सामुद्रिक शास्त्र सम्पूर्ण अंगो का शास्त्र है। पुराणों के अनुसार भगवान् कार्तिकेय ने इसकी शुरुआती रचना की थी जिससे भगवान् शिव रूष्ट हो गए और उन्होंने ग्रन्थ को पूरा होने से पहले ही समुन्द्र में फेक दिया। बाद में जब गुस्सा शांत हुआ तब उन्होंने ही समुन्द्र से बचा ग्रन्थ पूरा करने को कहा और इस तरह इसका नाम सामुद्रिक शास्त्र पड़ा।
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार शरीर के अलग अलग अंगो में हलचल होना विभिन्न संकेतो को दर्शाता है। शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र के विषय है जिसमे हम विभिन्न संकेतो के अर्थ को समझते है।
शकुन शास्त्र और सामुद्रिक शास्त्र को अलग मिला के देखे तो हमें भविष्य में होने वाली घटनाओ को देखने की एक विधि मिलती है। भविष्य में क्या होने वाला है कोई नहीं जानता लेकिन आसपास के कुछ खास संकेतो के आधार पर हम इनका पूर्वानुमान लगा सकते है।
भारत जैसे देश में बिल्ली का रास्ता काटना और घर से निकलते वक़्त छींकना दो सबसे बड़े संकेत है शकुन और अपशकुन के जिनके आधार पर लोग पूर्वानुमान करते है।
काली बिल्ली का रास्ता काटना हमें विपत्ति का संकेत देती है और हम कुछ देर के लिए यात्रा को टाल देते है। यही संकेत छींक देने से जुड़ा है जिसमे माना जाता है की ऐसा होने से काम की सिद्धि नहीं होती है।
शकुन शास्त्र में कुत्तो को शकुन रत्न कहा गया है क्यों की ये इंसानो के सबसे करीब है और उनके गतिविधियों के अनुसार कुछ संकेत करते है जिनके आधार पर हम भविष्य की घटनाओ का आकलन करते है। भविष्य देखने और शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र में अलग अलग तरह से बताये गए है।
शकुन-शास्त्र क्या है ?
shakun-shastra हमारे आसपास के जीव-जन्तुओ के विभिन्न गतिविधिओ से जुड़ा एक शास्त्र है जो भविष्य की पूर्वानुमान और आकलन के आधार पर हमें संकेत देता है। शकुन शास्त्र के अनुसार सूक्ष्म गतिविधो के आधार पर हम आसानी से भविष्य का आकलन कर सकते है।
ये ज्योतिष का ही एक भाग है और भविष्य बताने में सहायक लेकिन अन्धविश्वास से भरी हुई विद्या के नाम से जानी जाती है।
शकुन शास्त्र कैसे काम करता है :
future-telling practice हमारे आसपास घटने वाली उन अकस्मात घटनाओ को पढ़ने का काम करता है जो हमारे आसपास घटती है और खास संकेत देती है।
शकुन शास्त्र और सामुद्रिक विज्ञान में ऐसे कई रहस्यों का वर्णन किया है जो भविष्य की घटनाओ को समझने में सहायक सिद्ध हो सकते है।
इनमे हमारे शरीर में अचानक कोई हरकत होना, हमारे आसपास होने वाला अकस्मात बदलाव या फिर जीव जन्तुओ में आने वाला बदलाव इन सबकी और संकेत देता है। शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र में समझे जा सकते है।
शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र
शकुन शास्त्र अपने आप में ज्योतिष विद्या का एक भाग है जिसमे कोई भी एक्सपर्ट भविष्य की गणना करने से पहले आपके आसपास की घटना और शरीर के भागो को समझने बाद ही करता है। इसका एक मतलब तो यही है की शरीर के भागो में बदलाव भी खास संकेत देते है।
इन्हे समझ कर हम भी कुछ कुछ अंदाजा लगा सकते है। इनमे सबसे ज्यादा पॉपुलर है उल्लू, कुत्ते, चमगादड़, छींकना और फड़कने की हरकत।
1.) छींकने से जुड़े शकुन और अपशकुन :
घर से निकलते वक़्त अगर कोई छींक देता है और कार्य में बाधा और एक से ज्यादा बार छींका कार्य सिद्धि का संकेत माना जाता है।
प्रथम प्रहर ( सुबह 6 से 9 बजे ) में छींक सुनना अनेको कष्ट का, दूसरे प्रहर में सुनना शारीरिक कष्ट का, तीसरे प्रहर में सुनने से स्वादिष्ट भोजन की प्राप्ति और चौथे प्रहार में सुनने से मित्र मिलन संभव है।
कोई वस्तु खरीदते वक़्त अगर छींक आ जाए तो वो वस्तु शुभ होती है।
सोने से पहले और उठने के तुरंत बाद छींक की धवनि अशुभ मानी जाती है।
मरीज के दवा लेने के समय छींकने से उसके जल्दी ठीक होने की सम्भावना रहती है।
यज्ञ और भोजन करते समय तुरंत पहले छींकने को अशुभ संकेत माना गया है।
2.) शकुन शास्त्र में अंग फड़कने के अलग अलग मतलब
शकुन शास्त्र में पुरुष का अगर बांया भाग फड़कता है तो भविष्य में कोई दुखद घटना झेलनी पड़ती है वही दांये भाग के फड़कने से खुशखबरी मिलती है। महिलाओ के मामले में बिलकुल उल्टा है।
माथे में हलचल भौतिक सुख की और कनपटी में फड़कन धन लाभ का संकेत है।
दोनों गाल एक साथ फड़कने का संकेत है धन लाभ।
होंठ फड़कना नए दोस्तों से मिलने का संकेत है।
हथेली में हलचल बड़ी समस्या का संकेत करती है वही उंगलिया में हलचल दोस्तों से मिलने का संकेत है।
दांयी जांघ फड़कना शर्मिंदगी का और बांयी जांघ धन लाभ का संकेत देती है।
बायीं आँख का फड़कना स्त्री से वियोग और दुःख का लक्षण है वही दांयी आँख के फड़कने के संकेत विवाह और प्रेम से जुड़े है।
हथेली के कोने में फड़फड़ाहट भविष्य में किसी मुसीबत में फंसने की ओर संकेत करता है।
छाती में फड़फड़ाहट दोस्तों से मिलने की और संकेत करता है जिसमे छाती के दाहिने और विपदा तथा बायीं और और जीवन में संघर्ष एवं मध्य में फड़फड़ाहट लोक प्रियता का संकेत देती है। अंग फड़कने से जुड़े शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र में आप और भी ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकते है।
3.) कुत्तो से जुड़े शकुन और अपशकुन :
शकुन शास्त्र के अनुसार कुत्ता यदि अचानक धरती पर सर रगड़ना शुरू कर दे तो वहा गड़े धन के होने की सम्भावना होती है।
अगर किसी रोगी के सामने कुत्ता बार बार पूंछ और ह्रदयस्थल को छाते तो उस रोगी के जल्दी ही मरने के आसार होते है।
यात्रा के दौरान अगर कुत्ता बायीं और संग संग चले तो सुन्दर स्त्री और धन की प्राप्ति होती है वही दांयी और चलने पर किसी प्रकार के धन की हानि के संकेत मिलते है।
जुआरी के जुआ खेलते वक़्त कुत्ता अगर मैथुन करता मिले तो जुआ जितने की सम्भावना बढ़ जाती है।
अगर भोजन करते समय आपके सामने कुत्ता आ जाता है और पूछ उठाकर सर को हिलाता है तो भोजन नहीं करना चाहिए ऐसा भोजन करने से बीमार पड़ने की सम्भावना बढ़ जाती है।
कुत्ते के पेड़ के निचे खड़े होकर भोंकने से वर्षाकाल में अच्छी वर्षा के संकेत मिलते है।
कुत्ता अपनी जीभ से दाहिने अंग को चाटे तो कार्यसिद्धि की सुचना है और पेट छूता दिखे तो लाभ मिलता है।
4.) छिपकली से जुड़े शकुन और अपशकुन :
घर में पाए जाने वाली छिपकलियाँ भी भविष्य को लेकर हमें कुछ संकेत देती रहती है। इसके अलग अलग स्थिति में पाए जाने और गिरने से लेकर कई शकुन और अपशकुन जुड़े हुए है। जानते है ऐसे ही कुछ शकुन और अपशकुन के बारे में
नए घर में प्रवेश के वक़्त अगर गृहस्वामी को मरी हुई या मिटटी लगी हुई छिपकली दिखाई दे तो घर के सदस्य रोगी होने की सम्भावना हो सकती है इससे बचने के लिए पुरे विधि-विधान और वास्तु पूजा के बाद ही गृह प्रवेश करना चाहिए।
छिपकली समागम करती दिखे तो दोस्तों से मिलन, लड़ती दिखे तो कलह और अलग जाती दिखे तो बिछड़ने के संकेत है।
रात्रि कालीन समय में अगर भोजन के दौरान आपको छिपकली का बोलना सुनाई दे तो ये शुभ संकेत है।
माथे पर गिरे तो सम्पति मिलने की सम्भवना बढ़ जाती है।
नाक पर छिपकली का गिरना भाग्योदय का संकेत है।
गर्दन पर गिरने से यश की प्राप्ति और मुछ पर गिरने से सम्मान की प्राप्ति होती है।
छाती के दाहिनी और गिरने से ढेर सारी खुशिया वही दाए और गिरने पर घर में कलह का संकेत देती है।
5.) कौए और उल्लू से जुड़े शकुन-अपशकुन:
शकुन शास्त्र के अनुसार कौए और उल्लू के कुछ संकेत हमारे लिए शुभ और अशुभ होते है इसलिए घर से जाते समय या कही भी इस तरह के संकेत को नजरंदाज नहीं करना चाहिए।
व्यक्ति के ऊपर से कौए का गुजरना मान, सम्मान की हानि करवाता है, वही महिला के सर पर बैठने से पति पर संकट आता है।
यात्रा के समय अगर कौआ आपके सामने सामान्य स्वर में कांव कांव करे और चला जाए तो कार्य सिद्धि का संकेत है।
यदि कौआ रात को आपके घर के आंगन में कर्कश स्वर में कांव कांव करे तो घर में पारलौकिक संकट का सामना करना पड़ता है।
उल्लू अगर किसी घर के ऊपर जाकर बैठना शुरू कर दे तो वो घर जल्दी ही उजड़ जाता है, यही संकेत चमगादड़ो पर लागू होता है।
अगर उल्लू रात्रि में यात्रा करते वक़्त होम-होम की आवाज निकाले तो ये आपके लिए शुभ संकेत है।
owl का बाई और बोलना और दिखना शुभ है वही दांयी और दिखाई देने और बोलने अशुभ संकेतो से जुड़े है।
शकुन शास्त्र के इन खास संकेतो को समझकर हम खुद में उत्साह जगा सकते है, सकारात्मक बन सकते है और कार्य को सफल बनाने में मदद करते है। अगर आप इनमे विश्वास करते है तो आप खुद को इनसे जोड़ कर कार्य को सफल और असफल बना सकते है। मन में एक सकारात्मक सोच और उत्साह आपके काम को सफल बनाने में सबसे ज्यादा मदद करता है।
शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र के नकारात्मक पहलु
अगर आप इनमे बहुत ज्यादा विश्वास करते है तो आप इसके अन्धविश्वास का शिकार है। ये बात सच है की शकुन शास्त्र के हर संकेत खास और सही है जिनका एक मतलब है लेकिन इनकी भी एक गणना और स्थिति के आधार पर आकलन करना चाहिए।
जिससे हमें सही परिणाम मिले। बिल्ली का रास्ता काटना भी जगह और स्थान के आधार पर समझना चाहिए।
मान लीजिये किसी को एलेर्जी है या फिर साँस की बीमारी तो क्या आपके यात्रा के समय उसका छींकना आपके लिए शुभ और अशुभ के मायने रखेगा या नहीं। इसलिए हर बार इसे खुद से जोड़ना आपको वहम का शिकार भी बना सकता है।
दोस्तों कैसी लगी आपको आज की शुभ अशुभ के संकेत शकुन शास्त्र से जुड़ी हमारी ये पोस्ट। अगर आप भी शकुन शास्त्र को मानते है और इसे खुद के लिए शुभ और अशुभ महसूस करते है तो हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताये।
त्राटक और त्राटक की अवस्थाओं के साथ साथ इसके विभिन्न अभ्यास से हम भली भांति परिचित हो चुके है। त्राटक करने के फायदे और अलग अलग बोर्ड पर त्राटक करने से हमें क्या क्या लाभ मिलता है.
ये तो हम सभी पहले पढ़ चुके है लेकिन क्या आप जानते है की तकनीक और त्राटक की पद्धति का आधुनिक स्वरूप घूमने वाले शक्ति चक्र के बोर्ड पर त्राटक करने के फायदे क्या है और इससे हमें क्या हासिल होता है।
घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक करना अन्य त्राटक से कई मायनो में अलग है।
आज में आपको घूमने वाले शक्ति चक्र बोर्ड के बारे में बताऊंगा।
शक्ति चक्र के इस आधुनिक स्वरूप को एक्सपर्ट के लिए डिज़ाइन किया गया है लेकिन कुछ बातो का ध्यान रख कर आप भी घर पर इसका अभ्यास कर सकते है।
हालाँकि इस बोर्ड और सामान्य शक्ति चक्र त्राटक में कोई खास फर्क नहीं है फिर भी इसे हम ज्यादा इफेक्टिव मान सकते है जिसकी वजह है घूमने वाले शक्ति चक्र बोर्ड का काम करने का तरीका।
घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक
घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक करना जल्दी परिणाम दिलाने वाला अभ्यास है जिसमे आप भावना शक्ति को साथ में इस्तेमाल करते है।
घूमते शक्ति बोर्ड पर त्राटक करते वक़्त आपको साथ की साथ निर्देश भी देने पड़ते है। इस लिए जरुरी है की आप पहले से ही अपने अभ्यास से जुड़े निर्देश बना ले जैसे की मन को विचारशून्य करना, आँखों को तेजस्वी बनाना और खुद में बदलाव लाना वगैरह वगैरह जो भी आप चाहते है।
इस बोर्ड पर त्राटक करते वक़्त आपका मन बोर्ड की और ज्यादा जल्दी आकर्षित होता है जिसकी वजह इसके स्पाइरल का घूमना है इस वजह से आप जल्दी ही अवचेतन मन की अवस्था में पहुँचने लगते है।
इसलिए इस अवस्था में आप जो भी निर्देश देते है उनका असर और त्राटक की तुलना में ज्यादा पड़ता है। बशर्ते आप इस अभ्यास में लम्बे समय तक शून्य बने रहे और आपका चेतन मन अवचेतन मन के साथ विरोधाभास ना करे।
इसके लिए जरुरी है की विरोधाभास वाले ख्याल मन में न लाये। rotational yantra making at home
घूमने वाला शक्ति चक्र बोर्ड
सामान्य शक्ति चक्र 2 प्रकार का है लेकिन इसमें सिर्फ एक ही चक्र को प्रयोग में लाया जाता है। इसकी डिज़ाइन में इसके काम करने का तरीका छिपा हुआ है। इसलिए त्राटक के प्रयोग करने से पहले ये ध्यान रखे की जो शक्ति चक्र बोर्ड आपने बनाया है वो काम कैसे करता है।
स्पाइरल शक्ति चक्र यानि घूमते हुए शक्ति चक्र में मोशन 2 तरह से होता है अंदर की ओर जाते हुए और दूसरा बाहर की ओर। यानि जब हम अभ्यास करते है तब बोर्ड हमें किस तरफ घूमता हुआ महसूस होता है। इसे हम मोटर के कंट्रोलर से कण्ट्रोल करते है।
इंटरनेट पर हजारो डिज़ाइन हमें शक्ति चक्र के उपलब्ध हो रहे है लेकिन सही चक्र कोनसा है इसकी पहचान करने का सही तरीका है अंदर की ओर गति करता हुए चक्र का चुनाव। जब हम किसी चक्र पर कई देर तक त्राटक करते है तो उसकी गति किस ओर है पता चल जाती है।
घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक के लिए कुछ ख़ास बातो का ध्यान रखना चाहिए जिन्हे निचे बताया गया है.
