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Tuesday, May 26, 2026
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क्या आप भी चाहते है first time astral travel experience करना ? कुछ आसान तकनीक और प्रेरक कहानी

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क्या आपने कभी astral travel experience किया है ? सुनने में Real life से जुड़ी astral travel experience stories हमें imagination लगती है लेकिन वास्तव में ऐसा ही होता है. वास्तव में astral projection क्या है, क्या ये सच है की हम अपने शरीर से बाहर निकल कर अपने आसपास या मन की गति से कही भी आ जा सकते है ? ऐसे ही सवाल हमारे मन में आते है जब हम first time astral projection के लिए preparation करते है.

कुछ expert review के अनुसार astral travel experience good and bad दोनों ही तरह का हो सकता है. इसकी सही जानकारी आपको सही अनुभव करने में मदद कर सकती है. अपने शरीर से बाहर कैसे निकले ? काफी कोशिश करने के बाद भी हम उस स्टेट में नहीं जा पा रहे है की Astral body अपने आप शरीर से बाहर निकले.

ये सब हम conscious रहते हुए महसूस कर सके.

Astral travel Experience
ज्यादातर लोग जब इसका अनुभव करने के बाद जाग्रत होते है तो उन्हें ये सब सपने जैसा लगता है.

90% लोगो को वास्तविक रूप से शरीर से बाहर विचरण का अनुभव होते है लेकिन, वो इसे समझ नहीं पाते है. इसकी वजह है उन्हें ये सब सपने जैसा लगना. हकीकत में सूक्ष्म शरीर की यात्रा कल्पना जैसा है लेकिन वास्तविक है.

यहाँ पर कुछ ऐसी astral travel experience stories in Hindi शेयर की जा रही है जो आपको इसे बेहतर समझने में मदद करेगी.  अगर आप भी सही तरीके से astral travel experience करने की सोच रहे है तो पोस्ट को ध्यान से पढना न भूले.

Astral travel Experience

Out of body travel और astral travel इन दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है. शरीर से बाहर विचरण में हम सूक्ष्म शरीर की तरह विचरण नहीं कर पाते है और ये हमारा ऊर्जा स्वरूप नहीं होता है.

शरीर से बाहर विचरण की शुरुआत एक तरह से आत्मा का शरीर से बाहर विचरण है जिसे विचरण और विचरण के बाद की घटना याद रहती है.

अध्ययन के मुताबिक शरीर से बाहर विचरण सूक्ष्म शरीर यात्रा का शुरुआती चरण है अतः आप अगर सूक्ष्म शरीर की यात्रा का अनुभव करना चाहते है तो आपको इसकी शुरुआत करने का सही तरीका जानना चाहिए.

सूक्ष्म शरीर की यात्रा की शुरुआत करने के लिए आपका इरादा मजबूत होना चाहिए. क्यों की मजबूत इरादा आधा अभ्यास है. शरीर से बाहर विचरण के लिए आपको सिर्फ कुछ ही बातो का ख्याल रखना है. मजबूत इरादा या संकल्प और स्पंदन जो आपके अंदर तब पैदा होने लगते है जब आप खुद की भावनाओ को एक स्तर तक पहुंचा लेते है.

हम पहले की पोस्ट में बात कर चुके है की सूक्ष्म शरीर क्या है और अभ्यास कैसे करना है. लेकिन चूँकि वहा पर हमने astral travel experience करने से पहले की बात नहीं की थी तो सबसे पहले बात कर लेते है की अभ्यास से पहले हमें किस तरह की तैयारी करनी चाहिए.

इससे आपको अभ्यास में और ज्यादा मदद मिलेगी. सूक्ष्म शरीर का काया से बाहर विचरण एक रोमांचक अनुभव है जो ज्ञान से भरपूर है इसलिए हर किसी को ये अनुभव करना चाहिए.

Astral travel experience & strong determination

इसका मतलब है की अगर आप मन से चाहते है की आप शरीर से बाहर विचरण का अनुभव करे तो आपको मन में मजबूत इरादा रखना होता है. इसके पीछे कोई कारण नहीं बल्कि आपकी भावनाए होनी चाहिए. हम अक्सर किसी ना किसी फायदे के लिए अभ्यास की शुरुआत करते है.

जैसे कुछ लोग अंतर की यात्रा करना चाहते है तो कुछ लोग हीलिंग या फिर कुछ लोग जो दुनिया को नए नजरिये से देखना चाहते है. अभ्यास के लिए अगर आप कारण से ज्यादा भावनाओ पर काम करते है तो आपको अभ्यास में जल्दी सफलता मिलती है.

आपको सिर्फ यही करना है की जब भी आप अभ्यास करे तब आपको अंत में कुछ अच्छा ही अनुभव मिलेगा.

सबसे बड़ी बात आपको जो ध्यान रखनी चाहिए. आपको शरीर से बाहर विचरण के अनुभव की कल्पना करने से पहले reason why we should perform astral travel पर ध्यान देना है. क्यों की अक्सर ऐसा होता है की आप पूरी तरह से नहीं जान पाते है की आपको अभ्यास में क्या अनुभव होगा या फिर क्या महसूस कर सकते है.

Astral travel experience and state of vibration

Out of body experience के लिए आपको एक बात और ध्यान रखनी है की इसके अभ्यास से पहले आपका तन और मन दोनों इसके अनुकूल अवस्था में हो.

कहने का सीधा सा मतलब है की जब तक आपका शरीर और मन तालमेल नहीं बिठा पायेगा तब तक आप सही अनुभव नहीं कर पाएंगे इसी अभ्यास में नहीं हर अभ्यास में यह बात लागू होती है.

इसके बाद जो बात आपको ध्यान रखनी है वो है आपके मस्तिष्क की सही स्थिति यानि की मस्तिष्क का शांत और स्थिर होना. इसके लिए आप ध्यान कर सकते है अगर आपको ध्यान करने का कोई अच्छा अनुभव नहीं है तब भी आप मैडिटेशन म्यूजिक सुन सकते है जिन्हे अल्फ़ा म्यूजिक कहते है.

ये आपके मस्तिष्क को out of body experience के लायक सही अवस्था में लाने में काफी मदद करता है इन्हे आप ब्लॉग से भी डाउनलोड कर सकते है.

आपकी एकाग्रता ही बढाती है स्पंदन को

अगर आपने ह्यूमन साइकोलॉजी पढ़ी है तो आप जानते होंगे की हमारा मस्तिष्क 3 तरह की brain wave यानि तरंगो को छोड़ता है ये तरंगे अल्फ़ा, थीटा और डेल्टा है. ये waves अलग अलग केमिकल रिएक्शन द्वारा हमें अनुभव करवाती है.

ये सिर्फ सोते वक़्त ही नहीं बल्कि दिनभर की अलग अलग गतिविधि के लिए भी जिम्मेदार है. जैसे की आप अगर ध्यान करते है और आप किसी शोरगुल वाली जगह है तो दोनों स्थिति में ही आपके मस्तिष्क की स्थिति अलग अलग होगी.

शरीर से बाहर विचरण की शुरुआत के अनुभव यानि out of body experience के लिए इसका बहुत महत्वपूर्ण रोल है. ये इसलिए महत्वपूर्ण है क्यों की अलग अलग स्थिति में अलग अलग रिएक्शन द्वारा हम अनुभव करते है यही रिएक्शन हमें छटी इंद्री का अनुभव करवा सकती है क्यों की ये पीनियल ग्लैंड को प्रभावित करती है.

सूक्ष्म शरीर का अनुभव करने में आपके मस्तिष्क के स्पंदन काफी अहम भूमिका निभाते है.

caution and suggestion

Out of body experience की शुरुआत के लिए आपका daily routine and habit में कुछ changes लाना जरुरी है. ये इसलिए क्यों की जो केमिकल रिएक्शन इस अनुभव में महत्वपूर्ण रोल निभाती है उसे ये सब चीजे प्रभावित करती है.

  • ना तो अभ्यास से कुछ ही देर पहले कुछ खाये ना भी भूखे रहे.
  • उत्तेजक पदार्थ जैसे चाय, कॉफ़ी से दूर रहे.
  • आरामदायक कपडे पहने और अपने आसपास के माहौल को पूरी तरह अपने अनुकूल बनाये जैसे की अगर आपको अँधेरे कमरे में नींद आती है तो कमरे में पूरी तरह अँधेरा ही करे.
  • जरुरी नहीं की आप बाह्य स्त्रोत से सुनकर इसका अनुभव करे. आप खुद का एक निर्देशन बना कर अच्छा अनुभव कर सकते है.

शरीर से बाहर विचरण में क्या करे क्या नहीं ?

जिस समय आप अभ्यास करते है उस दौरान कोशिश करे की आपके सोने का समय ना हो. अगर आप सोने के समय इस अभ्यास को करेंगे तो जल्दी हो सो सकते है.

अगर आपको लगता है की आपको किसी के सहारे की जरूरत है जो की आपके डर की वजह से लगता है तो आप उसी व्यक्ति को कमरे में रखे जिस पर आपको पूरा भरोसा हो. ताकि किसी भी तरह की परिस्थिति में वो  आपकी सहायता कर सके. कमरे में अल्फ़ा म्यूजिक लगाना ना भूले.

ये आपको जल्दी ही brain waves change कर vibration state में पहुँचने में मदद करेगा.

दोस्तों आध्यात्म के रोमांचक सफर को अगर आप भी सही से अनुभव करना चाहते है तो आपको सबसे खास बातो पर ध्यान जरूर देना चाहिए. आपका मनोबल, आपके शरीर और मन की स्थिति शामिल है. किसी भी अभ्यास को दुसरो के नजरिये से करना सिर्फ कॉपी करना है.

आपको बेसिक पता है तो आप अच्छे अनुभव कर सकते है. गाइड करने वाले कभी अपना अनुभव नहीं बताते है जिसकी एक नहीं कई वजह है. इसलिए First time Out of body experience कर आप भी शुरुआत करे और अनुभव करे.

Real life astral travel experience stories

हम कहानियाँ क्यों सुनते है ? इनसे हमें motivation मिलता है और हमारे सोचने की क्षमता में विस्तार होता है. यही वजह है की ऐसी कुछ Real life astral travel experience stories को यहाँ शेयर कर रहे है. इससे आपको खुद की स्थिति को समझने में मदद मिलेगी.

शरीर से बाहर विचरण की सच्ची कहानी : ये कहानी एक 18 साल के लड़के की है. एक दोस्त जिसके यहाँ पर कोई नहीं रहता था उसे वहा जाना पड़ा और रात्रि को वही सो गया. उसके कुछ दिन बाद अपने घर में रात को सोते हुए ये वाकया हुआ.

रात्रि को बहुत ज्यादा थकावट की वजह से नींद आ जाती है लेकिन, कुछ देर बाद ही सैम खुद को एक आइने के सामने पाता है. इस वक़्त को अपने बेडरूम में था. जब सैम ने पलट कर देखा तो उसे हवा में भूरे बादल जैसी कोई आकृति हवा में तैरती दिखी.

घबराकर सैम हॉल की तरफ भागता है लेकिन वहां भी उसे वैसी ही कुछ shadow दिखाई देती है. इन सबको देखकर सैम की हालत ख़राब होने लगी. वो भागने की कोशिश करता तो पाता है की वो हवा की गति से उड़ रहा है और उसका शरीर उस हॉल में वैसे ही है.

सैम अपने शरीर में वापस चला जाता है लेकिन इसके काफी देर बाद तक वो बॉडी में किसी तरह की हलचल को कर पाने में असफल रहता है. हालाँकि ये काफी डरावना था लेकिन सैम का first time out of body experience था जिसे उसने बाद में समझा.

out of body experience stories Hindi case 2

ऐसे बहुत सारे केस सामने आते है जहाँ पर लोगो का कहना होता है की उन्होंने सपनो में खुद को उड़ते हुए महसूस किया और बाद में अनंत निचे गिरते हुए. इसके बाद झटके से आंख खुल जाना और उनका उठकर बैठ जाना. कुछ लोग इसे सपना समझकर इनके पीछे का मतलब निकालने की कोशिश करते है.

लेकिन क्या वास्तव में ये कोई सपना ही था expert review के अनुसार ये आपका पहला astral travel experience या फिर out of body experience हो सकता है. ये चीजे समझने में जितनी complicated लगती है उतनी है नहीं. जब हम सपनो में या सोते हुए state of vibration में पहुँच जाते है अपने आप ही astral travel की शुरुआत हो जाती है.

शरीर से बाहर विचरण पर शुरुआती स्तर में किसी का कण्ट्रोल नहीं होता है. अगर आप इसे समझकर करते है तो practice के जरिये नार्मल तरीके से शुरुआत कर सकते है.

Read : क्या होता है जब 2 लोगो के बीच का मानसिक कनेक्शन बहुत ज्यादा स्ट्रोंग बन जाता है ?

Astral travel experience – final word

सपनो में कई बार हमें महसूस होता है जैसे हम हवा में हो या फिर हमारा शरीर कही ओर है और हम कही ओर. इस दौरान हम इतना ज्यादा घबरा जाते है की इसे डरावना समझ कर भूल जाते है.

Astral travel experience करने के लिए हमें सबसे पहले अपने body vibration को control करना होता है.

ऐसा होने के बाद हम आसानी से पहले अनुभव को बिना किसी डर के पूरा कर सकते है.

इसके लिए आप रिलेटेड stories पढ़ कर खुद को इसके लिए motivate भी कर सकते है. अगर आपने अपना पहला अनुभव आसानी से पूर्ण कर लिया है तो अनुभव यहाँ पर शेयर करना न भूले.

क्या आपको भी कभी सोते समय black figure demon and sleep paralysis का experience हुआ है ? इसे fix कैसे करे

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क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है की आप खुद को अकेली जगह महसूस करते है और आपके आसपास किसी तरह की काली परछाई के होने का आभास हो रहा हो ?

या फिर वो आकृति आपके सीने पर बैठी हो. ऐसा लगभग हर उस शख्स के साथ होता है जो सही नींद नहीं ले पाता हो या फिर सोने के तरीके में किसी तरह की कोई खामी हो.

इस तरह के Shadow people sleep paralysis क्यों होते है, इनके पीछे की वजह क्या है और जो black figure during sleep paralysis हमें दिखाई देती है वो वास्तव में क्या है ?

Shadow people sleep paralysis

अगर बात करे की sleep paralysis feel की तो हम पाएंगे की ऐसी स्थिति जिसमे हमें लगता है की हम चेतन है लेकिन अपनी बॉडी को मूव नहीं कर पाते है. इस स्थिति में हमें अकेले होने का आभास होता है और सबकुछ सुनते और देखने के बाद भी हम कुछ भी movement नहीं कर पाते है.

ये स्थिति भले ही कुछ मिनट की हो लेकिन हमें लगता है जैसे कई देर से ऐसा हो रहा हो.

अगर आपके साथ भी सोते समय अनजानी ताकत को सीने पर महसूस करना (Shadow people sleep paralysis ) जैसा अनुभव रहा है तो इस पोस्ट को ध्यान से पढ़े. इसमें हम what causes sleep paralysis in Hindi & how to fix के बारे में पढेंगे.

Shadow people sleep paralysis

जब हम किन्ही कारणों से पूरी नींद नहीं ले पाते है और अचानक से उठ जाते है तब हमें एक तरह के hallucination की स्थिति का आभास होता है. इस दौरान आपको कुछ अजीब से अनुभव होते है जिसमे किसी का आपके सामने से गुजरना, परछाई का दिखना, सीने पर किसी के बैठे होने का अहसास होना शामिल है.

सामान्य तौर पर जब हम नींद से उठते है तो 2 मिनट से लेकर 5 मिनट तक हमें खुद को नोर्मल होने में देना चाहिए. ऐसा इसलिए ताकि शरीर पूरी तरह से जाग्रत हो सके और हम सामान्य तरीके से खुद को तरोताजा फील कर सके. लेकिन कई बार हडबडाहट की वजह से हम अचानक उठ जाते है.

इन सबकी वजह है सुप्त अवस्था से जाग्रत अवस्था में एक झटके से पहुंचना जो किसी तरह के disturb की वजह से होता है. इस दौरान हमारी आंखे खुल तो जाती है लेकिन बॉडी को नोर्मल होने में 2 मिनट तक का समय लगता है. इस दौरान हमारी आंखे ( पुतली ) वैसे ही मूव करती है जैसे सोते समय करती है. इस वजह से हम कभी कभी Shadow people sleep paralysis का experience करने लगते है.

