामान्य है लेकिन अगर ऐसा बार बार हो रहा है तो ये excessive tension on the eyes को दर्शाता है और harmful हो सकता है. steady gazing practice को continue करने के लिए cold water से आंखो को राहत देते रहे.
  • आंखो मे किसी तरह की eye drops ना डाले.
  • त्राटक का चुनाव सावधानी से करे. अगर mentally unstable है तो candle flame gazing trataka की practice न करे. जो भी object हम चुनते है हम उसे खुद मे adept करते है इसलिए अपने level के हिसाब से चुनाव करे ना की शक्ति हासिल करने के लिए.
  • अगर आप emotional है और जल्दी ही विचारो मे फंस जाते है तो moon gazing meditation का अभ्यास न करे. पहले खुद को strong and stable बनाए फिर अभ्यास करे.

त्राटक मे सिर्फ त्राटक ही नहीं बल्कि कुछ और भी exercise करनी होती है जिन्हे सहायक के तौर करना होता है. इसमे yoga kriya meditation, breathing exercise और thumb gazing जैसे अभ्यास है. इनके बगैर अकेले त्राटक का अभ्यास करना आपको सही अनुभव नहीं दे पाता है.

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Moon Gazing Meditation final thought

दोस्तों Moon Gazing Meditation exercise हमें कई spiritual experience का अहसास करवा सकता है. गृह नक्षत्र के साथ चंद्र भी हमारे जीवन में हमारे behave में changes लाता है. और इसे हम अपने व्यव्हार में परिवर्तन का प्रयोग कर खुद भी देख सकते है.

बस कुछ देर तक चन्द्रमा को देखते रहिये. और ये प्रयोग चद्रमा के ढलते और बढ़ते क्रम में करके देखिये फर्क आपको खुद दिखने लगेगा.

कई लोग tratak sadhana को लेकर सोचते है की कोनसा त्राटक करना बेहतर रहता है ? कोनसा trataka yoga for eyes हमें powerful बनाता है या फिर किस tratak technique का प्रभाव हम सबसे कम समय में महसूस कर सकते है.

तो ऐसे लोगो के लिए में सिर्फ इतना कहूंगा की त्राटक को अनुभव की कल्पना से करोगे तो कुछ हासिल नहीं होना है. अगर वक़्त पर अनुभव को छोड़ कर त्राटक को बिना किसी स्वार्थ के करोगे तो इतने रिजल्ट मिलेंगे की खुद आश्चर्यचकित रह जायेंगे.

दोस्तों अगर tratak practice को लेकर आपके मन में कोई भी सवाल है या कोई भी समस्या है तो कमेंट में जरूर बताये हमारे ग्रुप में आपको जल्दी ही आपकी समस्या का समाधान मिलेगा. पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर करना ना भूले. और हमें सब्सक्राइब जरूर करे.

मस्तिष्क को शांत करने के लिए आजमाइए इन अचूक टिप्स को

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Mind को शांत करना शायद ज्यादातर के बस के बाहर है। क्यों की आजकल की लाइफस्टाइल में हम इतना सोचते है जिसका आधा भी हमारे काम का नहीं होता है। ये जरुरत से ज्यादा सोचना ही Mind को शांत करना में सबसे बड़ी परेशानी का कारण है। अक्सर ऐसा होता है की हम दिनभर विचारो से घिरे रहते है चाह कर भी मस्तिष्क को शांत नहीं कर पाते है।

दिनभर कार्य का दबाव तनाव पैदा करता है, ऐसे में अगर मस्तिष्क को आराम न दिया जाये तो तनाव, अनिद्रा, और काम करने में व्यवधान जैसी समस्या होती है। ऐसे में हम अगर ठीक से सो भी ना पाते है तो मस्तिष्क दोबारा काम करने के लिए तैयार नहीं हो पाता है, अगर योगनिद्रा का अभ्यास सुबह सुबह किया जाये तो ऊर्जा में काफी सरंक्षंण किया जा सकता है।

Mind को शांत करना

आइये कुछ ऐसे अभ्यास जानते है जिनसे हम मस्तिष्क के दबाव को ना सिर्फ कम कर सकते है बल्कि खुद को भी संतुलित कर सकते है। विचारो की बाढ़ को हम आसानी से दूर कर सकते है।

Mind को शांत करना इतना आसान नहीं तो मुश्किल भी नहीं है बस इसकी समस्या को समझे और समाधान सामने है। सबसे पहले बात करते है मस्तिष्क को ज्यादा से ज्यादा परेशान करने वाली वजह जिनसे हम  सबसे ज्यादा प्रभावित होते है।

आकर्षण का सिद्धान्त – LAW OF ATTRACTION

आकर्षण का सिद्धान्त हमें उन कार्यो के लिए प्रेरित करता है जो हमारे लिए फायदेमंद है। आकर्षण के सिद्धान्त से आपका मस्तिष्क इस तरीके से कार्य करता है। की ये आपको उन कार्य के लिए ही प्रेरित करता है जो आपको पसंद है। और कार्य को पूरा करने के नए नए आईडिया सुझाता है।

सपनो के संसार में भी आप उन चीजो को देखते है जो आपको पसंद है इसका फायदा उठाकर आप सपनो में ऐसे विचारो को बढ़ावा दे सकते है जो आपको सही कार्य करने में सहायक है।

विचारो को अंतर्मुखी बनाना

हम ऐसे समाज में रहते है जहा अह्म ( अहंकार ) और किसी एक चीज को ज्यादा महत्त्व दिया जाता है। कई बार हम दुसरो के विचारो से तालमेल नहीं बैठा पाते है इसलिए उनसे खुद को दूर कर लेते है।

हमारा वक़्त मनोरंजन के साधनो ने छीन लिया है जिसकी वजह से हम दूसरे लोगो से जुड़ने की बजाय खुद को फेसबुक और व्हाटसअप जैसी चीजो में व्यस्त कर लेते है। इस वजह से हमारे अंदर अहंकार, ईगो जैसे तत्व जन्म ले लेते है।

अगर हम दुसरो से जुड़ कर उनके साथ वक़्त बिताते है तो समस्या को सुलझाने के नए तरीको को समझते है। और दुसरो के साथ हमारे रिश्ते अच्छे बनते है। जिससे हम दुसरो पर भरोसा करना सीखते है ये हमें समस्या को सुलझाने में सहायता करते है।

परेशान करने वाले विचार घूमना

फेसबुक व्हाट्सएप्प जैसी मीडिया से हम ना सिर्फ दुसरो से दूर भागने लगते है बल्कि जल्दी ही बात बात पर चिढ़ने लगते है। क्यों की ये हमे वास्तविकता से दूर ऐसे विचारो में घेरने लगती है जो हकीकत में कोई मायने नहीं रखते या फिर जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं होता है।

उदाहरण के लिए रात्रि को सोते वक़्त अगर हम डरावने कार्यक्रम देखते है तो सो नहीं पाते है और मस्तिष्क में उलटे सीधे विचार उमड़ते है वो अलग। इनकी वजह से हमारा मस्तिष्क शांत नहीं रह पाता है और बिना मतलब की शंकाओ से घिरने लगता है।

टीवी पर दिखाए जाने वाले विज्ञापन में उत्पाद को बेचने के लिए ऐसे विज्ञापन तैयार किये जाते है जो होते तो आम ही है पर आपके अवचेतन मस्तिष्क पर प्रभाव डालते है।

जिससे आप उन पर निर्भर होकर उन्हें खरीदने के लिए मजबूर हो जाते है।Mind को शांत करना है तो सोशल मीडिया से अधिकतम दुरी बनाये रखना शुरू कर दे।

समय ही संपदा है संपदा ही समय है

हम ज्यादातर सुनते रहते है की वक़्त अनमोल है इसलिए इसका एक एक सेकंड अमूल्य है। हमारा अवचेतन मन इस बात को गहराई से अपना लेता है जो की हमें जरुरत से ज्यादा काम में इस बात को ध्यान में रखकर करने को मजबूर कर देती है और जल्दबाजी में काम करने से हड़बड़ाहट ही रहती है।

हम ना तो खुश रहने का वक़्त निकाल पाते है ना ही खुद को प्रकृति से जोड़ पाते है ना ही ध्यान कर सकते है क्यों की मस्तिष्क में एक ही बात चलती है की वक़्त का हर सेकंड अनमोल है।

यही वजह है की हमारा मस्तिष्क ऐसे विचारो से भरने लगता है जो परेशान करने वाले होते है. हमारे अंदर अवचेतन मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है जो टीवी की दिखाई जाने वाली कल्पना को सच मानने पर मजबूर कर देता है. हालाँकि मस्तिष्क का दूसरा भाग हमें अभी भी हकीकत दिखाने की कोशिश करता है जो इसके ठीक विपरीत होती है।

इस वजह से हमारा मस्तिष्क इस भ्रम से बाहर ही नहीं निकल पाता है की ये जो दिखाया जा रहा है उसे माने या फिर वो जो मस्तिष्क बताता है।

और फिर मस्तिष्क विचारो के जंजाल में ही फंसता जाता है। टीवी मीडिया हमें प्रकृति से जुड़ने ही नहीं देता है ना ही प्रकृति की वास्तविकता दिखा पाता है। प्रकृति ही है जो दिल, दिमाग, और आत्मा को जोड़ती है।

समाज में घुलने मिलने का डर

समाज में दुसरो से मिलने पर किसी व्यक्ति को लगता है की वह दुसरो द्वारा तय किया जा रहा है। इस वजह से वह दुसरो से मिलने जुलने में डरने लगता है और मस्तिष्क में ऊलजलूल विचार चलने लगते है। अगर कोई आपको जज करने लगता है तो इसका मतलब है वो आपके साथ असुरक्षित महसूस करता है।

ऐसे में वो खुद पर ध्यान ना देकर आपकी और मुड़ने लगते है और आपको निशाना बनाने लगते है। वो उनका मुद्दा है आपका नहीं।

इस परिस्थिति को हैंडल करने का सबसे अच्छा तरीका है अपने आप को ऐसे प्रभाव से दूर रखना जिसके लिए खुद को एक ऐसे दर्पण की तरह मानना जो हर नकारात्मक विचार को प्रभाव को वापस सामने वाले पर भेज देता है। इस तरह आप उनसे प्रभावित ही नहीं हो सकते है।

Mind को शांत करने के तरीके

व्यस्तता को ख़त्म कीजिये : हमारा मस्तिष्क परेशान क्यों होता है अगर इसके सवाल का जवाब ढूंढते है तो जवाब मिलता है पैसे की समस्या या फिर जीने के लिए हमारी अर्थव्यवस्था जो हमारे जीवन को नियंत्रित करती है।

हो सकता है ये वक़्त हमारे नोकरी को बदलने का है और ऐसी नोकरी ढूंढने का है जिसे हम वास्तव में अपने दिल से करे।

सबसे आसान तरीका अपने दिल से पूछे की आपको क्या करना पसंद है। अगर पैसा महत्वपूर्ण नहीं है तो आपको क्या करना चाहिए ? मौज मस्ती के बाद हम वही करते है जो हमें दिल से पसंद है।

ऐसे में वो काम करे जिससे आपको नफरत है क्यों की जब आप फ्रेश हो जाते है तब काम करते वक़्त कुछ नया ही सीखते है.