शक्ति चक्र पर 2 बोर्ड होते है पहला स्पाइरल और दूसरा ग्रीक पद्धति वाला। सामान्य त्राटक में हम दोनों में से किसी एक का चुनाव करते है दोनों के अपने अपने तरीके और महत्व है।
इसके अलावा इनमे प्रभाव भी अलग अलग पड़ता है लेकिन अंत में परिणाम की तुलना एक ही होती है।
कुछ परिणाम अलग भी हो सकते है जिसमे मन पर पड़ने वाले प्रभाव में लगने वाले समय को छोड़ दिया जाता है।
घर पर शक्ति चक्र त्राटक बोर्ड कैसे बनाए
घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक का अभ्यास करना बेहद सरल है और आप इसे घर पर भी बना सकते है। इसके लिए आपको निम्न चीजे चाहिए :
एक छोटी DC मोटर जो आपके बोर्ड को घूमने की क्षमता रखती हो।
कंट्रोलर जो आपके मोटर की गति को कण्ट्रोल कर सके।
पावर सोर्स।
शक्ति चक्र स्पाइरल बोर्ड।
शक्ति चक्र स्पाइरल बोर्ड को घर पर बनाने के लिए गोल शक्ति चक्र को इस तरह से बनाए की ना तो वो ज्यादा भारी रखे ना ही हल्का जो आसानी से घूम जाए।
अब उसके सेण्टर में एक छेद कर उसमे पीछे से मोटर का पार्ट लगा कर आगे से टाइट कर दे ताकि वो गति ना कर सके।
अब उसमे मोटर कंट्रोलर लगा दे ताकि उसकी घूमने की गति को कण्ट्रोल किया जा सके। त्राटक के अभ्यास के दौरान आप उसकी गति को कम ज्यादा कर खुद पर प्रभाव डाल सकते है।
घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक करने पर आप निम्न चीजे या बदलाव महसूस कर सकते है। घूमते हुए चक्र पर त्राटक के दौरान कुछ लोग अलग अलग प्रयोग भी आजमाते है जिसमे अलग अलग लाइट का लगाना शामिल है।
जैसे जैसे वो बोर्ड घूमता है अलग अलग रौशनी आपके दिमाग पर प्रभाव डालती है लेकिन ये अभ्यास सामान्य से ऊपर है इसलिए एक्सपर्ट की देखरेख में ही इसे करना चाहिए।
पहला बदलाव आपकी आँखों पर पड़ता है और आपकी आँखे भारी होने लगती है।
दूसरा प्रभाव आपके मस्तिष्क पर पड़ता है जिसमे आपका ध्यान पूरी तरह से बोर्ड पर केंद्रित हो जाता है।
तीसरा प्रभाव आपके विचारो पर पड़ता है जिनकी गति धीरे धीरे न्यूनतम होते होते एकदम से शून्य हो जाती है और आप अचानक से paralysis जैसी स्थिति महसूस कर सकते है।
shakti chakra image
शक्ति चक्र की इमेज में कई तरह के डिज़ाइन आपको देखने को मिल सकते है लेकिन एक आदर्श साइज की बात करे तो ये आयताकार साइज में बढ़िया रहता है अगर आप घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक कर रहे है तो इसे वर्गाकार रखे जिसे बोर्ड पर बनाते समय वृताकार रूप देने में आसानी रहती है।
picture of shakti chakra आप इंटरनेट पर देख सकते है या फिर इसे यहाँ से भी डाउनलोड कर सकते है।
shakti chakra hypnotic power
शक्ति चक्र त्राटक की खास बात ये है की इसका प्रभाव हिप्नोटिक है यानि आप इस अभ्यास से जल्दी ही खुद का संयम करने में सक्षम हो जाते है जो व्यक्ति आत्म-संयम कर सकता है उसके लिए दुसरो के मन की बात जानना और सम्मोहन करना मुश्किल नहीं है।
shakti chakra vs moving board
सामान्य शक्ति चक्र त्राटक में आप किसी भी कमरे का चुनाव कर सकते है लेकिन अगर आप घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक अभ्यास करना चाहते है तो आपको इसे अपनी नजर के सामने स्थापित करना होता है।
आप चाहे तो इसे बोर्ड के रूप में बनवा कर दीवार में लगवा सकते है जो की किसी भी बिजली वाले के लिए आसान सा काम है।
आप अगर अकेले है तो शुरू में इसे सामान्य त्राटक की भांति कर सफलता प्राप्त करे। इसके बाद इसे दीवार में लगवा ले और फिर अभ्यास करे लेकिन इसके साइज का ध्यान रखे की आप इससे जितनी दुरी बनाते है उतना ही बड़ा होना चाहिए सामान्य में ये आपकी आँखों को कवर कर ले।
आपने अगर किसी मनोवैज्ञानिक के क्लिनिक में विजिट किया है तो वहा पर इसे जरूर पाया होगा।
कुछ एक्सपर्ट इसे दीवार पर तो कुछ स्टैंड पर फिट करवा कर रखते है। अगर कोई व्यक्ति तनाव, मन के दबे हुए डर, चिड़चिड़ेपन या पास्ट लाइफ की प्रॉब्लम से गुजर रहा है तो जरुरत पड़ने पर इस तरह के बोर्ड का ही इस्तेमाल किया जाता है।
यही बोर्ड क्यों करते है use
इस बोर्ड को use करने की कई वजह है। पहला इसका प्रभाव जल्दी पड़ता है अगर आपके बोलने की शक्ति आकर्षक और प्रभावी है। दूसरा इसके प्रभाव से हम जल्दी ही अवचेतन मन तक पहुँच सकते है।
तीसरा इसके इस्तेमाल में समय भी कम लगता और और सम्मोहन के लिए इसे कभी भी काम में ले सकते है। इसके लिए अलग से त्राटक के अभ्यास की जरुरत नहीं पड़ती है।
1) आवाज का जादू :
घूमते हुए शक्ति चक्र पर त्राटक के अभ्यास के वक़्त एक्सपर्ट आपको प्रभावी आवाज में निर्देश भी देते है।
चूँकि आपका मस्तिष्क हल्का और पलके भारी होने लगती है इसलिए आप जल्दी ही उसके निर्देश के अनुसार कार्य करने लगते है। आवाज का जादू इसमें खास भूमिका निभाता है इसके बगैर एक इंसान वैसे ही है जैसे बिना स्टेरिंग की गाड़ी।
अगर बात की जाए घूमने वाले शक्ति चक्र पर त्राटक की तो उस दौरान आपके आसपास हलकी रौशनी ही रखी जाती है ताकि स्पाइरल बोर्ड ज्यादा प्रभाव डाल सके।
नीली रौशनी इसमें अहम भूमिका निभाती है। कुछ एक्सपर्ट बोर्ड के स्पाइरल में रंग बिरंगी रौशनी वाली लाइट भी लगवाते है। इसका असर सिर्फ माध्यम का सारा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना है।
3.) नीली लाइट और वातावरण का प्रभाव
नीली लाइट आपके मन पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालती है और आप जल्दी ही एक्सपर्ट के प्रभाव में आ जाते है। इसके अलावा आपके आसपास का वातावरण आपके सोचने और समझने की शक्ति पर प्रभाव डालता है। इन सब को ध्यान में रख कर अगर आप भी अभ्यास करे तो सफलता पाने के चांस बढ़ जाते है।
यन्त्र मंडल पर त्राटक करना और उसके प्रभाव के बारे में अगली पोस्ट में बात करेंगे। यन्त्र मंडल पर त्राटक करना और उसके प्रभाव के बारे में अगली पोस्ट में बात करेंगे।
आजकल की लाइफ इतनी फ़ास्ट हो गई है की लोग हर चीज, हर काम में शॉर्टकट देखने लगे है। मसलन घर के खाने की बजाय बाहर खाना, पौष्टिक खाने की बजाय जंक फ़ूड खाना और भी बहुत कुछ।
आज में आपको बताने जा रहा हूँ नियमित ध्यान के फायदे जिन्हे समझने के बाद आप भी हर रोज कुछ समय निकाल कर मैडिटेशन करेंगे। अगर आप भी सोच रहे है की हर रोज ध्यान करने के क्या क्या फायदे है तो आज की पोस्ट सिर्फ आपके लिए है।
हर कोई अलग अलग फायदे के लिए ध्यान करता है। कुछ लोग शारीरिक और मानसिक विकास के लिए तो कुछ लोग आध्यात्म की गहराई में उतरने के लिए।
लेकिन क्या आप जानते है की ध्यान के फायदे क्या क्या है और एक ध्यान करने वाला इंसान कैसे सामान्य इंसान से अलग जीवन जीता है।
सबसे पहले तो में आपको बता देना चाहूंगा की ध्यान का सबसे पहला काम है विचारो की गति को नियंत्रित करना। ध्यान योग के फायदे की बात करते हुए जानते है कुछ खास फायदे जो आपको ध्यान से मिलते है।
नियमित ध्यान के फायदे :
एक सामान्य इंसान और ध्यान करने वाले इंसान की दैनिक गतिविधि का गौर से विश्लेषण किया जाए तो हम पाएंगे की इन दोनों में बहुत सी बातो में फर्क महसूस किया जा सकता है। इनमे कार्य को समझने और करने का तरीका, बातचीत में आकर्षण और दुसरो को महत्व देना जैसे अंतर आप साफ साफ देख सकते है।
इसके अलावा कूल बने रहना और सहजता से मुश्किल हालातो का सामना करना नियित ध्यान करने वाले इंसान में देखा जा सकता है। आइये बात करते है टॉप 11 ध्यान के फायदे की जो आपको सिर्फ नियमित ध्यान करने से मिलेंगे।
आपका जीवन शांत और स्थिर बनने लगता है:
दिनभर की भागदौड़ आपके चैन को ख़त्म करने लगती है। तकनीक ने हर चीज आसान जरूर की है लेकिन हमारी शांति और सुकून को लगभग ख़त्म सा कर दिया है।
हर रोज कुछ समय मैडिटेशन कर नियमित ध्यान के फायदे से आप वापस वही सुकून और शांति प्राप्त कर सकते है।
ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल होता है :
दिनभर की भागदौड़ और आगे से आगे की प्लानिंग जाहिर सी बात है तनाव और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाते है।
इससे बचने के लिए जब हम नियमित मैडिटेशन करना शुरू कर देते है तब हमारे विचारो में कमी आने लगती है और हम ज्यादा स्थिर बनने लगते है। तनाव और चिड़चिड़ापन होना कम होते होते न्यूनतम हो जाता है।
आपके आसपास के लोगो को आपका साथ अच्छा लगता है :
जब आप दुसरो से बिलकुल फ्रेश माइंड होकर मिलते है तो लोग भी आपके साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त गुजरना पसंद करते है।
ज्यादातर लोग दुसरो से मिलते ही अपनी समस्या सुनाने लगते है जबकि हर कोई चाहता की वो जब लोगो से मिले तो दूसरे अपनी पर्सनल समस्या गिनाने की बजाय अच्छे और सकारात्मक विचारो से जुड़ी बाते करे जो सबको सकारात्मक बनाए।
नियमित ध्यान के फायदे में ये मुझे सबसे अच्छा लगता है क्यों की इससे आपका तनाव और परेशानिया कम होती है और आप ज्यादा स्थिर महसूस करने लगते है।
ईश्वर और आध्यात्म में आपकी आस्था मजबूत होती है :
जब हम नियमित मैडिटेशन करना शुरू कर देते है तो हमारा पॉइंट ऑफ़ व्यू यानि देखने का नजरिया ही बदल जाता है।
हम हर चीज के सभी पहलुओं पर गौर करना शुरू कर देते है जिसकी वजह से हमारे जीवन के ज्यादातर तनाव और परेशानिया ख़त्म हो जाते है।
ज्यादातर परेशानिया और तनाव इसलिए आते है क्यों की हम किसी भी रिजल्ट को सिर्फ एक नजरिये से ही देखते है जो की ज्यादातर नकारात्मक होता है। यही हमारे परेशानी की वजह भी बनता है।
अंतर की आवाज को सुनने की क्षमता में विकास नियमित ध्यान के फायदे का ही परिणाम है। इसकी वजह से हम आध्यात्म के असली रहस्य को समझते है हमें समझ आ जाता है की ढोंगी और फ्रॉड धर्म गुरुओ द्वारा फैलाए गए विचारो में सिर्फ एक पाखंड है। इससे हमारी आस्था धर्म और ईश्वर में मजबूत होती है।
लम्बे समय की नींद और 20 मिनट का ध्यान
हम दिनभर की थकान उतारने और खुद को तरोताजा महसूस करने के लिए रोज 6-8 घंटे की नींद लेते है।
लेकिन क्या आप जानते है की 20 मिनट का ध्यान 8 घंटे की नींद के बराबर है। इसलिए अगर हर रोज 20 मिनट भी ध्यान करे तो हम नियमित ध्यान के फायदे उठा सकते है।
इसमें ना सिर्फ आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगे बल्कि पाएंगे की आपके सोचने, समझने और कार्य करने में आश्चर्यजनक बदलाव आये है।
नियमित ध्यान से हम शरीर और मन को आवश्यक आराम दे सकते है ताकि वह सुचारु रूप से कार्य कर सके।
आपकी मुश्किलें अब आसान बनने लगती है :
हर रोज ध्यान में बिताये गए कुछ मिनट आपको पुरे दिन कई लाभकारी रिजल्ट देते है।
इन्ही में से खास है मुश्किलें आसान होना। ध्यान करने से मस्तिष्क स्थिर और शांति से काम करने लगता है।
जिसकी वजह से आप विचारो में उलझते नहीं है और उनका समाधान भी बेहतर तरीके से बगैर विचलित हुए सोच सकते है। देखा जाए तो नियमित ध्यान के फायदे में से एक है आपके सोचने और समझने के तरीके में सुधार।
एकाग्रता बढ़ती और आप ज्यादा रचनात्मक बनते है :
विचारो का बोझ हटने पर आप बेहतर तरीके से सोचने और समझने लगते है। समस्या का समाधान हमें आसानी से समझ आने लगता है।
इसकी वजह है चेतन और अवचेतन मन का बेहतर तरीके से काम करना। जब हम स्थिर और शांत मन से किसी समस्या पर गौर करे तो उसका हल मिलते देर नहीं लगती है। इसलिए आज ही नियमित ध्यान के फायदे उठाना शुरू कर दे।
जीवन में रूचि बढ़ती है :
जीवन कब अच्छा और सुकून भरा लगता है ? जब हम विचारो और तनावों के बोझ से फ्री हो। और ये संभव है ध्यान द्वारा।
नियमित ध्यान हमें कूल बनने में मदद करता है। देखा जाए तो ध्यान द्वारा हमारी कल्पनाशक्ति और देखने के नजरिये में बदलाव आता है जिसकी वजह से हम खुद को तनावमुक्त बनाते है और आसान सी जिंदगी के मजे लेने शुरू करते है।
जीवन में तनाव न्यूनतम हो जाता है :
तनाव की सबसे बड़ी वजह है दिमाग का सही तरह से सोच ना पाना। नियमित ध्यान से हम खुद की आंतरिक शांति की तलाश करते हुए खुद को शांत और स्थिर बनाते है जिसकी वजह से तनाव दूर भागने लगता है।
नियमित कुछ समय ध्यान में बिताने के बाद और सामान्य तरीके से सुबह की शुरुआत करने वाले व्यक्ति की दैनिक दिनचर्या में बहुत अंतर देखने को मिल सकता है।
इसमें सबसे ज्यादा अंतर समझने और कार्य को सोचने के तरीके में अंतर देखने को मिलेगा। सामान्य इंसान अगर दिन की शुरुआत में एक काम को गलत तरीके से कर देता है तो उसका असर उसके पुरे दिन के काम पर देखने को मिल जाता है।
वही ध्यान द्वारा कूल बन जाने पर अगर हमसे एक काम में गलती हो भी जाती है तो उसका असर दूसरे काम पर देखने को नहीं मिलेगा।
सकारात्मक सोच और ध्यान से कल्पना शक्ति का विकास :
इंसान का सफल होना सिर्फ उसकी सोच पर निर्भर करता है। अगर आप विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक बने रह सकते है तो इसका मतलब ये है की आप कुछ भी कर सकते है।
अगर आप बुरे हालात में नकारात्मक विचारो से घिरने लगते है तो आप असफल हो जाते है। सबकुछ हमारे देखने समझने और नजरिये का फर्क है।
इसलिए नियमित ध्यान के फायदे की बात की जाए तो मैडिटेशन हमारे सकारात्मक सोच, सोचने समझने की क्षमता और देखने के नजरिये में बदलाव करता है। और ये तीन तत्व किसी भी इंसान को सफल बनाने के लिए बेहद जरुरी है।
क्या कभी आपने सुबह उठने के बाद कुछ पल बेड पर बैठे बैठे दिनभर क्या क्या करना के बारे में विचार किया है।
अगर नहीं तो कर के देखे। और अगर हां तो आपने पाया होगा की आप सबकुछ एक सपने जैसा देखते है जैसे जैसे आप काम को सफलता से करते हुए देखते है आपकी मुस्कान बढ़ने लगती है।
नियमित ध्यान के फायदे सिर्फ यही तक नहीं है।
इसमें आप जब काम को करते हुए खुद को देखते है तो आपका दिमाग उस कार्य से जुड़े और भी विकल्प देने लगता है जिससे आप काम को और भी बेहतर तरीके से पूरा कर सकते है वो भी कम समय में, यानि कम समय में रचनात्मक कार्य। ये सब संभव है सिर्फ नियमित मैडिटेशन में कुछ पल, कुछ मिनट बिताने से।
तो दोस्तों कैसी लगी हमारी आज की नियमित ध्यान के फायदे से जुड़ी ये पोस्ट। अगर आप भी तनाव से दूर रहना चाहते है या फिर खुद को रचनात्मक और कार्यशील बनाना चाहते है तो आज ही मैडिटेशन करना शुरू कर दे। ब्लॉग पर मैडिटेशन से जुड़ी अलग अलग पोस्ट है जिनमे से आप अपनी पसंद के अनुसार ध्यान की शुरुआत कर सकते है।
Lucid dreaming techniques before bed एक ऐसी खास तकनीक है जिसके जरिये हम मनचाहे सपने देख सकते है. ऐसे सपने जो है सपने लेकिन बने है हमारी कल्पनाओ से और उनका अंत हम तय करते है. हम ऐसा क्यों करते है ? Lucid dream technique एक ऐसी विधि है जिसके जरिये एक व्यक्ति अपनी निराश जिंदगी में रंग भर सकता है.