इस स्थिति में एक परछाई हमें आसपास दिखती है. हम चाहकर भी किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं कर पाते है. वैसे अगर आप चाहे तो ये आसानी से पता कर सकते है की कोई व्यक्ति सो रहा है या सपने देख रहा है.

सोने के दौरान हमारी आँखों की पुतली स्थिर रहती है जबकि सपने देखते समय ये तेजी से इधर उधर मूव करती है.

इसे समझ लिया तो स्लीप पैरालिसिस को समझना आसान हो जायेगा.

What causes Shadow people sleep paralysis ?

अचानक से शरीर का काम करना बंद कर देना पक्षाघात कहलाता है. जब हम सोते है तब हमारे शरीर के सभी हिस्से ( कुछ हिस्सों को छोड़कर ) काम करना बंद कर देते है. शरीर शिथिल होने की वजह से सुप्त अवस्था में जाता है और हम अपने मस्तिष्क की वजह से सपने देखना शुरू करते है.

सपने देखने की क्रिया में हमारी आंखे ( पुतली ) लगातार घुमती रहती है. इसकी वजह से हमारा मस्तिष्क हमारी यादो या अवचेतन मन दबी हुई स्मृति को सपने की तरह दिखाता है. एक सामान्य जीवन में ये लगातार चलता रहता है और नींद पूरी होने पर हम उठ जाते है.

लेकिन, कई बार ऐसा होता है की शरीर के हिस्से पूर्ण रूप से एक्टिव नहीं होते है लेकिन हमारी आँखों की पुतली बार बार घुमती रहती है.

इसी rapid eye movement mean REM की वजह से हम एक तरह की hallucination types को experience करने लगते है. इस अवस्था में हमें कुछ अजीब सा दिखने का भ्रम होने लगता है.

हालाँकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता की shadow people का इस दुनिया में कोई existence नहीं है. लेकिन, जो Black figure during sleep paralysis हमें दिखाई देते है वो वास्तव में सिर्फ एक hallucination होता है. shadow person एक अलग theory है जिसे हमने अलग से समझाया है.

मुख्य रूप से नींद का पूरा न होना या अचानक से उठने की वजह से body and mind के बिच सही तालमेल न बैठ पाने की वजह से हम sleep paralysis experience करते है.

Read : Different Stages of the hypnotic state How They unlock your unconscious mind

How does sleep paralysis feel?

लम्बे समय से इस विषय पर काफी सारी रिसर्च हुई है. लोगो के अलग अलग एक्सपीरियंस को समझा गया है. सामने कुछ बाते आई है जिनके अनुसार एक व्यक्ति Shadow people sleep paralysis  के experience के दौरान इस तरह के अनुभव करता है.

  • अचानक से उठने पर बॉडी में किसी तरह की हलचल को महसूस न कर पाना.
  • चाहकर भी बोल न पाना जैसे किसी ने आवाज को गले से निकलने से रोक दिया हो.
  • आसपास क्या हो रहा है ये सबकुछ देखना लेकिन किसी तरह की प्रक्रिया न कर पाना.
  • सीने पर किसी के बैठे होने का अहसास होना.
  • कुछ लोगो ने बताया है की उन्हें Black figure during sleep paralysis का भी experience हुआ है.
  • एक ही साइड से सोते रहना और जब उठते है तब थकावट सी महसूस होना.
  • जब अचानक से उठते है तब हम हरकत नहीं कर सकते है लेकिन दिखाई और सुनाई सब पड़ता है जिसकी वजह से कई बार किसी तरह के डरावनी जगह के होने का अहसास होने लगता है.

इन सभी अनुभव और feeling की बात करे तो एक बात कॉमन है और वो ये की इस स्थिति में हम जाग्रत और सपनो की दुनिया के बिच होते है. एक स्टेट से दूसरी स्टेट में जाने के दौरान हमें कुछ समय लगता है. अगर इस दौरान हम disturb हो जाते है तब इस तरह की स्थिति बनती है.

Black figure during sleep paralysis

जिन लोगो ने भी स्लीप पैरालिसिस को लेकर अपने अनुभव शेयर करते हुए Black figure during sleep paralysis के बारे में डरावने experience शेयर किये है. उनके अनुसार उन्हें इस स्थिति में अपने आसपास किसी शैतानी छाया का आभास होता है. वो उसे देखकर प्रतिक्रिया करना चाहते है लेकिन कुछ कर नहीं पाते है.

कुछ लोगो ने सीने के ऊपर किसी परछाई को महसूस किया है. वास्तव में जो काली परछाई वो देखते है वो और कुछ नहीं बल्कि एक तरह का hallucination ही है. यही वजह है की Shadow people sleep paralysis के बिच काफी गहरा रिलेशन है.

sleep paralysis

किसी वजह से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बाधा आने लगे तो हमें इस तरह के आभास होने लगते है.

ऐसा सिर्फ स्लीप पैरालिसिस में ही नहीं होता है बल्कि दूसरी condition जैसे की नशा करने या फिर किसी ऐसी चीज का सेवन करने से जिसकी वजह से सोचने समझने की क्षमता यानि नर्व सिस्टम पर असर पड़ता हो भी शामिल है.

ये आभास सिर्फ 2 मिनट तक ही रहता है. कुछ समय बाद जब धीरे धीरे बॉडी में चेतना वापस आने लगती है तब जो Black figure during sleep paralysis हमें दिखाई देता है वो गायब होना शुरू हो जाता है और वापस सब कुछ नोर्मल हो जाता है.

Read : सुबह के ठीक 3 बजे नींद का टूटना दे देता है ये संकेत जानिए आपके साथ ऐसा क्यों होता है

black figure दिखाई देने की वजह

जैसा की ऊपर बताया है की सपने के दौरान हमारी आँखों की पुतली में मूवमेंट होती है. इसे REM कहा गया है. इस अवस्था में जाने और आने में कुछ समय लगता है. सपने देखते देखते अचानक आँखे खुल जाती है जो या तो किसी डरावने सपने की वजह से होती है या फिर  किसी तरह के दखल की वजह से. ऐसी परिस्थिति में वास्तव में क्या होता है ?

जब हम इस तरह की स्थिति से उठते है तब हमारी सिर्फ आंखे खुलती है. शरीर उसी अवस्था में होता है और हम तब भी REM को experience करते है यानि सपने देखना.

हम सपने कभी भी कलर में नहीं देखते है. जो भी सपने में दिखता है वो Black and white होता है इसी वजह से हमें सिर्फ Black and white or only black color की परछाई का आभास होता है.

अब तो आप समझ ही गए होंगे की Sleep paralysis और demon look like creature का आपस में क्या रिलेशन है. ये आपके आसपास या फिर आपके सीने पर महसूस होता है. ये सिर्फ Oxygen की सही मात्रा की कमी की वजह से होता है. जब हमारे ब्रेन में आवश्यक मात्रा में oxygen की सप्लाई होने लगती है तो इस तरह के hallucinate experience भी बंद हो जाते है.

Sleep paralysis demon experience when hand on chest

पुरे विश्व में ( शायद ) अगर आपको किसी तरह की शैतानी आकृति दिखाई देती है या आप उसे अपने सीने पर महसूस करते है तो एक ही इलाज बताया जाता है.

जब भी Shadow people sleep paralysis का अनुभव हो अपने हाथो को सीने से हटा कर सो जाओ. इसके बाद डरावना अनुभव / सपने नहीं आएंगे.

ये तरीका काफी हद तक कारगर है क्यों की इससे आप रिलैक्स हो जाते है. डॉक्टर्स की माने तो ऐसा करने से हमारे साँस लेने की गति पर असर पड़ता है. जब हम स्लीप पैरालिसिस की अवस्था में होते है तब हमारे साँस लेने की गति काफी कम होती है. इसी वजह से हमें hallucinate experience होते है और इस दौरान जब साँस का प्रवाह सही हो जाता है तो हम वापस चेतना में लौट आते है.

दुनिया में अभी तक sleep paralysis की कोई दवा नहीं बनी है. इसके लिए बस आप कुछ तरीको को अपनाकर ही इससे छुटकारा पा सकते है.

Read : 8 मुख्य कारण जिनकी वजह से वशीकरण का उपाय काम नहीं करता है वशीकरण के फ़ैल होने की सबसे बड़ी वजह

Why do we hallucinate during sleep paralysis?

सोते समय हमें कुछ होने का आभास होता है जो बेहद अजीब होता है और समझ से परे होता है. इस तरह का आभास जो वास्तव में है नहीं होने की कई सारी रीज़न है जैसे की;

  • बहुत लम्बे समय से जगे हुए रहने के बाद अचानक ही सो जाना. ( ऐसी नींद जो अचानक ही आ जाती है )
  • कुछ ऐसी एक्सरसाइज जिनसे हमें अचानक ही थकान होकर नींद आ जाती है.
  • REM से नोर्मल अवस्था में आने के बिच का समय ignore कर देना.

एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाने की एक नोर्मल प्रोसेस होती है. कुछ लोग इसे follow न करते हुए शॉर्टकट या फिर कम टाइम में ही इन दोनों में से एक अवस्था में पहुँच जाते है. यही वजह है की इस अवस्था में हम न तो चेतन होते है न ही सोये हुए और अचानक से जब ऐसा होता है तब हमें आभास सा होने लगता है.

अगर इस वजह से होता है तो हम इसे फिक्स कैसे करे ? आइये कुछ ऐसे tips के बारे में भी जान लेते है जिन्हें अपनाकर आप Shadow people sleep paralysis से बच सकते है.

How do you fix Shadow people sleep paralysis ?

ऐसे काफी सारे tips and tricks है जिन्हें अगर follow कर लिया तो भी तरह के sleep disorder like Shadow people sleep paralysis, hallucinate and demon presence को दूर कर सकते है.

Succubus

  • समय पर सोने और उठने की आदत डाल ले और एक फिक्स नींद जरुर ले.
  • उठते वक़्त जल्दी न करे बल्कि 2-5 मिनट तक सिर्फ आंखे खुली रखे और सोचते रहे जैसे की दिन की प्लानिंग या फिर कुछ अच्छा जिससे आपका दिन बढ़िया निकले. इसी दौरान आपकी बॉडी पूरी तरह से एक्टिव हो जाती है.
  • सोने के समय करवट बदलकर सोने की कोशिश करे. अगर आप पूरी रात एक ही करवट में निकाल देते है तो मुमकिन है की आपका शरीर थकावट महसूस करे और sleep paralysis जैसी स्थिति बने.
  • सोते समय जरुरत से ज्यादा सोचने और तनाव वाली चीजो से बचे. कोशिश करे की टीवी देखते हुए न सोए.
  • अगर इस तरह का अनुभव हो भी जाए तो अपनी भावना शक्ति का प्रयोग कर sleep paralysis से बाहर निकला जा सकता है.

अगर आप इन tips को follow करते है तो easily आप भी sleep paralysis fix कर सकते है. sleep paralysis के लिए कोई दवा नहीं है इसे सिर्फ रोका जा सकता है. जो दवाई आपको इसके नाम पर दी जाती है वो सिर्फ नींद के pattern में बदलाव लाने के लिए होती है ताकि आप आराम की नींद लो.

Read : 5 बाते जो आपको ये मानने पर मजबूर कर देगी की भूत प्रेत और आत्माए होती है

what author say about Shadow people sleep paralysis

बचपन में ऐसा कई बार मेरे आपके हम सबके साथ हो चूका है. लाइफ में कई बार हम ऐसा experience है जिसमे किसी तरह की black figure demon का दिखना या फिर shadow people का दिखना और उस वक़्त शरीर में किसी तरह की कोई हलचल महसूस न होना इस तरह के अनुभव होते रहते है.

इनकी वजह और कुछ नहीं नींद में दखल होती है. बगैर दवा के भी आप Shadow people sleep paralysis जैसी psychological problem को दूर कर सकते है.

तो क्या shadow person जो की parallel dimension से belong करते है वो भी कल्पना है. बिलकुल नहीं ! shadow peoples और sleep paralysis experience में फर्क करना बेहद मुश्किल है खासकर तब जब हमारा मस्तिष्क hallucinate की स्थिति में हो. ये एक अलग concept है जिसे हमने अलग पोस्ट में समझाया है.

ध्यान में अनुभव के लिए समझे इन खास योग्यताओ का महत्व

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हम सभी ध्यानकी गहराई में उतरना चाहते है। और इसके लिए हम काफी प्रयत्न भी करते है लेकिन कई बार हम कोशिश करने के बाद भी इसमें सफल नहीं हो पाते है इसकी वजह है किसी भी ध्यान की 4 प्रमुख आवश्यकता को समझ कर उन्हें जाग्रता करना।

ये बिलकुल वैसा ही है जैसा हमारे जिन्दा रहने के लिए भोजन और पानी का सेवन। बात करते है ध्यान के लिए आवश्यक चरण की जिनकी वजह से आप ध्यान में गहरे अनुभव कर सकते है वो भी कम समय में। ध्यान के लिए आवश्यक चरण

ध्यान के लिए आवश्यक चरण

अगर आप ध्यान में घंटो बैठे रहने के बाद भी कोई अनुभव नहीं कर पा रहे है तो बजाय ध्यान की तकनीक बदलने के आप निचे दिए चार योग्यताओ को अपने अंदर विकसित करे जो किसी भी ध्यान और त्राटक के अभ्यास में आपको कम समय में अच्छा अनुभव करने में सक्षम है। आपको सबसे पहले इसका बेसिक समझना होगा और इन्हे अपने अभ्यास में उतारना होगा।

शरीर को चैतन्य बनाना

शरीर को जब ध्यान की शुरुआत में आराम मिलता है तब वो शिथिल होने के साथ साथ हमें निद्रा की ओर ले जाता है। हम रोज शरीर को आराम देने के लिए सोते है लेकिन सही मायने में शरीर को आराम मिलता है ध्यान के समय क्यों की उस समय हम शरीर और मन दोनों पर नियंत्रण बनाते है। ध्यान की किसी भी तकनीक में हमें चार महत्वपूर्ण स्किल को जाग्रत करना होता है ताकि अनुभव मिले। आइये जानते है ध्यान के लिए आवश्यक चरण को और इनका ध्यान में क्या महत्व सब कुछ विस्तार से।

  1. उपस्थिति : ध्यान के वक़्त खुद को एक जगह उपस्थित रखना ना सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी।
  2. जागरूकता : हम कहा है इस बात का भान बने रहना।
  3. फोकस : एक जगह विचारो को फोकस रखने की क्षमता।
  4. एकाग्रता : एक जगह पर खुद को एकाग्र रखते हुए किसी अन्य गतिविधि पर ध्यान ना देना।

खुद को वर्तमान में रखना

ध्यान करते वक़्त हम ज्यादातर वर्तमान से हटकर अतीत की यादो में चले जाते है। ऐसा हर उस व्यक्ति के साथ होता है जो शुरुआती ध्यान कर रहा होता है। अगर आप लगातार 1 घंटे से ध्यान कर रहे है तो मुश्किल से 5 मिनट भी आप खुद को वर्तमान में नहीं रख पाते है।

ध्यान में मास्टर किसी भी चीज को मानसिक ऊर्जा से चलायमान कर देते है जैसे मानसिक शक्तियों के अभ्यास में आप पढ़ चुके है इसके लिए उनका सारा ध्यान सिर्फ वर्तमान में रहता है तभी वो ऐसा कर पाते है।

ध्यान में आप जितने आगे बढ़ते जाते है उतना ही आपके वर्तमान में रहने की अनिवार्यता बढ़ती जाती है। आप हर रोज ध्यान की शुरुआत में खुद को वर्तमान में रखने की कोशिश करते है लेकिन कुछ ही देर बाद मानसिक और भावनात्मक रूप से आप खुद विचारो के भंवर में खो जाते है।

ये सब आपके मस्तिष्क में लगातार गतिविधि को बढ़ाते है और यही वजह है की ध्यान में लगातार घंटो बैठे रहने के बाद भी आपका मन शांत नहीं होता है।