हो सकता है आपको वो काम ही पसंद आने लगे इसकी वजह है हम वो कार्य पूर्ण कर चुके है जिसकी इच्छा मस्तिष्क में चलती है और फिर पीछे बचता है सिर्फ काम जिसे आप अच्छे तरीके से करेंगे ये मेरा विश्वास है तो आज ही इसे आजमाए और फर्क खुद देखे।

टीवी देखना बंद कर दे

खाली वक़्त हम सबसे ज्यादा जो काम करते है वो है टीवी देखना। हम सोचते है की इससे हमारा दिमाग रिफ्रेश होता है हम खुद को तरोताजा महसूस करते है लेकिन असल में टीवी हमारी सोच को ही नियंत्रित करने लगता है।

क्यों की काम के बाद मस्तिष्क को आराम दिया नहीं और टीवी देखने लग गए इस वजह से मस्तिष्क लगातार विचारो का आदान प्रदान करता रहता है।

अमेरिका में टीवी, रेडियो,न्यूज़ पेपर और मनोरंजन की किताबो के मध्य आपस में समझौता है जो उन्हें आपस में बांधे हुए है और वो आसानी से लोगो की सोच को नियंत्रित कर लेते है।

आप क्या है, कोई काम क्यों कर रहे है, क्या पहन रहे है ये सब मीडिया द्वारा नियंत्रित किया जाता है। आपका मस्तिष्क विचारो के तर्क वितर्क में ही उलझ कर रह जाता है.

इन सबसे बचने के लिए टीवी पर निर्भरता ख़त्म करनी होगी। जितना वक़्त आप टीवी देखते है उतना ही मीडिया द्वारा प्रभावित होकर उत्पाद खरीदने पर मजबूर होते है दूसरे शब्दो में आपका खाना पीना, पहनना और रहना सब मीडिया द्वारा कण्ट्रोल होने लगता है.

Mind को शांत करना है तो टीवी पर निर्भरता ख़त्म कर दे क्यों की ये मनोरंजन का साधन नहीं है आपके मस्तिष्क की सोच को नियंत्रित करने माध्यम है।

Mind को शांत करना है तो ध्यान है सबसे अच्छा माध्यम

ज्यादातर लोग ध्यान न कर पाने का सबसे ज्यादा बहाना बनाते है की वक़्त नहीं है। एक सर्वे के अनुसार ज्यादातर लोग जब खाली होते है टीवी देखते है जो उनका कम से कम तीन घंटे की खपत करता है।

जब की वो पडोसी से मिलना पसंद नहीं करते है। ये सर्वे बताता है की टीवी हमारे खाली वक़्त को कैसे खपत करता है कैसे हम इस पर निर्भर रहते है. इसके हिसाब से हम वक़्त नही होने का बहाना तो कर ही नहीं सकते है।

दूसरा लोग कहते है की ध्यान करे तो कैसे करे मस्तिष्क से विचार कम ही नहीं होते है मस्तिष्क शांत हो तो ध्यान करे !

ध्यान की अनेको विधिया है आपको हर विधि को आजमा कर अपने लिए श्रेष्ठ विधि का चुनाव करना चाहिए।

ध्यान के लिए सबसे अच्छा है त्राटक क्यों की इससे हम ना सिर्फ मस्तिष्क की गतिविधि को विराम दे सकते है बल्कि उन्हें नियंत्रित भी कर सकते है। ये हमें आत्मिक शांति प्रदान करता है।

खुश रहना है तो Ego दूर भगाए

ज्यादातर लोग दुसरो से इसलिए तालमेल नहीं बैठा पाते है क्यों की इसमें उनके ईगो बाधक बनने लगते है।

किसी के विचारो से प्रभावित ना होने की कोशिश एक तरह का ईगो है जो हमे दुसरो को समझने से रोकते है. Mind को शांत करना है और ईगो से छुटकारा पाना है तो दुसरो की भावनाओ को समझन शुरू कर दे.

खुद को दुसरो की जगह रखकर उन बातो को महसूस करना जिससे आपको परेशानी होती है। इससे आपको पता चलता है की आप दुसरो को जो कहते है अगर वही आपके साथ हो तो आपको कैसा लगेगा। ये तरीका अपने आप आपका अहम ख़त्म कर देगा।

आपका शरीर आपका मंदिर है

खाने में मीठे की अधिकता और उत्तेजक पदार्थो का सेवन आपके सोचने की शक्ति को प्रभावित करता है। नशीले पदार्थ का सेवन आपके सोचने की शक्ति ख़त्म कर देता है आप एक ही विचार को बड़ा करके उसमे फंस जाते है।

आपका खानपान आपके विचार को प्रभावित करता है इसलिए खानपान को लेकर सचेत रहे उल्टा सीधा खाने की बजाय अपने लिए वक़्त निकाले और अच्छा सात्विक खाना खाये।

आपका शरीर क्या चाहता है ये भी महत्वपूर्ण है अगर आपके शरीर की जरुरत है अम्लीय खाना और आप खा लेते है क्षारीय तो आपका शरीर इसे स्वीकार नहीं कर पाता है जिससे हमारा शरीर और मस्तिष्क सही तरीके से काम नहीं कर पाता है।

अगर दिनभर काम करके थक गए है Mind को शांत करना है तो सबकुछ भुला कर एक झपकी ले ले आपका शरीर वक़्त पर आपको बताता रहता है की इसे क्या चाहिए जरुरत बस उसे समझने की है.

Mind को शांत करना है तो करे नियमित व्यायाम

व्यायाम आपके मस्तिष्क और शरीर दोनों को सही तरीके से काम करते रहने के लिए जरुरी है इसलिए नियमित व्यायाम हमेशा ध्यान रखे।

अपने लिए वक़्त चुराना सीखे

दुसरो के लिए काम करते करते हम अपने लिए वक़्त ही नहीं निकाल पाते है जिस वजह से परेशान रहने लगते है क्यों की अपनी जरुरत को भी सभी तरीके से समझ नहीं पाते है। Mind को शांत करना है तो इसके लिए दिन में थोड़ा सा सही पर खुद को एकांत दे इससे आप खुद को बेहतर बना सकते है। खुद को समझ सकते है और दोबारा काम के लिए तैयार हो जाते है।

मौज मस्ती को जीवन का हिस्सा बनाये :

अगर विचारो में बदलाव लाना है तो ऐसे काम करे जिन्हें करने में आपको ख़ुशी मिलती हो। जिन कामो को करने से ख़ुशी मिलती है वो आपको सही सोचने के लिए प्रेरित करते है।

सबकुछ आपके नियंत्रण में रहे जरुरी नहीं

ज्यादातर लोग ये चाहते है की सबकुछ उनके नियंत्रण में रहे वे अकसर सोचते है की अगर वो उन्हें नियंत्रित नहीं कर सकते तो वो अपने आप पर भीं नियंत्रण खो देंगे जो की सत्य नहीं है. अवसर सबकी जिंदगी में आते है और जाते है चाहे आप उन्हें कण्ट्रोल करे या नहीं। आपकी जरूरते आपकी क्रियाओ की प्रतिक्रिया है। जब आप दुसरो को कंट्रोल करने की कोशिश करते है तो खुद के लिए और ज्यादा क्रिया पैदा करते है। Mind को शांत करना है तो दुसरो से उम्मीद ही ना रखे दुसरो पर जितना कम निर्भर रहेंगे उतना ही कम आपके विचारो में विवाद होगा।

खुद को शब्दो में उकेरने की कोशिश करे

अगर हम नियमित डायरी लिखने की आदत डालते है तो खुद को ज्यादा से ज्यादा सकारात्मक रखते है क्यों की इसमें हम अपने अच्छे अनुभव उतारते है जो हमें आगे बढ़ने में मदद करते है और बुरे अनुभव जिनसे हम कुछ सीखते है। इससे हम नकारात्मक विचारो से दूर हो जाते है।

वर्तमान में रहना सीखे :

भुत में हम जो कर चुके है उसे बदल नहीं सकते है और ना ही भविष्य में जो होने वाला है उसे देख सकते है तो फिर इनकी फ़िक्र क्यों आज में रहे और खुश रहे। क्यों की अगर आज अच्छा है तो आने वाला कल और अच्छा होगा। Mind को शांत करना है और खुश रहना है तो  बीते हुए कल की यादो में और आने वाले कल की चिंता में आज को बर्बाद मत करे। वर्ना कुछ हासिल नहीं होगा।

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खुद को प्रकृति से जोड़ना सीखे :

खुद के लिए वक़्त निकाले और बगीचे में घूमने जाये खुद को प्रकृति के बिच महसूस करे उससे जुड़ने की कोशिश करे। जब आप प्रकृति के बिच हो अपने दैनिक जीवन को भुला दे। ये आपका ना सिर्फ तनाव ख़त्म करता है बल्कि आपको सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण करता है जो किसी कार्य के लिए आवश्यक है।

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सिर्फ एक महीना अंगूठे का अभ्यास और हैरान रह जाओगे खुद में इन बदलाव को देखकर

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Thumb Gazing exercise for eye in Hindi.आँखों की देखभाल के लिए आप क्या करते है ? उन्हें ठन्डे पानी से धोना, समय समय पर और खाने में हरी सब्जिया क्यों की इनसे आपको सही पोषण मिलता है.