negative life से positive life का हिस्सा बनने में इस खास तकनीक का एक अहम् योगदान होता है अगर इसे सही तरीके से किया जाए.
क्या आप नहीं चाहेंगे खुद को मनचाहे सपने के पूरा होने से मोटीवेट होता देखे ? हर कोई अपनी life में किसी न किसी चीज को बेहद चाहता है लेकिन हकीकत में उसे पा नहीं सकता है. ऐसी चीजे जिन्हें हम कल्पनाओ के जरिये खुद के पास पाते है. Law of attraction and positive mindset का काम करती है. इस पोस्ट में हम इसी बारे में काफी कुछ जानने वाले है.
सोते वक़्त हम जो देखते और अनुभव करते है वो सब एक सपना की वास्तविकता जानना ही ल्युसिड ड्रीम है। हम हर रात को सपनो की दुनिया में सैर करते है, दिन भर की जो इच्छाए हमारी अधूरी रह जाती है उन्हें सपनो में हम जीते है.
लेकिन क्या आप जानते है की कई बार सपने देखते हुए आपको अचानक ये आभास होता है की जो आप महसूस कर रहे है वो सब एक भ्रम या सपना है.
ये समझना की हम ख्वाब में है और जो सब कुछ हम महसूस कर रहे है वो एक कल्पना और सपना मात्र है lucid dream technique द्वारा possible है.
Lucid dream technique meaning in Hindi
ल्युसिड ड्रीम यानि मायाजाल में खुद की रचना को जीना. ये शब्द इसलिए सबसे सटीक बैठते है क्यों की lucid dream में हम खुद की कल्पना द्वारा किरदार और स्थान के साथ साथ घटना की रचना करते है. ये सब हमारी इच्छा, पर्सनल स्वार्थ या अनुभव के आधार पर महसूस किया जाता है.
जो इच्छा दिन भर में पूरी नहीं होती है उन्हें रात्रि में ख्वाब में अपनी मर्जी से जिया जाता है.
इसके जरिये हम खुद को बेहतर भी बना सकते है वही दूसरी और मायाजाल में भी फंस कर रह सकते है. ( निर्भर करता है आप इसे किस तरह प्रयोग करते है ) इस तरह की खास तकनीक का उदेश्य लोगो को निराशा से दूर ले जाना, nightmare and dark figure demon during sleep paralysis जैसी condition से बाहर निकलने के लिए भी किया जाता है.
इसका साफ सा मतलब है ऐसे सपने जिनका निर्णय हमारी कल्पना करती है, हम उनमे अपनी सोच के अनुसार बदलाव करते है.
ऐसे सपनो पर हमारा पूरा कण्ट्रोल होता है और हम उन्हें मनचाहे तरीके से अंतिम रूप दे सकते है. ये सब करना हमारे अन्दर एक positive vibration create करता है जो आगे चलकर हमे हमारे लक्ष्य की और ले जाता है.
ल्युसिड ड्रीम कब अनुभव किये जाते है ?
लुसिड ड्रीम रात्रि में सोने की बिच की अवस्था में होता है. इस वक़्त हमारा मस्तिष्क चेतना से अवचेतना की और अग्रसर होता है जिसमे दिनभर की सूक्ष्म घटनाए रिकॉर्ड रहती है. उस वक़्त हमारा चेतन मन लगभग धीरे धीरे सुप्त होने लगता है.
ऐसा संभव है की हम इस दौरान सपने देखे और हमें अचानक अहसास हो जाए की ये मात्र एक सपना है. ज्यादातर केस में ये चेतना और अवचेतना के बिच टकराव की वजह से हो सकता है. क्यों की चेतन मन तर्क पर आधारित काम करता है. Lucid dream technique इन सबको ध्यान में रख कर काम करती है.
Lucid dream technique से मनचाहे सपनो का अनुभव
ल्युसिड ड्रीम अनुभव करने के लिए कुछ खास तकनीक और टिप्स आज आपको जानने को मिलेगी. इसमें सपने देखने से लेकर सपनो के बाद तक कुछ खास निर्देशों का पालन करना जरुरी है.
1.) दिन के समय खुद से दोहराये कुछ खास बाते
ये संभव है की लुसिड ड्रीम रात्रि के अलावा दिन में भी महसूस किया जा सके, वो भी चलते चलते और बैठे हुए. अक्सर वास्तविक अनुभव और लुसिड ड्रीम में याद रखने के कुछ अंतर है. ल्युसिड ड्रीम की खास तकनीक के आधार पर आप सपने और वास्तविकता में फर्क का पता लगा सकते है.
जब हम दिन में बार बार कुछ खास बातो को दोहराते है तो ये हमारे लिए एक खास तरह का instruction बन जाता है. Lucid dream technique के जरिये जब मनचाहे सपनो की शुरुआत की जाती है तब ये खास निर्देश ही हमें आगे की कड़ी से जोड़ते है. सिंपल से शब्दों में कहे तो जो बदलाव आप खुद में चाहते है उन्हें लेकर कुछ बातो के समूह को दोहराए. फिर जब लुसिड ड्रीम की स्टेज में पहुंचे तब यही निर्देश आपको मनचाहा सपना दिखाते है.
इससे आप खुद को मोटीवेट फील करने लगते है और धीरे धीरे मानसिक बदलाव आपके अन्दर देखा और महसूस किया जाने लगता है.
2.) Lucid dream technique – सपनो की किताब
जब भी आप सपने देखे उन्हें उठने के तुरंत बाद लिखना ना भूले. इसके लिए बेड के पास में डायरी और रिकॉर्डर भी रख सकते है. इससे आपको ल्युसिड ड्रीम को समझने में काफी मदद मिलती है. आप समझ जाते है की ये सब आपकी अधूरी इच्छाए है जिन्हे आप सपनो में मन मुताबिक अनुभव करते है.
अक्सर ऐसा होता है की हम वास्तविक सपनो और लुसिड ड्रीम में फर्क महसूस ही नहीं कर पाते है.
एक डायरी लिखना और उसमे अपने सपनो को नोट करना आपको उन्हें समझने में काफी मददगार है. इससे न सिर्फ आप अपने मनोवैज्ञानिक पैटर्न ( आपकी सोच और तनाव के स्तर ) को समझ पाते है बल्कि उनमे क्या बदलाव करना है ये भी समझ पाते है.
इन सभी बातो के clear होने के बाद आप खुद को बेहतर गाइड कर पाते है और अपने अन्दर क्या बदलाव लाना चाहते है के लक्ष्य को हासिल करने लायक सही निति तैयार कर पाते है. Lucid dream technique का ही एक अहम् हिस्सा है journal तैयार करना और उसके बाद आगे का ड्रीम पैटर्न तैयार करना.
3.) लुसिड ड्रीम के लिए सबसे सही समय का चुनाव
लुसिड ड्रीम के लिए नींद खुलने के बाद की कुछ समय की नींद सबसे अच्छी रहती है. मान लीजिये आप रात्रि में सो गए है लेकिन सुबह 4-5 बजे आपकी नींद खुल जाती है.
इस वक़्त आप चेतना की और अग्रसर तो होते है लेकिन मस्तिष्क अर्धचेतन होने की वजह से आप वापस सो सकते है. इस दौरान आप खुद को लुसिड ड्रीम अनुभव करवा सकते है.
हम कभी भी लुसिड ड्रीम को experience कर सकते है बशर्ते कुछ खास condition हो. सबसे पहली condition है मस्तिष्क का पूरी तरह जाग्रत न होना ना ही पूरी तरह से सुप्त. इस स्थिति में हम सपने देख सकते है लेकिन उन पर हमारा कण्ट्रोल होता है.
इसके अलावा ढीले कपड़े, किसी तरह का तनाव न होना बेहद जरुरी है. अगर आप चाहते है की आपके सपने पर आपका पूरा कण्ट्रोल रहे तो आपको इन condition को follow करना चाहिए.
आइये अब समझते है lucid dream technique को जिनके अभ्यास से हम desired dreams experience कर सकते है.
Lucid dream technique step by step guide in Hindi
ल्युसिड ड्रीम अनुभव की खास तकनीक को आप घर आजमा सकते है जो 100% प्राकृतिक और लाभदायक है. लेकिन इनमे सफलता आपकी मानसिकता पर निर्भर करती है.
1.) तुरंत उठते ही सपने को याद करना
ये तकनीक हम अक्सर अपनाते है. याद कीजिये जब आप अपने मीठे सपने को देखते देखते उठ जाते है तो वापस उसे याद करते हुए आँखे बंद करते हुए आगे की कल्पना करते है. आपको इसमें यही करना है.
सबसे पहले तो एक अलार्म लगाना है जो नींद पूरी होने के तिहाई समय बाद का होता है. जैसे की आप 6 बजे उठते है तो अलार्म 3 से 4 बजे का लगाए.
जब आप अलार्म से उठ जाते है तो याद कीजिये आपने सपने में क्या देखा उसे तुरंत याद कीजिये.
आप जितना याद रख पाते है उसे याद करते हुए वापस सो जाए लेकिन इस वक़्त ध्यान रखे आपको खुद को ये निर्देश भी देना है की ये एक लुसिड ड्रीम है और में जाग्रत हूँ. अगर फालतू विचार मस्तिष्क में आने लगे तो खुद को पहले से तैयार किये गए विचारो के निर्देश या खास भावना दे ताकि फालतू विचार आपके मस्तिष्क में ना आये.
95% चांस होते है की अगर आप उठते ही with in 5 minute अपने सपने को याद कर पाते है तो वो आपको पूरी तरह से याद रहे. इसके बाद सपने की स्मृति आपके दिमाग से मिटने लगती है. संभव है की वो अवचेतन मन की परत में छिपी हो.
2.) खुद को ल्युसिड ड्रीम में खोना
ये ल्युसिड ड्रीम की खास तकनीकमें से एक कारगर तकनीक है क्यों की इसमें सफलता मिलती ही मिलती है. और अक्सर हम अनजाने में भी इसे कर लेते है.
Lucid dream technique के इस अभ्यास में इसमें आपको सोने के बाद जब अलार्म से उठे तो खुद के लिए लुसिड ड्रीम का निर्माण करना है. सरल शब्दों में उठने के बाद खुद की इच्छाओ और कल्पनाओ को पूरा करते हुए अनुभव करना है.
जब आपको ऐसा करते हुए काफी समय हो जाए तो वापस सो जाए.
इसे दूसरे तरीके से समझने की कोशिश करे तो हम जब सो जाने के बाद अलार्म से उठते है तब हमारा मस्तिष्क भारी महसूस होता है. उस वक़्त भी हम नींद की अवस्था में ही होते है. उस दौरान बिस्तर पर बैठे बैठे आपको सपने के बारे में या फिर आगे जो करना है उसकी कल्पना करने लगते है. और ऐसा करते करते ही हम वापस सो भी जाते है.
ल्युसिड ड्रीम में खो जाने के केस
रात्रि को सोते हुए करीब 1-2 बजे आपको जोर का सू-सू लगने लगता है. आप उठते है और गैलरी से बाथरूम का रास्ता तय करते है. सू-सू करते हुए जब आपको थोड़ा समय बीत जाता है तब आप असल में उठते है और तब आपको पता चलता है की आप सपने में ही सू सू करने लगे थे. इसके अलावा सपने में स्वपनदोष कई मामले में इसका ही केस है.
हम सुबह उठते है और बिस्तर पर बैठ जाते है. आलस की वजह से आँखे खुलती नहीं है और मन में ख्याल आने लगते है. हम बिस्तर से उठ जाते है और नहा-धोकर नास्ता भी कर लेते है. इस दौरान अचानक हमें कोई उठा देता है तब हमें पता चलता है की ये तो एक सपना है. ये खासतौर से स्कूल के स्टूडेंट के साथ होता है.
3.) अचानक से उठ जाने की तकनीक
दोपहर की झपकी के दौरान आप इस तकनीक को आजमा सकते है. इसमें आपको शुरू से ही सोने के दौरान ध्यान रखना है की आप lucid dream की अवस्था में है. आप सांसो को गिन सकते है. लम्बे समय तक सोते हुए जाग्रत अवस्था में रहना इस तकनीक की खासियत है. और अंत तक लुसिड ड्रीम की स्टेट में बने रहना ना की ल्युसिड ड्रीम के बाद सो जाना इसमें आता है.