जब आपके मन में भावनाये और विचार जोर मारने लगते है तब आपका मस्तिष्क अतीत और भविष्य के बिच एक पेंडुलम की भांति घूमने लगता है। इससे बचने के लिए आपको फोकल ऑब्जेक्ट यानि ध्यान केंद्रित करने के लिए बिंदु की आवश्यकता पड़ती है। इसे आप आज्ञा चक्र पर ध्यान भी कह सकते है और त्राटक इसका सबसे अच्छा उदहारण है जिसमे हम लम्बे समय तक वर्तमान में रह सकते है।

जागरूकता को बढाए

ध्यान के लिए आवश्यक चरण में जब आप खुद को एक स्तर तक वर्तमान में रहने के लायक बना लेते है तब आपके अंदर जागरूकता बढ़ने लगती है। जैसे की आपने शवासन या फिर न्यास ध्यान किया तब आप शुरू में शरीर के शिथिल होने के साथ ही सोने लगते थे फिर कुछ दिन के अभ्यास के बाद आप खुद को चैतन्य रखने में कामयाब हो जाते है उस दौरान आप जब शरीर को शिथिल करते है तब हर हरकत आप महसूस कर पाते है।

जब आप न्यास ध्यान में शरीर के किसी भी भाग को शिथिल करते है तब आपकी सारी चेतना उस अंग पर चलती है।

आप उस अंग में शिथिलता को महसूस करते है यहाँ तक की उसकी सूक्ष्म गतिविधि भी आप खुद देखने लगते है जैसे की आप अपने शरीर से बाहर निकल कर सामने खड़े है यही चैतन्यता जागरूकता कहलाती है जो सिर्फ वर्तमान में रहती है अतीत या भविष्य में नहीं। खुद को ज्यादा से ज्यादा जागरूक बनाने के लिए हो रही गतिविधि का सूक्ष्म निरीक्षण करना शुरू कर दे बिना किसी प्रतिक्रिया के।

इससे आप खुद को बगैर किसी हरकत के ही ज्यादा से ज्यादा चैतन्य यानि जारूक महसूस करने लगेंगे।

दिशा दे अपने फोकस को

फोकस करना हमारे वर्तमान में रहने और उसके प्रति जागरूक बने रहने के लिए गाइड करता रहता है। जब आप ऊपर के दोनों चरण पार कर लेते है तब आपका दिमाग ज्यादा से ज्यादा फोकस होना शुरू हो जाता है।

हमारे विचार, वर्तमान में रहने की कला और जागरूकता खुद में इतनी प्रभावी नहीं है जितना इन्हे फोकस करने के साथ जोड़कर बनाया जाता है इसे आप Magnifying glass के उदाहरण द्वारा समझ सकते है।

सूर्य की किरणे हम पर पड़ती है तब वो इतनी शक्तिशाली नहीं होती है की वो हमें जला सके।

लेकिन वही किरण जब magnifying glass से गुजर कर हम पर पड़े तो हमें आसानी से जला सकती है। कहने का साफ सा मतलब है सिर्फ विचारो के वर्तमान में रहना प्रति जागरूक बने रहना काफी नहीं है उन्हें केंद्रित करना भी पड़ता है तभी हमारे विचारो में प्रभाव बनता है।

विचारो को फोकस करने के लिए आप त्राटक जैसे अभ्यास का सहारा भी ले सकते है। ध्यान में भी कुछ तकनीक में जैसे अंतर ध्यान में कुछ देर बाहर के माध्यम पर फोकस कर बंद आँखों द्वारा उसी माध्यम के आभासी पर फोकस किया जाता है। ये एक कला है खुद को फोकस करने के लिए और ध्यान के लिए आवश्यक चरण का अभ्यास इसमें काफी महत्वपूर्ण है

एकाग्रता को कैसे बनाये

फोकस होने के बाद के चरण में उस फोकस को लम्बे समय तक कैसे बनाये रखे ये एकाग्रता का काम है। यानि ध्यान के लिए आवश्यक चरण में से एक द्वारा क्षमता में आप किसी विचार पर ना सिर्फ फोकस होते है बल्कि लम्बे समय तक उस पर बने भी रहते है।

किसी भी चरण में हमें जबरदस्ती से एकाग्रता को बढ़ावा नहीं देना चाहिए क्यों की ये तनाव पैदा करती है। अगर आपका मन ध्यान में इधर उधर भागता है और आप जबरदस्ती उसे एक जगह एकाग्र करने की कोशिश में लगे है तो कुछ समय बाद तनाव और मानसिक थकावट महसूस करने लगते है।

इससे बचने के लिए आसान से माध्यम को अपने एकाग्रता अभ्यास का भाग बनाये।

कुछ समय तक ही एकाग्र होकर देखे। इससे आपको ज्यादा अच्छे रिजल्ट मिलेंगे क्यों की ध्यान में सही तरीके से बिताया गया कुछ पल का वक़्त उन घंटो की मेहनत से कही बेहतर है जिसमे आपने ज्यादा वक़्त खुद को फोकस और concentrate होने में बिता देते है।

अगर आप भी चाहते है की आप एकाग्रता पर अपनी पकड़ मजबूत बना सके तो आपको सबसे पहले फोकस करने की क्षमता को जाग्रत करना पड़ेगा। जब आप फोकस होने की क्षमता को बढ़ा लेंगे तो एकाग्रता अपने आप बढ़ने लगेगी। इसके लिए ऊपर दिए गए चारो स्किल को समझे और उन्हें अपने अभ्यास में जरूर उतारे।

फोकस जागरूकता से बढ़ता है और जागरूकता वर्तमान में रहने से बढ़ेगी। 

प्रक्रिया को दोहराते रहिये

आप किसी भी ध्यान की प्रक्रिया में पूर्ण मास्टर नहीं बन सकते है जब तक की आप इन अभ्यास या योग्यता को अपने अनुसार ना बढ़ा ले। ऊपर बताये गए चारो योग्यताओ में पूर्णता हासिल करना संभव नहीं है फिर भी चरणबद्ध अभ्यास में इनको दोहराना आपको अपने इच्छित लक्ष्य की प्राप्ति में काफी मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए आप निम्न चरण को अपनाये :

  • शुरुआत में खुद को वर्तमान में रखना सीखे और एक स्तर तक इसका अभ्यास करे जब तक की आप खुद को जागरूक बनाये रखने में कामयाब नहीं हो जाते है।
  • इसके बाद आप खुद को जागरूकता के उस स्तर तक ले जाये जहा पर आप फोकस करना सीख सके और इसके अभ्यास को आगे दोहराते रहे।

हालाँकि इन चार चरण में आप खुद को पूर्ण मास्टर नहीं बना सकते लेकिन चरणबद्ध तरीके से और अनुभव के आधार पर इनपर और ज्यादा पकड़ मजबूत करते रहिये और प्रक्रिया को तब तक दोहराते रहिये जब तक की आपको मनचाहे स्तर पर इनकी पकड़ ना मिल जाए।

पढ़े  : घर में रखे पुराने दर्पण की वजह से आपको हो सकता है पारलौकिक शक्तियों के होने का अहसास

ध्यान के लिए आवश्यक चरण-अंतिम शब्द

दोस्तों हम ध्यान के बारे में पहले ही बाते कर चुके है और आज की पोस्ट में ध्यान में उतरने से पहले की प्रक्रिया में बताया गया है ये प्रक्रिया हर ध्यान की अवस्था और त्राटक में लागू होती है। इसे सही से समझ कर आप भी उन कारणों का पता लगा सकते है जिनकी वजह से आप ध्यान में नहीं उतर पाते है या फिर त्राटक में मनचाहे अनुभव नहीं हो रहे है।

अनचाहे विचारो से छुटकारा पाना है तो आजमाइए इन तरीको को

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विचार हमारे सबसे अच्छे दोस्त भी है सबसे बुरे दुश्मन भी क्यों की अक्सर हम लोगो के बिच अपने विचारो से लोकप्रिय भी बन सकते है और उनके लिए बुरे भी बन सकते है।  आज की पोस्ट में हम जानेंगे की कैसे हम अपने विचारो पर कण्ट्रोल पा सकते सकते है.

विचारो को कण्ट्रोल करना उनका दमन करना नहीं है उन्हें समझना और फिर दिशा देना है। वैसे तो आपको कई माध्यम मिल जायेंगे लेकिन आज बात करेंगे कुछ ऐसे तरीको की जिनसे हम अनचाहे विचारो को कण्ट्रोल करना संभव कर सकते है वो भी बिना किसी परेशानी के।

अनचाहे विचारो को कण्ट्रोल करना

विचारो को कैसे कण्ट्रोल किया जाना सही है। ज्यादातर लोग सोचते है की विचारो के प्रवाह को रोकना ही सही है लेकिन क्या आप जानते है विचार और भावनाए कभी दमित नहीं होती है उन्हें एक जगह से दूसरी जगह सिर्फ परिवर्तित किया जा सकता है।

यही वजह है की में विचारो का दमन करने की बजाय उन्हें सही दिशा में ले जाना ज्यादा सही है क्यों की इससे हमारी शक्ति को हम सही जगह इस्तेमाल कर सकते है।

अनचाहे विचारो को कण्ट्रोल करना

विचारो पर नियंत्रण पाना आपको शायद आसान ना लगे लेकिन ये मुश्किल भी नहीं है लगातार अभ्यास द्वारा हर नामुमकिन को मुमकिन किया जा सकता है। इसके लिए आपको सिर्फ कुछ तकनीकी चीजे जाननी होगी जिन्हे निचे समझाया जा रहा है।

रुकना और गहरी स्वांस लेना

जब भी आपको लगे की आप विचारो की जगह अनचाहे विचारो में उलझने लगे है तो खुद को अचानक से विराम दीजिये और गहरी सांसे लेना शुरू कर दे।

ये सब इसलिए क्यों की अब आपका सारा ध्यान विचारो की बजाय उस विराम और गहरी साँस लेने की प्रक्रिया पर आ गया है।

शुरुआती तौर पर ये तकनीक काफी कारगर है क्यों की हमारे विचारो को हम सांसो के जरिये कण्ट्रोल कर सकते है।

इसके लिए आपको सिर्फ 90 सेकंड यानि सिर्फ 1:30 मिनट चाहिए अपने अनचाहे विचारो को साफ करने के लिए।

वापस उसी अवस्था में आना

जब आप ये कर ले तब वापस उस जगह अपना ध्यान फोकस करिये जहा से आपका कण्ट्रोल अपने विचारो पर से हटा था। आध्यत्मिक अनुभव में जब हमसे किसी चरण पर गलती होती है तब साधक को वापस उसी चरण पर फोकस होने की सलाह दी जाती है।

अब ये तो मुमकिन नहीं की एक ही स्टेप में एक ही गलती बार बार दोहराई जाये और इसी वजह से हमारा अनचाहे विचारो को कण्ट्रोल करना और भी ज्यादा मजबूत होता जाता है।

विचारो को बिना किसी प्रतिक्रिया के निरीक्षण करना

कई बार जब हम विचारो के भंवर में फंस जाते है तब हम खुद को बिना किसी प्रतिक्रिया के उसमे खो जाते है। इससे जब विचारो को प्रतिक्रिया नहीं मिलती है तो वो जल्दी शांत होने लगते है और हमें परेशानी का सही तरीका पता चलता है। इसे उदहारण के तौर पर समझे तो

आप जब भी किसी से मिलते है तो उससे पहले ही आपके मन में उससे जुड़े कई सवाल उठते है। इसके बदले में आप प्रतिक्रिया करने लगते है और फिर आपके मस्तिष्क को एक नया रास्ता मिल जाता है

सोचते जाने का आप जो प्रतिक्रिया करते है उसके उलट आपका मस्तिष्क भी नए नए विचार गढ़ना शुरू कर देता है फिर चाहे वो सही हो या नहीं ये सब आपकी कल्पना या पूर्वानुमान पर निर्धारित करता है। इसलिए इससे बचकर भी आप विचारो पर नियंत्रण पा सकते है।

अनचाहे विचारो की पहचान करना

अगर आप सिर्फ सोचते है उसके लिए कोई एक्शन नहीं लेते तो ये आपके मन में अनंत विचारो की प्रक्रिया को पैदा करता है। इसलिए जब भी कोई विचार आपके मन में उठे उसकी पहचान कर अपने जीवन में उसके महत्व की पहचान करे।

इस अवस्था से उबरने के लिए जो विचार आपके मन में उठते है उन्हें करना शुरू करे।

कई बार आपका मन आपको नए नए आईडिया देता है लेकिन किसी डर की वजह से आप एक्शन से घबराते है। इससे बचे और जो आपका मन आपको सुझाये उसे करके भी देखे। इससे अनचाहे विचारो को कण्ट्रोल करना तो होगा ही आपकी विचार क्षमता में सुधार भी होगा।

अपने आसपास के माहौल को बदले

कई बार जब आपके आसपास का माहौल आपके लिए अनुकूल नहीं होता है तब आप विचारो से परेशान होने लगते है। आप जिस तरह के माहौल में रहते है आपके मस्तिष्क में उसी माहौल से जुड़े विचार बनने लगते है।

इसके लिए आपको खुद में बदलाव करना जरुरी है।

खुद को आत्मविश्वास से भरपूर बनाये। विचारो को कण्ट्रोल करना माहौल में बदलाव से प्रभावित होता है।

गतिविधि बदले ध्यान और विचार बदलने लगेंगे

कई बार हम लगातार काम में फंसे रहते है और उससे जुड़े विचार कब अनचाहे विचारो में बदल जाते है पता ही नहीं चलता है।

इसके लिए आप ब्रेक ले लीजिये और अपना सारा ध्यान किसी दूसरी गतिविधि में लगाए।

म्यूजिक सुनना या बाहर टहलना सबसे अच्छा विकल्प है। इसे करने से भी अनचाहे विचारो को कण्ट्रोल करना सरल हो जाता है और आप वापस फ्रेश दिमाग के साथ अपने विचारो पर फोकस हो सकते है।

दोस्तों से बाते करिये

कई बार दोस्तों से बात करना हमारी हर टेंशन को भुला देता है। तो फिर अपनी समस्या उनसे क्यों ना शेयर की जाए।

दोस्तों से बाते करना और गप्पे लड़ना हर समस्या का समाधान है और फिर आप चाहे तो दोस्तों के सामने अपनी समस्या रख सकते है। अनचाहे विचारो की बजाय वो आपको समस्या का बेहतर समाधान दे सकते है।

क्यों की हो सकता है उनका और आपका सोचने का नजरिया समान ना हो और इसीलिए वो आपसे बेहतर सोच सके। ज्यादातर लोग दोस्तों द्वारा अनचाहे विचारो को कण्ट्रोल करना बेहतर तरीके से जानते है।

इन सभी उपाय का पालन करके आप अनचाहे विचारो से अपना ध्यान हटा सकते है। इससे आप कुछ समय के लिए अनचाहे विचारो से छुटकारा पा सकते है। जब आप ये कर ले तो लम्बे समय तक विचारो पर कण्ट्रोल करना सीखना जरूर शुरू करे।

विचारो पर कण्ट्रोल कैसे बनाये रखे

हमारा मस्तिष्क इस ब्रह्माण्ड की शायद सबसे जटिल सरंचना है क्यों की इसमें घटनाओ को सहेजने की और उन्हें वापस रिकॉल यानि याद करने की क्षमता है। इसलिए विचारो के आने का चुनाव नहीं करे बल्कि उनके उभरने की गतिविधि पर ध्यान रखे।

हम किसी भी विचार को आने से नहीं रोक सकते है लेकिन हर वक़्त मुझे विचारो को रोकना जैसे विचार मन में लाना एक तरह से उन विचारो को उभारना है जिनसे हम बचना चाहते है।

हर वक़्त घटनाओ को ignore करना permanent solution नहीं है। इसलिए कोशिश करे जब भी विचार आये उसे रोकने की बजाय उसके उभरने पर कण्ट्रोल बनाये।

मस्तिष्क को दे जरुरत के हिसाब से आराम हमें भरपूर नींद लेनी चाहिए जिसका सामान्य वक़्त 7-8 घंटे रोजाना का है। ये न सिर्फ अनचाहे विचारो से मुक्ति दिलाता है बल्कि बेहतर तरीके से सोचने के लिए भी हमें तैयार करता है।