पर क्या आप जानते है की अगर आपको चश्मा चढ़ा हुआ है तो आप उससे भी धीरे धीरे निजात पा सकते है. आज हम बात करेंगे आँखों की देखभाल के लिए किये जाने वाले सही व्यायाम की.

आँखों की लंबी उम्र और नजर तेज करने के लिए शारीरिक व्यायाम के साथ साथ हमें Eye Gazing व्यायाम भी करना चाहिए जिससे हमारी आँखों की नजर तेज होती है और पुतलियों की Exercise होने से उसकी कोशिकाएं मजबूत बनती है. eye care tips Hindi.

शरीर को चुस्त और दुरुस्त बनाने के लिए हम सभी व्यायाम करते है महंगे gym में भी जाते है. लेकिन क्या आप अपनी आँखों के लिए भी कोई व्यायाम करते है ? आँखों की रौशनी वक़्त के साथ मंद पड़ती जाती है.

Thumb Gazing exercise for eye

अगर लम्बे समय तक आँखों की रौशनी बरकरार रखना चाहते है तो आँखों पर भी ध्यान देना पड़ता है. आँखों के लिए व्यायाम की बात की जाये तो सबसे पहले त्राटक का नाम आता है. त्राटक आँखों के देखने की क्षमता को बढ़ाता है.

सुबह हम जब व्यायाम करते है तब thumb gazing exercise (see above pic) का नाम अपने सुना ही होगा जी हाँ ये एक्सरसाइज आँखों की देखने की क्षमता और इसकी रौशनी को प्रभावित करता है.

हमारी आँखों की बनावट के कारण ये ज्यादा और कम रौशनी में खुदबखुद एडजस्ट हो जाती है. लेकिन क्या होगा जब आप लम्बे वक़्त तक ज्यादा या कम रौशनी में काम करते है या फिर रहते है. इसके विपरीत जाने पर आपकी आँखे adjust नहीं हो पाती है.

How to do Thumb Gazing exercise for eye in Hindi

आँखों की देखभाल के लिए अंगूठे का अभ्यास एक ऐसी तकनीक है जो आपकी आँखों के लिए किया जाता है. Thumb Gazing exercise for eye को आप आसान तरीके से कर सकते है. निचे दिए गए स्टेप को फॉलो करे.

सबसे पहले सुबह उठ कर किसी शांत जगह प्राकृतिक वातावरण में आराम से बैठ जाये.

अपनी आंखे खोले और निचे दिखाए गए चित्र की तरह चारो और घुमाये. ये आपकी आँखों की पुतली को मजबूत बनाता है.

अब आँखों के सामने हाथ को सीधा कर अंगूठे को ऊपर की ओर उठा ले और इसे देखने की कोशिश करे.

जब आपकी आँखों में पानी आने लगे तो आंखे बंद कर ले और फिर इस अभ्यास को तब तक दोहराये जब तक आंखे इसके लिए तैयार ना हो जाये.

इसके बाद आगे बढ़ते हुए अंगूठे को दूर और पास लाने की प्रक्रिया शुरू करे, शुरू में धीरे धीरे दूर से अंगूठे को पास लाए लेकिन नजर ना हटने पाए.

Thumb Gazing exercise for eye की वजह से शुरू में आँखों में तनाव पैदा होता है मगर बाद में सब सही होने लगता है और सहजता से आप इसे कर पाते है.

जब कुछ दिन हो जाये तब अभ्यास में कुछ बदलाव लाए जैसे ऊपर निचे और दाये बाये अंगूठे को घुमाये और इसके साथ ही आँखों की गति रखे.

Thumb Gazing exercise for eye के नियमित अभ्यास से आँखों की रौशनी तो बढ़ती है साथ ही साथ अगर आपको चश्मा चढ़ा हो तो सही हो जाता है. आँखों की देखभाल के लिए अंगूठे का अभ्यास एक सही अभ्यास है.

नियमित व्यायाम के साथ करना चाहिए अभ्यास

नियमित रूप से स्वस्थ रहने के लिए हम व्यायाम करते है तो फिर आँखों के स्वास्थ्य को क्यों नजरअंदाज किया जाये.

Thumb Gazing exercise for eye के नियमित व्यायाम के साथ मात्र 5 मिनट भी अगर आप इस अभ्यास को करते है तो आप अपने आप को चश्मे से दूर रख सकते है. इसके लिए आपको कुछ नहीं करना बस खुद को किसी ऑब्जेक्ट पर कंसन्ट्रेट करना है.

जैसे त्राटक में हम किसी ऑब्जेक्ट का इस्तेमाल करते है वैसे ही इसमें मूविंग ऑब्जेक्ट का यूज़ करना होता है. Thumb Gazing exercise for eye ना सिर्फ आँखों की देखभाल का सबसे अच्छा माध्यम है बल्कि आँखों की रौशनी को लंबे समय तक बनाये रखने के लिए भी प्रभावशाली उपाय है.

त्राटक के गलत अभ्यास से आँखों पर पड़ता है असर

त्राटक के बारे में पढ़ कर कर जब हम सही तरह से त्राटक नहीं करते है तब हमें आँखों में जलन,पानी आना और आँखों में चुभन जैसी समस्या होने लगती है. हम दिन के उजाले में भी निकलने से कतराते है.

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हमें Thumb Gazing exercise for eye करनी चाहिए.

इसके आलावा आँखों को गोल घुमा कर भी हम Thumb Gazing exercise for eye कर सकते है. इसमें आँखे ऊपर निचे और साइड में करते है. सुबह बगीचे में घूमे त्राटक का अभ्यास सूर्य निकलने से पहले करे.

इसके बाद नियमित रूप से garden में टहले थोड़ा दौड़े और फिर किसी object पर नजर जमाये.

इसके पीछे एक बड़ा कारण है की त्राटक का अभ्यास करते वक़्त हम सिर्फ एक बिंदु पर फोकस होने लगते है.

ऊपर बताये उपायो से हमारी आँखों की प्रकाश को absorb करने की क्षमता बढ़ती है जब दोनों कार्य होते है तो आँखों की देखभाल सही रहती है. इनमे जलन, पानी आना और चुभन जैसी शिकायत नहीं रहती है.

Read : एक ही गले से दो आवाज निकलना क्या वाकई ये किसी आत्मा का काम है या कुछ और क्या है सच ?

बिच में ना छोड़े त्राटक का अभ्यास

त्राटक का अभ्यास छोड़ने की आवश्यकता नहीं है. त्राटक चालू रखे लेकिन दूसरे उपाय भी नियमित रखे ये आपमे ऊर्जा का संचार भी करेंगे और आपकी आँखों की देखभाल को बरकरार रखेंगे.

त्राटक की वजह से अगर भोहों ( ललाट ) में खिंचाव होने लगे तो आप Thumb Gazing exercise for eye के साथ साथ आँखे बंद कर भावना शक्ति का अभ्यास जरूर करे.

आँखे बंद कर भावना दे की आपका तनाव काम हो रहा है. इस तरह आपका तनाव दूर हो जायेगा और भावना शक्ति में इजाफा भी होगा.

Remember improper guidance harm you. Before trying any practice consult with expert. So you can get proper guide what to do.

क्या आप जानते है सिर्फ सोचते रहने से भी आप अनचाहे विचारो से छुटकारा पा सकते है

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get rid from unwanted thoughts के लिए meditation सबसे बड़ा उपाय है. meditation से हम विचारों को कम करते हुए उन्हें control करते है. लेकिन क्या अपने कभी सोचा है की फालतू विचारो से छुटकारा पाने की बजाय विचारों की मात्रा बढ़ाते हुए mind को relax करे. सोचने में अजीब लग सकता है की एक बड़ा आईडिया आपको सिर्फ सोचते रहने से ही मिल पाता है।

लेकिन ये सच भी है क्यों की जब हम सोचते रहते है तो कुछ समय तक ही हमारे मन में फालतू विचार आते है। इसके बाद हमारा मस्तिष्क साफ और शांत तरीके से सोचने लगता है। इन्ही वजह से हम एक बड़ा आईडिया विचारो में से निकाल पाते है। human mind लगातार सोचता रहता है.

जिस वजह से हमारी energy उस जगह लग नहीं पाती है जहां काम आनी चाहिए. इसलिए ध्यान में विचारों को निम्न तरह से control करना सिखाया जाता है.

  • 1. ध्यान कर विचारों को एक जगह केंद्रित करना.
  • 2. ध्यान कर विचारों को कम करना.
  • 3. ध्यान कर विचारों से रहित मन मस्तिष्क का सर्जन

सबसे ज्यादा कठिन है सीधे तौर से मन को शुन्य करना. मनुष्य का मस्तिष्क हमेशा सोचता रहता है.इसलिए ऊपर की विधि द्वारा या तो उसे कम करे या एक जगह केंद्रित कर उसे दिशा प्रदान करे जो concentration कहलाती है.

how to get rid from unwanted thoughts

get rid from unwanted thoughts या मानसिक थकान. ध्यान में इन विधि के इस्तेमाल से हम विचार को न्यून करने का प्रयास तो करते है लेकिन जब mind ही थक जाये तो क्या फायदा ध्यान करने का. मस्तिष्क का थकना हमारे विचारों को जबरदस्ती न्यून करने की कोशिश का नतीजा है.