जब हम झटके से उठते है तो कई बार हमें डरावने और सबसे ज्यादा जूझे जाने वाले मोवैज्ञानिक समस्या sleep paralysis and shadow people जैसे experience हो जाते है. हालाँकि ऐसा सिर्फ कुछ पल के होता है लेकिन ये बेहद डरावना अनुभव रहता है,.
4.) ल्युसिड ड्रीम की खास तकनीक – सपनो में जाग्रत रहना
समाधी की अवस्था में होने के बावजूद आपको अपने आसपास का पता हो तो कैसा लगेगा. ये तकनीक आपको लम्बे समय तक जाग्रत रहते हुए अंतर की यात्रा करवाने की कामयाब तकनीक है.
ध्यान करते समय खुद का बोध करते हुए सम्पूर्ण विश्व में भ्रमण करते हुए खुद को देखना और अंत तक आपको पता होना की आप लुसिड ड्रीम की अवस्था में जाग्रत है.
ये एक ऐसी अवस्था है जिसमे हमें अपने होने का पूरा अहसास होता है साथ ही हम एक ही जगह पर रहते हुए दूसरी जगह पर खुद को पाते है. लुसिड ड्रीम यानि मनचाहे सपनो की दुनिया इस खास lucid dream technique के बदौलत हम अपनी अधूरी इच्छाओं को भी जी सकते है.
इसके अच्छे और बुरे दोनों परिणाम देखे जा सकते है. क्यों की अति हमेशा बुरी होती है और यहाँ बात हो रही है सपनो के मायाजाल की तो भटकाव भी हो सकता है.
लुसिड ड्रीम के लिए सही वक़्त क्या है
lucid dream technique को समझते हुए हम सब ये तो समझ चुके है की सपनो की दुनिया और वास्तविक दुनिया में फर्क करने के लिए कुछ ऐसे पैरामीटर आपको हमेशा चेक करते रहना चाहिए. इसमें आपका घड़ी को लम्बे समय तक बार बार चेक करना की वो चल रही है या रुक गई है सबसे खास है.
अपने आप को देखना की उसमे कोई बदलाव है या नहीं. अपनी नाक को बंद कर साँस लेने की कोशिश करना जैसे काम है.
ये ऐसे कार्य है जिनमे हम खुद को सपने और लुसिड ड्रीम में होने के के अहसास से अवगत हो सकते है.
विचारो से बदले सपनो को
जब भी रात को सोने के लिए जाए. बेड पर लेट कर अपने हाथो को देखते हुए खुद को निर्देश दे की में ये सपना देखने वाला हूँ या फिर में सपने में ये देखने वाला हूँ. इस तरह की प्रैक्टिस हर रात को 30 मिनट तक दोहराते रहे जब ताकि आपको नींद ना आने लगे.
इसके बाद जब भी रात्रि को उठे खुद के हाथो को देखे अगर वो ना दिखे तो अगली बार देखने का निर्देश दे.
नियमित अभ्यास के बाद आप खुद जब सो जाते है खुद के हाथो को देखते है और अनुभव करते है की ये सब एक सपना मात्रा है.
हाथो के दिखाई देने और ना देने के पीछे की वजह
जब हम रात्रि को हाथो को देखने की कोशिश करते है तो हम अँधेरे में देखने की कोशिश करते है. लेकिन नियमित अभ्यास से हम खुद को भावनाओ द्वारा इस कदर मायाजाल में बाँध लेते है की हमें हाथ दिखाई देने लगते है. इसे आप भ्रम की स्थिति कह सकते है जो की लगातार एक ही भावना देने से बनती है.
जब ये दिखाई दे जाते है तब आप ल्युसिड ड्रीम की अवस्था में होते है. इसलिए इसे भी special lucid dream technique कह सकते है.
इसके लिए आपको एक छोटा सा अभ्यास करना है. अपने कमरे में अँधेरा कर ले और शरीर को पूरी तरह शिथिल करे. इसके बाद अपने दोनों हाथो को हवा में उठाए और उन्हें ऐसे महसूस करे जैसे वो दिखाई दे रहे हो. जिस तरह हमें दिन के उजाले में अपने हाथ दिखाई देते है वैसे ही अँधेरे में हमें इसकी कल्पना करनी है.
कुछ समय बाद आप पाएंगे की ऐसा सोचने के बाद आपको हाथ दिखाई देने लगते है. ये वास्तविक नहीं है बल्कि जो निर्देश आप मस्तिष्क को देते है वो आपको निर्देश के अनुसार वैसे ही दिखाने की कोशिश करता है.
ये हमें इतना रियल लगने लगता है की हम उसे हकीकत मानने लगते है. ( मानसिक शक्ति में हम इसे बढ़ा सकते है. )
Lucid dream technique कुछ खास बाते जो ध्यान में रखनी चाहिए
जो लोग रात को सपनो में अनजाने भय से डरते है उनके लिए ये काफी मददगार साबित हो सकती है. आप lucid dream technique द्वारा खुद की अच्छाई को बाहर ला सकते है डर पर काबू पा सकते है.
ध्यान रखे सपने के बाद जब जगे तो शरीर में हरकत ना करे अगर आप फिर से लुसिड ड्रीम को अनुभव करना चाहते है तो.
इसके अलावा निर्देश को follow करते हुए ही इसका अभ्यास करे वर्ना आपको मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ सकता है.
अगर आप इसे पूरी तरह से positive होकर अनुभव करना चाहते है तो पूरी डिटेल जाने, नीर्देश पढ़े और भय को काबू में रखकर अभ्यास करे.
Side effect of lucid dream – सावधानी
अगर आप लुसिड ड्रीम के दौरान खुद को बहुत ज्यादा उत्तेजित कर लेते है जैसे की सपने में सेक्स तो आप चेतना में वापस लौट सकते है. या फिर ये संभव है की आप sleep paralysis ये फिर ऐसे दृश्य जो आपकी असल जिंदगी से वास्ता नहीं रखते से परेशान हो सकते है. ध्यान रखे जब भी लुसिड ड्रीम लेकर उठे खुद को सकारात्मक महसूस करे ना की नकारात्मक.
कई बार देखने में आता है की हम लुसिड ड्रीम से इस कदर जुड़ जाते है की असली नकली में फर्क महसूस ही नहीं कर पाते है. अगर आप अपनी life में negative बनते जा रहे है तो इस अभ्यास को करने से पहले ये कन्फर्म कर ले की आप इसे लेकर नकारात्मक तो नहीं. इसके अलावा एक टाइम में एक ही step को follow क्यों की शुरुआत में ही आप एक्सपर्ट नहीं बन सकते. जबरदस्ती किया गया अभ्यास सिर्फ थकावट और मानसिक परेशानी ही लायेगा.
लुसिड ड्रीम वास्तव में और कुछ नहीं कल्पनाओ के दिखाए गए दृध्य है. हम जो सोचते रहते है वही अचानक से हमें ऐसी अवस्था जिसमे हम सोने और जागने के बिच की अवस्था में रहते है तब दिखाई देने लगता है.
Lucid dream technique के जरिये हम अपनी अधूरी इछाओ को या फिर उन सपनो को जीते है जो वास्तविक जीवन में पुरे नहीं हो पा रहे है.
एक ओर जहाँ हम इसके जरिये खुद को positive बना सकते है वही दूसरी ओर इसके जरिये सपनो के मायाजाल में भी भटक सकते है.
सबकुछ निर्भर करता है आपके विवेक पर. अगर आप यहाँ दिए गए step by step guide को follow करते है तो आपको आसानी से बिना किसी परेशानी के मनचाहे सपने दिखाए जा सकते है.
हम दिन भर हजारो जानकारियों से गुजरते है जिनमे से ज्यादातर तो विज्ञापित होती है। किसी भी जानकारी को हम ज्यादा से ज्यादा और क्लियर तरीके सेयाद रख पाए इसलिए बाजार में विज्ञापनों का सहारा लिया जाता है जो आवाज और वीडियोके मिश्रण से हम पर अपना प्रभाव छोड़ते है।
विज्ञान के अनुसार सिर्फ देखने या सुनने की बजाय दोनों के मिश्रित रूपका प्रभाव ज्यादा पड़ता है। ऐसे में कल्पना शक्ति का जादू कैसे काम करता है को आज समझते है।
हर रोज हजारो की मात्रा में जानकारिया हमारे आँखों और कानो से होकर दिमाग तक पहुँचती है। इन सबका मकसद हमारे दिमाग पर अपने उत्पाद या वस्तु को लेकर अच्छी पकड़ बनाना है। आजकल के बाजार की स्थिति ये है की जिस उत्पाद का प्रचार हमारे सामने सबसे ज्यादा होता है उसे हम जरुरत ना होते हुए भी खरीद लेते है।
ये सब एक तरह से सम्मोहन का जादू सा है जो की लम्बे समय तक प्रचार करने की वजह से पैदा होता है। आजकल देखा जाए तो हम ज्यादातर चीजे सिर्फ इसलिए खरीद लेते है ताकि उन्हें समय आने पर आजमा सके।
इन सबकी वजह से ही एक बाजार सफल बनता है क्यों की वो हमारे कल्पना शक्ति के काम करने के तरीके पर अपनी अच्छी पकड़ बनता जा रहा है। मान लीजिये हम लोग विदेशी उत्पाद की खरीददारी को नकारना शुरू कर रहे है।
क्यों ? किस वजह से ?
क्यों की हमें पता चला है की स्वदेशी उत्पाद हमारे लिए हानिकारक नहीं है और ये सब कैसे संभव हुआ प्रचार और advertise से। 100 में से 90 समय में हम कल्पना शक्ति द्वारा ही अपने आसपास की वस्तु और माहौल को समझते है। यह कल्पना शक्ति का जादू ही है जो वस्तुओ को हमारी जरुरत बनाता जा रहा है।
कल्पना शक्ति का जादू
The power of imagination यानि हमारी सोच का मैजिक ये सब हमारे मस्तिष्क के अंदर चलने वाली एक सीरीज में घटनाओ के क्रम का परिणाम है। उदहारण के तौर पर
हम कही जाते है और चलते चलते हम आसपास के माहौल को अपने मन में उतारने लगते है जिसमे सबसे पहले बाजार में दुकाने और रास्ते शामिल है। इसके बाद जब हम और गहराई से निरीक्षण करने लगते है तो दुकाने किस चीज की और क्या क्या वहा है की जानकारी हमारे मस्तिष्क में जमा होती जाती है।
ये सब एक क्रम में होता है बिना किसी क्रम के जानकारी कभी सेव नहीं हो सकती है।
कहने का मतलब है जब भी हम किसी नई जानकारी से रूबरू होते है हमारे मस्तिष्क में वो कल्पना शक्ति के साथ व्यस्थित होती है।
हर जानकारी को हम कल्पना यानि सोच के द्वारा मस्तिष्क में जमा करते है। इसके बाद जब भी हमें उस जानकारी की आवश्यकता होती है हमारे मस्तिष्क में जानकारी कल्पना के माध्यम से ही उभरती है ना की शब्दों के जरिये।
यही कहलाता है कल्पना शक्ति का जादू
कृति भावनाओ के लिए जिम्मेदार है :
हम दिनभर अलग अलग जानकारियों से गुजरते है और हर जानकारी पर आपका एक अलग इमोशन यानि भावना या फिर यू कहे की फीलिंग होती है। हम शब्दों पर उतना अच्छे से रिएक्ट नहीं कर सकते जितना फोटो और पिक्चर पर।
यही वजह है की बाजार में या दिनभर हम जहा भी जाए हमारे आसपास उत्पाद और जानकारियों को फोटो के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है जिसकी वजह है हमारे इमोशन को फोटो के प्रति समझना ताकि वो हमारे जरुरत को पैदा कर सके समझ सके और उसके अनुसार ही मार्किट में उत्पाद को बेच सके।
कल्पनाशक्ति का जादू फोटो और शब्दों का मिश्रण है जिसमे हमारे दिनभर की दिनचर्या में सोचने और रहने के तरीके में और ज्यादा विस्तार कर सके। ये सब हमारे अवचेतन मन को सोचने की प्रक्रिया को लेकर मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
आपने कई जगह देखा होगा की हम कुछ फोटो को सिर्फ देख कर उसके उदेश्य को समझ जाते है यहाँ तक की उसमे शब्दों की कमी भी होती है जिससे की कोई उसके बारे में सही जानकारी नहीं समझ सकता लेकिन फिर भी उसमे हमारा ध्यान खींचने वाले कुछ ऐसे फोटो इस्तेमाल किये जाते है जो जल्दी ही समझ आने वाले होते है।
शब्दों का खेल सीधे अवचेतन पर असर करता है
हमारा अवचेतन मन शब्दों को सीधे दृश्य में बदलने का काम भी करता है जो की समझने का सबसे अच्छा माध्यम साबित हुआ है। हम जो पढ़ते है वो एक दृश्य के रूप में हमारे मस्तिष्क में छपता रहता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है खाना बनाने वाली पुस्तक।
हम जैसे जैसे पुस्तक पढ़ते है हमारे दिमाग में वो सब एक फिल्म की तरह चलता है जो की उस वक़्त पढ़े हुए को याद रखने में अहम् भूमिका निभाता है। ये सब होता है हमारे इंटरेस्ट के अनुसार वस्तुओ को याद रखने की वजह से।
अगर शिक्षा के क्षेत्र में बात की जाए तो एक प्रयोग के अनुसार क्लास में बच्चो को किताब पढ़ाने और लैब में प्रोजेक्टर मदद से वही किताब बच्चो को समझाई गयी। एग्जाम में उन बच्चो का रिजल्ट अच्छा रहा जिन्होंने क्लास के साथ साथ प्रोजेक्टर पर पढाई की।
फर्क सिर्फ इतना ही था की प्रोजेक्टर पर किताब को आसान भाषा में बदल दिया गया जिसमे प्रश्नो के जवाब आसानी से खोजे जा सकते थे। ये विषय था अंग्रेजी जो ज्यादातर बच्चो को कठिन लगता है लेकिन मुश्किल चीजों को आसान बनाने के लिए हमने विकल्प भी चुने है।
दिमाग में बनती है छवि
जब बच्चो को प्रजेक्टर पर पढ़ाया गया तो उनके मस्तिष्क का सबसे ज्यादा हिस्सा उस दौरान पढ़ने और वहा प्रोजेक्टर पर दिखाए जाने वाले मेटर पर व्यस्त था जबकि क्लास में ये संभव नहीं था। यही वजह थी की कल्पना शक्ति का जादू काम कर गया और बच्चो ने रिजल्ट अच्छा प्राप्त किया।
महसूस करे कल्पना शक्ति का जादू :
गुजरते वक़्त के साथ हम एक ही अनुभव के अलग अलग पहलुओं से गुजरते है। मान लीजिये स्कूल में आप किसी चीज में कमजोर थे और उस वक़्त आपको लगता था की आपमें ये कमी है। आप कॉलेज में आ जाते है और यहाँ आप अनुभव करते है की अच्छा हुआ आप उस चीज में कमजोर थे जिसका आज आपको फायदा मिला।
जैसे की दुसरो से अलग रहना। इसके अलग अलग पहलु पर विचार करे तो हम पाएंगे की,
अगर हम सोचते है की दुसरो से अलग रहना कोई कमी है तो हम पाएंगे की हम सिर्फ उन परिणामो के बारे में सोच रहे है जिनमे हमें नुकसान हुआ है जैसे की अलग रहने की वजह से आप कुछ कामो में पिछड़ जाते है। जैसे दुसरो के सामने खुद को कमजोर महसूस करना। लेकिन दूसरी तरफ
आप सकारात्मक रवैये से सोचे तो पाएंगे की अच्छा हुआ आप लोगो से अलग रहे। इसमें आपको कई फायदे भी तो हुए है जैसे की पढाई में आगे रहना क्यों की आपके पास वक़्त को बर्बाद करने का कोई विकल्प ही नहीं।
दूसरा आप गलत संगत में नहीं पड़े जो की आमतौर पर कॉलेज लाइफ हर कोई फेस करता है। कल्पना शांति का जादू ही तो है की जो आपको स्कूल में कमी लगी थी कॉलेज में वही आपकी ताकत बन गई। सोचने का तरीका और कल्पना सबकुछ बदल सकती है।
