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Thursday, March 5, 2026
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बागेश्वर बाबा यानि धीरेंद्र शास्त्री के चमत्कारों से जुड़े 5 सबसे बड़े विवाद की कहानी और उन्हें निशाना बनाए जाने के पीछे का षड़यंत्र

5 सबसे बड़ी वजह आखिर क्यों बागेश्वर धाम और उनके प्रमुख धीरेन्द्र शास्त्री अचानक से चर्चा में आ गए है. बागेश्वर धाम के बागेश्वर बाबा, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तब से चर्चा में हैं जब उन्होंने नागपुर के एक कार्यक्रम में विवाद खड़ा कर दिया था.

नागपुर में हुए प्रोग्राम के दौरान उन्हें अपनी “जादुई शक्तियों” को साबित करने के लिए चुनौती दी गई थी, जिसका वह दावा करते हैं.

इसके बाद जो हुआ उससे एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया जिसमें कुछ लोगों ने उनसे पूछताछ की और अन्य उनके समर्थन में सामने आए. लेकिन मध्य प्रदेश का बागेश्वर धाम क्यों ट्रेंड कर रहा है? यहाँ पाँच प्रमुख तथ्य हैं.

मध्य प्रदेश के Bageshwar Dham और उसके प्रमुख के रूप में बागेश्वर बाबा / धीरेन्द्र शास्त्री, नागपुर में एक कार्यक्रम में अपने पास होने का दावा करने वाली चमत्कारी शक्तियों को प्रदर्शित करने के लिए चुनौती दिए जाने के बाद अचानक सुर्खियों में आ गए.

Basic Reason of Unsuccess in Sadhna
बागेश्वर बाबाबाबा पिछले कुछ दिनों से खबरों में हैं, कुछ उनके दावों पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ उनके समर्थन में आ रहे हैं.

Bageshwar Dham Sarkar alias Dhirendra Krishna Shastri एक स्वयंभू धर्मगुरु है जो चमत्कारी शक्तियों का दावा करते है और वे दावा करते है कि वह किसी व्यक्ति का उल्लेख किए बिना समस्या को जान सकते है.

महाराष्ट्र में अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने उन्हें नागपुर के प्रोग्राम के दौरान अपनी शक्तियों को साबित करने के लिए चैलेंज किया था. इस दौरान उन पर बीच में ही कथा छोड़ कर जाने का आरोप लगाया गया.

कौन हैं बागेश्वर बाबा?

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जिन्हें बागेश्वर बाबा  के नाम से भी जाना जाता है उन्होंने विभिन्न दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों का समर्थन प्राप्त किया है जिन्होंने दावा किया कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने धर्मांतरण को चुनौती दी है और यहां तक ​​कि उन लोगों की ‘घर वापसी’ भी की है जिन्होंने अपने विश्वास को त्याग दिया था.

बागेश्वर धाम की वेबसाइट के अनुसार, शास्त्री 26 साल के हैं और उनकी कथा लाखों भक्तों को बागेश्वर धाम की ओर खींचती है. वेबसाइट का यह भी दावा है कि वह कई लोक कल्याणकारी पहलों से जुड़ा है.

बागेश्वर धाम की बागडोर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास है. पं. धीरेंद्र का जन्म 1996 में छतरपुर (मध्य प्रदेश) जिले के गड़ागंज गांव में हुआ था.

बागेश्वर बाबा का पूरा परिवार अभी भी गड़ागंज में ही रहता है. पं. धीरेंद्र शास्त्री के दादा पं. भगवान दास गर्ग भी इस मंदिर के पुजारी रहे.

कहा जाता है कि पं. धीरेंद्र का बचपन काफी कठिनाई में बीता. जब वह छोटे थे तो परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि एक वक्त का ही भोजन मिल पाता था. पं. धीरेंद्र शास्त्री के पिता का नाम रामकृपाल गर्ग और मां सरोज गर्ग है. धीरेंद्र के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग जी महाराज हैं.

वह भी बालाजी बागेश्वर धाम को समर्पित हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पं. धीरेंद्र शास्त्री ने 11 साल की उम्र से ही बालाजी बागेश्वर धाम में पूजा पाठ शुरू कर दी थी.