उस वजह का पता करना जिसकी वजह से अनचाहे विचार आते है ये काम ज्यादा मुश्किल नहीं है। हम अपने विचारो पर विराम दे कर वापस कुछ देर बाद उसी अवस्था में लौटने पर उस वजह का आसानी से पता लगा सकते है। इसके लिए आपको कुछ देर के लिए अपने विचारो को रोक कर वापस उसी जगह पर आना होता है जहा से विचारो की जगह अनचाहे विचार ले रहे है। उस घटना का पता चलने से आप आसानी से उसका समाधान कर सकते है।

ध्यान और प्राणायाम करना विचारो को बनता है और भी बेहतर ध्यान और प्राणायाम हमारे सांसो को नियंत्रित करता है। इसके साथ ही विचारो में कमी भी लाता है जिसकी वजह से हम अनचाहे विचारो से छुटकारा पाते है और बेहतर सोच सकते है।

विचारो को दे सकारात्मक माहौल कई बार हम विचार करते है लेकिन हमारा मन नकारात्मक विचारो से घिर जाता है जिसकी वजह से अनचाहे विचार उभरने लगते है ये बिलकुल वैसा है जैसे एकांत में हमारे अंदर असुरक्षा की भावना आना। इसलिए अपने मस्तिष्क और मन दोनों को सुरक्षात्मक आवरण जरूर दे जसिके लिए मनोबल को मजबूत करना आवश्यक है।

हम हर चीज को कण्ट्रोल नहीं कर सकते है कई बार अनचाहे विचार हमारी अधूरी आकांशाओ का रूप भी लेते है। जैसे की हम हर चीज को कण्ट्रोल नहीं कर सकते है ऐसे में विचारो से उस हालत से लड़ने की बजाय समर्पण करना अनचाहे विचार का खत्म करने जैसा है। इससे मन निर्मल हो जाता है और हम वापस सामान्य अवस्था में लौट जाते है।

दोस्तों अनचाहे विचारो को कण्ट्रोल करना वैसे तो बहुत मुश्किल काम है लेकिन अगर इसे सही दिशा देकर किया जाए तो हम इसे अपने दैनिक जीवन में आसानी से अमल में ला सकते है। आज की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देकर हमें बताये की हमारा आर्टिकल आपको कैसा लगा और आप विचारो को कण्ट्रोल करने के लिए इनमे से कोनसी तकनीक आजमाते है।

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How to use Power of suggestion techniques for money, wealth and study simple Guide

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क्या आपने कभी नोटिस किया है की आप अपनी Daily life activity कैसे perfectly without any misguide कर पाते है ? आज हम Power of suggestion techniques in Hindi के बारे में जानने वाले है जिसका use पूरी लाइफ करने के बाद भी इसके बारे में अनजान रहते है.

इसे हम Most powerful tool for mind programing or secret subconscious mind programming tool की तरह भी समझ सकते है क्यों की यही है जो सीधे अवचेतन मन को किसी भी स्थिति के लिए तैयार करता है.

हमारी पूरी लाइफ Autosuggestion affirmations की वजह से ही stable रहती है वर्ना हम हर रोज एक ही activity को बिना किसी delay के नहीं कर पाते.

इस तरह की mind power technique बिना किसी special skill or training के सीखी जा सकती है और अगर आपने इसके बारे में सही से समझकर खुद पर लागू कर लिया तो ऐसा कुछ भी नहीं है जो आप नहीं कर सकते है.

ज्यादातर लोग अपनी लाइफ में इसे unconscious level पर इस्तेमाल करते है जिसकी वजह से इसकी potential एक हद तक सिमित है. हमें अभ्यास के जरिये इसे conscious level तक लाना होता है जिसके बाद हम जब चाहे तब इसके जरिये खुद को program कर सकते है.

Power of suggestion techniques

आपको सिर्फ Auto-suggestion and the subconscious mind के बीच के connection को समझना होगा.

अगर आप जानना चाहते है की ये क्या है तो एक experiment आप खुद पर कर सकते है जैसे की सुबह उठने के बाद खुद से कहे “आज में बीमार लग रहा हूँ” आपको ये सिर्फ अगले 2 घंटे में 4 से 8 बार दोहराना है और बाद में आप खुद महसूस करना शुरू कर देते है की आप बीमार से लग रहे है.

वाकई में आप बीमार नहीं थे ये आपका Auto suggestion techniques है जो आपको ऐसा feel करवा रहा है. आपका subconscious mind इसे catch करता है और आपकी बॉडी उसके अनुसार काम करना शुरू कर देती है. जब ऐसा हो सकता है तो सोचिये क्या नहीं हो सकता है.

Power of suggestion techniques in Hindi

Auto suggestion techniques को हम अपने performance improvement में use कर सकते है. इसके अलावा anxiety relieve, meditation practice, boost confidence जैसी condition में ये आपको काफी help कर सकती है.

ये आप पर निर्भर है की आप इसका use किस तरह करते है क्यों की positive way में किया गया use आपको relax, improve concentration, provide energy जैसी help देगा वही negative way में इसका use आपको और ज्यादा negative और कमजोर बना देगा.

Power of suggestion techniques के साथ self hypnosis जैसी तकनीक को शामिल करने पर परिणाम जल्दी और बेहतर मिलते है. जब हम खुद को चैतन्य रखते हुए आत्म-सम्मोहन का प्रयोग करते है और एक ही बात को बार बार दोहराते रहते है तो वो हमारे लिए काम करना शुरू कर देती है.

इसमें कोई जादू नहीं है बल्कि एक तरह से ये Alpha state of mind and power of affirmation का इस्तेमाल है जो की बार बार दोहराने की वजह से उस एक thought को सच करने लगता है जो हम बार बार खुद पर दोहराते रहते है.

आइये जानते है इसके बारे में और ज्यादा डिटेल से और Auto-suggestion for students and Auto suggestion for money के बारे में.

Auto suggestion psychology

अगर बात करे की ये काम कैसे करता है तो हमें इसके पीछे की psychology को समझना होगा. जब हम subconscious mind को किसी चीज पर believe करने के लिए ready करते है या प्लान बनाकर उसे अचेतन मन पर execute करते है तो वो हमारे लिए काम करने लगती है.

हमारा brain किसी भी thought को अपनाकर उसके अनुसार प्रतिक्रिया दे सकता है बशर्ते उस पर हमारा strong believe हो.

इसके लिए हमें बार बार उस एक चीज को दोहराना होता है जो हम खुद में चाहते है.

जब हम एक ही चीज को बार बार दोहराते है तो ये हमारे लिए brainwash की तरह काम करता है यानि self hypnosis की तरह ये हमारे thought को strong बनाता है.

इसके आधार पर एक धारणा निकल कर सामने आती है की हम वही पाते है जैसा हम सोचते है.

ज्यादातर लोग अनचाहे विचारो में फंसे रहते है जिसकी वजह से उन्हें वो नहीं मिलता है जो वो चाहते है. वही कुछ लोग जानते है की किस तरह alpha state of mind को access करना है और उसके दौरान खुद subconscious mind को program करना है.

Advanced auto-suggestion techniques

इस तकनीक को Advanced auto-suggestion or self-hypnosis techniques के नाम से जाना जाता है. secret subconscious mind programming में इसका ही use किया जाता है और इसके परिणाम आपको हैरान कर सकते है.

सबसे खास बात ये है की ये जितनी advanced technique है उतनी ही simple भी है. आप आसानी से step by step guide के जरिये इसे अपने daily life में fit कर सकते है.

यहाँ पर हम जितनी भी technique share करते है उनके लिए आपको अलग से वक़्त निकालने या कुछ भी बदलाव करने की जरुरत नहीं है.

ये सब आप अपनी daily life activity and schedule को follow करते हुए भी कर सकते है. आइये बात करते है कुछ खास Power of suggestion techniques के बारे में जिन्हें आप आसानी से कर सकते है.

5 auto suggestion techniques for mind programming

ये 5 तकनीक आपके schedule में कुछ बदलाव है. आपको सिर्फ इन्हें फॉलो करना है और इसका असर आप अपने daily routine पर नोटिस कर सकते है.

यहाँ कुछ ऐसी तकनीक के बारे में डिटेल शेयर की जा रही जो करने में बेहद आसान है. आप आसानी से Power of suggestion techniques का इस्तेमाल कर सकते है.

कुछ ऐसी simple technique जो आपस में मिलकर एक बड़ी तकनीक बनती है.

आइये जानते है की इन तकनीक को हम अपने ऊपर कैसे लागू कर सकते है.

The 30 Day Mental Diet

क्या आप उन लोगो में से है जो खुद को वक़्त देते है और खुद से बाते करते है? सुनने में अजीब लगेगा लेकिन जो लोग खुद से बाते करते है उनका confidence level दूसरो से ज्यादा बेहतर होता है.

ऐसे लोग Auto-suggestion and the subconscious mind का बेहतर इस्तेमाल करना जानते है और जब भी वे खुद को किसी odd situation में पाते है इसके जरिये न सिर्फ स्थिति handle करते है बल्कि बेहतर परिणाम हासिल करते है.

ज्यादातर लोग जब भी कुछ गलत करते है या उनके साथ कुछ गलत होता है वे खुद को या दूसरो को दोष देना शुरू कर देते है.

उन्हें लगता है की उन्हें पश्चाताप करना चाहिए और बार बार खुद को दोषी ठहरा कर वे इससे बाहर निकल सकते है लेकिन, असल में आपका Subconscious mind आपको दोषी मान लेता है क्यों की आप बार बार खुद को दोषी मान रहे है.

इससे होगा ये की अब आप भले ही आगे बढ़ना चाहे आपका subconscious mind ये मान कर ही काम करेगा की आप दोषी है. यही वजह है की अब आपको 100% result नहीं मिलेंगे और आपको आगे बढ़ने में काफी problem का सामना करना पड़ेगा.

इस तरह की स्थिति से बचे और खुद को बार बार दोषी ठहराना बंद करे. अगर आपको लगता है की आपने गलती कर दी है तो उसके लिए बार बार दोषी ना माने. कोशिश करे की थोड़ा वक़्त निकाल कर स्थिति का analysis करे और उस कड़ी को तोड़ कर नयी शुरुआत करे.

आप न सिर्फ स्थिति को बेहतर हैंडल करेंगे बल्कि आपका माइंड खुद को guilty feel करवाना बंद कर देगा.

Power of suggestion techniques को लागू करने की ये पहली स्टेप है जिसे आपको सबसे ज्यादा समय देना होता है. क्यों की आप किस तरह के शब्दों का खुद पर चयन करते है ये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. इसके बाद आपको आगे की स्टेप पर बढ़ना चाहिए.

Autosuggestion affirmations

Affirmations कुछ ऐसे positive, present tense language का bundle होता है जिसे हम खुद को बार बार देते है.

आपको यहाँ पर auto suggestion techniques में कुछ ऐसे word का selection करना है जो आपका ध्यान past and future से हटाकर सिर्फ और सिर्फ present पर फोकस करते हो. हर odd situation के लिए आपका Affirmations अलग हो सकता है लेकिन इन सबका एक ही उदेश्य होता है, आपके Subconscious mind को trigger करना.

जब आप ऐसा करते है तो आपका अवचेतन मन उस एक word को catch करता है और स्थिति को उसके अनुकूल बनाने पर काम करना शुरू कर देता है.

इसके लिए आपको उन शब्दों का चुनाव करना है जो आप पर काम करे क्यों की हर व्यक्ति की मानसिक स्थिति अलग अलग होती है जिसकी वजह से हर किसी पर एक ही positive affirmation काम नहीं करता है.

खास सुझाव को बार बार दोहराना

अगर आप Mental Diet को follow करते है तो पाएंगे की दिनभर में कई बार आप negative word को encounter करते है.

आप खुद से ऐसे कई नकारात्मक शब्द कहते है जो आपके अवचेतन मन पर उल्टा असर डालते है. ये सीधा आपके performance पर असर डालता है और आप अपने maximum potential को use नहीं कर पाते है.

दिनभर ऐसे हजारो negative thoughts से हम सामना करते है जिसकी वजह से subconscious mind धीरे धीरे negativity को अपनाता जाता है और हम चाह कर भी ठीक नहीं कर पाते है.

क्या आप जानते है की हम दिनभर में जाने अनजाने ही Power of suggestion techniques का use करते रहते है. ध्यान दे पैदल चलते समय, गाड़ी चलाते समय या फिर नहाते, खाने के टाइम कुछ खास शब्दों को दोहराते रहते है. आपको सिर्फ positive affirmation का चुनाव करना है.

Use visualization

वास्तव में ये language of the subconscious mind है. किसी भी तरह की mind power techniques हो वो visualization का इस्तेमाल करती है.

जब हम खुद को किसी सही तरीके या काम के लिए visualization करते है तब ये हमारे लिए स्थिति को उसी तरीके से बनाना शुरू कर देता है.

अगर आप इसका इस्तेमाल meditation खासतौर पर an Alpha state में करते है तो ये आपके Subconscious mind programing की तरह काम करता है.

इसका सीधा strong impression हमारे Subconscious mind पर देखने को मिलता है जो की इसे आसान बनाता है. यही वजह है की इसे very powerful mind programming भी कहा जाता है.

Use the alpha state of mind

देखा जाए तो हम हर रोज हर पल जब भी कुछ भी नया सोचते है वो एक तरह से प्रोग्रामिंग ही है. जब भी हम alpha state of mind में होते है. Self-hypnosis or meditation techniques में हम deep comfortable state में होते हुए खुद को मनचाहे तरीके से program कर सकते है.

इसके लिए आपको ज्यादा कुछ करने की जरुरत नहीं है. एक जगह पर आराम से बैठ जाए.

सांसो को गहरा बना ले और अपना पूरा ध्यान अपनी सांसो पर बना ले. जब आपकी साँस गहरी हो जाए तब Power of suggestion techniques का इस्तेमाल करे.

आपको सिर्फ एक positive affirmation का इस्तेमाल करना है और उसे जब भी आपका मन शांत हो बार बार दोहराना है. धीरे धीरे एक महीने में ये एक thought आपके habit का हिस्सा बन जाता है.

Alpha state of mind how to use it

Subjective senses of imagination, creativity, memory, and intuition जैसी activity हमारे brain के Alpha state of mind के दौरान experience की जाती है. दिनभर में हमारा brain active रहता है वो Beta state होती है.

इस दौरान हमारे brain activity को 14 and 30 HZ के बीच मापा जाता है. इससे निचे होने पर अल्फा स्टेट होती है.

शांत रहने के दौरान हमारे brain activity को 7 and 14 HZ के बीच मापा जाता है. इस दौरान मस्तिष्क more receptive, open, creative, and less critical जैसी स्थिति में होता है. इसका सबसे बड़ा फायदा better memory and recall में देखा जा सकता है.

इस state को भरपूर नींद, day-dreaming, Meditation and Self Hypnosis के जरिये access किया जा सकता है. Power of suggestion techniques को अगर alpha state में खुद पर लागू किया जाए तो इसके amazing result मिलने लगते है.

How to Use Alpha for Studying

अगर आप पढाई में कमजोर है तो आपको अपने brain activity को alpha state में रखना चाहिए. इससे memory power बढती है साथ ही recall process भी सुधरती है. पढने से कुछ समय पहले खुद को relax कर ले.

अपने आप से दोहराए की आपका मन शांत है और अब आप जो पढने वाले है उसे लम्बे समय तक याद रखने वाले है. गहरी सांसे लेना आपको रिलैक्स होने में मदद करता है.

Power of suggestion techniques में alpha state को access करने पर अब आपकी excellent memory, concentration, focus, and understanding skill improve हो रही है. अपनी आंखे खोले और अब पढना शुरू करे.

आप पाएंगे की शांत मन होने की वजह से आपका मन पढाई से उचट नहीं रहा है साथ ही आप चीजो को बेहतर तरीके से recall कर पा रहे है.

पढने का टाइम 20 मिनट का रखे इससे ज्यादा नहीं. इसके बाद टहलना शुरू कर दे और इसी दौरान brain को access करे और recall process को दोहराए.

How to use autosuggestion for wealth?