इसमें मस्तिष्क थक जाता है और फिर ध्यान की इच्छा खत्म होने लगती है. मानसिक थकान शरीर पर प्रभाव डालती है और कम करने की रूचि कम हो जाती है, आराम करने की इच्छा बार बार होने लगती है.ऐसे में हमें ध्यान की दूसरी डायरेक्शन पर ध्यान देना चाहिए.

हम एकाएक विचारों से रहित मस्तिष्क का निर्माण तो नहीं कर सकते लेकिन चाहे तो विचारों को दिशा और guide कर illusion की स्थिति का निर्माण कर आसानी से मन लगने लायक ध्यान की स्थिति का निर्माण कर सकते है. थकान इसमें भी आती है लेकिन वो तब होता है जब हम इस स्थिति में ज्यादा देर तक रहने लगे और illusion बनता रहे.

how to get rid from unwanted thoughts

फालतू विचारो से छुटकारा पाना है तो हमें खुद को विचार शून्य करने पर जोर कभी ना दे। बदलते वक़्त के साथ ऐसी कई तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है जिनसे हम बगैर मानसिक थकावट के खुद को फालतू विचारो से छुटकारा दिला सकते है। आज हम बात करेंगे ऐसी ही कुछ आसान और कारगर तकनीक जो आपको फालतू विचारो से छुटकारा दिलाने में हेल्प करेगी।

illusion क्या है

illusion hypnotherapy जैसा है इसमें जाग्रत रहते हुए हम विज़न बनाते है बिलकुल मूवी की तरह.उन दृश्य का निर्माण हम खुद करते है.

इससे mind में stress नहीं होता है और हम आसानी से मस्तिष्क को वो दिखा सकते है जो हम चाहते है इससे फालतू विचारों से छुटकारा मिल जाता है और हम मस्तिष्क में विचारों को दिशा प्रदान करने में सक्षम हो जाते है.

प्रयोग सोते हुए किया जाता है. बचपन में मेने खुद ये खूब किया था जब कोई fantasy प्रोग्राम देखता था या फिर फिल्म. इससे नींद अच्छी आती थी और stress ख़त्म होके mind भी relax हो जाता था.

विचारो को दे दिशा

इसके बाद हम चाहे तो विचारों को एक दिशा में guide कर उसे विचार शुन्य या फिर concentrate कर सकते है. दूसरा तरीका इससे similar है. जैसे हम विचारों को रोकते है और वो ज्यादा से ज्यादा दिमाग में उमड़ते है.

इसलिए रोकने के बजाय लेट कर उन्हें ज्यादा से ज्यादा सोचे, जितना आप सोचते जाते है वो दबे हुए विचार बाहर निकलने लगते है जो हमारे लिए जरुरी है जैसे कई ऐसी बाते जो हम याद नहीं रख पाते फिर कुछ देर बाद हम पाएंगे की विचार अपने आप कम होने लगते है और हम सोने लग जाते है.

इससे मस्तिष्क पर दबाव कम होता है शरीर में नई स्फूर्ति का अहसास होता है. ये दोनों प्रयोग सोते हुए लेट कर करे इससे विचार तो कम होंगे साथ ही याद करने की क्षमता में इजाफा होता है. ये उनके लिए फायदेमंद है हो विचारों को रोक नहीं पाते है या जिनका मन चंचल होता है

get rid from unwanted thoughts में मददगार है दैनिक लाइफस्टाइल

हमारी दिनचर्या व्यवस्थित ना होने की वजह से हमारे मस्तिष्क पर इसका सबसे ज्यादा इफ़ेक्ट पड़ता है। इसे एक उदाहरण से समझे : हम दिन भर अलग अलग काम करते है तो बगैर प्लानिंग और प्लानिंग से करने पर हम क्या फर्क महसूस करेंगे।

हम पाएंगे की बगैर प्लानिंग के काम करने में हमें ज्यादा सोचने की जरूरत पड़ती है और ये ज्यादा थकाने वाला काम भी होता है। इसलिए दैनिक दिनचर्या में कुछ बातो को फॉलो कर हम इसे मजेदार बना सकते है।

Tricks make you Cool in Daily routine

  • काम में रूचि जगाये और ये तभी संभव है जब आप अपने काम को पूरी तरह समझ लेते है। इसलिए काम को समझे और बेहतर तरीके से करे।
  • हमेशा विकल्प तैयार रखे क्यों की वही काम उबाऊ होता है जो सदियो से एक ही तरीके से चलता आ रहा है और पारम्परिक तरीके से होता है। काम में विकल्प हमें कार्य को बेहतर तरीके से करने के अवसर देता है।
  • कार्य की शुरुआत से कुछ वक़्त पहले ध्यान दे और सही समय की बजाय कुछ देर पहले का वक़्त निकाल कर उसे तैयार करे ताकि आपको एक्स्ट्रा वक़्त मिले और सही तरीके से कम वक़्त में आप उसे पूरा कर सके।
  • जब आप पहले काम को वक़्त से पूरा कर लेंगे तो आपके पास वक़्त बचता है जो दूसरे कामो में इस्तेमाल किया जा सकता है यानि सुबह की शुरुआत पुरे दिन आपके काम को बेहतर बना देगी।

इन तरीको पर अमल करने से आपको दो फायदे होंगे पहला आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी दूसरा आपके पास वक़्त बचेगा कुछ नया करने का जो आपको get rid from unwanted thoughts में मदद करेगी।

get rid from unwanted thoughts दोस्तों ये थी आज की पोस्ट जो get rid from unwanted thoughts in hindi आपको अनचाहे विचारो से छुटकारा पाने में मददगार साबित होगी. अगर आपके पास ध्यान से जुडी बढ़िया पोस्ट, जानकारी, अनुभव है तो आप हमारे ब्लॉग पर इसे शेयर कर सकते है। आपके नाम के साथ हम इसे पब्लिश करेंगे। आज की पोस्ट पर कमेंट कर अपनी राय जरूर दे।

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fourth dimension – क्या है चतुर्थ आयाम का रहस्य और इसके सिद्धाश्रम के अस्तित्व के सबूत

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क्या आपने भी sidhhvastha के बारे में सुना है। सिद्धावस्था यानि sidhhashram में प्रवेश एक ऐसी जगह जहा पर उच्च कोटि के योगीजन विचरण करते है। विज्ञान भी इस जगह के अस्तित्व को मानता है और उनके अनुसार इसे chaturth avastha कहा जाता है।

सिर्फ 3 तत्व जो देव तत्व कहलाते है से युक्त व्यक्ति ही इस अवस्था में प्रवेश करने लायक होता है। fourh dimension in hindi में कैसे प्रवेश करे. enter in fourth dimension और sidhhashram में कैसे हम महा मुनि के guide ले.

fourth dimension

tratak ki alokik sadhna द्वारा पंच तत्व में से दो तत्व का लोप करवाया जाता है। इनसे हम सिर्फ 3 तत्व युक्त हो जाते है। अलौकिक साधना में अग्नि त्राटक सबसे पहला त्राटक है जिसमे हम अगर सफल हो जाये तो सूर्य और दूर त्राटक में भी सफल होने के चांस बढ़ जाते है।

ये माना गया है की अग्नि त्राटक सिर्फ सन्यासी या सांसारिक कर्म से विरक्त साधक ही सही तरीके से कर सकता है। यही वजह है की त्राटक की ये साधना अलौकिक और दुर्गम साधनाओ में से एक है।

क्या है fourth dimension / सिद्धावस्था:

चित्र आमतौर से two dimension होते हैं। उनमें लम्बाई चौड़ाई ही दृष्टिगोचर होती है। आगे पीछे के, ऊँचे नीचे के वस्तु संकेतों को देखकर यह अनुमान लगाया जाता है कि यह कितनी गहरी या ऊँची होनी चाहिए।

गत दो दशकों में third dimesion चित्र बनाने का सिलसिला चल तो पड़ा है पर सर्व साधारण के लिए अभी पूरी तरह सुलभ नहीं हुआ।

अभी उनका मोटा तरीका इतना ही है कि दो आँखों पर दो चित्र एक जैसे ही लगाये जाते हैं। एक फोकस बिन्दु पर जब दोनों की छवियाँ एकत्रित हो जाती हैं, तब उनकी गहराई-ऊँचाई भी अनुभव में आने लगती है।

बच्चों के टेलिस्कोप और दो बिन्दीदार चित्रों को आपस में सटाकर भी यह कौतूहल बच्चों के लिए सुलभ हो गया है कि वे 3D चित्र देखें। सिनेमा ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया और कुछ थ्री.डी. फिल्में भी पिछले दिनों बनाई हैं।

त्रि आयामी तकनीक और हमारा विज्ञान

यह फिल्में होलोग्राफी के सिद्धान्त के आधार पर बनाई गई थीं। इसमें मात्र गहराई, ऊँचाई, निचाई ही नहीं दीखती थी पर साथ ही इतना और भी देख पड़ता था कि सामने का पर्दा कोई खुला मैदान है और उसमें से निकल कर शेर घोड़े वगैरह इस तरह दौड़ते आ रहे हैं मानो वे दर्शकों पर सवार ही होने वाले हैं।

प्रारंभ में इन्हें देखकर अनेक सिनेमा दर्शक भयभीत हो गये और चीखते हुए हाल से भागे। कइयों को वह कौतूहलवर्धक scene इतने आश्चर्यजनक लगे कि उनने उन्हें कई-कई बार देखा। पर अब यह प्रयोग नवीन नहीं रहा। 3D comics काफी popular हो गये हैं। संग्रीला घटी का रहस्य पृथ्वी का 3rd आयाम

इस 3 Dimensional technique को विज्ञानी यूक्लिड ने आविष्कृत किया था और इसका नाम stereoscopic दिया था।

इस आधार पर प्रथम फिल्म “बवाना डेविल” बनी थी, जो बहुत ही सफल रही। बीच में तकनीकी कठिनाइयों के कारण वह बहुत विस्तार न पा सकी, पर बाद में नये सिरे से ऐसी शृंखला को manage करने की हालीवुड ने एक समग्र योजना बनायी एवं वे इसमें सफल रहे। अवचेतन मन की शक्ति तलिस्मान का निर्माण