कल्पना शक्ति का दायरा
हमें सिर्फ हमारे कल्पना शक्ति के दायरे को बढ़ाना है इसके बाद तो आप किसी भी नकारात्मक सोच से, रवैये से आसानी से बाहर निकल सकते है। Imagination हमारे अवचेतन मस्तिष्क पर काफी प्रभाव डालती है। अब ये आप निर्भर करता है की आप कल्पना करते करते परेशान होना चाहते है या फिर समस्या से बाहर निकलना।
दोस्तों आज की पोस्ट अवचेतन मस्तिष्क और कल्पना शक्ति का जादू आपको सिर्फ ये समझाने की कोशिश है की किस तरह हम Imagination द्वारा खुद को सकारात्मक और नकारात्मक बना सकते है। इनका प्रभाव बहुत गहरा होता है इसलिए अगर सही तरीके से इसका इस्तेमाल दैनिक जीवन में किया जाये तो बहुत सी मुश्किलों को हम आसान बना सकते है।
कल्पना शक्ति को बढ़ाने और छटी इंद्री के रहस्य पर आधारित एक बुक पर आप पढ़ सकते है जो हिंदी में है सस्ती है और अच्छी भी है।
ध्यान की अलौकिकविधियों में से एक है साँस द्वारा ध्यान की गहराई में उतरना और इस ध्यान की विधि से हम समाधी की अवस्था में भी उतर सकते है।
ध्यान से समाधी का सरल अभ्यास में हम आज ब्लॉग पर सेतु विक्रम सर की अपनाई हुई ध्यान की खास विधि को साझा करने जा रहे है जिसमे ध्यान की गहराई में उतरने का प्रयास करेंगे।
ध्यान की ये अनोखी विधि वैसे तो काफी सरल प्रतीत होती है लेकिन इसके प्रभाव इससे भी ज्यादा प्रभावशाली है। इसे करने से पहले खुद की काबिलियत को जांचना बेहद जरुरी है।
सबसे पहले तो में आप सभी को बता दू की सेतु विक्रम सर आध्यात्मिक गुरु के नाम से भी जाने जाते है। उन्हें जानने वाले करीबी लोगो का कहना है की वो काफी अच्छे और आध्यत्मिक दुनिया के उच्च स्तर के साधक है और उतने ही सामान्य दुनिया के इंसान भी।
कई बार तो समय समय पर उन्होंने ध्यान की विधियों में कई अनोखे प्रयोग किये है जिसमे सूक्ष्म शरीर की यात्रा, कुण्डलिनी जागरण और सप्त चक्र में ऊर्जा के प्रवाह की साधनाए शामिल है।
ध्यान से समाधी का सरल अभ्यास
ध्यान की इस खास विधि में हमें अपनी सांसो पर ध्यान लगाना होता है। ये विधि विपस्सना विधि से भी मिलती जुलती है। विपस्सना विधि में हमें सांसो की गतिविधि को समझते हुए मन की गहराई में उतरना होता है। इस प्रक्रिया के 3 चरण है
पहला सांसो को समझना
सांसो के मध्य अंतराल को बढ़ाना
मन की गहराई में उतरना
सांसो की प्रक्रिया को समझ कर सहज भाव से हमें इसके मध्य के अंतराल को बढ़ाना चाहिए जिससे की हम खुद को ज्यादा से ज्यादा स्थिर बना सके। इससे हम न्यूनतम सांसो की मात्रा के साथ मन की गहराई में उतरने में सफल हो जाते है। साथ ही समाधी की अवस्था को भी प्राप्त कर सकते है।
1.) सांसो को समझना
ध्यान से समाधी की ओर की इस क्रिया में सबसे पहले हमें सांसो के अंतराल को समझना होगा। हम दिन भर जितनी बार भी श्वसन क्रिया करते है उसके अनुसार ही हमारे विचार बनते और मिटते रहते है।
इसलिए विचारो की मात्रा को घटाना और शून्य की अवस्था के बाद समाधी प्राप्त करना इस ध्यान की विधि का उदेश्य है।
सांसो की मात्रा को घटा बढ़ा कर हम अपने विचार पर नियंत्रण ला सकते है इसके लिए आप एक प्रयोग को कर सकते है जो आज के समय में हर डॉक्टर और अनुभवी द्वारा हमें तनाव और गुस्से से बचने के लिए सुझाया जाता है।
जब भी आपको गुस्सा, तनाव या फिर विचारो की बाढ़ की समस्या से रूबरू होना पड़ता है तो आप एक प्रयोग आजमा सकते है। आपको करना सिर्फ ये है की जब भी आपको गुस्सा आए आप अपनी सांसो पर ध्यान दे। लम्बी सांसो को अंदर ग्रहण करे और कुछ देर तक रोके रखे।
ऐसा 4-5 बार करे। ये दिखने में जितना सरल है उतना ही प्रभावी भी इसलिए आपके विचार न्यून हो जाते है और आप शांत हो जाते है।
पढ़े : क्या मेस्मेरिज्म एक औझा विद्या है जानिए इससे जुड़ी खास बाते
2.) सांसो की अवधि को बढ़ाना :
हमारे साँस लेने और छोड़ने की मात्रा को धीरे धीरे बढ़ाने के अद्भुत परिणाम मिलते है। शुरू शुरू में साँस को ग्रहण करने के बाद आप जितनी देर अंदर रोके रख सकते है उतना प्रयास करे।
ध्यान रखे की आपको अभ्यास में जबरदस्ती नहीं करनी है अन्यथा सांसो को जबरदस्ती रोके रखने के दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते है।
इसलिए हमेशा सांसो को अंदर उतनी ही देर रोके जितना रोक सके। धीरे धीरे इसकी अवधि अपने आप बढ़ने लगती है।
हम दिन बार लगभग 72000 बार श्वसन क्रिया करते है। ध्यान की इस विधि से ये प्रक्रिया एक चौथाई भी हो जाए तो हम खुद को शांत, स्थिर और सहज रख पाने में सक्षम हो जाते। है यह शुरुआत है हमारे अंतर की यात्रा और मन की गहराई में प्रवेश की।
क्या होगा प्रभाव
इसके परिणामस्वरूप आपके मन में विचारो की मात्रा सांसो के मध्य बढ़ते अंतराल के साथ साथ कम होने लगती है। आपका मन शांत और स्थिर होने लगता है। साथ ही साथ आप लम्बे समय तक खुद को एक जगह स्थिर रख सकते है। ध्यान से समाधी का सरल अभ्यास हमारे श्वसन प्रक्रिया को कम से कम बनाते हुए हमें अपने अंतर में उतरने में मदद करता है। इसलिए सामान्य जीवन में आप खुद के विचारो को नियंत्रण में ला सकते है।
3.) मन की गहराई में उतरना
जब सांसो की मात्रा धीरे धीरे घटने लगती है तब ध्यान से समाधी का सरल अभ्यास अपने अगले चरण में बढ़ने लगता है। विचार धीरे धीरे न्यून होते हुए शून्य की अवस्था में पहुँचने लगते है और एक अवस्था ऐसी आती है जब हम शारीरिक और मानसिक रूप से शिथिल और स्थिर हो जाते है।
मन की गहराई में उतरने के लिए आपका स्थिर होना और सहज होना अति आवश्यक है इसलिए जब सांसो की मात्रा सिर्फ प्राण संचरण के लिए ही ग्रहण की जाने लगती है तब विचार शून्य की अवस्था में प्रवेश करने लगते है। और यही से शुरुआत होती है अंतर् की यात्रा की।
यह प्रक्रिया पुरातन समय से ऋषि मुनियो द्वारा अपनाकर समाधी की अवस्था में बने रहने के लिए अपनाई जा चुकी है।
आज भी हिमालय में सिद्धाश्रम में जहा पर उच्च स्तर के योगी और साधको का रहा जाना माना जाता है ध्यान से समाधी का सरल अभ्यास द्वारा लम्बे समय तक अपनी सांसो को रोक कर सुप्तावस्था में अपना तप कर रहे है।
हमेशा ध्यान रखे साँस ग्रहण करने और उसे अंदर रोके रखने की प्रक्रिया सहज और प्राकृतिक होनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आपको अपना दम घुटता हुआ महसूस होने लगेगा जिससे की आपको ना सिर्फ परेशानी हो सकती है बल्कि आपका ध्यान भी भटकने लगता है। ध्यान, त्राटक और अवचेतन मन के साथ साथ आध्यत्मिक दुनिया के सफर में कई बदलाव ऐसे होते है जो हमें विचलित कर सकते है। लेकिन सांसो पर नियंत्रण पाकर हम आसानी से खुद को सहज बना सकते है।
दोस्तों ध्यान से समाधी का सरल अभ्यास एक अपनाई हुई तकनीक है और अगर सही तरीके से की जाए तो इसके बहुत ही प्रभावशाली परिणाम देखने को मिलते है। अगर आप गुस्से, तनाव और चिड़चिड़ेपन से परेशान रहते है तो आपको एक बार ये विधि जरूर करनी चाहिए।
Telepathy का नाम आपने सुना ही होगा बिना किसी Physical medium के एक दूसरे से बात करना बिलकुल किसी superpower की तरह लगता है. Reading someone’s mind एक तरह की skill है जिसे अभ्यास से सीखा जा सकता है.
आपका क्लाइंट क्या चाहता है, बॉस क्या चाहता है या फिर सामने वाला क्या चाहता है या बोल रहा है इसके बारे में बगैर बोले अहसास हो जाना ये आपकी Psychic ability को दर्शाता है. ज्यादातर लोग इसे inner intuition के नाम से भी जानते है. आइये जानते है How to read someone’s mind के बारे में.
ऐसे लोग जिन्हें पता होता है की सामने वाला क्या चाहता है अपनी लाइफ में ज्यादातर सफल होते है. Top performance देने वाले सभी लोग स्मार्ट हो जरुरी नहीं है.
ऐसे लोग जिनका emotional quotient अच्छा होता है उन्हें पता होता है की सामने वाले को क्या चाहिए या फिर उसे क्या पसंद है. हमारा हर विचार जिसे हम दूसरो के साथ शेयर करे या न करे एक signal की तरह आसपास के environment में flow करता रहता है.
ये सामने वाले वाले पर निर्भर करता है की वो उस सिग्नल को catch कर पाता है या नहीं. इसे सीखने में कुछ वक़्त लगता है लेकिन एक बार इससे जुड़ जाने के बाद आप आसानी से सामने वाला क्या सोच रहा है इसका अंदाजा और अनुमान लगा सकते है.
Magician इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते है क्यों की वे लोगो की सोच को Manipulate करने में कामयाब रहते है.
अगर आप दूसरो का दिमाग पढना चाहते है तो इसके लिए five ways to someone’s mind को practice कर सकते है. ये कुछ ऐसे तरीके है जिनके जरिये आप दूसरो के दिमाग में चल रहे विचारो को समझ सकते है साथ ही एक better business relationship को buildup कर सकते है.
दूसरो के दिमाग को पढने के लिए कुछ psychic अपने खुद के heart and guts को feel करते है. आइये जानते है इसके बारे में और ज्यादा डिटेल से.
How Reading someone’s mind work in Hindi
दूसरो के दिमाग में क्या चल रहा है इसे समझने के लिए sensory awareness को develop किया जाता है. इससे हम सामने वाले के विचारो को words and expressions के भी समझ सकते है.
इसके लिए आपका अपने sensory reactions और mental activity इन दोनों को समझना बेहद जरुरी है. इसके जरिये सामने वाले के बगैर बोले आप ये समझ सकते है की वो क्या बोलना चाहता है या उसके मन में क्या है.
इसमें 3 चीजे काम करती है और आपको इन तीनो को develop करना होता है जैसे की
Sensory Awareness
Cognitive Awareness
The courage to be sensitive
जितना ज्यादा आप sensitive होंगे उतना ही ज्यादा आप दूसरो से जुड़ाव को महसूस कर पाएंगे.
How do people read minds?
ज्यादातर लोग जो दावा करते है की वे दूसरो का दिमाग पढ़ सकते है वे इन 3 सेंसर पर काम करते है.
खुद को ज्यादा से ज्यादा sensitive रखने के लिए वे Sensory और Cognitive awareness का सहारा लेते है. अगर आप master of reading someone’s mind बनना चाहते है तो इन तीनो पर काम करे.
Sensory Awareness
इसे inward awareness भी कहा जाता है. दूसरे आपको क्या कहते है या आपकी क्या reaction रहती है ये इसी Sensory Awareness की वजह से होता है. कई बार बिना बोले भी हम सामने वाले से कुछ brainwaves को receive करते है जिसकी वजह से हमारा brain reaction देता है.
ये सब inward awareness की वजह से होता है. आपको अपने चल रही इसी awareness को समझना होता है.
कई बार हम बिना सामने वाले के बोले ही उसके desires, disappointments, needs, frustrations, hopes, and doubts को समझ जाते है.
ऐसा इसलिए होता है क्यों की आपके processing centres of the nervous system जैसे की brain, heart, and gut ये सब active होते है और आप इन्हें सेंस कर पाते है.
Cognitive Awareness
ज्यादातर समय हम इसी awareness का इस्तेमाल अपने आसपास के माहौल को समझने और उस पर reaction देने के लिए करते है. आपने अपने आसपास के माहौल और लोगो के बारे में क्या सुना और देखा है इसी आधार पर behavior करते है. ज्यादातर facial expressions को 100% accuracy के साथ समझ पाना मुश्किल है लेकिन अगर आप इसके आसपास अंदाजा लगाना शुरू कर दे तो कुछ समय बाद सामने वाले की सोच को manipulate कर आसानी से उसके दिमाग में चल रहे विचारो को पढना संभव किया जा सकता है.
जितना ज्यादा आप sensitive होंगे उतना ही ज्यादा आप Reading someone’s mind के लिए जरुरी vibration को feel कर सकते है. आपने देखा होगा की घर के पालतू जानवरों के साथ हमारा connection काफी मजबूत होता है.
कुछ तो सिर्फ आपके आँखों के इशारे से ही समझ जाते है या फिर कुछ आपके मूड को समझ कर उसके according behavior करने लगते है. ये एक स्थिति है जहाँ पर आप अपने आसपास क्या चल रहा है उसके प्रति aware रहते है.
बगैर किसी तरह के interfere के अगर आप दूसरो को सेंस करना शुरू कर दे तो ये आपको न सिर्फ दूसरो को समझने में मदद करता है बल्कि आप सिर्फ दूसरो को समझते है ना की उनसे प्रभावित होते है.
कई बार ऐसा देखने में आता है की sensitive लोग दूसरो की तकलीफ को देखकर खुद को दुखी कर लेते है. इसका फायदा कुछ Psychic vampire उठाते है जो आपको use करना शुरू कर देते है.
To be sensitive होना सिर्फ दूसरो को समझना है ना की उनसे प्रभावित होना. ये एक ऐसी journey है जहाँ आपकी एक चूक आपके पतन का कारण बन सकती है.
आपको difference between empathy and sympathy के बारे में पता होना चाहिए. क्यों की empathy दूसरो के emotion को समझना है वही sympathy का मतलब है दूसरो के emotion को absorb करना.