अगर आप Power of suggestion techniques के जरिये Auto suggestion for money technique को खुद पर लागू करना चाहते है तो सबसे पहले conscious mind को पैसा बढाने पर फोकस कर दे. ऐसा करने पर आपका subconscious mind इससे प्रभावित होगा और इसके लिए पैसा कमाना प्राथमिकता बन जाएगी.

एक बार subconscious and conscious mind ये दोनों harmony यानि balance form में आ जाए तो उसके बाद आपकी लाइफ में पैसा कमाने को लेकर नए नए जरिये बनने लगते है.

हालाँकि पैसा हमारी लाइफ में अचानक से बरसना शुरू नहीं होता है लेकिन, जब हम सोच और प्लान को पैसे के लिए बदलते है तब money consciousness में बदलाव होता है. इसके लिए आप self-hypnosis के साथ Autosuggestion affirmations का experiment कर सकते है.

ऐसी किसी भी सोच जिसमे हम consciously believe करते है उससे subconscious mind improve होता है.

किसी भी तरह के सुझाव फिर चाहे self or external suggestion हो इसमें आपकी सोच और परिणाम को बदलने की काफी क्षमता है.

Auto Suggestion Work to Build Your Wealth: Step By Step Process

अगर आप लाइफ में पैसे कमाने को लेकर Autosuggestion affirmations का use करना चाहते है तो एक प्लान बनाकर Power of suggestion techniques के जरिये आगे बढ़ने की कोशिश करे. इसके लिए Step By Step Process को यहाँ शेयर किया जा रहा है जिसे आप लागू कर अपने subconscious mind के potential को maximum level पर access कर सकते है.

  • सबसे पहले आपको अपने goal को clear समझते हुए एक जगह पर लिख लेना है.
  • पैसा कमाने के बाद आप क्या करना चाहेंगे इसे भी एक जगह मेंशन करना न भूले.
  • पैसा कैसे कमाना है और इसके लिए आपके पास क्या क्या resources है इसे देखे.
  • हर रोज रात को सोने से पहले आपको इसे दोहराना है.

हम सब जानते है की हमारा मस्तिष्क सबसे बड़ा टूल है जो किसी भी काम को संभव कर सकता है. हम जिस तरह के thoughts पर खुद को फोकस रखते है हमें वही मिलने लगता है. अगर आपका पूरा फोकस पैसे कमाने पर है तो आपको पैसा ही मिलेगा. इसमें कोई doubt नहीं है की autosuggestion to improve your wealth and your life को हम खुद पर use कर सकते है.

इसे आसान बनाने के लिए self-hypnosis or auto suggestion इन दोनों का experiment खुद पर किया जा सकता है.

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How to use Power of suggestion techniques final conclusion

Autosuggestion affirmations वास्तव में सबसे easy mind programming tool है. इस तरह के mind power techniques को आसानी से कही भी, कभी भी access किया जा सकता है.

हम सब autosuggestion techniques का इस्तेमाल करते है लेकिन हमें इसका फायदा नहीं मिलता है जिसकी सबसे बड़ी वजह subconscious mind का इसे use करना है. Power of suggestion techniques का इस्तेमाल अगर conscious brain के स्तर पर किया जाए तो आसानी से हम इसे अपनी लाइफ में लागू कर सकते है.

आमतौर पर हम इसका इस्तेमाल खुद पर negative impact डालते हुए महसूस करते है. याद करे जब भी आपसे कुछ गलत होता है तब आप बार बार खुद को दोषी ठहराते है. आपके नजरिये में ये आपका पश्चाताप है लेकिन असल में ये आपके subconscious mind पर negative impact डालता है.

आपको अपनी लाइफ में आगे बढ़ना है तो इस तरह के negative impact को positive impact में बदलना है.

मालूम हो की इस तरह की तकनीक आपको पढाई में, नौकरी में, पैसे कमाने में हर तरह से आगे बढ़ने में मदद कर सकती है बशर्ते आप इसका सही use करे. किसी भी तरह की शंका आपके मन में है तो कमेंट में पूछ सकते है.

दुसरो को कण्ट्रोल करने के लिए आज ही आजमाइए इन टिप्स को

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हजारो वजह हो सकती सकती है दुसरो के माइंड को कण्ट्रोल करने की जिसमे सबसे ज्यादा है अपनी बात को मनवाना। क्या आप भी यही सोचते है की काश में दुसरो के mind पर control कर सकता। या फिर दुसरो के दिमाग को कण्ट्रोल कर उनसे अपनी बात मनवा सकता।

ज्यादातर बाते खुद के personal स्वार्थ से जुड़ी है लेकिन फिर भी दुसरो के बिच पॉपुलर कैसे बने इस पर बात करेंगे। इसमें शामिल है आकर्षक व्यक्तित्व और दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे साथ ही साथ उनको समझना ताकि वो आपको अपने लिए खास मानने लगे।

दुसरो के Mind को control करना एक psychological विषय है। यानि लोगो के psychic को समझ कर हम उन पर हावी हो सकते है। यहाँ पर कोई वशीकरण जैसे विषय पर बात नहीं की जा रही है जिसमे हम खुद के लाभ के लिए दुसरो को अपने कण्ट्रोल में करते है।

दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे

मनोवैज्ञानिक तरीके से ये संभव है की हम लोगो की बातो को समझ कर उन्हें respect दे और उनके लिए खास बने जिससे हम उन्हें कोई काम कहे तो वो मना ना कर सके। लोगो को समझकर हम उनसे अपनी बाते मनवा सकते है वो भी बिना उनके ego को hurt किये।

इसके लिए आपको थोड़ा सा झुकना पड़ता है लेकिन सामने वाला पूरा झुक सकता है। अपने सुना ही होगा

मीठी बोली बोलने वाले अपना काम कैसे भी करके निकाल ही लेते है। 

दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे

दुसरो को कण्ट्रोल करने या उनकी सोच पर काबू पाने के लिए आपको उन्हें समझना बेहद जरुरी है। ऐसी कई बाते है जिन्हे ध्यान में रख कर आप आसानी से दुसरो से अपनी बाते मनवा सकते है आइये जानते है ऐसी ही कुछ बातो को।

दूसरे लोगो को समझना

दूसरे लोगो को समझने का मतलब है उनकी nature को समझना वो किस प्रकृति के है और कैसे हम उनसे अपना काम निकलवा सकते है। क्यों की हर इंसान खुद के आदर्श बना कर behave करता है।

उसके आदर्श या यु कहे की उसके personality के पैमाने पर अगर आप खरे उतरे तो वो आपकी बात मानेगा।

इसलिए लोगो को कण्ट्रोल करने की बजाय उन्हें किसी काम के लिए कन्वेंस करना ज्यादा बेहतर रहता है इससे आप अपनी बात मनवा भी सकते है और सामने वाले का ईगो भी बना रहता है।

इस तरीके से आप लोगो के ऐटिटूड को बदल सकते है उनकी इज्जत और भावनाओ में किसी बदलाव के बगैर।

सही तरीके का चुनाव

अगर आप सही तरीके का चुनाव नहीं कर पाएंगे तो आप लोगो की भावनाओ को हर्ट कर सकते है।

ऐसे में लोगो को कन्वेन्स करना आपके लिए काफी प्रेशर भरा काम हो जायेगा। इसलिए पहले दुसरो की भावनाओ को समझे की वो किस तरह से आपकी बाते मान सकते है।

इसके लिए ध्यान की की कभी लोगो को आपके काम के लिए फाॅर्स न करे ना ही उनसे अपनी बात जबरदस्ती मनवाये। लोग कभी नहीं चाहेंगे की कोई उन्हें उनकी मर्जी के बगैर change के लिए force करे।

लोगो की प्रेरणा-स्त्रोत की पहचान करे

आप लोगो से force काम नहीं करवा सकते लेकिन अगर आपको पता हो कौनसी बाते उन्हें motivate करेगी काम करने के लिए तो आप आसानी से उन्हें प्रेरित ही सही काम करने के लिए मनवा सकते है।

कहने का मतलब है लोगो के नजरिये से काम को देखो क्यों की किसी भी काम को वो 2 तरीके से ही करेंगे पहला उनका कोई स्वार्थ या भले का काम हो, उन्हें उनसे क्या फायदा होगा।

इसलिए आप लोगो को convince कर सकते है दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे इसके लिए उन बातो को जानिये जिनसे उन्हें प्रेरणा मिलती है।

आप लोगो के प्रेरणा-स्त्रोत की आसानी से पहचान भी कर सकते है जैसे की आप उनसे पूछे की वो इस काम को क्यों करना चाहेंगे या नहीं करना पसंद करेंगे।

उनके तर्क और दलील पर ध्यान देंगे तो उन्हें समझने में आपको ज्यादा मदद मिलेगी। आपको बस उनके फायदे और अपने काम के बिच तालमेल बिठाना है।

उदाहरण से समझे प्रेरणा-स्त्रोत को

इस बात को आप example के तौर पर ऐसे भी समझ सकते है जैसे आपकी team में 5 आदमी है और उनमे से एक member उतना काम नहीं कर रहा है जितने की आप expect कर रहे है।

इसकी 2 वजह हो सकती है या तो उसे लगता है की वो पहले से ही काफी काम कर चूका है यानि खुद को limit में बांध कर काम कर रहा है या फिर आलस के मारे काम नहीं कर रहा है।

और दूसरी वजह उसका आत्मविश्वास कमजोर होना जिसकी वजह से उसे लगता है की वो काम को उतना अच्छा कर ही नहीं सकता जितना करना चाहिए। अगर वो पहला तर्क सोचता है तो उसे आप मोटीवेट कर सकते है।

दूसरे तर्क में आप को उस पर ध्यान देकर उसे और ऊपर उठाना होगा। साथ काम कर उसे बताये की वो और बेहतर कर सकता है। दोनों ही कंडीशन में motivation की अनिवार्यता है।

सबसे ज्यादा स्ट्रांग मोटिवेशन की पहचान

हमारे जीवन में वक़्त के साथ हमारे आदर्श बदलते जाते है क्यों की वक़्त के साथ हमारा मोटिवेटर बदलता जाता है जिससे हम प्रभावित होते है। आपने महसूस किया तो होगा की जब हम किसी को मोटीवेट करते है तो किसी एक टॉपिक पर वो सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।

ऐसा इसलिए क्यों की वो उसे अपनी जिंदगी के बेहद नजदीक महसूस करता है। आपने पता कर लिया की लोगो को प्रेरणा किन चीजों से मिलती है लेकिन उनमे से किस स्त्रोत से वो सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे उसकी तलाश भी बेहद जरुरी है। क्यों की इसमें लोगो का mind change करने की power है।

आप लोगो को तब आसानी से कन्वेंस कर सकते है जब आप उन्हें उन बातो को समझाओ जिनसे उनकी जिंदगी में सबसे गहरा असर पड़ता है।

उदहारण के तौर पर एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को अपना मत सिर्फ इसलिए देने की सोचने लगता है क्यों की वो टीवी में उसके काम देखता है और सोशल मीडिया पर उसके बारे में सुनता है।

ऐसे में अगर आप उनसे अपनी बाते मनवाना चाहते है तो आपको दूसरे व्यक्ति के साथ जुड़े अपने अनुभव शेयर करने चाहिए और उनके आसपास हुए काम को लेकर उदहारण देना चाहिए। ऐसे में आप आसानी से उनका विश्वास जीत सकते है।

सिर्फ मोटिवेशन ही नहीं कमियों को भी समझे

आपको अपनी बात मनवाने के लिए इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए क्यों की लोग जल्दी से किसी other people की बात पर believe नहीं करते है। इसके लिए उन्हें पूरी तरह से अपनी बातो के आईडिया में उतारना पड़ता है।

इसलिए कभी भी लोगो को motivate करने वाले factor को ध्यान में रखने के साथ साथ उन बातो की ओर भी ध्यान दे जिनसे वो पीछे हटने लगते है। जैसे की एक सेल्समेन किसी ग्राहक को कोई वस्तु खरीदने के लिए मना लेता है फिर भी लास्ट टाइम ग्राहक का मूड बदल जाता है।

यहाँ पर ध्यान देना चाहिए उन बातो को जिनकी वजह से वो ग्राहक पीछे हटा। हो सकता है जो अपने बताया है उसमे कोई limit या कमी उसे नजर आ गयी हो। इसलिए हमेशा उन बातो को भी importance दे जो लोगो के लिए risk पैदा करती हो।

अगर आप लोगो के दिमाग में वही भरना चाहते है जो आप चाहते है तो ये एक बहुत ही bad idea साबित हो सकता है। क्यों की दूसरे लोग अपने विचारो से इससे जुड़ी रिस्क को भी गौर करते है।

आत्मविश्वास और संबंध स्थापित करे

लोगो के बिच self-confidence और आपसी relationship मजबूत करने के पीछे सिर्फ उन्हें ये भरोसा दिलाना है की वो कर सकते है।

हर कोई उम्मीद करता है की उसे किसी काम में हीरो वाला रोल मिले। इसके लिए आप उन्हें आसानी से विश्वास दिला सकते है की किस तरह वो आपसे जुड़ कर खुद को एक अच्छा और रोल मॉडल साबित कर सकते है।

लोगो को समाज और पहचान दे : कोई भी आपसे जुड़ कर ख़ुशी ख़ुशी तभी काम कर पायेगा जब आप उसे अपनी टीम का एक हिस्सा समझेंगे।

या फिर उसे लगेगा की वो आपके काम में एक महत्वपूर्ण भाग निभा रहा है। हर कोई किसी से जुड़ कर काम करना पसंद करेगा बशर्ते उसे भी एक पहचान मिले।

दुसरो के लिए काम करने से गुरेज ना करे

लोगो के लिए निस्वार्थ भाव से मदद करना एक अच्छा माध्यम साबित हो सकता है आपके लिए लोगो से जुड़ने में।

इससे लोग आपको respect के नजरिये से देखेंगे और अगली बार जब आप किसी को कोई काम कहेंगे तो वो उसे ना ही नहीं कर पायेगा। लेकिन इसके लिए आपको लोगो से जुड़ना होगा और उनकी हेल्प करनी होगी।

लोगो को भी उतना ही सम्मान दे जितना आप चाहते है

कुछ लोग दुसरो का मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते है। शायद उन्हें लगता है की दूसरे उनसे निम्नतर है। लेकिन क्या आप जानते है की हर कोई इस जीवन में महत्वपूर्ण है और सबके काम आने वाला है।

अगर आप emotionally रूप से किसी के सम्मान को चोट पहुंचाते है तो संभव है की वो आगे चलकर आपको किसी भी काम के लिए ना कर दे।

इसके बजाय जब भी किसी को लगे की वो निम्नतर है उसे मोटीवेट करे इससे वो आपके लिए सम्मान की भावना रखेगा और आपको कभी ना नहीं करेगा। दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे इसके लिए हमेशा दुसरो को सम्मान देना सीखे।

दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे-अपनी भाषा में लाये बदलाव

बोलने का अंतर कई बार आपकी बातो के मतलब पर असर डालता है। एक औरत उस बात को आसानी से मनवा लेती है जिसमे एक मर्द फ़ैल हो जाता है।

क्यों ?

फर्क है बोलने में और बोलने के तरीके में। इसलिए वाणी में कभी भी आर्डर वाली भावना ना आने दे। इसके बजाय किसी को अपील करने वाले लहजे में आप ज्यादा बेहतर तरीके से अपनी बात मनवा सकते है।

बातो को जोड़े लॉजिक के साथ

कई बार आपकी बाते काफी request से भरी होती है लेकिन फिर भी आप सामने वाले को आपकी बातो के लिए राजी नहीं कर पाते है क्यों की आपकी बातो में logic की कमी होती है। जिस काम को लेकर आप दूसरे से बात करते है आपको उससे जुड़े कुछ लॉजिक का भी पता होना चाहिए जैसे की इसका काम क्या है, ये क्या फायदा कर सकता है.

