शत्रु शमन, त्रिकालदर्शी और शून्य सिद्धि की प्राप्ति के लिए माँ ललिताम्बा साधना सिद्धि का अभ्यास दिसंबर 2023 की उच्च साधना


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ललिताम्बा साधना सिद्धि या ललिताम्बा देवी साधना भूत भविष्य और वर्तमान को प्रत्यक्ष देखने के लिए की जाने वाली सबसे उच्च स्तर की साधनाओ में से एक है. वर्तमान में ज्यादातर साधक ऐसी साधनाओ में रूचि रखते है जो काल ज्ञान से जुड़ी है.

काल ज्ञान की साधना करने वाले साधक आने कल और बीते कल के साथ वर्तमान में क्या हो रहा है उसके बारे में जानकारी हासिल करते है. ये जितनी भी साधनाए है वे आपके आकाशिक रिकॉर्ड / Akashik record को देखती है.

वर्तमान समय में 10 महाविद्या को सर्वोतम माना जाता है लेकिन माँ ललिताम्बा से जुड़ी ये साधना भी उच्च स्तर की साधनाओ में से एक है और इसके जरिये आप भूत वर्तमान और भविष्य के बारे में आसानी से जान सकते है.

अगर आप भी दूसरो के मन की बात को जानना और उनके बारे में बिना कुछ कहे जी जानना चाहते है तो आपको ललिताम्बा साधना सिद्धि का अभ्यास जरुर करनी चाहिए.

देवी ललिताम्बा की साधना सिद्धि होने के बाद साधक को काल ज्ञान की सिद्धि तो मिलती ही है लेकिन, इसके साथ ही उन्हें शून्य की सिद्धि भी होती है. इस सिद्धि के जरिये साधक शून्य से किसी भी चीज को हासिल कर सकता है.

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ललिताम्बा साधना सिद्धि

शत्रु शमन के लिए भी आप इस साधना की सिद्धि कर सकते है. देवी साधक की हर खतरे से सुरक्षा करती है और भी ऐसे कई फायदे है जो आपको इस साधना में मिलते है.

आइये जानते है माँ ललिताम्बा की साधना सिद्धि के सबसे आसान तरीके के बारे में और इससे जुड़े फायदे के बारे में जो साधक को मिलते है.

ललिताम्बा साधना सिद्धि

ललिताम्बा साधना एक ऐसी श्रेष्ठ और दिव्य साधना है जो साधक को शून्य सिद्धि प्रदान करती है. शून्य सिद्धि होने के बाद साधक हवा से कुछ भी प्रकट कर सकता है.

ऐसा माना जाता है की इस उच्च स्तर की साधना के सिद्ध होने पर साधक को अनंत सिद्धियाँ प्राप्त होती है जिसमे शत्रु शमन और त्रिकालदर्शी बनना शामिल है.

साधक के जीवन की समस्त भौतिक और आध्यात्मिकता से जुड़ी कमियों को दूर करते हुए माँ ललिताम्बा उन्हें उच्च स्तर के साधक बनने में मदद करती है.

ऐसा माना जाता है की जो साधक इस साधना को सिद्ध करता है वो अपने और किसी के भी भूत और भविष्य को देखकर उसके बारे में जान सकता है. माँ ललिताम्बा को समस्त सिद्धियों की स्वामिनी माना गया है और ये ललिताम्बा साधना सिद्धि के अभ्यास को उच्च स्तर की साधनाओ में से एक बनाता है.

देवी के तो अनेक रूप होते हैं – जगदम्बा, दुर्गा, ‘तारा, काली, किन्तु इन दस महाविद्याओं से भी परे एक और स्वरूप है “ललिताम्बा” जो ब्रह्माण्ड के समस्त सिद्धियों की स्वामिनी है.

जहां वह अपने प्रेम, स्नेह और करुणा से साधक को अपना आशीर्वाद प्रदान करती है, वहीं उसे पूर्व जन्मकृत पाप-दोषों से अवगत कराकर तथा उसके जीवन के समस्त शत्रुओं का विनाश कर उसे एक चिन्तामुक्त जीवन प्रदान करती है, और ये शत्रु हैं उसके भौतिक और आध्यात्मिक जीवन की समस्त न्यूनताएं.