ये 3 चीजे है जो की Reading someone’s mind में काम करती है. अगर आप इसकी practice करना चाहते है तो यहाँ शेयर की गई कुछ खास चुनी हुई practice को फॉलो कर सकते है.
क्या मन की आवाज और intuition एक ही है?
मन की आवाज सुनना किसी भी वाक्य के विश्लेषण के बगैर ही उसे स्वीकार करना. ज्यादातर श्रद्धा और विश्वास के मामले में हम intuition शब्द का इस्तेमाल करते है.
आध्यत्मिक स्तर पर इसका बहुत बड़ा महत्व है और शरीर से बाहर विचरण हो या सूक्ष्म शरीर की यात्रा ये हर जगह हमारे सफर को आसान बनाता है. सहज बोध या मन की आवाज इसे हम ऐसे समझ सकते है :
“हम कही जा रहे है और अचानक ही हमारे अंदर से अहसास होता है की हमें आज नहीं जाना चाहिए. हम रुक जाते है और बाद में पता चलता है की हमें वाकई नहीं वहा नहीं जाना चाहिए था. जैसे एक्सीडेंट, ख़राब सफर या अन्य किसी वजह से हम जाते तो हमें नुकसान उठाना पड़ता.”
“हम किसी काम में उलझे हुए है और अचानक ही हमें लगता है की हमें कही और होना चाहिए हम चले जाते है और जहा हम जाते है वहा हमारा कोई इन्तजार कर रहा होता है.”
ऐसे कई उदहारण है जहा हम काम करते करते अचानक ही किसी अन्य काम को करने लगते है. और बाद में हमें पता चलता है की हमें यही करना चाहिए था. ये एक तरह से पूर्वानुमान और छटी इंद्री की तरह लगता है.
मन की आवाज सुनना कैसे काम करता है
सहज बोध हमारे चेतन मन को किसी भी कार्य को बगैर किसी तर्क के सीधे एक्सेप्ट करने के लिए बाध्य करता है.
आध्यात्मिक यात्रा में जब कुछ ऐसा घटने लगता है जिससे हमारा चेतन मन उलझने लगे तो ये हमें उससे बाहर निकलने में मदद करता है. सहज बोध तर्क वितर्क करने से बचाता है जिससे हम किसी भी स्तर में आसानी से विचरण करने लगते है.
मान लीजिये हमारे मन में अचानक ही कोई विचार उठता है और जब तक हम उसे नहीं करते बार बार वही ख्याल मन में उठता रहता है फिर हम उसके अनुसार करने लगते है. क्या इस दौरान हमारा मन तर्क वितर्क करता है की हमें ये करना चाहिए या नहीं ?
हमारे मन की आवाज एक tuning पर काम करती है यानि subconscious mind को लगातार एक स्तर पर active रखने की कला जो हमें वक़्त पर आगाह कर सके. मन की आवाज सुनना या अंतरात्मा की आवाज or Reading someone’s mind ये कुछ शब्द है जो इसे और बेहतर तरीके से समझाते है.
1.) सहज बोध में खुद को जोड़ना सीखे
मन की आवाज सुनना या फिर शरीर के अंदर की हलचल को महसूस करना इस कला को activate करने की first step है. हमारे शरीर के कम्पन हमें हमारी भावनाओ के बारे में बताते है, जैसे हम क्या महसूस कर रहे है, हमारे आसपास क्या घट रहा है और हमें किस चीज की जरुरत है.
इसे समझने के लिए आप खुद को एक ऐसे पात्र की तरह मान ले जिसमे विचार और भावनाए आ और जा रहे है.
जब हम Reading someone’s mind करने में सफल हो जाते है तब हम समझने लगते है की जरुरत और मिलने पर हमारा शरीर किस फ्रीक्वेंसी पर रिएक्शन करता है.
दिनभर हर एक्शन पर हमारा शरीर विभिन्न फ्रीक्वेंसी को कैच करता है जो भावनाओ और फीलिंग पर निर्भर करती है. अभ्यास द्वारा हम इसे समझने में सक्षम हो सकते है.
2.) अपने आप पर और सहज ज्ञान में विश्वास करना शुरू कर दे
एक बार जब आप समझ जाते है की आपका शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है, सुनिश्चित करे की कौनसे reason आपके साथ है ना की जो दुसरो पर कार्य करते है, ना ही जो हमें दूसरे बताए.
मन की आवाज सुनना यानि Reading someone’s mind को समझना और उस दौरान कौनसा कारण उस प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार होता है को समझने की कोशिश करे. उदाहरण के लिए समझे तो मान लीजिये की आपको राह चलते ही वापस जाने का मन करने लगते है आपको बार बार लगता है की आपको वापस चले जाना चाहिए.
आपका मन घबराने लगता है और आप पर घबराहट छाने लगती है आप बैचेन होने लगते है.
आपके आसपास के लोगो को लगता है की आपको कुछ हुआ और वो अपनी सलाह आपको देने लगते है जैसे आराम करो कुछ खा लो पी लो वगैरह. कोई नहीं जानता ये किस वजह से हुआ है सिर्फ आपको पता है.
इसलिए मन की आवाज को सुनना शुरू करे और अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझे ना की लोगो की राय को.
एक बार जब आप Reading someone’s mind practice करना शुरू कर देते है तो बाद में आपके शरीर के कम्पन आपको और भी ज्यादा इस बारे में सहज बोध के संकेत समझने लगते है.
3.) सहज बोध के ज्ञान को विस्तारित करे
जब आप मन की आवाज सुनना की क्षमता को खुद में विकसित कर लेते है तब वक़्त आता है की आप इसका और विस्तार करे. इसके लिए आप दुसरो का चुनाव कर उन पर एक्सपेरिमेंट कर सकते है. जैसे की उनसे मिलने और उन्हें छूने पर अनुभव करे की वो क्या महसूस कर रहे है.
या फिर जब आप किसी से मिले या हाथ मिलाये तो महसूस करे की वो क्या अनुभव कर रहा है.
ज्यादातर मामले में क्षणिक भर वक़्त के लिए आपके दिमाग में कुछ आईडिया आते है और इग्नोर हो जाते है. आपको इन्ही आईडिया को कैच करना है.
एक माँ अपने बच्चे को सिर्फ छू कर समझ जाती है की वो क्या चाहता है. ये मन की बात सुनना का सबसे बड़ा उदाहरण है जिसमे कोई आपको बताता नहीं है पर आप फिर भी सामने वाले की जरुरत को समझ जाते है.
इसके लिए जरुरी है आपसी स्तर पर फ्रीक्वेंसी की Tuning बनानी पड़ती है. True friend’s में हमेशा एक टूनिंग होती है जिससे वो सामने वाले के मन की बात को छुपाने के बावजूद समझ ही जाते है.
ये और कुछ नहीं बल्कि Reading someone’s mind का ही एक हिस्सा है. दूसरो पर इस प्रयोग की सफलता के लिए आपको Body language और feeling के matching के साथ आपके मन में उठने वाली frequency को सामने वाली फ्रीक्वेंसी के साथ जोड़ना होता है.
4.) खुद के स्तर पर करे सहज बोध के विस्तार का प्रयास
हम सभी बचपन से सुनते आते है की अगर बड़ा बनाना है तो बड़े लोगो की तरह सोचो और बड़े लोगो की संगत में रहो. सही भी है क्यों की आप जैसी संगत में रहते है आप पर उसका वैसा ही प्रभाव भी पड़ता है.
इसलिए खुद को हमेशा ऐसे लोगो के आसपास रखो जो दुसरो की भावनाओ को समझते हो. दुसरो की भावनाओ का ख्याल रखते है और लोगो के बिच प्रिय हो. इसके साथ साथ आप किसी के बारे में कल्पना भी कर सकते है.
जितनी ज्यादा आपकी कल्पना शक्ति विकसित होगी आपकी सोच उतनी ही विस्तारित होगी और आप उतना ही अच्छा सोच सकेंगे. ये Reading someone’s mind के लिए बेहद जरुरी है.
दोस्तों मन की आवाज सुनना या फिर दुसरो के मन की बात जानना कोई चमत्कार या जादू नहीं है.
ये एक कला है जिसे हर कोई अपने अंदर विकसित कर सकता है. इसके लिए आपको सिर्फ किसी भी घटना के होने पर मन में आने वाले शुरुआती और क्षणिक पल के विचारो पर केंद्रित होने की जरुरत है. अभ्यास द्वारा हम इससे बढ़ा सकते है.
Six steps for building sensory awareness in conversation
अगर आप ऐसे तरीके देख रहे है जिन्हें daily life के रूटीन में follow किया जा सके तो आप इन तरीको को अपना सकते है जैसे की
अन्दर और बाहर से शांत रहे ताकि आप आराम से दूसरो को समझ सके.
सिर्फ अपने दिमाग की ना सुने, आपका दिल और guts (psychic feeling and vibrational change in body) को भी सुने ताकि किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले आपको पता हो की क्या सही है और क्या नहीं.
खुद से पूछे की क्या feel कर रहे है क्यों की आपके emotion सामने वाला क्या feel कर रहा है इसका ही एक reflection होता है. इसके लिए एक Emotional Awareness exercise है जिसे आप खुद कर सकते है. इसके लिए देखे की कब आप uncomfortable with the emotions feel कर रहे है, खुद को रिलैक्स कर मोमेंट में आपसे ज्यादा समाने वाले को participate करने दे.
समय समय पर अपने instinct को चेक करते रहे. हमारी बॉडी की सबसे खास बात ये है की ये आसपास की घटनाओं को feel कर आपको कुछ ऐसे संकेत देती है जिन्हें guts कहते है. जैसे की Interview देने से पहले कुछ अच्छा महसूस न करना, किसी से मिलने से पहले अच्छा न लगना या फिर नयी मीटिंग के लिए आपके बॉडी का माइंड के साथ coperate नहीं करना.
अगर Reading someone’s mind में जल्दी सफलता न मिले तो खुद को दोष ना दे अगर आप दूसरो के साथ connection नहीं बना सकते है. इसमें समय लगता है इसलिए अगर आप दूसरो को समझ नहीं पा रहे है तो खुद को दोष ना दे.
बातो को graciously ख़त्म करे. आप दूसरो से मिलते है अगर उन्हें आपकी हेल्प चाहिए तो जो कर सकते है वो करे. किसी समस्या का समाधान खोज सकते है तो खोजे लेकिन अगर ऐसा नही होता है तो इसे एक सही ending दे और सामने वाले को थैंक्स दे की उसने अपना वक़्त दिया.
ये सब चीजे आपके दूसरो के साथ connection को strong बनाती है खासकर business relationship में. अगर आप भी इसमें कामयाब होना चाहते है तो इन्हें अपने daily life schedule का हिस्सा बना ले.
Reading someone’s mind किसी तरह का जादू नहीं है ये एक कला है जिसमे ज्यादातर लोग जो बिज़नस में सफल होते है उनके अन्दर ये develop रहती है. आइये अब बात करते है कुछ ऐसे तरीको के बारे में जो आपको इसमें मास्टर बनने में मदद कर सकते है.
Five Ways to Read Someone’s Mind
कुछ ऐसे तरीके भी है जिन्हें practice करते हुए आप इसमें master बन सकते है. दूसरो का दिमाग पढने के लिए आपको सामने वाले के मनोभाव पर ध्यान देना चाहिए.
आमतौर पर जो लोग चेतना में unwanted intrusive thought में खोये रहते है उनके लिए इसे समझना मुश्किल होता है क्यों की उनका दिमाग हर पल विचारो में खोया हुआ रहता है.
अगर आप Reading someone’s mind की practice कर रहे है तो आपको सबसे पहले अपने दिमाग को शांत रखना होगा, कम बोलना और ज्यादा सुनना समझना होगा तभी आप इसमें कामयाब हो सकते है.
Start with generational differences
किसी भी घटना और सोच को लेकर हर पीढ़ी का अपना एक नजरिया होता है. एक ही घटना के 3 नजरिये हो सकते है इसलिए सबसे पहले आपको Generational differences को समझना होगा. सामने वाले की सोच किस पीढ़ी की है जैसे की हम आमतौर पर कहते है
“वो पुराने ज़माने की सोच रखता है”
अगर किसी की सोच आपसे मिलती नहीं है और एक ही चीज पर 2 लोग के विचार आपस में मेल नहीं खाते है तो इस तरह के कमेंट देखने को मिलते है.
दूसरो के दिमाग को पढने से पहले आपको उसकी सोच को जानना और समझना बेहद जरुरी है. हो सकता है की जो अपने समझा है वो सही है लेकिन इस पर उसकी अपनी सोच क्या है ये आपको जानना बेहद जरुरी होता है.
ये न सिर्फ आपको एक दूसरे को समझने में हेल्प करता है बल्कि Reading someone’s mind के साथ साथ relationship development में भी help करता है.
Recognize hot buttons
according to psychology अगर आपको सामने वाले के मुह से सच सुनना है तो उसे कुछ इस तरह से redirect करे की वो खुद सच बोलने के लिए मजबूर हो जाए. आपने देखा होगा की वकील किस तरह आरोपी को बार बार एक ही चीज की तरफ ले जाने की तरफ कोशिश करते है.
ऐसा सबके साथ होता है और सबका एक ऐसा पॉइंट होता है जिस पर बार बार चोट की जाए तो सामने वाला अपने आप वो बोल देता है जो हकीकत है.
How Reading someone’s mind work के एक उदाहरण के लिए अगर आप किसी के दिमाग को पढने का दिखावा करते है और सामने वाले को बोलते है की में तुम्हारा दिमाग पढ़ सकता हूँ इसलिए भूल कर भी वो मत सोचना जो तुम्हारे मन में है.
ऐसे में सामने वाला ना चाहते हुए भी वही सोचता है और mentalism करने के लिए उसके दिमाग को पढना आसान हो जाता है.
हकीकत में जब माध्यम को लगता है की mentalism उसके सोचे गए विचार के आसपास पहुँच रहा है तो वो अपने मनोभाव को बदल नहीं पाता है जिसकी वजह से master के लिए सही कैलकुलेशन करना आसान हो जाता है.
कम बोले और ज्यादा सुने
सामने वाले को समझना है तो अपना मुह कम से कम खोले और उसे बोलने दे.
अक्सर सामने वाले सच को बोल देते है जिसे normally हम ignore कर देते है. अगर आपको सामने वाले को समझना है तो सामने वाला क्या बोल रहा है उस पर ध्यान दे और उसे समझे.
हर व्यक्ति का एक emotional trigger होता है जिसमे वो न चाहते हुए भी सबकुछ सच बोलता है.
आपको बस ऐसे ही किसी trigger की पहचान करना है और उसे target करना है. सामने वाला खुद सच बोलना शुरू कर देगा.
ये सब सामने वाले को पता भी नहीं होता है. उसे सिर्फ यही लगता है की वो अपने विचार आपके साथ शेयर कर रहा है लेकिन असल में आप उसके बारे में काफी कुछ पता कर सकते है.
Consider personalities
ऐसा करना आपको सामने वाले के individual qualities को notice and observe करने में help करता है.
इसके लिए आप body language का सहारा ले सकते है. ये सामने वाले के बारे में काफी कुछ समझने में मदद करती है.
Reading someone’s mind के लिए आपको सामने वाले के nature, उसका बात करने का तरीका, वो दूसरो से किस तरह मिलता है और बर्ताव करता है ये सब एक मीटिंग में ही पता कर सकते है.
Look for nonverbal communication
Nonverbal behavior भी Reading someone’s mind practice का अहम् हिस्सा है.
सामने वाला अगर अपने बारे में कुछ बता नहीं रहा है तो कोई बात नहीं. एक व्यक्ति अपने बोलना का तरीका बदल सकता है लेकिन हाव-भाव नहीं.