सामने वाले को ये क्यों करना चाहिए वगैरह वगैरह इससे सामने वाले पर आपकी बातो का असर जल्दी पड़ेगा ही वो आसानी से आपकी बात को मान भी लेगा।

साथ ही अपनी वाणी में बोलने के तरीके में आत्मविश्वास से भरे शब्दों का इस्तेमाल करे ये जानते हुए भी की आपको इस काम में नाकामी हासिल हो सकती है। दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे खासतौर से तब जब आपकी लैंग्वेज में दम ही ना हो इसलिए बॉडी लैंग्वेज का भी ध्यान रखे।

अपने आईडिया को बनाये लोगो का आईडिया

दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे और कैसे अपने आईडिया को उनका आईडिया बनाये। क्या आप ऐसा कर सकते है। इसे दूसरे शब्दों में अपने काम को दुसरो से करवाना भी कहते है। लोगो को पता नहीं होता है की उन्हें ये काम करना चाहिए या नहीं।

लेकिन आप उन्हें अपने विश्वास में ले लेते है और अपने आईडिया को उनके दिमाग में भर देते है। आप जानते है की इससे सबसे ज्यादा फायदा आपको ही होगा लेकिन आप दुसरो को ऐसा दिखाते है की इससे उन्हें ही लाभ होगा। और फिर जब किसी काम को लालच से जोड़ दे तो काम बनते देर ही कितनी लगती है।

लोगो को किसी बात के लिए चिंतित करना भी जरुरी है

ज्यादातर ऑनलाइन शॉपिंग में आप क्या पाते है। online shopping में पहले किसी product की इतनी marketing की जाती है की आपको लगने लगता है की वो तो आपके पास होना ही चाहिए। और सबसे अंत में उसकी सीमा भी तय कर देते है जैसे की only 55 product left in cart इससे आप उस प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसके बारे में ज्यादा सोच ही नहीं पाएंगे।

और जल्दी से जल्दी order भी कर देंगे बगैर ये जाने की ये वास्तव में कैसा होगा। ये आईडिया लोगो को आपकी बात जल्दी से मानने पर महबूर कर देगा।

इसमें 2 चीजे गौर करने वाली है पहली दिमाग में किसी product के लिए जरुरत पैदा करना जैसा की मेने बताया की अपने आईडिया को लोगो का आईडिया कैसे बनाये और दूसरा उन्हें सोचने का मौका ही ना देना की वो उससे जुड़ी risk पर ध्यान दे सके।

इसलिए इनके बिच तालमेल बैठा कर आप ज्यादा बेहतर तरीके से लोगो से अपनी बाते मनवा सकते है।

अपने अनुभव का विश्लेषण करे

आप दुसरो को कण्ट्रोल करना पसंद करते है सिर्फ अपनी बाते मनवाने के लिए या खुद को उनसे बेहतर साबित करने के लिए लेकिन क्या वो आपको कण्ट्रोल करना पसंद नहीं करेंगे। दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे इंसानी सोच इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रोल निभाती है और उसमे सबसे इसकी वजह है की हमारा दुसरो की लाइफ पर कण्ट्रोल नहीं होता है।

यही वजह है की की दूर लोग कभी भी आपको अपने दिमाग पर कण्ट्रोल करना पसंद नहीं करेंगे। यही सबसे बड़ी प्रॉब्लम है क्यों की आपका दुसरो के हालत और स्थिति पर नियंत्रण नहीं है।

ऐसा इस वजह से भी हो सकता है की जब आपकी लाइफ में स्थिति आपके कण्ट्रोल से बाहर हो जाती है तब आप दसरो को कण्ट्रोल कर खुद को secure करने की कोशिश करते है।

इसलिए कभी भीहमेशा ध्यान रखे की दुसरो को कण्ट्रोल कर आप खुद की स्थिति में कभी बेहतर महसूस नहीं कर सकते इसके लिए उन विकल्प का चुनाव करे जो आपकी स्थिति को बेहतर बनाये।

इसका एक उदहारण आप देख सकते है की किस तरह बोर्ड के एग्जाम में एक लड़का जो दूसरे होशियार लड़के को पढाई में पीछे रखने के लिए सिर्फ इसलिए कोशिश करता है क्यों की उसे लगता है की वो उससे बेहतर कर लेगा। ऐसे में वो पढ़ने पर ध्यान देने की बजाय दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे इस पर ज्यादा सोचेगा।

क्या ये इस प्रॉब्लम का सलूशन है। नहीं दुसरो को पीछे रखने की बजाय खुद को आगे बेहतर बनाने की कोशिश करना ही इसका सही समाधान है।

दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे-क्या करे

खुद की कमियों को बाहर निकाले। आपमें क्या कमिया है और आप कहा पर पीछे रह सकते है उसे दूसरे के सहयोग से भी दूर कर सकते है। आत्मविश्वास बढ़ाना आपकी कमियों को लगभग आधा हल कर देता है।

  • आपको ऐसा क्यों लगता है की ये आपके रास्ते में आ सकती है। या फिर आपको इससे नुकसान पहुँच सकता है जबकि हकीकत में ऐसा हो भी सकता है नहीं भी इसलिए प्रॉब्लम को इग्नोर करना सीखे।
  • दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे आपकी मज़बूरी है जरुरत नहीं ऐसे में अगर वो मज़बूरी ही ना रहे तो ! कोशिश करे की ऐसी नौबत आये ही नहीं की आपको दुसरो को कण्ट्रोल करना पड़े। इसके बजाय लोगो को अपनी टीम का हिस्सा बनाकर काम करवाना एक बेहतर ऑप्शन है।
  • जीवन के उतार-चढाव को समझे और उसके साथ चलने की कोशिश करे। वक़्त को आप कण्ट्रोल नहीं कर सकते लेकिन अच्छा तो बना ही सकते है। इसी की कोशिश करे।

पढ़े  : 5 बाते जो आपको ये मानने पर मजबूर कर देगी की भूत प्रेत और आत्माए होती है

 बेहतर विकल्प का चुनाव

दूसरे विकल्प का चुनाव भी एक बेहतर सुझाव है। इसके लिए आपको बस उन अवसर की तलाश करनी है जिसमे आप खुद को बेहतर बना कर ऐसी स्थिति ही ना आने दे की आप मजबूर हो जाये। जैसे की एक schedule बनाकर work करना बजाय इसके की आप जल्दबाजी में काम करे और बाद में ऐसी स्थिति पैदा हो जाए की आपको दुसरो की सहायता लेनी पड़े।

दोस्तों आज की पोस्ट दुसरो का माइंड कण्ट्रोल कैसे करे मेरे विभिन्न लेखो से लिए गए विचार है जिसमे Wiki-how का सबसे बड़ा योगदान है।

ऊपर दिए गए सभी टिप्स आपको अपने जीवन को नए नजरिये से देखने और समझने में मदद करेंगे। अगर आपको लगता है की पोस्ट में कही कुछ कमी है जिसे सुधारा जा सकता है तो आप कमेंट में अपने विचार जरूर रखे।

तीसरे नेत्र छटी इंद्री और आज्ञा-चक्र जागरण की सबसे सरल ध्यान विधि

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तीसरा नेत्र या तीसरी आंख के बारे में जानना आज भी उतना ही रोचक है जितना हम इसे समझते जा रहे है। लेकिन क्या आप ये जानते है की तीसरे नेत्र का जागरण का वास्तविक महत्व क्या है, तीसरी आंख कैसे जाग्रत की जाती है और सबसे बड़ी बात छटी इंद्री क्या है ?

आज्ञा चक्र जागरण क्या है और कैसे किया जाता है। ये सभी चीजे जो हमारे आध्यत्मिक स्वरूप से जुड़ी है ज्यादातर लोग आज भी ये जानना चाहते है की तीसरी आंख कैसे खोले।सबसे पहले तो आप ये जान ले की तीसरी आंख का विज्ञान की दुनिया में भी वजूद है और इसमें तीसरी आंख या यू कहे की छटी इंद्री को Pineal gland पीनियल ग्लैंड कहते है।

वैज्ञानिक आज भी तीसरे नेत्र का जागरण पर रिसर्च कर इंसान की वास्तविक क्षमता का पता लगाने की कोशिश कर रहे है।

हम अलग अलग जगह पर इससे जुड़ी अलग अलग जानकारिया पढ़ सकते है। sixth sense यानि छटी इंद्री को समझना थोड़ा सा मुश्किल है क्यों की ये हर इंसान की क्षमता के अनुसार विकसित होती है जिसे बाद में अभ्यास द्वारा बढ़ाया भी जा सकता है।

तीसरे नेत्र का जागरण की सरलतम विधि 

विज़न यानि काल की घटनाओ की झलकियां देखना। यहाँ काल का मतलब तीनो काल है और झलकियां प्रदर्शित करती है ऐसी घटना की ओर जिस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता है।

हम जो भी देखते है या महसूस करते है उसमे हमारा कोई अभ्यास नहीं होता है बस कुछ पल के लिए हम काल की घटनाओ को महसूस करते है और भूल जाते है। कुछ लोग इन्हे याद करने के लिए कई तरीके भी आजमाते है जिनमे से एक है डायरी लिखना। इसलिए अगर इसे एक जटिल प्रक्रिया कहे तो गलत नहीं होगा।

तीसरी आंख और इसके अलग अलग मतलब

आपने सबसे पहले तीसरे नेत्र यानि Third eye के बारे में कब सुना शायद बचपन में जब अपने धार्मिक सीरियल देखे तब। लगभग हर किसी ने यही से इसके बारे में सुना है और उसके मन में एक उत्सुकता बनी थी की काश में भी तीसरे नेत्र को जाग्रत कर सकता।

अलग अलग जगह तीसरे नेत्र को खोलने की प्रक्रिया है जिनमे प्रसिद्ध है तिब्बत की क्रिया इसमें चीरा लगाकर तीसरे नेत्र को जाग्रत किया जाता है जो की एक उच्च स्तर की प्रक्रिया है। इसके अलावा ध्यान में भी तीसरे नेत्र का जागरण की कई विधियों के जिक्र है।

तीसरी आंख पर ध्यान करना प्याज की परत को उधेड़ना है। जिस तरह प्याज में परते होती है वैसे ही हमारे आज्ञा चक्र के चारो और परत का जाल है जो हमारे विचारो द्वारा पैदा किया गया होता है। ध्यान द्वारा एक एक कर इन परत को खोला जाता है और अंत में शून्यता के साथ हम अनंत ब्रह्माण्ड में किसी भी तरंग को पकड़ने में सक्षम हो जाते है। आज्ञा चक्र का मुख्य कार्य ही विचरण करती तरंगो को पकड़ना है।

तीसरी आँख से जुड़े रोचक फैक्ट

तीसरी आंख से जुड़ी कुछ बेसिक बाते जो आपको इसके बारे में और ज्यादा स्पष्ट करेगी जानिए ऐसी ही कुछ बेसिक बातो को।

1.) स्थिति : माथे के आगे की ओर दोनों भोहों यानि eyebrow के मध्य।
2.) रंग : इंडिगो लाल और नीले रंग का मिश्रण।
3.) ध्वनि : ॐ का जाप जिसमे o सूर्य तत्व और m चंद्र तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
4.) तत्व : विधुत तरंगो का स्वरूप यानि टेलीपैथिक ऊर्जा।
5.) सेंस यानि अहसास : भाव द्वारा।

तीसरी आंख कैसे काम करती है :

जिस तरह हम खुली आँखों द्वारा देखते है ठीक वैसे ही तीसरी आंख द्वारा होता है। तीसरी आंख को देखने के लिए जिस ऊर्जा की जरुरत पड़ती है वो उसे आंखे बंद करने पर मिलती है। यानि जब हमारी आंखे बंद होती है तभी हम तीसरी आंख द्वारा देखने की प्रक्रिया की शुरुआत कर सकते है।

तीसरे नेत्र का जागरण की शुरुआत करिये ध्यान द्वारा क्यों की ये सबसे आसान और सरल है।

तीसरे नेत्र का जागरण की सरलतम विधि

ध्यान में सांसो पर नियंत्रण कर तीसरे नेत्र के जागरण की सरलतम विधि का जिक्र है जिसे हम कई स्टेप्स में पूरा करते है। इस अभ्यास के सभी चरण अपने आप में पूर्ण भी है और अलग अलग अनुभव प्रदान करने वाले है।

चरण-1

सबसे पहले तो ध्यान की अवस्था में आ जाये जिसमे आप सबसे ज्यादा आरामदायी महसूस करते है। इसके बाद अपने शरीर, मन और भाव को शिथिल करने की प्रक्रिया शुरू करे। शरीर और मन को आरामदायक स्थिति में लाने के बाद पूरा ध्यान अपनी सांसो पर ले आये।

अगर ध्यान भटक जाए तो घबराये नहीं फिर से अपना ध्यान सांसो पर एकाग्र करे। सांसो के आने जाने पर जो ध्वनि उत्पन होती है उसे सुनने की कोशिश करे।

चरण-2

दूसरे चरण में आप अपनी आँखे बंद कर ले और अपना ध्यान अपने दोनों आँखों के बिच eyebrow के मध्य यानि नाक की सबसे ऊपरी तरफ जहा दोनों आँखों के बिच गहराई है वहा फोकस करे। कुछ समय बाद आपको एक चमकीला बिंदु दिखाई देगा।

ये बिलकुल ऐसे ही है जैसे आप किसी गहराई में उतर रहे हो। लेकिन आपको अपना ध्यान उस सुरंग की बजाय चमकीले बिंदु पर रखना है। हो सकता है आपका ध्यान भटकने लगे और आपको बिंदु के अलावा कई चीजे दिखाई देने लगे। ऐसे में उन पर ध्यान ना देने से आप उन्हें इग्नोर कर सकते है।

आप चाहे तो अपने अंगूठे को अपने आज्ञा चक्र की जगह छुआ कर रख सकते है। शुरुआत में इस क्षेत्र पर दबाव आपको एकाग्र रहने में मदद कर सकता है।

जैसे त्राटक में हम खुली आँखों से करते है। इससे आपको एक फायदा और होगा की आपके मन में आने वाले विचारो के कम्पन हटने लगेंगे और आप ज्यादा से ज्यादा फोकस हो सकेंगे।

तीसरा चरण :

जब आप ऊपर के दोनों चरण पार कर लेते है तब आपको शून्य की अवस्था प्राप्त होती है। इस अवस्था में आपको अपने शरीर का भान भी नहीं होता है। जब आप शून्य की अवस्था में पहुँच जाते है तब आप शारीरिक बंधन से मुक्त हो जाते है और अपने आसपास की विचरण करती तरंगो को कैच करने लगते है।

इससे आप काल की झलकियां देखने में कामयाब हो जाते है। तीसरे नेत्र जागरण की तीन अवस्था में हमें ध्यान देना चाहिए की हमारा मानसिक स्तर संतुलन की अवस्था में हो। कम या ज्यादा की अवस्था में हम उदासीनता या फिर अहम जैसे भाव में भी फंस सकते है।

तीसरे नेत्र का जागरण में सावधानिया

Third eye के activation को लेकर आपकी क्या उम्मीदे हो सकती है और आप क्या महसूस कर सकते है इसे लेकर आपको सावधान रहना चाहिए। कई बार हम कुछ ऐसे झलकियों को महसूस करने लगते है जो हमारे लिए डरवाना अनुभव बन सकती है।

हिंदू धर्म में तीसरे नेत्र को हमारे आध्यत्मिक स्तर से जोड़ा जाता है। उनके अनुसार तीसरा नेत्र यानि आज्ञा चक्र हमें अंतर की यात्रा में सहायता करता है। इसके बारे में हम पढ़ चुके है।

तीसरे नेत्र का जागरण के वक़्त जरुरी नहीं की हमें वही अनुभव हो जो हम चाहते है। जैसे की आपके मन में इच्छा होती है की आप खुद से जुड़ी काल की घटनाओ को महसूस करे। लेकिन जब आप उस अवस्था में पहुँचते है तब आपका तीसरा नेत्र ब्रह्माण्ड में विचरण करती अनचाही तरंगो को पकड़ सकता है।

ज्यादातर अनुभव में जब तीसरे नेत्र के जागरण में खुद से जुड़ी घटनाओ को देखने की बजाय दुसरो की घटनाओ को आसानी से देख पाते है। ये सही भी है और नहीं भी निर्भर करता है आपका उदेश्य क्या है। क्यों की कुछ लोग इसे एक व्यवसाय के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए भी करते है।

Read : भगवान महादेव का शक्तिशाली त्रिनेत्र खोलने का मंत्र और साधना का विधान

अंतिम शब्द

हर इंसान में थोड़ी बहुत कालन्तर की घटनाओ की झलकियां देखने की शक्ति होती है। लेकिन ये तब संभव है जब हमारा मन भावुक हो इस हालत में अनुभव जल्दी होते है।