पं. धीरेंद्र शास्त्री के दादा ने चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से दीक्षा ली थी, इसके बाद वह गड़ागंज पहुंचे थे.

बागेश्वर बाबा क्यों ट्रेंड कर रहे है?

  • बागेश्वर बाबा अपने अनुयायियों के बीच हमेशा लोकप्रिय रहे हैं. उनके अनुयायी का मानना ​​है कि उनके पास किसी व्यक्ति की समस्याओं को भांपने और बिना कुछ कहे उन्हें हल करने की चमत्कारी शक्तियां हैं. लेकिन बाबा ने खुद को मुश्किल में पाया जब महाराष्ट्र स्थित एक अंधविश्वास विरोधी संगठन ने उन्हें नागपुर में एक कार्यक्रम में चमत्कारी शक्तियों का प्रदर्शन करने के लिए चुनौती दी.
  • बाबा पर रामकथा से भाग जाने का आरोप लगने के बाद विवाद खड़ा हो गया. इसके बाद से धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहे हैं और उनके वीडियो भी ट्विटर पर वायरल हो रहे हैं. अपने बचाव में उन्होंने कहा, “जो कुछ भी मुझे प्रेरित करेगा, मैं लिखूंगा और जो मैं लिखूंगा, वह सच हो जाएगा” बाबा ने यह भी कहा कि बागेश्वर धाम की जनता उनकी छवि खराब करने वालों को करारा जवाब देगी.
  • बाबा को भाजपा सहित विभिन्न नेताओं का समर्थन मिल रहा है Kailash Vijayvargiya उनके समर्थन में सामने आए और दावा किया कि लव जिहाद के खिलाफ बोलने के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.
  • हालांकि, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel जोशीमठ की समस्या को हल करने के लिए बाबा को चुनौती दी कि अगर उनके पास जादुई शक्तियां हैं. “अगर वह इतने शक्तिशाली हैं, तो उन्हें जोशीमठ की समस्या का समाधान करना चाहिए,” उन्होंने कहा.
  • बाबा का एक वीडियो, जिसे सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित किया जा रहा है, उसमें भीड़ में से एक पत्रकार को बुलाते हुए दिखाया गया है. फिर बागेश्वर बाबा पत्रकार के परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी साझा करता है, जिससे पत्रकार दंग रह जाता है जो घोषणा करता है कि यह असाधारण है कि वह विवरणों से अवगत है. इसके बाद लोगों ने दावा किया है कि पत्रकार के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर सारी जानकारी मिल सकती है.

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बागेश्वर बाबा पर लग चुका है हिंदुओं को भड़काने का आरोप, इन बयानों पर हुआ विवाद

बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख धीरेन्द्र शास्त्री जिन्हें आमजन बागेश्वर बाबा भी बुलाते है उनके कई बयान काफी ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए है. उनके द्वारा हाल में ही कुछ ऐसी गतिविधि की गई है की वे अचानक से कुछ लोगो के निशाने पर आ गए है.

महाराष्ट्र में नागपुर के एक प्रोग्राम के दौरान उन पर अपनी शक्तियों को साबित करने का आरोप लगा था. उनके खिलाफ की जाने वाली गतिविधि तब से सुर्खियों में आ गई है जब उन्होंने हिन्दुओ की घर वापसी और लव जिहाद जैसे टॉपिक पर बोलना शुरू कर दिया.

बागेश्वर धाम के बागेश्वर बाबा यानि धीरेन्द्र शास्त्री जी का अपनी सफाई में कहना है की उन्होंने कभी दूसरे धर्म पर सवाल नहीं उठाए है सिर्फ अपने धर्म और अपनी आस्था को लोगो के बीच रखा है.

  • उनके बयानों में से एक “बुलडोजर खरीदकर पत्थर चलाने वालों पर चलाएंगे” ने काफी ज्यादा तूल पकड़ा था. उन्होंने हिन्दू सनातनी से एक होने की प्राथना की थी और अपने बयान में कहा था की जो राम के काज और सनातनी महात्मा संतो पर पत्थर फेंकने वाले है उन पर हम बुलडोजर चलाएंगे.