Elbert Einstein and universal theory

अलबर्ट आइंस्टीन ने इस विश्व ब्रह्माण्ड में exist अनेक आयामों की संभावना व्यक्त की थी। इसमें से वे उपलब्ध जानकारियों व उनकी परिणतियों पर प्रामाणिक प्रकाश डालते थे और कहते थे कि जब मनुष्य चतुर्थ आयाम के तथ्यों को कार्य रूप में परिणति करने लगेगा तब उसके ज्ञान में अबकी तुलना में अनेक गुनी वृद्धि होगी।

साथ ही ऐसी शक्ति भी हस्तगत होगी जिसे जादुई कहा जा सके। वस्तुतः चतुर्थ आयाम को जादू लोक की समता दी जाय तो कुछ अत्युक्ति न होगी।

जर्मनी के प्रो. जौलनर ने वर्षों अथक परिश्रम करके चतुर्थ आयाम के बारे में अनेक महत्वपूर्ण खोजें की। अनुसंधान के दौरान उनने पाया कि अगणित ऐसे कार्य, जो त्रिआयामीय स्पेस में संभव नहीं, उन्हें चतुर्थ-आयामीय स्पेस में सुगमतापूर्वक सम्पन्न किया जा सकता है। यथा धातु की बनी गेंद को दस्ताने की तरह उल्टा जा सकता है।

इसी प्रकार दोनों किनारों से बँधे धागे में आसानी से गाँठ लगायी जा सकती है एवं दो पृथक डिब्बों में बन्द छल्लों की, डिब्बों को खोले बिना आपस में फँसाया जा सकता है। उनका कहना है कि इसी प्रकार के अनेकानेक अजीबोगरीब करतब दिखाये जा सकते हैं।

proof of fourth dimension – सिद्धावस्था का अस्तित्व है

यही नहीं, इस आयाम की विश्वसनीयता को प्रामाणित करने के लिए उनने परोक्ष जगत से भी संपर्क किया और अनेक माध्यमों का सहयोग लेकर कई प्रकार के प्रयोग किये। कहा जाता है कि इसमें इन्हें अद्भुत सफलता मिली।

एक प्रयोग के मध्य देखा गया कि वे जिस कुर्सी पर बैठे थे, उसकी भुजा से उनकी बाँह अपने आप बँध गई, यद्यपि उनका दूसरा हाथ टेबल पर था, जिसे प्रयोग के दौरान उनने संचालित किया ही नहीं।

एक अन्य प्रदर्शन में टेबुल के दोनों सिरों से बँधी डोरी में स्वतः गांठें बँध गई। तात्पर्य यह कि परोक्ष जगत के माध्यम से चौथे आयाम के चमत्कारों को आसानी से देखा जा सकता है।

प्रेतात्माएँ भी चौथे आयाम की पुष्टि करती हैं और चतुर्थ आयाम प्रेत योनि के अस्तित्व को असंदिग्ध रूप से प्रमाणित करता है।

effect in 4th dimension-सिद्धावस्था में परिवर्तन

प्रो. क्रुक्स ने तो यहाँ तक कहा है कि चौथे आयाम में पहुँच जाने के बाद वस्तुओं का वजन अप्रत्याशित रूप से घट जाता है तथा एडगर वैलेस के अनुसार इस आयाम में शरीर अग्निरोधी बन जाता है, उसे आग से किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँचती।

वैज्ञानिकों द्वारा यह अनुमान लगाया गया है कि जब मनुष्य fourth dimension क्षेत्र में प्रवेश करेगा तो उसकी यही आँखें टेलिस्कोप और स्टीरियो microscopic का काम करने लगेंगी।

वह पीने के पानी में चलते फिरते कीड़े देख सकेगा और जिस प्रकार राडार दूर-दूर तक की आकाश में उड़ती वस्तुओं को अपने पर्दे पर दिखा देता था, उसी प्रकार मनुष्य की गरुड़ दृष्टि भी अन्तरिक्ष और इतनी दूर तक इतनी स्पष्टता के साथ देख सकेगी जैसे कि अपनी आँखों से एक सीमित मोटाई और दूरी देखी जाती है।

इस प्रकार मनुष्य की दृष्टि में विशिष्टता भरी जाने का स्वाभाविक परिणाम यह होगा कि उसका ज्ञान कहीं अधिक बढ़ जाय और उस आधार पर अपनी सुरक्षा और प्रगति संबन्धी कई समस्याओं का समाधान संभव हो सके। जितना वह अब जानता है उसकी तुलना में अधिक जानकार बन सके।

fourth dimension-सिद्धावस्था में विचरण

सिद्धावस्था / fourth dimension में प्रवेश कर सकने वाला प्राणी एक प्रकार से सिद्ध पुरुष होगा। वह पीछे मुड़ कर बीती हुई घटनाओं को भी देख सकेगा और सिर उठाकर यह भी अनुमान लगा सकेगा कि भवितव्यता क्या है? निकट भविष्य में क्या होने जा रहा है?

कारण की घटनाओं का तारतम्य उनके प्रत्यक्षतः सामने आने से पूर्व ही चल पड़ता है और उसका आभास मिलना संवेदनशील इन्द्रियों के लिए सरल होता है। अनेक जीव-जंतु भूकम्प, वर्षा आदि की घटनाओं के घटित होने के पूर्व ही अनुमान लगा लेते हैं और समय से पूर्व ही अपने बचाव का उपाय कर लेते हैं।

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नई शक्ति का पादुर्भाव

इसे चतुर्थ आयाम का सीमित आभास कह सकते हैं। इस आधार पर अपना दूसरों का भूतकाल और भविष्यत् बहुत अंशों में जाना जा सकता है। इतना ही नहीं, इसके साथ एक नई शक्ति का भी प्रादुर्भाव हो सकता है।

चौथे आयाम में प्रविष्ट व्यक्तियों के सूक्ष्म नेत्रों में ऐसी शक्ति हो सकती है जिसके सहारे वे अदृश्य लोक में भ्रमण करने वाले जीवात्माओं की सत्ता का परिचय प्राप्त कर सकें। उन्हें विदित होने लगे कि किस स्तर की मृतात्मा कितनी दूरी पर किस स्थिति में रह रही है। उसके साथ संबन्ध मिलाना और आदान-प्रदान का सिलसिला चला भी कुछ कठिन न रहेगा।

अभी हम द्विआयामीय या त्रिआयामीय दुनिया में रह रहे हैं। 3 dimensional तक का भी थोड़ा बहुत उपयोग ही हाथ लगा है। पर जब fourth dimension में प्रवेश करना बन पड़ेगा तो बुद्धि एवं शक्ति का इतना विस्तार होगा जिसे “सिद्धावस्था” कहा जा सकेगा।

दोस्तों हो सकता है की आज की पोस्ट आपकी समझ से थोड़ी परे हो लेकिन इसमें विज्ञान और आध्यात्मिक संसार के मिश्रण को दोनों तरह से समझने की कोशिश की गई। ज्यादा से ज्यादा पोस्ट के लिए हमें सब्सक्राइब करे और कमेंट में अपनी प्रतिक्रिया देना ना भूले।

ध्यान करे अब म्यूजिक के साथ वो भी आसानी से

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meditation music एक ऐसा माध्यम है जिसमे हम बिना किसी परेशानी के सिर्फ म्यूजिक से मस्तिष्क की गतिविधि को शुन्य की अवस्था में ला सकते है। Meditation With music में हम अपने विचारो के प्रवाह को दिशा देते है। और एक थॉट पर फोकस होने में काफी मदद मिलती है।

दोस्तों खाली वक़्त में आप क्या करते है ? ज्यादातर गाने सुनते है या फिर कुछ खेलते है कुछ तो घूमना पसंद करते है। लेकिन हर किसी के इस तरह अलग अलग वक़्त बिताने को आप कैसे समझेंगे।

म्यूजिक हम रिलैक्स होने या मूड फ्रेश करनेके लिए सुनते है लेकिन क्या आप जानते है एक म्यूजिक हमारे मस्तिष्क को रि-प्रोग्राम कर सकता है। सम्मोहन के लिए कुछ खास धुन तैयार की जाती है जिनसे हम आसानी से अपने क्लाइंट को निद्रा की अवस्था में ला सकते है।

अगर बाते करते वक़्त आपके आसपास कुछ खास धुन लगा दी जाये तो आप उसमे डूबे बगैर नहीं रह सकते है।

Meditation Music

हम अपने दैनिक जीवन में म्यूजिक सुनते है और दूसरे काम भी करते रहते है क्या अपने कभी महसूस किया की म्यूजिक सुनते सुनते आप अपने काम में ज्यादा एकाग्र महसूस करते है या फिर एक अवस्था आती है जिसमे आप म्यूजिक तो चलता है पर आपको सुनाई नहीं देता है यानि आपका पूरा ध्यान सिर्फ काम में होता है।

ये अवस्था हमें मैडिटेशन में भी महसूस होती है पर म्यूजिक सुनते सुनते हम कई बार इसी अवस्था में आ जाते है। आज की पोस्ट में हम ऐसे म्यूजिक की बाते करेंगे जो आपके मस्तिष्क को शून्य की अवस्था में लाने में कारगर है इसके प्रयोग से हम कुछ भी करने में सक्षम होते है खासतौर से अपने मस्तिष्क में बदलाव लाने में .