ज्यादातर लोग तीसरे नेत्र का जागरण को समझने के बजाय इससे डरने लगते है क्यों की वो अपने अनुभव शेयर नहीं कर पाते है इस डर से की उन्हें असामान्य ना समझ ले या फिर उनका गलत फायदा ना उठा ले।

दोस्तों ये कुदरत की वो देन है जिसे हर इंसान महसूस कर सकता है।

पर जरुरत है तो बस कुछ पल के लिए ही सही मस्तिष्क को उस अवस्था में ले जाया जाए। आज की पोस्ट तीसरे नेत्र का जागरण भी एक कड़ी का पहला भाग है। अनुभव और घटनाओ के आधार पर हम आज्ञा चक्र, विज़न, और तीसरे नेत्र के बारे में और भी जानेंगे अगली पोस्ट में इंतजार करते रहिये और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। तीसरे नेत्र का जागरण

मस्तिष्क की अनंत क्षमता और आपके सुपरमैन बनने की हकीकत part-1

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क्या हम सुपर पावर पा सकते है। क्या हम भी एक आम इंसान से ऊपर उठकर Powerful, amazing और सभी के attraction के center बन सकते है। हां ये possible है।

लेकिन कैसे क्यों की एक आम इंसान अपने mind और अपनी mental capability का सिर्फ नाममात्र उपयोग करता है अगर हम खुद को superman बनना चाहते है तो कड़ी मेहनत द्वारा ये संभव है लेकिन क्या आप जानते है इसकी शुरुआत कैसे की जाये।

हमेशा की तरह आज भी हम बात करेंगे मस्तिष्क की अनंत क्षमता तथा मनुष्य की असीमित शक्तियों और क्षमताओ को उभारने वाली कुछ खास बातो पर जो आप सब से सुनते है लेकिन उन्हें प्रयोग में लाने का right method नहीं जानते।

मस्तिष्क की अनंत क्षमता का इस्तेमाल

हम सभी पहले भी सुन चुके है की हमारा मस्तिष्क सिर्फ नाममात्र का काम में लिया जाता है।

सवाल ये उठता है की एक साधक कितने % तक दिमाग की क्षमता का इस्तेमाल कर रहा होता है तो आपको बता दू की वो भी सिर्फ 10-15% तक ही होता है।

जो magic आप देखते है वो इससे सिर्फ और सिर्फ 5% बढ़ कर इस्तेमाल कर पाते है। ये में नहीं अब तक की research कहती है। ये सारा डाटा मेने कई जगह से पढ़ने के बाद शेयर किया है। तो मान लिया जाये की 25% maximum इस world में मस्तिष्क की क्षमता का इस्तेमाल किया गया है।

मस्तिष्क की अनंत क्षमता का इस्तेमाल कैसे बढ़ाये

science और spiritual world दोनों में ही मस्तिष्क को लेकर कई बाते शेयर की गयी है जिनमे सबसे common है basic principle of work (मस्तिष्क के काम करने की प्रणाली।) ध्यान दे में बात कर रहा हु subconscious mind की ना की conscious mind यानि चेतन मन।

अवचेतन मन काम करता है विश्वास के आधार पर ना की तर्क और वितर्क। इस मामले में सिर्फ एक अपवाद है और वो ये है की आपका अवचेतन मस्तिष्क चेतन मस्तिष्क द्वारा प्रेषित की गयी सूचनाओं को अंदर भेजने से पहले खुद जाँचता है।

यानि की अगर सम्मोहन की अवस्था में भी अगर हम किसी व्यक्ति से ऐसी बात मनवाये जो उसके संस्कारो से विपरीत है तो सम्मोहन काम नहीं करता है। इसे आप अवचेतन मन का सेल्फ सुरक्षा द्वार समझ सकते है।

आस्था और विश्वास अवचेतन मन की सबसे बड़ी ऊर्जा

हमारा अवचेतन मन सिर्फ आस्था और विश्वास पर हर मुश्किल काम को संभव बना सकता है। बशर्ते आप इसे विश्वास दिला सको की आप में वो काबिलियत है। एक कामयाब इंसान कभी भी अपने अवचेतन मन को निराश नहीं करता है।

कुछ लोग चमत्कार देखने के बाद उसे तर्क की कसौटी पर तौलते है और अंत में कहते है की नहीं ऐसा तो हो नहीं सकता है और वास्तव में वो चाहे जितनी कोशिश कर ले लेकिन कामयाब नहीं हो पाते है।

क्यों की वो अपने मन को खुद की क्षमता पर शक करने का मौका खुद दे रहे है। मस्तिष्क की अनंत क्षमता बढ़ाई जा सकती है कैसे खुद ही देख लीजिये।

कभी भी अपने मन को जाहिर ना होने दे की आप किसी कार्य को नहीं कर सकते है। अगर आप उसे संतुष्ट कर पाएंगे तो आप कभी हार नहीं सकते।

इसलिए सबसे पहले तो खुद पर शक करना बंद कर दे की आप किसी काम को कर नहीं सकते। हर इंसान के अंदर इतनी क्षमता है की वो सब कुछ कर सके पर खुद की क्षमता को एक घेरे में लाकर वो उसे एक limit में बांध देता है। जिससे वो कभी आगे बढ़ ही नहीं पाता है।

आपकी वाणी में वो प्राण ही नहीं है

यहाँ प्राण का मतलब है वो मानसिक बल जो आपके शब्दों से झलकना चाहिए। आपने देखा होगा पहले लोग एक प्रण या संकल्प लेते थे और अपनी जान से बढ़कर उसे पूरा भी करते है। और आज के वक़्त में हम हजारो संकल्प लेते है और पूरा एक भी नहीं करते यही फर्क है की आपका अवचेतन मन कमजोर पड़ता जाता है।

आपका मनोबल एक बार टूट जाए तो उसे वापस मजबूत करने में आपकी पूरी जिंदगी लग सकती है।

इसलिए अगर आप खुद को strong और शक्तिशाली बनाना चाहते है तो संकल्प सोच समझ कर ले और उन्हें पूरा जरूर करे। मस्तिष्क की अनंत क्षमता इस पर भी निर्भर करती है। जिसके बारे में आगे विस्तार से चर्चा की जाएगी।

क्या आपको लम्बे अभ्यास के बाद भी अनुभव नहीं होते है

सबसे बड़ी समस्या उचित गुरु का ना मिल पाना है। इस अभाव में हम किताबी ज्ञान द्वारा अभ्यास करते है तो हमें सही अनुभव नहीं मिल पाते है। दुनिया की पहली किताब जिसने लिखी क्या उसे कही बाहर से ज्ञान और अनुभव मिला था।

नहीं दुनिया में सबसे पहला अनुभव और ज्ञान खुद के ह्रदय से उपजा था। इसकी वजह थी अभ्यास में तर्क वितर्क ना करना। मस्तिष्क की अनंत क्षमता को समझने वाले अपने मन को ही अपना गुरु मान कर अभ्यास करते है और सफलता प्राप्त करते है।

दूसरा हमें इस बात की जल्दी रहती है की कब पहला चरण पूरा हो और दूसरे चरण में प्रवेश करे। साधना का कोई चरण नहीं। हमारा मस्तिष्क और इसके अंदर का मन 7 द्वार के पीछे छुपा है। कुण्डलिनी और चक्र भेदन में इन 7 द्वार का भेदन किया जाता है।

जितना भेदन उतनी ज्यादा ज्ञान की प्राप्ति। लेकिन मोक्ष इसके सबसे अंतिम चक्र के भेदन में छिपा है।

हमें अभ्यास में फ़ैल नहीं होते है कभी नहीं। क्यों की हम कुछ करे और हमें कुछ सिखने को ना मिले ऐसा तो हो ही नहीं सकता।

समस्या है सिर्फ आपके धैर्य की कमी की। क्यों की आप सुन लेते है की अमुक व्यक्ति ने इतने कम समय में अनुभव कर लिया है और हम इतने लम्बे वक़्त से कोशिश कर रहे है फिर भी कोई अनुभव नहीं।

क्या करना चाहिए

धैर्य और संयम के साथ अभ्यास करना चाहिए। इससे हमें 2 फायदे होंगे।

पहला आपको कोई साइड इफ़ेक्ट का नुकसान नहीं होंगे जो अक्सर जल्दी अनुभव में महसूस किये जा सकते है। ऐसे अनुभव होते है जो हमारी समझ से परे होते है और मस्तिष्क फिर उसमे उलझ कर रह जाता है।

दूसरा आपको वो अनुभव होंगे जो लम्बे समय तक आपके साथ बने रहेंगे। इसके अलावा आप दोबारा कभी भी अपने अनुभव को फिर से जाग्रत कर सकते है।

आपके मस्तिष्क की अनंत क्षमता सिर्फ आपके धैर्य और संयम द्वारा ही बढ़ाई जा सकती है अचानक से नहीं।

आप संतुष्ट नहीं होते या आपको कोई रोक देता है

इंसान के अंदर मोल-भाव करने की आदत है। फिर चाहे वो कोई भी क्षेत्र हो। सच्ची-प्रेरणा से जुड़े एक्सपर्ट अपनी सेवाए उपलब्ध करवाने के लिए तैयार भी है लेकिन कुछ लोग कई दिन तक पूछताछ के बाद ये कहते है की हम संतुष्ट नहीं हुए।

आप हमें कोई और एक्सपर्ट उपलब्ध करवाए। क्या ये कमी expert की है। जी नहीं क्यों की वही एक्सपर्ट दूसरे लोगो को भी अपनी service देते है और उन्हें अच्छे अनुभव भी होते है।

बगैर शुरुआत के ये मान लेना की हम संतुष्ट नहीं होंगे आपकी ही कमी को show करता है। इसलिए एक बात पर ध्यान दे की हम कोई magic या चमत्कार नहीं करते है। मस्तिष्क की अनंत क्षमता को बढ़ाने के पीछे हमारा मकसद सिर्फ आपके मन को दिशा देना है यानि guide करना है।

बाकि अनुभव आपको ही होते है ये सब आपकी काबिलियत होती है। इसलिए सबसे पहले खुद को इस लायक बनाये की आपको विश्वास हो जाये की हम ये कार्य कर सकते है।

पढ़े : 8 मुख्य कारण जिनकी वजह से वशीकरण का उपाय काम नहीं करता है वशीकरण के फ़ैल होने की सबसे बड़ी वजह

लगभग 6 साल से ज्यादा हो चुके है और अपनी सेवाए उपलब्ध करवाना हम 3 महीने पहले ही शुरू कर चुके है। हम आपके मन की असीम क्षमता को उजागर करने और व्यक्तित्व विकास करने में आपकी मदद करेंगे।

आज की पोस्ट खासतौर से किसी अनुभव या अभ्यास पर नहीं है। ये सिर्फ एक शुरुआत है मन की शक्तियों को उभारने से पहले आपके डाउट को क्लियर करने की।

इसलिए हमने फैसला लिया है की इस पोस्ट को हम कड़ी में उपलब्ध करवाएंगे जिसमे आपको अभ्यास, अनुभव, टिप्स और बहुत कुछ जैसे की आपकी समस्या और हमारे सवाल जवाब भी उपलब्ध करवाए जायेंगे। इससे आपको दोगुना फायदा भी मिलेगा और हमें किसी फालतू सवाल का जवाब नहीं देना पड़ेगा।

अगर आपके मन में भी मस्तिष्क की अनंत क्षमता को लेकर कोई भी सवाल हो आप कमेंट के जरिये पूछ सकते है।

क्या आप जानते है इन संकेतो को जो बताते है की आप Law of attraction में एक्सपर्ट बन रहे है

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जब आपने पहली बार Law of attraction को समझा था तब आपके मन में ये सवाल तो आया ही होगा की कैसे हम भी Law of attraction में मास्टर बने। Law of attraction है क्या ? आपने पहली बार अपने मन की शक्ति को जाना होगा की आपका भाग्य आपके अपने हाथो में है, आपके अंदर भी वो काबिलियत है की आप उसे हकीकत में बदल सको जो आप सोचते है। Law of attraction में मास्टर कैसे बने जानिए कुछ इससे जुड़े अनछुए पहलु।

अगर आप मन की असीम शक्तियों पर विश्वास करते है तो आप एक तरह से Law of attraction में मास्टर बन चुके है क्यों की आपने मन की शक्तियों पर विश्वास रख कर खुद की रियलिटी की रचना ही तो की है।

हम सबमे विचारो पर फोकस होने, विश्वास रखने और पूर्वानुमान करने की क्षमता है। फोकस होने की आपकी क्षमता ही तो वास्तविकता को आपके ओर नजदीक कर देती है। ये ऐसी प्रक्रिया है जिसमे आप जन्मजात एक्सपर्ट है।

Law of attraction में मास्टर कैसे बने

Law of attraction एक्सपर्ट होने के मायने क्या है : ज्यादातर लोग Law of attraction के बारे में सोचते है की वो क्या प्राप्त करते है ये एक्सपर्ट होना तय करता है। जबकि हकीकत में

Law of attraction में एक्सपर्ट होना रिजल्ट पर कम और रिजल्ट के लिए क्या तरीका अपनाया उस पर ज्यादा निर्भर करता है। 

ज्यादातर हम दुसरो के पास चीजो को देखकर ही खुद के पास उन चीजो के होने की कल्पना करते है। जबकि हमारी खुद की इच्छाये इन सबसे भी ज्यादा उलझी हुई और मुश्किल है। चेतन रूप से इच्छाओ के घटने की कोई लिमिट नहीं है। ऐसा होता है सिर्फ हमारे भौतिक सुविधा में वृद्धि करने के लिए।

Law of attraction में मास्टर कैसे बने-एक्सपर्ट का नजरिया

चेतन रूप से जीवन में Law of attraction को अपनाने के रिजल्ट सामान्य उम्मीदों से कही ज्यादा है। ये आपके जीवन में विकास के हर पहलु पर गौर करना है फिर चाहे वो किसी बात को समझना हो या फिर उनके अनुसार व्यव्हार करना। अगर आप भी अपने जीवन में Law of attraction में मास्टर बनना चाहते है तो निम्न बातो को जरूर समझे।

Law of attraction में मास्टर कैसे बने- समझे इन बदलाव को

1.) आपकी उम्मीदे ऊँची है :

अगर आप चेतन रूप से Law of attraction का इस्तेमाल करना सीख जाते है तो आपके विचार और उनमे विश्वास के नजरिये में बदलाव आते है जिसके परिणामस्वरूप आप ऊँची सोच रखते है और आपकी उम्मीदे सामान्य विश्वास से परे होती है। आजकल की युवा पीढ़ी गुजरते वक़्त के साथ अपनी सोच और उम्मीद के दायरे में लगातार बढ़ोतरी कर रही है।

2.) आप सकारात्मक अभिव्यक्ति रखने लगते है :

जब आपका विश्वास और व्यव्हार Law of attraction के प्रति मजबूत हो जाता है तब आप सकारात्मक बोलचाल की भाषा का प्रयोग करने लगते है। आप सबसे पहले तो नकारात्मक विचारो को खुद से दूर करते है। ऐसा इसलिए क्यों की आपका विश्वास आपकी सोच के नाकाम या कामयाब होने पर सवाल ही नहीं उठाएगा।

आप हर पल ज्यादा से ज्यादा चेतन तो बनते है साथ ही फालतू के तर्क वितर्क से बचने लगते। है अब चूँकि आपका मन आकर्षण के सिद्धान्त के प्रति मजबूत हो रहा है तो आप किसी से शिकायत भी नहीं करते क्यों की अब आप विचलित नहीं होते है और इसकी वजह सिर्फ आपका आत्मविश्वास है।

3.) आप ज्यादा से ज्यादा लोगो से जुड़ने लगते है :

अगर आप फालतू के gossip  को Avoid करने लगते है तो खुद-ब-खुद आप ज्यादा लोगो से जुड़ने लगते है। क्यों की पहले आप सिर्फ उस टाइप के लोगो से जुड़े थे जो gossip करना पसन्द करते थे। अगर बात की जाए human psychology की तो इंसान अपना ज्यादा time उन लोगो के साथ गुजारता है जो उसके अनुसार या उसकी पसंद का व्यव्हार करे। अगर आप भी सोच रहे है की Law of attraction में मास्टर कैसे बने तो फालतू gossip से बचना शुरू कर दे।