उन्होंने अपने बयान में किसी धर्म विशेष को निशाना नहीं बनाया था लेकिन, उन्हें ट्रोल किया गया और भड़काने के आरोप लगाए गए.

  • उनके एक और बयान “भारत अकबर का देश नहीं सन्यासियों का देश” को भी हवा मिली जब श्रद्धा मर्डर केस का मामला ट्रेंड कर रहा था. उन्होंने देश की पहचान को सुभाष चंद्र बोस और चंद्रशेखर आजाद का देश है. भारत संतों-सन्यासियों का देश है बताया और कहा की हम सनातन के खिलाफ कुछ भी बर्दास्त नहीं करेंगे. श्रद्धा मामले को भी लव जिहाद का एंगल दिया गया जिसकी वजह से उन्हें ट्रोल किया गया.
  • उन्होंने साईं बाबा पर विवादित बयान दिया था जिसमे उन्होंने साईं बाबा को गैर हिन्दू बताया और कहा की जब हिन्दू धर्म में 33 कोटि देवी देवता है तो किसी चाँद मिया को पूजने की क्या जरुरत है.

हालाँकि इस बात में कोई शक नहीं है की उनका स्वभाव उग्र है और वे अपने बयानों की वजह से अब धीरे धीरे लोगो के निशाने पर आने लगे है लेकिन, अगर इसे धर्म विशेष से जोड़ा जाए तो कही न कही कुछ लोगो को उनसे खतरा है.

गदा लेकर क्यों चलते हैं बागेश्वर बाबा?

बागेश्वर धाम प्रमुख पं. धीरेंद्र शास्त्री हमेशा एक छोटी गदा लेकर चलते हैं. उनका मानना है की उन्हें इससे प्रेरणा और शक्ति मिलती है. वे लोगो को हनुमान जी की भक्ति के लिए प्रेरित भी करते है और उनका खुद का जीवन हनुमान जी की भक्ति से प्रेरित है.

बागेश्वर बाबा का कहना है की वे कोई चमत्कार नहीं करते है. उनकी अपने बाबा हनुमान जी में श्रद्धा है और दरबार में जो लोग अर्जी लगाते है उनकी श्रद्धा से वो हनुमान जी सुनते है.

इस बात को लेकर कई लोगो ने उन्हें निशाने पर लेते हुए अन्धविश्वास फैलाने के आरोप भी लगाए है. हालाँकि इस मामले में सफाई देते हुए उन्होंने कहा है की वे किसी भी अपने दरबार में जबरदस्ती नहीं बुलाते है.

लोग अपनी मर्जी से आते है और अरदास / अर्जी लगाते है जिन्हें बाबा सुनते है और हनुमान जी के सामने रखते है. इससे लोगो को फायदा भी मिलता है और ये सब चमत्कार नहीं बल्कि प्रेरणा की शक्ति है.

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क्या है बागेश्वर धाम का इतिहास?

छतरपुर के पास एक जगह है गढ़ा यहीं पर बागेश्वर धाम है. यहां बालाजी हनुमान जी का मंदिर है. हर मंगलवार को बालाजी हनुमान जी के दर्शन को भारी भीड़ उमड़ती है. धीरे-धीरे इस दरबार को लोग बागेश्वर धाम सरकार के नाम से पुकारने लगे. बागेश्वर बाबा का ये मंदिर सैकड़ों साल पुराना बताया जाता है.

1986 में इस मंदिर का रेनोवेशन कराया गया था. 1987 के आसपास यहां एक संत बब्बा जी सेतु लाल जी महाराज आए. इनको भगवान दास जी महाराज के नाम से भी जाना जाता था. धाम के मौजूदा प्रमुख पं. धीरेंद्र शास्त्री भगवान दास जी महाराज के ही पौत्र हैं.

इसके बाद 1989 के समय बाबा जी द्वारा बागेश्वर धाम में एक विशाल महायज्ञ का आयोजन किया गया. 2012 में बागेश्वर धाम की सिद्ध पीठ पर श्रद्धालुओं की समस्याओं के निवारण के लिए दरबार का शुभारंभ हुआ.