अगर सामने वाले के हावभाव उसके बोलने के तरीके से मैच नहीं कर रहे है तो समझ ले की वो कुछ छिपा रहा है. इसके लिए body language और बोलने का तरीका दोनों ही काफी अच्छे से हेल्प कर सकते है.
सिर्फ सुनना काफी नहीं है अगर आप सामने वाले के बोलने और उसके मन में क्या चल रहा है इसे समझ नहीं पाएंगे तो उसके दिमाग को भी नहीं पढ़ पाएंगे.
एक अच्छा सुनने वाला हमेशा सुनने के अलावा उसे समझने की कोशिश भी करता है ताकि वो ये analysis कर सके की सामने वाला सिर्फ जो बोल रहा है वो बोल ही रहा है या उसके मन में भी यही चल रहा है.
आमतौर पर शांत दिमाग वाले व्यक्ति आसानी से अपने इमोशन को कण्ट्रोल कर सामने वाले को पता भी नहीं चलने देते है की वो क्या सोच रहे है.
आपका मन शांत होगा तभी आप हर चीज को अच्छे से समझ पाएंगे.
How to master in Reading someone’s mind final conclusion
आपने पिछली पोस्ट mentalism के बारे में पढ़ा था. ये कोई जादू नहीं है बल्कि एक कला है जिसे कोई भी सीख सकता है. ताश के पत्ते में से सही पत्ता बताना, मन में क्या चल रहा है ये बिना बोले समझ लेना और सच और झूठ का पता लगाना ये सब एक ट्रिक है.
कोई भी इसमें परफेक्ट बन सकता है बशर्ते उसका अपने दिमाग पर अच्छा खासा कण्ट्रोल हो.
Reading someone’s mind की practice काफी सारा समय और practical अनुभव लेती है इसलिए जल्दबाजी ना करे बल्कि अपने आसपास से सीखे.
जो लोग extrovert personality के होते है वे अलग अलग personality के लोगो से मिलते है इसलिए उनके लिए ये काफी आसान हो जाता है खासकर जो लोग marketing से जुड़े होते है.
ये आसानी से समझ जाते है की सामने वाला क्या सोच रहा है इसलिए वे सही समय पर सही इमोशन को trigger करते है. इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए mentalism की पोस्ट पढ़ सकते है.
कई बार ऐसा होता है की हम किसी से बातचीत के दौरान खुद में कमजोरी और निर्बलता का अनुभव करने लगते है। कई बार तो हद हो जाती है जब हम बीमार भी पड़ जाते है। लेकिन इसकी वजह हमारे स्वास्थ्य में गिरावट आना नहीं होता है।
औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह और आपकी ऊर्जा को दूसरे के द्वारा चुराए जाने की वजह से आप ऐसा महसूस कर सकते है।
कई बार आपके औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह से आप जल्दी जल्दी बीमार पड़ने लगते है या फिर लोगो से मिलते वक़्त खुद में उत्साह की कमी महसूस करने लगते है। ये सब स्वाभाविक नहीं है इसकी वजह आपका औरा दुर्बल होना है।
आपके औरा के दुर्बल होने और ऊर्जा की चोरी की वजह से खुद में कई बदलाव को महसूस कर सकते है जैसे की बार बार बीमार पड़ना, लोगो से मिलते वक़्त आत्मविश्वास की कमी महसूस करना, लोगो को किसी बात के लिए मना ना कर पाना या फिर जल्दी ही दुसरो के दबाव में आ जाना। सबसे हैरत करने वाली बात की ये है की
कुछ लोग सिर्फ फोन के माध्यम से आपसे बात करते वक़्त भी आपकी ऊर्जा चुरा लेते है।
ये बिलकुल सत्य है और कई लोग इसे महसूस कर चुके है लेकिन इन्हे इग्नोर करते रहते है। औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह को हलके में लेकर इग्नोर करना आपको मुश्किल में डाल सकता है। इसलिए आभा मंडल को मजबूत करने के लिए हमें आरम्भ से ही कुछ उपाय अपना लेने चाहिए।
सबसे पहले बात करते है कुछ ऐसी वजह की जिनकी वजह से औरा क्षेत्र दुर्बल हो जाता है। औरा क्या है और आभा मंडल को आकर्षक बनाना कैसे हमारे लिए फायदेमंद है ये पिछली पोस्ट में पढ़ चुके है।
औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह
खानपान में लापरवाही
व्यायाम में कमी या नजरअंदाज करना।
साफ वायु की कमी।
आराम में कमी
तनाव
उत्तेजक और नशे के पदार्थो का सेवन
तम्बाखू
गलत आदते
दिनभर में कोई भी शारीरिक गतिविधि वाले काम ना करना।
औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह से कैसे बचे
आमतौर पर जब ऐसा होता है तब हमें खुद को ज्यादा से ज्यादा पवित्र कर्म करने की सलाह देते है। इनमे मंदिर जाना, भगवान् का स्मरण और खुद को अच्छे कामो में लगाना शामिल है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की कई बार जब हम बीमार पड़ते है तब झाड़फूंक वाले मोरपंख से हमारा इलाज करते है।
पढ़े लिखे लोग शायद इसे अन्धविश्वास माने लेकिन चंदवे वाला मोर-पंख बहुत चमत्कारिक है। खासतौर से हमारे औरा क्षेत्र को मजबूत करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में बहुत शक्तिशाली माध्यम है।
ये चुंबकीय ऊर्जा से भरपूर होता है जिस पर हमारी पृथ्वी के दोनों केंद्र काम करते है। इसके अलावा कुछ तकनीक है जिनसे हम औरा क्षेत्र को मजबूत करने के साथ साथ कमजोर होने से बचा सकते है।
क्या हमारी ऊर्जा को कोई चुरा सकता है ?
बेशक ! हमारी ऊर्जा को कोई भी चुरा सकता है। कई बार ऐसा अनजाने में भी हो सकता है तो कई बार जान-बुझ कर अगर इसे दैनिक जीवन में देखे तो आपने औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह को महसूस किया होगा की कुछ लोगो से बात करते वक़्त यहाँ तक की फोन पर भी आप धीरे धीरे खुद को कमजोर महसूस करने लगते है।
इसमें मानसिक कमजोरी और निराशा या उदासी भी शामिल है। आप जब बात करके वहा से हटते है तो खुद को बेहद कमजोर महसूस करने लगते है जबकि वो व्यक्ति जिससे आप बात कर रहे थे इसके बाद खुद को बेहतर और ऊर्जावान महसूस करने लगता है।
ये बिलकुल वैसे ही जैसे किसी ऊपरी ऊर्जा का आपको अपने गिरफ्त में ले लेना और आपको पता भी नहीं चले। इसीलिए कई लोग बुरी नजर से बचने के सरल उपाय अपनाते है। आपकी ऊर्जा का आपकी मर्जी के बगैर खींचा जाना आपके कमजोर होने को साबित करता है।
इसलिए जब भी आपको लगे की आपकी ऊर्जा को किसी अनजान शक्ति या व्यक्ति द्वारा चुराया जा रहा है आप ऊर्जा शक्ति को चुराने से बचाने के लिए सरल उपाय अपना कर इनसे बच सकते है।
अगर आपको लगता है की किसी से बात करना बंद करने से आप खुद की ऊर्जा को चोरी होने से रोक लेते है तो ऐसा करना गलत है ऐसा करने से आप उस व्यक्ति को खो देते है। इससे बचने के लिए आप उन व्यक्ति के बारे में गहराई से सोचने से बचे। जो की आपकी ऊर्जा की चोरी की कुछ हद तक रोक लेता है।
औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह से बचने की तकनीक
जब आपको लगे की आपकी ऊर्जा चुराई जा रही है और आपके औरा क्षेत्र में दुर्बलता आ रही है तो आप कुछ उपाय अपना सकते है जिनसे आप औरा क्षेत्र को कमजोर होने से बचा सकते है। इसके लिए आपको सिर्फ कुछ स्टेप फॉलो करने है।
सबसे पहले तो सुखासन में बैठ जाइये और दोनों पैरो को घुटने तक मोड़ लीजिये।
अब दोनों हाथो को अपने गोद में लाइए और अंगूठे तथा अनामिका अंगुली आपस में जोड़ लीजिये।
ये तरीका आपके आपके ऊर्जा तंत्र को बंद करने के काम आता है इससे आपके औरा क्षेत्र को हम खुद तक सिमित रखने और घनत्व प्रदान करने के लिए काम में ला सकते है।
आभामंडल को मजबूत करने की तकनीक
दूसरे तरीके को आप उस जगह प्रयोग में ला सकते है जहा आपको साफ हवा की कमी की वजह से समस्या आ रही हो। इसका सही तरीका नाक द्वारा साँस लेना है कई बार गलत तरीके से साँस लेने से भी औरा कमजोर हो सकता है।
इसके लिए स्वर विज्ञान सबसे खास है। स्वर विज्ञान को ध्यान में रख कर आप इस समस्या से समाधान पा सकते है।
इसके लिए आधुनिक तकनीक साँस द्वारा ज्यादा से ज्यादा प्राण को अवशोषित करने पर जोर देती है। जिसके लिए नाक के टिप पर और साँस लेने की प्रकिर्या पर हमें चैतन्य होना पड़ता है।
माना जाता है की खुद को साँस की प्रक्रिया से जोड़ने से हम ज्यादा से ज्यादा प्राण ऊर्जा को साँस द्वारा वायु में से अवशोषित कर सकते है।
प्राणायाम में कुछ खास विधिया भी है जिनके माध्यम से हम स्वर विज्ञान को ध्यान में रखते हुए प्राण ऊर्जा का संचरण करते है। अनुलोम और विलोम विधि द्वारा भी हम प्राण ऊर्जा को बढ़ा कर औरा क्षेत्र को मजबूत कर सकते है।
आभामंडल को मजबूत करने की तकनीक
औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह की पहचान करने और इससे बचने की तीसरी तकनीक हमारे कल्पना पर आधारित है। ये विधि बहुत ही ज्यादा प्रभावी है और इसे करने में ज्यादा से ज्यादा आधा घंटा या फिर 5 मिनट लगते है।
इस विधि द्वारा हम खुद के औरा क्षेत्र की सफाई करते है और ये करने का सबसे अच्छा समय शाम के अंत का होता है। शाम के वक़्त एक आरामदायक स्थिति में कुर्सी पर बैठ जाइये और खुद को रिलैक्स करने की कोशिश करे।
जब आप शिथिल हो रिलैक्स की स्थिति में आ जाये तब खुद से कुछ ऊपर एक आध्यत्मिक ऊर्जा को महसूस करे।
ये सिर्फ आपको कल्पना करना है। इस आध्यतमि ऊर्जा को आप खुद के सहस्रार तक पहुँचते हुए महसूस कीजिये और कल्पना करे की ये ऊर्जा आपके अंदर ऊपर से निचे गति कर रही है बिलकुल धीरे धीरे।
आपको महसूस होने लगता है की जैसे जैसे ये ऊर्जा आपके शरीर के औरा क्षत्र को छू रही है वैसे वैसे आपके अंदर की नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म हो रही है।
ये अनुभव बिलकुल वैसा ही जैसे किसी कमरे की सफाई करना। आपकी कल्पना इसे एक साकार रूप देती है और आपका मस्तिष्क इसे वैसे ही महसूस करता है जैसे आपकी गाइड लाइन होती है। इसलिए जितनी ज्यादा अच्छी कल्पना शक्ति होगी आपका अनुभव उतना ही बढ़िया होगा। ये क्रिया कुछ हद तक रैकी से मिलती है जिसमे आपको रैकी मास्टर वही सब महसूस करवाता है जो आप इस अभ्यास में करते है। ऊर्जा आपके सर से गुजरते हुए आपके निचले हिस्से तक गति करती है और धरती में आपकी नकारात्मक उर्जाए समा जाती है। और आप खुद में अच्छे बदलाव महसूस करने लगते है।
ऊर्जा को चोरी होने से बचाने के लिए दुसरो को इग्नोर करना :
कुछ लोग सोचते है की अगर किसी व्यक्ति द्वारा उनकी ऊर्जा चोरी हो रही है तो उससे बचने के लिए वो उससे बात करना ही बंद कर दे तो ? जब बात ही नहीं होगी तो ऊर्जा चोरी ही नहीं होगी। लेकिन ये अच्छा आईडिया नहीं है क्यों की ऐसा करने से आप उस व्यक्ति को खो देते है।
या फिर दुसरो की नजर में खुद को कमजोर साबित करने लगते है। इस लिए जब भी आपको लगे की ऐसा कुछ आपके साथ हो रहा है तो अपने औरा क्षेत्र पर ध्यान दे ना की उससे संबंध तोड़ने पर। क्यों की कुछ लोग जानबूझ कर आपकी ऊर्जा नहीं चुराते है।
दोस्तों औरा क्षेत्र के दुर्बल होने की वजह और आभा-मंडल मजबूत बनाने पर आज की पोस्ट उम्मीद करता हूँ आपको अच्छी लगी होगी।
कमेंट के माध्यम से अपनी राय जरूर दे। अगर आपने भी किसी तरह का आभामंडल से जुड़ा अनुभव किया है तो आप अपने अनुभव हमारे साथ शेयर कर सकते है।
टैरो कार्ड क्या है और इसे कैसे पढ़े जाता है के बारे में हम इंटरनेट और फिल्मो में काफी कुछ जान चुके है। कुछ लोग इसे तीसरे नेत्र की शक्तियों से जोड़ कर देखते है तो कुछ लोग छटी इंद्री की शक्ति मानते है। असल में टैरो कार्ड आपके intuition यानि जो हो रहा है उसे बगैर किसी विरोधाभास के ग्रहण करते रहना की वजह से होता है।
टैरो कार्ड रीडिंग एक कला है जो आपके मन में दबी होती है। आज की पोस्ट में हम टैरो कार्ड पर बात करने वाले है जिसे समझना उतना ही रोचक है जितना इसे प्रत्यक्ष में करना। टैरो कार्ड रीडर हमें हमारे मन की उलझनों के समाधान द्वारा मदद करते है।
tarot card में कुल 78 card होते है। इन्हे मुख्य और अल्प में विभाजित किया है।
इसमें एक शब्द आर्काना लैटिन भाषा के अर्कान्स से लिया गया है जिसका मतलब है रहस्य्मय व्यक्तिगत विकास।इसमें गुप्त विद्याओ को समझने वालो के टैरो कार्ड एक गंभीर विषय है। टैरो कार्ड भविष्यवाणी से जुड़ी कई बाते भी बताता है।
टैरो कार्ड रीडिंग में प्रदर्शन का तरीका
आपने देखा होगा की टैरो कार्ड की रीडिंग के वक़्त उन्हें एक खास तरह से अपने सामने रखा जाता है और टैरो कार्ड के चुनाव की खास विधिया द्वारा इनका चुनाव करवाया जाता है।
जैसे ताश के पत्तो में बाँटने और उन्हें रखने का खास तरीका उनके बारे में बहुत कुछ बता देता है उसी तरह टैरो कार्ड को पढ़ने के निम्न 3 तरीके आपको जान लेने चाहिए। टैरो कार्ड रीडिंग इन हिंदी में आप यहाँ जानिए इसे पढ़ने के प्रचलित तरीके और भी कुछ जानकारिया।
1.) तीन कार्ड का तरीका