Meditation Music-संगीत के साथ ध्यान कैसे करे

आज के वक़्त में ऐसा कोई नहीं जो संगीत नहीं सुनता है. सभी संगीत सुनते है और इसके द्वारा अलग अलग भाव को महसूस करते है.सभी एक जैसा music नहीं सुनते है.किसी को rock किसी को pop किसी को spiritual तो किसी को कुछ और music में अनोखा सम्मोहन है ये बात वो जानते है जिन्हे डांस करना नहीं आता है लेकिन फिर भी जब में म्यूजिक सुनते है तो उनके कदम थिरकने लगते है।

जो म्यूजिक हमें पसंद होता है वो हमारे मस्तिष्क को कुछ खास निर्देश लगातार भेजता है जिससे हमारे माइंड में उसकी एक फिल्म बनने लगती है ये बिलकुल वैसा ही है जैसे की सिर्फ सुन कर उसकीसाकार कल्पना बना लेना।

इसलिए इनकी पावर का कोई अंदाजा नहीं की ये हमारे मस्तिष्क को किस तरह प्रोग्राम कर दे।

Meditation Music हमारे सोचने की शक्ति को कैसे प्रभावित करता है.

music जब हम सुनते है तब उसकी धुन हमारे मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव डालती है अगर music हमारी interest के अनुसार होता है तो हम उसमे खो जाते है. इसका सीधा सा प्रभाव हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है अगर हम हमारी पसंद की चीजे देखते सुनते है तब हम happy रहते है.

लेकिन इसके विपरीत जब हम कोई और जो हमें पसंद नहीं है देखते है या सुनते है तो हम unhappy हो जाते है. इसका कारन है अवचेतन मन का उन्हें पहले से ही धारण कर लेना।

Alpha music क्या है.

Alpha music यानि ऐसा म्यूजिक जो मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है. सामान्य म्यूजिक सिर्फ हमारे विचारो को एक दिशा दे सकता है लेकिन अल्फा म्यूजिक सीधे हमारे विचारो को न्यून करने का काम करता है इसकी धुन इस तरह होती है जो सीधे sleeping effect डालती है।

यूट्यूब पर ऐसे ढेरो विडियो है जिसमे Alpha म्यूजिक है और ये प्रभावी भी है मगर कुछ ही म्यूजिक सुनने लायक है क्यों की इनकी फ्रीक्वेंसी और धुन बेहद मायने रखती है। जिससे हम सही दिशा में बढे वर्ना हो सकता है की हम अचेतावस्था में पहुँच जाये।

अल्फा म्यूजिक और ध्यान

Alpha music  तब ज्यादा काम करता है जब हम म्यूजिक के शौक़ीन हो यानी म्यूजिक सीधा दिमाग पर असर करे.इस स्थिति में हमें अल्फा म्यूजिक का चुनाव भी ध्यान से करना चाहिए. इसके अलावा भी कुछ दिन तक सुनते रहने से ये अपना प्रभाव छोड़ने लगता है। इसके लिए हमें तभी अभ्यास करना चाहिए जब हम हो क्यों की इस अवस्था में हम बेहतर तरीके से अपने मस्तिष्क को प्रोग्राम कर सकते है।

म्यूजिक का सही चुनाव : जब हम अल्फा म्यूजिक सुने तब ध्यान दे अल्फा म्यूजिक आप पर कितना असर कर रहा है.इसके अलावा इसकी धुन आपके कानो को प्रिय है या अप्रिय।

Meditation music की चुनी गई लिस्ट

ध्यान दे सही अल्फा म्यूजिक का चुनाव करे और इसका वक़्त भी निर्धारित करे. you tube पर अनेको alpha music की list है लेकिन काम के सिर्फ 2% है. इसलिए इसका चुनाव ध्यान से करे नहीं तो इसके side effect भी है। कुछ खास धुन का ग्रुप है जिसमे हमारे मस्तिष्क तक जल्दी इफ़ेक्ट डालने की काबिलियत है।

मेने कुछ साल तक यूट्यूब से कई धुन डाउनलोड की है और उनमे से बेस्ट को सेलेक्ट कर ब्लॉग में अपलोड किया है आप इन्हें आजमा सकते है और 100% ये आपके ऊपर अपना सकारात्मक प्रभाव छोड़ेगी।

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Meditation music के साइड इफ़ेक्ट

1 दिमाग का शुन्य हो जाना

2 शरीर की हरकत शिथिल हो जाना

3 शरीर का कई देर तक हरकत में न आना और जब होश आता है तब कमजोरी और शिथिलता का अहसास रह जाना जो कई देर तक रहता है।

दोस्तों यूट्यूब पर कई ऐसे म्यूजिक की लिस्ट है जहा पर बताया  गया है की ये ध्यान के लिए सबसे अच्छा म्यूजिक है पर इनका चुनाव सही तरह से सोच समझ कर करना चाहिए। क्यों की इन म्यूजिक से सबसे ज्यादा हमारे कान और मस्तिष्क प्रभावित होता है। Meditation Music का चुनाव कानो को प्रिय लगने वाला होना चाहिए।

ज्यादातर हमें विचार शुन्य होने मे, तनाव दूर करने में, और कई बार तो सूक्ष्म शरीर की अवस्था में लाने में कारगर साबित हुए है।

इसके अलावा हम अपनी कुछ आदतों में भी बदलाव कर सकते है। जिसके लिए हमें शून्य की अवस्था में आने के बादअच्छी आदतों पर विचार दोहराने चाहिए इससे हम ज्यादा बेहतर तरीके से उन्हें अवचेतन मन तक पहुंचा सकते है।

लेकिन इसका अभ्या हमें शाम को या दोपहर में ही करना चाहिए सुबह अगर करते है तो पहले योगा या ध्यान से खुद को चेतन्य कर ले।

आज का आर्टिकल हमें खासतौर से ध्यान में सरल और आसान तरीके से सफलता पाने में मदद करने वाले उपाय पर लिखा है आपको आजका आर्टिकल कैसा लगा हमें जरूर बताए अपने विचार कमेंट के माध्यम से रखे और हमें सब्सक्राइब जरूर करे ताकि हम आपको और भी बेहतर पोस्ट आपके इनबॉक्स में भेज सके।

anger management therapy के इस अभ्यास से खुद को बचा सकते है गुस्से और तनाव से – best tips

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दिनभर की भागदौड़ में हम अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाते है। ऐसे में तनाव से घिरना आम बात हो चुकी है। दिनभर भागदौड़ करने के बाद जब मन को शांति नहीं मिलती तो हम गुस्से और तनाव का शिकार होने लगते है। गुस्से पर काबू पाना है तो उसकी वजह खोजे।

ऐसे कई कारणऔर वजह है जिनकी वजह से हम इसका शिकार होने लगते है जैसे की समय पर ना उठ पाना या फिर कोई भी काम वक़्त पर याद ना रह पाना। बात करते है घर पर की जा सकने वाली anger management therapy के बारे में.

ज्यादातर लोग google पर anger management classes near me देखते है लेकिन इसके जरिये आप घर पर ही anger management and control को possible कर सकते है.

homemade anger management therapy in Hindi

हम अक्सर शिकायत करते है की हमें वक़्त नहीं मिलता है कुछ पल शांति के नहीं मिलते है।

याद रखिये वक़्त मिलता नहीं है निकालना पड़ता है। अगर आप वक़्त पर उठ नहीं पाते है तो कुछ पल की देरी दूसरे काम में बहुत बड़ी लेट लतीफी की वजह बन जाती है। जिसका परिणाम है गुस्सा और  तनाव और जब ये बढ़ने लगता है तो गुस्से पर काबू पाना भी मुश्किल होने लगता है।

आप दिमाग को शांत रखने के लिए क्या करते है. आज की इस Busy Life में सब-कुछ Fast है तो ऐसे में छोटी छोटी गलती आपके पुरे दिन को बिगाड़ देती है। या फिर ज्यादा होने पर आपके रिश्तों में भी दरार पड़ सकती है। जीवन में उतार-चढ़ाव लगे रहते हैं।

जरूरत है तो बस खुद को बैलेंस्ड रखने की। कई बार आस-पास के शोर के कारण परेशानी होती है तो कई बार दिमाग में चल रही हलचल में खुद को balanced रखना मुश्किल हो जाता है।

Anger management therapy in Hindi

वैसे तो अगर गुस्सा होने से पहले कुछ पल का वक़्त निकाल दे तो गुस्सा ख़त्म हो जाता है। पर अक्सर देखने में आता है की कोशिश करते रहने के बावजूद कही न कही आप कमजोर ऐसे में दिमाग को शांत रखने के लिए कुछ बातें फायदेमंद रहेंगी।

जानिए anger management therapy बारे में

1.) सोच को काबू में रखिए

हर चीज दो बार बनती है। एक बार दिमाग में और दूसरी बार हकीकत में। इसलिए अपनी सोच को काबू में रखिए, क्योंकि आपकी सोच ही असलियत का रूप लेगी। इसके लिए आपको मन शांत करना पड़ता है। और सुबह जल्दी उठ कर अगर ध्यान करे तो आप बेहतर सोच सकते है.