4.) आप बाह्य संसार से अलग हो सकते है :

2 बाते है पहली आप क्या चाहते है उस पर फोकस होना और दूसरा आप क्या प्राप्त कर रहे है उसे लेकर परेशान रहना।

एक्सपर्ट लोग ऐसे में परेशान होने की बजाय किसी दूसरी जगह फोकस होना पसंद करते है। अगर आप ये सोच कर परेशान हो रहे है की अपने लक्ष्य से हटने से आप उसमे कामयाबी हासिल नहीं कर पाएंगे तो आप गलत है क्यों की एक मास्टर ऐसे हालात में लक्ष्य से हटने को सिर्फ एक सपना समझता है ना की बलपूर्वक उस लक्ष्य से ही दूर हो जाना।

5.) आपका प्रथम लक्ष्य ही फोकस होना है :

दिनभर हमारे अंदर सेंकडो इच्छाये जन्म लेती है। ऐसे में Law of attraction में मास्टर कैसे बने। इसके लिए आपका सबसे पहला मकसद किसी एक इच्छा पर फोकस होना है।

ये आपको आपके लक्ष्य के पूर्ण होने में मदद करता है क्यों की आप अपने लक्ष्य को लेकर क्लियर है। सोच समझ कर अपनी इच्छा को निर्धारित करना उसे पूरा करने में मदद करता है।

6.) आपका दूसरी चीजो को देखने का नजरिया :

हमारी सोच का नजरिया ही हमारी लिमिट को निर्धारित करता है। जब हम किसी चीज ( अपने इच्छा में ) को लिमिट से जोड़ते है तो वो सिर्फ हमारे मस्तिष्क की सोच होती है।

अगर हम विश्वास करे की सबकुछ संभव है और फिर हम किसी लिमिटेशन का सामना करते है तो इसका मतलब वो सिर्फ हमारे मस्तिष्क की लिमिट है। Law of attraction में मास्टर कैसे बने के लिए सबसे पहले तो आपको  खुद पर आत्मविश्वास मजबूत करना होता है और सबकुछ संभव है जैसी मानसिक सोच बनानी पड़ती है।

7.) जीवन में कुछ भी कभी एक जैसा नहीं होता है

एक Law of attraction के मास्टर की life में वक़्त के साथ बहुत सारे बदलाव आते है। ये सब उसकी उस लिमिट को धुंधला कर देते है जो उसने कभी बीते कल में महसूस की थी। जैसे की आप अगर सोच ले की आपको फ्री माइंड रहना है तो फिर चाहे कितना भी काम आपके पास हो आप आसानी से उसे पूरा कर लेते है।

इसका मतलब ये नहीं है की आपने सोचा और हो गया Law of attraction में इस पर हम किस तरह से मेहनत करते है ये उस पर निर्भर करता है।

8.) आपको अपनी गलतियों में भी फायदे दिखते है :

ये आपको सरप्राइज कर सकता है लेकिन ये सच है क्यों की जब हम आकर्षण के सिद्धान्त में मास्टर बन जाते है तब हमें हमारे नकारात्मक कदम और समस्याओ में भी फायदे नजर आने लगते है। ये सब निर्भर करता है हमारी सोच के नजरिये पर।

हर परिणाम के दो पहलु होते है। अगर आप अच्छे पहलु की ओर देखे तो दूसरे को नजरअंदाज कर रहे है। जीवन में कई बार बड़े फैसले लेने पड़ते है। ऐसे में दोनों पहलु पर विचार कर ही हम सही फैसला ले सकते है। हमारी गलतिया हमारे फ़ैल होने का सबूत नहीं है ये हमें बताती है की हम अच्छा कर सकते है। और फिर क्या गलतियों से अनुभव नहीं मिलता।

9.) ये तो अनंत सफर है मंजिल नहीं :

क्या आप सिर्फ एक बार कामयाब होकर संतुष्ट हो जायेंगे। हमारी सोच और विश्वास से जब हम एक बार कामयाब हो जाते है तो हम बैठते है बल्कि दूसरे सफर के लिए निकल पड़ते है। क्यों की कभी भी जीवन में हमारे सामने सिर्फ एक लक्ष्य नहीं होता है।

एक इच्छा पूरी होने के बाद दूसरी इच्छा पूरी करने हम निकल पड़ते है जीवन के अनंत सफर पर। आपकी सोच की Law of attraction में मास्टर कैसे बने हमेशा इस सफर में आपको नया सिखाती रहती है।

10.) लोग आपके बारे में क्या सोचते है पर ध्यान नहीं देते है :

आत्मविश्वास में कमी वाले हमेशा किसी भी काम को दुसरो की उम्मीदों के हिसाब से पूरा करते है ना की खुद के लिए। अगर आप भी किसी काम को करते हुए ये सोचते है की लोग इस बारे में क्या कहेंगे तो आप समझ जाइये की आप उस काम को खुद के लिए नहीं दुसरो के लिए कर रहे है।

क्यों की ऐसे में आप खुद के फायदे के लिए नहीं लोग क्या चाहते है की तरह से काम पूरा करेंगे। और जब आप ऐसा करते है तो आप सिर्फ दिखावा करते है।

हमें खुद में इतना आत्मविश्वास तो बनाना ही चाहिए की हम समझ सके की हम चाहते क्या है। लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे या फिर में इस काम को ऐसे करू ताकि लोग खुश हो की सोच नहीं रखनी चाहिए। क्यों की आपको अपने लिए काम करना है ना की दुसरो के लिए। खुद में आत्मविश्वास जगाना Law of attraction में मास्टर कैसे बने की समस्या को दूर करने में सहायक है।

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अंतिम शब्द-लेखक का नजरिया :

दोस्तों में कभी भी किसी काम को करते वक़्त सबसे पहले उसमे विश्वास करता हूँ की वो कार्य में कर सकता हूँ। इसके साथ ही दूसरा सबसे बड़ा नियम बाह्य संसार से अलगाव यानि सिर्फ अपने नजरिये के लोगो के साथ ना रहकर विस्तृत नजरिये के लोगो के साथ वक़्त बिताना ये दो नियम Law of attraction में सबसे ज्यादा काम आते है।

क्यों की अपने काम को पूर्ण करने का विश्वास उसे आधा पूरा कर देता है। बाद में बचता है सिर्फ तरीका।

आज की पोस्ट Law of attraction में मास्टर कैसे बने की पोस्ट इन्टरनेट पर आकर्षण के सिद्धान्त से जुड़ी अलग अलग पोस्ट का मिश्रण है। अगर आपको लगता है की इसमें कही पर सुधार हो सकता है तो कृपया अपने सुझाव कमेंट बॉक्स में जरूर रखे।

क्या आप विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल कर सकते है ?

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विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करनासुनने में आपको ये मुश्किल लग सकता है और लगे भी क्यों नहीं जिस मन को साधने में हमें सालो लग जाते है फिर भी चाह कर भी पूरी तरह मन को कण्ट्रोल नहीं कर पाते है। क्यों की मन इस संसार में सबसे ज्यादा गतिशील है। सच्ची-प्रेरणा पर आज में आपको बताऊंगा की कैसे हम विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना सीख सकते है। ये अभ्यास थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन लगभग 2 महीने के अभ्यास में ही हमें आश्चर्यजनक परिणाम मिलने लगते है।

हम सभी जानते है की हमारा मस्तिष्क हमेशा विचारो से घिरा रहता है। क्यों की दिनभर हमारे मन में सेंकडो विचार और इच्छाये जन्म लेती है लेकिन क्या वो सभी इच्छाये और विचार पूर्ण होते है ! नहीं ना, इसकी वजह है हमारा सिर्फ सोचना उन्हें पूरा करने का कोई प्रयास नहीं करना। इसलिए व्यक्तित्व निर्माण के लिए आज एक अभ्यास के बारे में जानेंगे जिसे करने के बाद आप ना सिर्फ अपने आप को control कर सकते है बल्कि अपनी ज्यादातर problem solve कर सकेंगे।

हमारा शरीर और मन गतिशील है :

अगर आपने गौर किया होगा तो पाया होगा की हम दिनभर कुछ physical activity ऐसी करते है जिनका हमारे काम से कोई मतलब नहीं होता है। जैसे की पैरो को हिलाना, अंगुलिया घुमाते रहना ये सब हम इसलिए करते है क्यों की हमारा mind अनचाहे विचारो में उलझ जाता है। इसकी बजाय जब आप सिर्फ किसी खास work पर focus करते है तो हम सिर्फ उसी काम में डूबे रहते है और कोई फालतू हरकत नहीं होती है।

हमारा मन गतिशील है लेकिन इससे पहले हमें शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना होगा क्यों की मन को अगर शांत करना है तो हमें शारीरिक activity पर से ध्यान हटाना होगा। आपने देखा होगा किसी भी आसन, pranayama, meditation, त्राटक इन सभी विधि में मन से पहले body की movement को control किया जाता है। हम मन को control करने की बजाय अगर उसके direction यानि दिशा प्रदान करे तो आसानी से हम विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना सीख सकते है।

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 शरीर और मन दोनों ओर बेहतर बनने के लिए ही बने है :

आपने कई लोगो से सुना तो होगा ही की computer और human mind दोनों में ही यादो को सहेजने की क्षमता है साथ ही दोनों को program भी किया जा सकता है। अगर बात को Subconscious mind के नजरिये से समझने की कोशिश करे तो हमारा मस्तिष्क अलग अलग हालात में ढल सकता है ये programing का ही एक हिस्सा है। इसी तरह के एक अभ्यास द्वारा आज हम खुद को भावना द्वारा मनचाहे विचार के अनुसार program करने के बारे में सीखेंगे। भावना शक्ति के बारे में आप पहले की पोस्ट में जान चुके है। आज उसका प्रयोग कर खुद को modify करना जानेंगे। भावना शक्ति द्वारा विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना इतना आसान तो नहीं है पर अगर ये अभ्यास हो जाए तो आप खुद को किसी भी परिस्थिति में संभाले रख सकते है। साथ ही साथ अनचाही प्रॉब्लम से छुटकारा पा सकते है।

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 विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना

दरअसल इस अभ्यास का मकसद आपके भावना शक्ति को मजबूत बनाना है। इसके द्वारा हम खुद को वो महसूस करवाते है जो हम चाहते है। अभ्यास काफी हद तक मानसिक शक्तियों के अभ्यास से मिलता भी है।

स्थान और समय का चुनाव :

इस अभ्यास के लिए ऐसी जगह चुने जहा आपको कम से कम 2 घंटे तक कोई व्यवधान न पहुंचे। क्यों की अभ्यास में हमें बिलकुल शांत जगह और सुनसान यानि किसी के आने की सम्भावना ना हो जैसी जगह का चुनाव करना है। दोपहर के समय जब आपको खाना खाये हुए 2 घंटे हो जाए तब इस अभ्यास को कर सकते है। ध्यान इस बात का रखना है की lunch अभ्यास से इतना पहले किया हो की अभ्यास पर इसका असर ना पड़े।

1.) शुरुआती तैयारी :

अभ्यास के लिए आप background music लगा सकते है जो बिलकुल धीमे सुनाई पड़े। साथ ही माहौल ऐसा बनाये जिसमे आपका मन लगा रहे। इसके लिए खुशबु का इस्तेमाल कर सकते है। इसके बाद आप आराम से लेट जाइये और सोने की स्थिति में यानि शवासन में आ जाइए। इसके बाद आपका शरीर शिथिल हो जाता है। और मन में विचार भी बहुत कम आने लगेंगे।

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2.) अभ्यास का दूसरा चरण :

अब आपके शरीर की हरकते न्यूनतम हो चुकी है और शिथिल हो चूका है। इसके आगे आपको अब मन में भावना देनी है की आपके हाथ हवा में उठ रहे है। आपको शारीरिक बल द्वारा हाथ नहीं उठाने है बल्कि सिर्फ मन में भावना देनी है। लगातार ऐसी ही एक भावना देने से आपको कुछ समय बाद ऐसे महसूस होने लगता की जैसे आपके हाथ हवा में उठने लगे है। जब आपका ध्यान इस ओर जाता है तो वो वापस निचे आ जाते है।

शुरू शुरू में इनमे हरकत सिर्फ अंगुल भर ही होती है। इसलिए घबराने की जरुरत नहीं है बस अपना सारा ध्यान सिर्फ एक ही विचार पर लगा दीजिये।

मेरे हाथ हवा में उठ रहे है। उनमे हरकत हो रही है और में इसे महसूस कर रहा हूँ।

आपको आंखे बंद ही रखनी है। साथ ही और किसी गतिविधि पर ध्यान ना जाये इसे याद रखे। कुछ समय बाद धीरे-धीरे आपके हाथ थोड़े ऊपर उठने लगते है। अगर अभ्यास सही चलता रहता है तो इसके बाद एक समय  ऐसा आता है जब आप कुछ समय बाद ही सफलतापूर्वक हाथो को विचारो द्वारा हवा में उठा पाते है।

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3.) विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना-अंतिम चरण :

विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना अब आपके लिए काफी आसान हो जाता है। सब भावनाओ का खेल है और जिस तरह कंप्यूटर को प्रोग्राम किया जाता है वैसे ही आप भी खुद में बदलाव ला सकते है। अंतिम चरण में आपका मस्तिष्क आपके शरीर को वही अहसास करवाने लगता है जो वो सोचता है।

  • इसके लिए आपको वही शवासन की position में आकर खुद को भावना देनी है की मुझे कोई हरकत महसूस नहीं हो रही है। जैसे की आपको खुजली होने लगे या फिर आपको मच्छर काटे लेकिन फिर भी महसूस होने के बावजूद आपमें आपमें उसकी कोई हरकत ना हो तो समझ लीजिये आपने अभ्यास में पूर्णता प्राप्त कर ली है। इस अभ्यास का सबसे बड़ा secret ये है की
  • आप जो चाहे वही पा सकते है जरुरत है तो बस भावना शक्ति के साथ उसकी सही कल्पना करना।

यही वो सीक्रेट है की में आज तक जिस अभ्यास को भी करता आया उसमे पूर्णता प्राप्त की ना सिर्फ पूर्णता बल्कि इसका सही जगह इस्तेमाल भी किया।

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विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना-लाभ :

इस अभ्यास को आप हर जगह आजमा सकते है। खासतौर से तनाव दूर करने और अनचाहे विचार को हटाने के लिए। यकीन मानिये अगर आपने ये अभ्यास कर लिया तो आप निम्न फायदे उठा सकते है।

  • किसी भी माहौल में खुद को ढाल सकते है खासतौर से अगर आपको किसी जगह असहजता महसूस होती है  तो आप आसानी से खुद को इसके लिए तैयार कर सकते है।
  • पढ़ाई में मन लगाने के लिए।
  • तनाव दूर करने में और इसके लिए आपको किसी शांत जगह की जरुरत नहीं है बस आँखे बंद की और कुछ समय तक भावना दी। फिर चाहे आप कही सफर में ही क्यों ना हो ( ये मेरा खुद का सबसे ज्यादा किया जाने वाला प्रयोग है। )

ये अभ्यास मानसिक शक्तियों के अभ्यास में भी काफी मददगार साबित हो सकता है। अगर आपने पहले कभी कोई अभ्यास किया हो और किसी वजह से बिच में ही छूट गया हो और वर्तमान में करना चाहते है तो ये आपके लिए सबसे ज्यादा कारगर और प्रभावी अभ्यास है।

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अंतिम शब्द :

विचारमात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना वाकई में हमारे लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। अगर आपने भावनाशक्ति का सही इस्तेमाल करना सीख लिया तो आपके लिए कोई ऐसा काम नहीं जिसमे आप सफलता प्राप्त नहीं कर सकते है। व्यक्तित्व विकास के लिए  विचारममात्र से शरीर और मन को कण्ट्रोल करना और Thought regulation process को कर आप हर वो कार्य अपने लिए आसान बना सकते है जो आपको मुश्किल लगता था।  अभ्यास से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए आप हमें Contact कर सकते है और कमेंट में भी पूछ सकते है।