टैरो कार्ड रीडिंग का ये तरीका सबसे ज्यादा काम में आने वाला है जो तीन card के ड्रा करने के तरीके को दर्शाता है ये आपके तीनो काल से यानि भूत, वर्तमान और भविष्य से भी जुड़ा हो सकता है या फिर परिस्थिति, सुझाव और बचाव का नतीजा भी हो सकता है।
जितना आप रचनाशील होंगे उतना ही अच्छा रिजल्ट आपको मिलता है। इसमें आप कार्ड पढ़ने के प्रवाह और तरीके को समझ सकते है।
2.) पांच कार्ड का तरीका
इसका तरीका भी वही Tarot card reading में shuffle किये गए पत्तो में से पांच का चुनाव करे। ये कार्ड का तरीका भी पांच बाते जिनमे से तीन आपके काल से जुडी है और 2 में सुझाव और नतीजे को दर्शाता है।
इसका मतलब पांच तत्वों से जोड़ कर भी भविष्य की झलकियों को समझाया जा सकता है जो आपके व्यव्हार और माहौल से जुडी है।
3.) सात कार्ड का तरीका
ऊपर वर्णित किये गए तरीके की तरह ये मेथड भी हमें बहुत कुछ इसकी जानकारिया देता है जिसमे आपके काल और जीवन से जुडी लगभग बाते समझ में आ जाती है।
इसमें 7 बातो का पता चलता है जिसमे 3 आपके काल से जुडी है, इसके अलावा आपकी परिस्थिति, आपके जीवन की बाधाएं, उनसे निकलने के 2 तरीके शामिल है।
इस तरीके में एक और जहा आपको अपनी परेशानियों से जुडी हर समस्या का समाधान मिलने के चांस है वही ये तरीका सबसे मुश्किल और अनुभवी माना जाता है।
कैसे पढ़े टैरो कार्ड को
tarot card को पढ़ने का सबसे easy method shuffle किये गए कार्ड में से 3 कार्ड का चुनाव करना है। चुने गए 3 कार्ड अलग अलग मतलब और जानकारी को दर्शाते है इसमें
पहला कार्ड प्रश्न पूछते वक़्त आपके मन की स्थिति को दर्शाता है।
दूसरा कार्ड आपको बताता है की आप उन इच्छाओ को पूरा करने के लिए क्या करने वाले है या क्या प्रयास करने होंगे।
तीसरा और अंतिम कार्ड आपको आपके परिणामस्वरूप प्रश्न का उत्तर देता है। ये आपके लिए सुझाव या फिर नतीजे को दर्शाने वाला भी हो सकता है। आजकल ऑनलाइन टैरो कार्ड रीडिंग वेबसाइट आपको इसे समझने में पूरा सहयोग दे सकती है।
टैरो कार्ड से जुड़े रोचक तथ्य
टैरो कार्ड अगर आप किसी से खरीदते है तो आपको उसे गिफ्ट देना चाहिए। हम खुद के टैरो कार्ड खरीद सकते है और इसके लिए पैसे देने की प्रक्रिया पुरानी हो चुकी है।
अगर कोई कहता है की टैरो कार्ड रीड करने की सिर्फ एक ही प्रक्रिया है और गलत तरीके से पढ़ने पर इसके कोई रिजल्ट नहीं मिलते तो ये भी गलत है क्यों की इसमें हमारी सोच और कल्पना शक्ति कार्य करती है इसलिए इसका इस्तेमाल करने से पहले टैरो कार्ड कैसे पढ़े को जान ले।
कुछ लोग टैरो कार्ड पढ़ने से अपने आसपास का माहौल बिलकुल ही अलग सा बना लेते है उनका मानना है की आध्यत्मिक शक्तियों का आवाहन करने से उन्हें कार्ड पढ़ने में ज्यादा मदद मिलती है जबकि ऐसा कुछ नहीं है।
टैरो कार्ड को पढ़ने के बाद उसे स्पेशल जगह रखना और उन्हें क्रिस्टल से साफ करना भी जरुरी नहीं है हालाँकि नेगेटिव रिजल्ट भी नहीं है पर अगर आप टैरो कार्ड पढ़ना जानते है तो आपको इन चीजों की कोई जरुरत नहीं है।
ये जरुरी नहीं है की आप टैरो कार्ड पढ़ने से पहले उन्हें खास तरीके से चुने या ताश के पत्तो की तरह उन्हें snuffle करे।
टैरो कार्ड पढ़ने के लिए आपको गहन अभ्यास की जरुरत तो है लेकिन अँधेरी रातो में अभ्यास करना इसकी सफलता कभी नहीं है आपको इसमें टैरो कार्ड को समझना है जिसके लिए आपको नियमित अभ्यास की आवश्यकता है इसलिए अगर कोई आपसे जल्दी इसे सीख रहा है तो परेशान ना होइए।
tarot card सिर्फ future की झलकियां देखने के लिए ही काम आते है इनका ध्यान, रचनाशीलता की क्षमता और कल्पनाशक्ति में बढ़ोतरी में कोई योगदान नहीं है।
tarot card एक ऐसी practice है जो intuition पर निर्भर है जबकि ओउजा बोर्ड आत्माओ को आकर्षित कर उनसे अपने सवालों के जवाब पाने का माध्यम है। ओउजा बोर्ड वास्तव में काम करता है अगर आपके मन में आकर्षण शक्ति का इस्तेमाल करने सही तरीका है। और आपके मन में स्थिरता है।
जबकि टैरो कार्ड आपके मन की उलझनों को कार्ड के द्वारा प्रदर्शित करता है। टैरो कार्ड में आपको विस्तृत से जानकारी मिल सकती है जबकि Auja board में आपको हां या ना में उत्तर मिलता है। दोनों ही विद्या अलग अलग है और अलग विज्ञान से वास्ता रखती है।
क्या टैरो कार्ड रीडिंग सही है
बिलकुल क्यों की ये अंक गणित, रमल प्रश्नावली जैसी महत्वपूर्ण विद्याओ की तरह ही है। अगर आपने अंक गणित और रमल प्रश्नावली की कोशिश की है तो आपने देखा होगा की आपको अपनी समस्या के जवाब लगभग 95% सही मिलते है। ये निर्भर करता है इसके ज्ञाता की समझ और उसके अनुभव पर। में इन दोनों प्रश्नावली से अपने सवालों का जवाब पा चूका हूँ आप भी कोशिश कर सकते है। इंटरनेट पर कई वेबसाइट टैरो कार्ड रीडिंग ऑनलाइन फ्री उपलब्ध करवाते है।
ध्यान में हमें कई अनुभव होते है और बहुत लम्बे समय तक ध्यान करने से हमारे शरीरऔर मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ता है या मस्तिष्क में क्या बदलाव आते है इसके बारे में हम काफी कुछ पढ़ चुके है लेकिन पहली बार ध्यान में अनुभव क्या होता है या फिर पहली बार ध्यान में बैठने पर क्या होता है के बारे में बहुत कम ही लोगो को बताया जाता है।
आज की पोस्ट में हम बाते करेंगे की क्या होता है जब हम पहली बार ध्यान करते है।
बहुत सारी स्टडी इसके ऊपर कई रिसर्च कर चुकी है जिसमे हॉवर्ड की रिसर्च सबसे खास है इसके अंदर उन्होंने पता किया है की ध्यान के वक़्त मस्तिष्क के अंदर क्या गतिविधि होती है इसमें ग्रे मेटर कैसे विकसित होता है का पता लगाया गया है।
कई स्टडी ध्यान द्वारा हमारे IQ के बढ़ने की बात भी करते है जिसके अलावा तनाव में कमी और अलग अलग स्टडी के अनुसार निम्न बदलाव देख सकते है। मैडिटेशन कैसे करे आइये जानते है अलग अलग अनुभव द्वारा।
चीन की रीसर्च के अनुसार ध्यान द्वारा अलकोहाल और ब्लड प्रेशर जैसी समस्या से छुटकारा मिलता है।
जटिल चिकित्सा प्रोसेस में हमें जो दर्द महसूस होता है उससे छुटकारा मिलता है। यहाँ तक की जटिल रोगो में भी रोगी को लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार लाता है।
कई लोगो का मानना है की ध्यान में अनुभव के लिए उन्हें लम्बे समय तक ध्यान करने की जरुरत है। लेकिन ऐसा नहीं है ध्यान करने के 2 माह के अंदर हमें अच्छे अनुभव मिलने शुरू हो जाते है बशर्ते हम ध्यान को अपने व्यव्हार में उतार सके।
पहली बार ध्यान में अनुभव
पहली बार हम जब ध्यान करते है तब हमें जो अनुभव होते है वो हमारे वास्तविक जीवन और उसकी गतिविधि से बिलकुल उलटे हो सकते है। पहली बार ध्यान में अनुभव कुछ ऐसे हो सकते हैजैसे की
ध्यान द्वारा हमारे सोचने और समझने में जब बैलेंस बनने लगता है तब हम महसूस करते है की हम उन लोगो से और भी ज्यादा जुड़े हुए है जिन्हे हम खुद से भिन्न मानते है।
ध्यान करने से हमारा तनाव का मायना बदलने लगता है छोटी छोटी बातो पर पहले जहा हम स्ट्रेस यानि तनाव में आ जाते थे अब ऐसा नहीं होता है अब हम सिर्फ उच्च स्तर के तनाव पर ही चिंतित होते है जैसे की ट्रैफिक को देखकर रुकना।
जब हम ध्यान के लिए बैठते है तब हमारा मस्तिष्क शांत होने लगता है उस वक़्त ऐसा नहीं है की हमें अंतर का अनुभव होने लगता है पर हमारी वास्तविक और ध्यान की स्थिति में बदलाव आने लगता है। ऐसे में जो होता है उसे समझने की बजाय सहज भाव से अपनाना बेहतर होता है।
ध्यान के बाद हम कम तनाव और दबाव महसूस करते है। ध्यान मानसिक दबाव या तनाव को ख़त्म नहीं करता है उन्हें सिर्फ आप पर हावी होने से दूर रखने में मदद करता है।
प्राथमिक ध्यान की शुरुआत
पहली बार ध्यान में अनुभव के बाद meditation practice से आगे बढ़ते हुए अब बात करते है कुछ दिन ध्यान करने के बाद आपके अंदर आने वाले बदलाव की। इसमें निम्न बाते शामिल है :
ध्यान में बैठने के बाद हमें कुछ समय तक दर्द का अहसास होना बंद हो जाता है। अक्सर सभी का ध्यान भटकता है जब वो ध्यान में पहली बार बैठते है लेकिन कुछ समय बाद ध्यान में हमें उस दर्द का अहसास होना बंद हो जाता है क्यों की इसमें मस्तिष्क के उस हिस्से को बिजी कर देते है जो हमें दर्द का अहसास करवाता है।
कई लोगो को ध्यान के समय अपने शरीर का अनुभव होना बंद हो जाता है इस वजह से वो कई बार डर भी जाते है जबकि इस अवस्था को थोड़ा और मजबूत कर वो इससे पार पा सकते है।
जब आप कुछ दिन ध्यान का अभ्यास कर लेते है तो पहले महीने बाद आप दुसरो की फीलिंग को बेहतर तरीके से समझना शुरू कर देते है आपके केस में भी ऐसा हो सकता है की आप लोगो को समस्या से घिरा देखर भावुक हो जाये।
मास्टर और ध्यान – ध्यान की उपलब्धि :
जब हम ध्यान में मास्टर बन जाते है तब हम कुछ ऐसा करने में सक्षम हो जाते है जो आज भी विज्ञान के लिए पहेली है और आज भी उस स्टडी चल रही है। जैसे की :
1.) घंटो एक अवस्था में बिताना :
आपने कुछ साधुओ को कांटो पर सोते और चलते हुए देखा होगा, कुछ तिब्बत साधु तो घंटो तक ध्यान की एक अवस्था में बैठे रह सकते है जितना वक़्त हम सोने में बिता देते है, वो भी बिना कुछ लिए हुए। वो अपने शरीर को कड़कड़ाती ठण्ड में भी गरम रख सकते है और गर्म पानी में भी बैठ सकते है। ध्यान द्वारा उनके शरीर में कुछ ही मिनट में गर्मी बनने लगती है जो उन्हें घंटो हिमालय की ठण्ड में बैठने की हिम्मत देती है।
2.) ह्रदय की गति को कम या न्यूनतम करना :
ध्यान द्वारा समाधी के बारे में हम सबने सुना है जिसमे योगी अपने शारीरिक गतिविधि को लगभग जीरो कर देते है। ऐसे में वो जिन्दा कैसे रह पाते है जबकि उनके दिल की गति लगभग जीरो आती है। विज्ञान इसे आज तक समझ नहीं पाया है और इसे अब तक चमत्कार ही मानता आ रहा है। इस अवस्था में हिमालय के योगी वर्षो तक तपस्या में बैठे रहते है।
3.) मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाना
ध्यान द्वारा हमारे मस्तिष्क की अनंत क्षमता को विकसित करना वाकई एक चमत्कार जैसा ही तो है। जैन साधु के अनुसार उन्होंने ध्यान द्वारा अपने मस्तिष्क की क्षमत को इस हद तक बढ़ा लिया है की वो किसी भी बात को सेंकडो बार बगैर अटके सुना सकते है यही नहीं उन्हें कई भाषाओ में भी सुना सकते है। ये दर्शाता है की मस्तिष्क की क्षमता को ध्यान द्वारा बढ़ाया जा सकता है इसका प्रयोग मंदबुद्धि के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है।
4.) बहुत कम लोग जानते है साँस लेने की की खास प्रणाली को
ध्यान में खास साँस लेने की प्रणाली है जिसके द्वारा हम किसी भी वातावरण के खिलाफ अपने अंदर प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर सकते है। इसका उदहारण एक डचमैन है जिन्होंने एवरेस्ट को फतह किया है और 20 बार लिम्का बुक में अपना नाम दर्ज करवाया है। ऐसा उन्होंने सिर्फ जूतों और कपड़ो के सहारे किया है बगैर कुछ खाये पिए सिर्फ साँस की खास प्रणाली द्वारा।
ध्यान में कुछ समय बिताना आपको इसमें मास्टर तो नहीं बना सकता है लेकिन आप ध्यान के शुरुआती अभ्यास में अपने विचारो को कण्ट्रोल कर सकते है, उन्हें एक जगह फोकस कर सकते है और विचारो को सही मायने में महसूस कर सकते है। सब कुछ संभव है सिर्फ कमी है तो शुरुआत की तो फिर वो शुरुआत आज ही क्यों नहीं ! आज ही हर रोज ध्यान का प्रण ले अपने जीवन को बेहतर बनाए।
पहली बार ध्यान में अनुभव क्या होगा कैसे होगा और कितना सही होगा हर किसी के मन ऐसे सवाल उठना लाजमी है।
ज्यादातर लोग जो सोचते है की कैसे पता चलेगा की ध्यान में समूर्णता हासिल हुई है या नहीं या फिर सही जा रहे है इसका कैसे पता चलेगा उन्हें में सिर्फ यही कहना चाहूंगा की 95% लोग ध्यान ना कर सिर्फ उसकी बातो में उलझे रहते है ऐसे में पहले शुरुआत करे और फिर अपनी समस्या पर गौर करे।
बचे 5% लोग जो अभ्यास करते है पर कुछ अनुभव नहीं करते है इसकी वजह ज्यादातर उनका अभ्यास में होने वाली घटनाओ में उलझना हो सकता है जिसमे हम अभ्यास में घट रहे घटनाक्रम में उलझ जाते है जबकि हमें स्थिर होना है। इसलिए पहली बार ध्यान में अनुभव को लेकर ज्यादा परेशान ना हो और हो जो घटता है उसे घटने दे।
जब उच्च अवस्था में पहुँचते है तब हमें प्रतिक्रिया करना चाहिए। ये पोस्ट वेब पर पहली बार ध्यान में अनुभव पर लिखे गए कई लेखो से प्रभावित है और उनमे से कुछ को इसमें शामिल किया है। आप पोस्ट पर अपने विचार रख सकते है।