2.) एक वक्त पर एक ही कदम बढ़ाएं

आज आपके साथ जो कुछ हो रहा है उसमें ऐसा कुछ नहीं है जो आपको आगे बढ़ने से रोकेगा। इसीलिए एक वक्त पर एक ही कदम बढ़ाएं यानी एक वक्त में एक ही काम को पूरी एकाग्रता और ईमानदारी से करें। इससे सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। क्यों की एकाग्रता से किया कार्य कभी असफल नहीं होता है।

3.) किसी एक बुरी बात के कारण दिन बर्बाद न करें

एक पल बुरा था तो उससे बाकी पल बुरे नहीं बन जाते हैं। इसी तरह से अगर दिन में कोई एक घटना बुरी हो गई है तो उससे पूरे दिन को बर्बाद नहीं किया जा सकता है। सिर्फ इतना ध्यान रखे जब भी कोई बुरी या नकारात्मक घटना घटे उस वक़्त अपने आप को संयमित रखे और आपके दूसरे कार्य पर उस बुरी घटना का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

4.) anger management therapy best tips – किसी एक बुरी बात पर न टिकें

पूरी किताब की कहानी उसके एक चैप्टर में नहीं होती है। न ही कोई एक चैप्टर पूरी कहानी बता सकता है। इसी तरह से एक गलती करने से आपके चरित्र के बारे में पता नहीं चलता है। इसलिए जिंदगी के पन्ने बदलते जाएं यानी किसी एक बात या गलती पर टिके न रहें।

अगर आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा या अच्छे विचार लगातार चलते रहते है तो आप कैसे भी बुरी बातो से न तो विचलित होंगे न ही उसमे उलझेंगे क्यों की इस परिस्थिति से जल्दी ही निकलने की खासियत आपमें आ जाती है। सकारात्मक सोच को कैसे बढ़ाये।

5.) पुरानी बातों पर अफसोस न करें

गुजरी बातों पर जितना मर्जी अफसोस जताने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसी तरह से आने वाले भविष्य को लेकर चाहे जितना एक्साइटमेंट होगा तो भी फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आज जो आपके पास है उसके लिए भगवान को शुक्रिया कहने से बहुत फर्क पड़ेगा। गुजरी बातो में उलझने से कुछ नहीं मिलता है लेकिन आपका आज जरूर ख़राब हो सकता है इसलिए आज को बेहतर बनाए भविष्य अपने आप बेहतर बन जायेगा।

6.) ध्यान रखें जिंदगी हर पल बदलती है

आप कहीं फंस गए हैं, यह केवल एक अहसास है कोई हकीकत नहीं। इसलिए यह कभी मत सोचिए कि आप कहीं फंस गए हैं।

जिंदगी हर सेकंड बदलती है और उसके साथ आप भी बदलते रहते हैं। वक़्त के साथ खुद को ढालने की कला सीख लेने से आपको किसी भी परिस्थिति में तकलीफ या परेशानी नहीं होती है।

तो दोस्तों ये थी वो बाते जिन्हे ध्यान में रख कर अपने आप को super cool बना सकते है। किसी भी परिस्थिति में आप विचलित नहीं हो सकते है। और सबसे बड़ी बात आप खुद को वक़्त के साथ ढाल लेने में सक्षम हो जाते है।

anger management therapy के साथ दिनचर्या में शामिल करे ये आदतों

गुस्से पर काबू पाने में हमारी दिनचर्या का बहुत बड़ा योगदान है। एक नियमित दिनचर्या बनाना मुश्किल जरूर है पर जब ये आदत में शामिल हो जाती है तो आसानी से हम उसमे ढलने लगते है। इन आदतों में सबसे पहली आदत है।

  • सुबह जल्दी उठना और उठ कर ईश्वर से प्राथना करना आज के दिन के लिए।
  • उठने के बाद आज के दिन में होने वाले कामो को कल्पना से साकार करना। यानि प्लान करना की कब क्या करना है जिससे आपको बाद में हड़बड़ाहट का सामना ना करना पड़े।
  • कम से कम आधा घंटा ध्यान या योग में बिताना जिससे मन और शरीर स्वस्थ रहे।
  • सुबह का नाश्ता लिए बगैर काम की शुरुआत ना करे।
  • शाम को कुछ वक़्त एकांत में बिताये।
  • काम से लौटते ही टीवी या मोबाइल से ना जुड़े सोशल मीडिया को भी कुछ वक़्त आराम दे।
  • सोने से तुरंत पहले टीवी ना देखे, ना ही कुछ पढ़े सिर्फ अपनों से बाते करे। इससे आपके रिश्ते मजबूत होंगे।

इन सभी बातो पर अगर आप कुछ सप्ताह भी मनन करे तो ये आपकी आदत में सुमार हो जाएगी। आप हमारी 21 दिन में आदत को दिनचर्या का हिस्सा बनाये वाली पोस्ट पढ़े आपको काफी कुछ सिखने को मिलेगा।

Read : आज भी काले जादू के इन 5 प्रकार को सबसे खतरनाक माना जाता है आप इनके बारे में कितना जानते है

anger management therapy – final word

दोस्तों आज जो लाइफस्टाइल हम फॉलो कर रहे है उससे हमें आराम तो मिला है लेकिन साथ तनाव, अवसाद और चिडचिडापन भी मिला है.

इसके साथ ही हमारे गुस्से में भी बढ़ोतरी हुई है. आज हमने जिस anger management therapy के बारे में जिक्र किया है वो घर पर की जा सकने वाली आसान tips है जिसके बाद आपको किसी तरह की anger management classes near you देखने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

इन tips को फॉलो करे और अपने अनुभव कमेंट में शेयर करे.

आध्यात्मिक और शारीरिक विकास में मददगार है ध्यान

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क्या आप जानते है ध्यान के लाभ कितने सारे है जो हमारा जीवन बदलने की क्षमता रखते है। ध्यान के लाभ में आपके शारीरिक विकास के साथ आध्यात्मिक और मानसिक विकास से जुड़े फायदे भी शामिल है। इसलिए ध्यान के लाभ जानने के बाद ध्यानके प्रति उत्साह बढ़ जाता है।

ध्यान करने से हमारे अंदर सकारात्मकता बढ़ जाती है। आइये जानते है  ध्यान के लाभ क्या क्या है ध्यान के लाभ कई तरह से हमारे व्यक्तित्व का विकास करते है। रोजाना 30 मिनट ध्यान कर आप भी ध्यान के लाभ उठा सकते है।

हर इंसान की ज़िंदगी मे सफलता – विफलता, खोना – पाना, सुख – दुख के दौर आते जाते रहते है। कई लोग इसका डट कर सामना करते है तो कई घबराकर हार मान लेते है। exams के समय देखा जा सकता है की किस तरह से बच्चे तनाव से जूझते है और उनके दिमाग मे तरह तरह के नकरात्मक विचार आते है।

कमजोर दिल वाले बच्चो मे आत्महत्या जैसे विचार भी देखे जा सकते है। कई लोग छोटी से बीमारी मे हार मान लेते है तो कई इन मुश्किल परिस्थितयो मे भी अपना कंट्रोल नहीं खोते। ऐसा क्यो होता है की एक ही परिस्थिति मे दो लोग अलग अलग तरीके से react करते है?

spiritual meditation

विज्ञान के अनुसार ऐसा इंसान के immune system की वजह से होता है। कमजोर हृदय वाले लोगो का immune system कमजोर होता है जिसकी वजह से ऐसे लोग टेंशन, बीमारी और दूसरी परिस्थितियो मे जल्दी घबरा जाते है।

ऐसे लोगो के लिए सबसे बड़ा इलाज है Meditation. Meditation यानी की ध्‍यान सिर्फ अध्‍यात्‍म से ही नहीं विज्ञान से भी जुड़ा है । वैज्ञानिक शोधों (रिसर्च) के जरिये इन बातों की पुष्टि हुई है कि रौजाना मेडिटेशन करने वाले लोगो का immune system मजबूत रहता है और साथ साथ स्वास्थ्य बेहतर रहता है और याद्दाश्‍त बढ़ती है।

क्या होता है मेडिटेशन – what is Meditation in Hindi

Meditation (ध्यान) एक प्रकार की क्रिया है जिसमें इंसान अपने मन को चेतन (consciousness) की एक विशेष अवस्था में लाने की कोशिश करता है। मेडिटेशन का उद्देश्य लाभ प्राप्त करना भी हो सकता है या मेडिटेशन करना अपने आप में एक लक्ष्य हो सकता है।

इसमें अपने मन को शान्ति देने से लेकर आन्तरिक ऊर्जा (Energy) या जीवन-शक्ति (की, प्राण आदि) का निर्माण करना हो सकता है जो हमारी ज़िंदगी मे सकरात्मकता और खुशहाली लाती है

ध्यान से मानसिक लाभ :

शोर और प्रदूषण के माहौल के चलते व्यक्ति निरर्थक ही तनाव और मानसिक थकान का अनुभव करता रहता है। ध्यान से तनाव के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।

निरंतर ध्यान करते रहने से जहां मस्तिष्क को नई उर्जा प्राप्त होती है वहीं वह विश्राम में रहकर थकानमुक्त अनुभव करता है। गहरी से गहरी नींद से भी अधिक लाभदायक होता है ध्यान।

विशेष : आपकी चिंताएं कम हो जाती हैं। आपकी समस्याएं छोटी हो जाती हैं। ध्यान से आपकी चेतना को लाभ मिलता है। ध्यान से आपके भीतर सामंजस्यता बढ़ती है। जब भी आप भावनात्मक रूप से अस्थिर और परेशान हो जाते हैं, तो ध्यान आपको भीतर से स्वच्छ, निर्मल और शांत करते हुए हिम्मत और हौसला बढ़ाता है।

ध्यान से शरीर को मिलता लाभ :

ध्यान से जहां शुरुआत में मन और मस्तिष्क को विश्राम और नई उर्जा मिलती है वहीं शरीर इस ऊर्जा से स्वयं को लाभांवित कर लेता है।

ध्यान करने से शरीर की प्रत्येक कोशिका के भीतर प्राण शक्ति का संचार होता है। शरीर में प्राण शक्ति बढ़ने से आप स्वस्थ अनुभव महसूस करते हैं।

विशेष : ध्यान से उच्च रक्तचाप नियंत्रित होता है। सिरदर्द दूर होता है। शरीर में प्रतिरक्षण क्षमता का विकास होता है, जोकि किसी भी प्रकार की बीमारी से लड़ने में महत्वपूर्ण है। ध्यान से शरीर में स्थिरता बढ़ती है। यह स्थिरता शरीर को मजबूत करती है।

ध्यान के लाभ :

ध्यान से भरपूर लाभ प्राप्त करने के लिए नियमित अभ्यास करना आवश्यक है। शुरूआत में आधे घण्‍टे सुबह व आघे घण्‍टे शाम का ध्‍यान आपको भरपूर लाभ दे सकता है बशर्ते की आप नियमित करते हैं।

यदि ध्यान आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है तो यह आपके दिन का सबसे बढ़िया समय बन जाता है।

आपको इससे आनंद की प्राप्ति होती है। फिर आप इसे थोडा थोडा करके बढ़ा सकते हैं। शुरूआत का ध्यान आपके मस्तिष्क में शुरुआत में तो बीज रूप से रहता है, लेकिन 3 से 4 महिने बाद यह वृक्ष का आकार लेने लगता है और फिर उसके परिणाम आने शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा ध्‍यान से और भी लाभ है।