इसके बाद धीरे-धीरे बागेश्वर धाम के भक्त इस दरबार से जुड़ने लगे. दावा होता है कि यहां आने वाले लोगों की समस्याओं का निवारण किया जाता है.

बागेश्वर बाबा को पाखंडी साबित करने की कोशिश या फिर कोई बड़ा षड़यंत्र

अभी तक जितने भी धार्मिक गुरु को निशाना बनाया गया है वे सब हिन्दू है. हालाँकि इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता की कुछ धर्म गुरु धार्मिक भावनाओ की आड़ में लोगो का शौषण कर रहे थे लेकिन, कौन जाने हकीकत क्या है? कही ये सब इसलिए तो नहीं क्यों की हिन्दू धीरे धीरे एक होने लगे थे.

इतिहास गवाह रहा है जब भी हिन्दू धार्मिक गुरु ने अपने क्षेत्र से बाहर निकलकर दुनियाभर में प्रसिद्द होना शुरू किया और उनके Follower बढ़ने लगे उन्हें किसी न किसी षड़यंत्र का शिकार बनना पड़ा है.

बागेश्वर बाबा ही नहीं ऐसे अनेको उदाहरण आपके सामने है जिसमे राम रहीम, आशाराम बापू और संत रामपाल शामिल है. हम किसी भी धार्मिक गुरु का समर्थन नहीं करते है लेकिन, ये सब तब विवादों का हिस्सा बने है जब इन्होने एक पॉइंट से ऊपर उठकर ख्याति हासिल की.

अगर वाकई महाराष्ट्र में अन्धविश्वास को रोकने के लिए समिति है तो उन्हें आदिवासी लोगो को इसाई बनाने वाले धर्म गुरु के खिलाफ भी एक्शन लेना चाहिए.

arara funny fraud guruस्टेज पर लोगो के सामने चमत्कार दिखाने वाले धर्म गुरु में जब बागेश्वर बाबा पर ऊँगली उठाई जा रही है तो उन पर क्यों नहीं ?

कही न कही इसकी वजह हिन्दू धर्म के लोगो का सोशल मीडिया से ज्यादा प्रभावित होना है. वे हर धर्म सम्मान करते है लेकिन अपने धर्म पर ऊँगली उठाते है.

आपको जानकर हैरानी होगी की मॉडर्न एजुकेशन और राईट के नाम पर युवा सनातन धर्म पर आसानी से ऊँगली उठा ले रहे है और सवाल खड़े कर रहे है लेकिन हकीकत में उन्होंने कभी भागवत गीता को पढने का प्रयास भी नहीं किया.

बिना अपने धर्म के विज्ञान और आध्यात्म को समझे हम सब बस Western culture के पीछे पागल हो रहे है.

किसी भी धर्म को देख ले सप्ताह में एक दिन वे अपने धर्म और उसके सिद्धांत का पालन करते है बिना किसी सवाल के लेकिन, हिन्दू में आपको मंदिर जाने को लेकर मना करने वाले लोग आसानी से मिल जायेंगे. यही तो बनता है पतन का सबसे बड़ा कारण.

online fraud babaहम अपने ब्लॉग पर किसी धर्म की भावनाओ को आहत नहीं कर रहे है. अपने नजरिये को ओपन रखते हुए आप खुद सोचे की आखिर क्यों बागेश्वर सरकार के प्रमुख बागेश्वर बाबा यानि धीरेन्द्र शास्त्री तब कुछ लोगो के निशाने पर आ गए है जब उन्होंने धर्म वापसी और लोगो में आस्था जगाने की मुहीम जारी की.

बेशक आप अन्धविश्वास में ना पड़े लेकिन, इस तरह के दोगलेपन को भी नजरअंदाज ना करे जहाँ हनुमान जी की प्रेरणा को अन्धविश्वास बताया जा रहा है और इसाई धर्म गुरु जो भारत के आदिवासी और हिन्दुओ को चमत्कार के नाम पर दिखा रहे है उस पर सवाल तक खड़े नहीं किये जा रहे है.

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