ध्यान के लाभ : शारीरिक

  1. ऑक्सीजन की खपत को कम करती है, श्वसन की दर घट जाती है.
  2. रक्त प्रवाह बढ़ता है और हृदय की दर को धीमा कर देती है.
  3. श्रम सहनशीलता बढ़ जाती है.
  4. शारीरिक विश्राम को गहरे स्‍तर तक पहुचाता है
  5. उच्च रक्तचाप को सामान्‍य करता है
  6. खून में लैक्टेट स्तर को कम करके चिन्‍ता को समाप्‍त करता है.
  7. मांसपेशियों का तनाव कम होता है
  8. एलर्जी जैसे पुराने रोगों, गठिया आदि में मदद करता है
  9. पूर्व मासिक धर्म सिंड्रोम के लक्षण कम कर देता है.
  10. पोस्ट ऑपरेटिव भय के उपचार में मदद करता है.
  11. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है.
  12. वायरस की गतिविधि और भावनात्मक संकट को कम कर देता है
  13. ऊर्जा और शक्ति को बढ़ाता है. वजन घटाने में मदद करता है
  14. शरीर में होने वाली टूट फूट को जल्‍दी ठीक करता है
  15. उच्च त्वचा प्रतिरोध कोलेस्ट्रॉल के स्तर में गिरावट, हृदय रोग के जोखिम को कम करती है.
  16. उम्र बढ़ने की प्रक्रिया घट जाती है. पुराने रोगों काे ठीक करता है
  17. सिर दर्द और माइग्रेन का इलाज, दिमाग के काम की क्रिया को तेज करता है
  18. शरीर को चिकित्‍सकीय देखभाल की कम आवश्‍यकता
  19. कम ऊर्जा बर्बाद, खेल गतिविधियों में अधिक ऊर्जावान बनाता है
  20. अस्थमा से महत्वपूर्ण राहत, एथलेटिक स्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन
  21. अपने आदर्श वजन करने के लिए, हमारे अंत: स्रावी प्रणाली को सुधारता है
  22. हमारे तंत्रिका तंत्र को आराम, स्थायी मस्तिष्क विद्युत गतिविधि में लाभकारी परिवर्तन

ध्यान के लाभ : मनोवैज्ञानिक

  1. आत्म विश्वास बनाता है.
  2. सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है, मूड और व्यवहार को प्रभावित करती है.
  3. Phobias और भय का समाधान स्वयं के विचारों के नियंत्रण में मदद करता है
  4. ध्यान और एकाग्रता को बढाता है
  5. रचनात्मकता बढाता है
  6. सीखने की क्षमता और स्मृति में सुधार
  7. जीवन शक्ति और कायाकल्प की भावनाओं में वृद्धि.
  8. भावनात्मक स्थिरता में वृद्धि.
  9. बेहतर रिश्ते बनाने में मदद करता है
  10. उम्र का प्रभाव धीमा करता है
  11. बुरी आदतों को दूर करने में मददगार
  12. अंतर्ज्ञान विकसित यानि तीसरा नेत्र जागरण
  13. उत्पादकता वृद्धि
  14. घर पर और काम पर संबंधों में सुधार
  15. क्षुद्र मुद्दों की अनदेखी में मदद करता है
  16. जटिल समस्याओं का समाधान करने की क्षमता
  17. अपने चरित्र शुद्ध
  18. विकसित करने की शक्ति होगा
  19. दो मस्तिष्क गोलार्द्धों के बीच अधिक से अधिक संचार
  20. तनावपूर्ण घटना के लिए अधिक जल्दी और अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया
  21. नौकरी से संतुष्टि
  22. प्रियजनों के साथ घनिष्ठ संपर्क के लिए क्षमता में वृद्धि
  23. संभावित मानसिक बीमारी में कमी
  24. बेहतर, अधिक मिलनसार व्यवहार
  25. कम आक्रामकता
  26. धूम्रपान, शराब की लत छोड़ने में मदद करता है
  27. दवाओं की गोलियाँ, और दवाइयों पर निर्भरता कम कर देता है
  28. कम नींद की ज़रूरत है
  29. अनिद्रा इलाज में मदद करता है
  30. जिम्मेदारी की भावना बढ़ जातीहै
  31. क्रोध कम कर देता है, बेचैन सोच में कमी, चिंता की प्रवृत्ति कम, सहानुभूति बढ़ जाती है
  32. अधिक सटीक निर्णय करने में मदद करता है
  33. ग्रेटर सहनशीलता : रचानात्‍मक तरीके से कार्य में धैर्य देता है
  34. एक स्थिर, अधिक संतुलित व्यक्तित्व बढ़ता है भावनात्मक परिपक्वता विकसित करता है.

ध्यान के लाभ : आध्यात्मिक

  1. परिप्रेक्ष्य में चीजों को रखने में मदद करता है
  2. मन की शांति, खुशी प्रदान करता है
  3. जीवन में अपने उद्देश्य खोजने में मदद करता है
  4. स्वयं actualization में वृद्धि. दया भाव में व्रद्धि खुद को और दूसरों की गहरी समझ आध्यात्मिक समझ का गहरा स्तर
  5. एक आत्म की स्वीकृति में वृद्धि क्षमा करने में मदद करता है
  6. जीवन की ओर परिवर्तन रवैया अपने भगवान के साथ एक गहरा संबंध बनाता है अपने जीवन में synchronicity बढ़ जाती है ग्रेटर direct redness भीतर वर्तमान में रहने में मदद करता है
  7. शक्ति और अहंकार से परे चेतना के डिस्कवरी आश्वासन की एक आंतरिक भावना का अनुभव एकता की भावना का अनुभव आत्मज्ञान

कैसे करें ध्यान?

Meditation की हजारों विधियां हैं। यहाँ उन कुछ विधियो का जिक्र किया गया है जिन्हे आप आसानी से कर सकते है।

  • 1 Concentration meditation

किसी भी शांत जगह मे बैठकर किसी एक चीज पर अपना ध्यान केन्द्रित कीजिये। आप अपनी breaths यानि के सासों पर अपना ध्यान केन्द्रित कर सकते है। लगभग 15 मिनट तक सिर्फ अपनी सासों (breaths) पर ही अपना ध्यान दे जिसकी वजह से आपका ध्यान सिर्फ एक चीज पर फोकस रहेगा। इसका अलावा आप कोई एक मंत्र या एक शब्द भी बार बार दोहराकर उस अपना ध्यान केन्द्रित कर सकते है। आप इस विडियो को देखकर इसके बारे मे ओर अधिक जान सकते है।

  • 2 Mindfulness meditation

किसी शांत जगह मे बैठ जाये। अपने मन मे कुछ भी न सोचे । अपने शरीर को ढीला छोड़ दें और शरीर में कंपन होने दें और सिर्फ उसे महसूस करे। महसूस करे कि यह ऊर्जा आपके पांवों से ऊपर की ओर बह रही है। जो हो रहा है उसे होने दें और सिर्फ उसी पर ध्यान दे । ये प्रक्रिया 20 -25 मिनट तक करते रहे। इस पर आपका ध्यान बाहरी चीजों से हटकर सिर्फ एक चीज पर केन्द्रित होगा इसके अलावा आप इंटरनेट से पक्षियो की आवाज़ download कर सकते है और किसी शांत जगह मे बैठकर अपना मन सिर्फ उसी पर केन्द्रित कर सकते है।

Meditation यानि की ध्यान कोई भी इंसान एक ही बार मे आसानी से नहीं कर पाता। इसलिए सिर्फ पहले दिन करके ही हिम्मत न हारे। लगातार 6-7 करने के बाद ही आपका ध्यान किसी एक चीज पर केन्द्रीत होगा और धीरे धीरे इसके फायदे दिखने लगेंगे । इसलिए सिर्फ एक 1-2 दिन करके ही इसे बीच मे न छोड़े। हो सके तो रौजाना सिर्फ 15-20 मिनट अपने लिए निकालिए।

  • 3.पिरामिड ध्यान

पिरामिड में ध्यान लगाने के लिए सबसे पहले सीधे बैठ जाये अपनी रीढ़ को सीधा कीजिये और अपनी मुद्रा को सुखासन में लाइए बिलकुल तनाव रहित. आप चाहे तो ज्ञान मुद्रा ( गोद में दोनों हाथ LOCK ) करके बैठ जाइये. ध्यान का प्रभाव बढ़ाने के लिए आप ध्यान से जुड़े म्यूजिक लगा सकते है बिलकुल हल्की आवाज में.

ध्यान का अभ्यास : सुखासन में बैठ कर सांसो को नियत करे और धीरे धीरे साँस की गति को शुन्य करने का प्रयत्न करे. मन शांत होने की वजह से जल्दी ही आपकी सांसे कम होने लगती है. इसमें आगे विचारशून्य की स्थिति बनने लगती है. अंत में आपकी चेतना लुप्त होने लगती है और आप ब्रह्मांड में व्याप्त हो जाते है.

पिरामिड में ध्यान कैसे करे : पिरामिड में प्रवेश करने के बाद के बाद ध्यान रखे की आपके अंदर और पिरामिड से बाहर इसमें ऊर्जा के संचार होने न पाए इन दोनों के बिच किसी तरह का कोई कांटेक्ट न हो.

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आरामदायक आरामदायक स्थिति में आते ही शरीर तनाव रहित होने लगता है. आपका पूरा ध्यान सिर्फ सांसो पर केंद्रित होना चाहिए। जब आपकी साँस विचारशून्य अवस्था में चली जाती है तब आप ध्यान की गहराई में उतरने लगते है और विचारों का प्रवाह रुक जाने की वजह से आपके पुरे शरीर में प्राण शक्ति का प्रवाह होने लगता है।

दोस्तों आज की पोस्ट हमारे प्रिय नीरज मित्तल सर के विचारो का और अनुभव का एक हिस्सा है। उम्मीद करते है आपको ये काफी पसंद आयी होगी। अपने विचार जरूर रखे।