ऐसी कई वजह है जो इस एक साधना को खास बनाती है और साधक को इसे जरुर करना चाहिए.

ललिताम्बा साधना सिद्धि से मिलने वाले फायदे

इस साधना की सिद्धि करने वाला व्यक्ति अथवा साधक पूरे संसार में, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त करता है और फिर जीवन में उसे किसी भी प्रकार का कोई भय नहीं रहता है.

lalitamba devi

इसकी साधना से नपुंसक व वृद्ध व्यक्ति भी पूर्ण यौव्रनवान एवं कामदेव के समान सुन्दर बन जाता है, उसे “शून्य सिद्धि” स्वतः ही प्राप्त हो जाती है. सिद्धि प्राप्त हो जाने पर फिर वह वायु में से कोई भी पदार्थ प्राप्त कर सकता है.

वास्तव में यह साधना गोपनीय एवं दिव्य है. गोरक्ष संहिता के अनुसार यह साधना गोपनीय ही नहीं, महागोपनीय है.

ललिताम्बा साधना सिद्धि सम्पन्न करने पर साधक को विभिन्न लाभ प्राप्त होते हैं.

  1. इस साधना को सम्पन्न करने के बाद उस व्यक्तित्व में भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों तरह का परिवर्तन परिलक्षित होता है.
  2. इस साधना को सिद्ध करने के पश्चात् साधक धन धान्य,’ सुख-सौभाग्य से परिपूर्ण होकर श्रीवान और ऐश्वर्यवान बन जाता है.
  3. उसके जीवन का क्रम अपने-आप में अद्वितीय और परिमार्जित हो जाता है.
  4. इसके साथ ही साथ उसके शत्रु पक्षका स्वतः ही शमन हो जाता है.
  5. आध्यात्मिक क्षेत्र में उसको दिव्य अनुभूतियां होने व लंगती हैं, तथा ललिताम्बा साधना सिद्धि के बाद अनन्त सिद्धियां स्वतः ही उसके पास आ जाती हैं.
  6. इस साधना के बाद साधक का तृतीय नेत्र खुल जाता है, वह “त्रिकालदर्शी” बन जाता है, और तब वह किसी के भी भूत और भविष्य को देखकर उसके बारे में जान सकता है.

यह ऐसी ही अद्वितीय एवं श्रेष्ठ साधना है, जिसे किसी गुरु या मार्गदर्शक के निर्देशन में ही सम्पन्न करना चाहिए. इस तरह की साधनाओं के लिए मार्गदर्शक के रूप में गुरु का होना अति आवश्यक होता है.

अगर आपको अभी तक गुरु की प्राप्ति नहीं हुई है या फिर आप साधना का अभ्यास घर रहते हुए करना चाहते है तो आप इसका अभ्यास यहाँ शेयर किये जा रहे तरीके से करे.

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माँ ललिताम्बा साधना सिद्धि की परीक्षित विधि

साधक इस साधना को शुभ समय पर कर सकते है. सबसे अनुकूल समय मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पूर्णमासी को माना गया है और इस साल के अंत में आप इस साधना की शुरुआत कर सकते है.

पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 26 दिसंबर 2023 को सुबह 05 बजकर 46 मिनट पर होगी और इसका समापन 27 दिसंबर 2023 को सुबह 06 बजकर 02 मिनट पर होगा. मार्गशीर्ष पूर्णिमा मोक्षदायिनी पूर्णिमा कहलाती है.

Devi lalitamba

इस अवसर पर की जाने वाली साधना के अनुकूल परिणाम मिलते है और साधना सिद्धि में भी आसानी रहती है.

यह ललिताम्बा साधना सिद्धि 3 दिन तक की जाती है और साधना काल में साधक को पीले वस्त्र धारण करने चाहिए. स्नान कर पीले वस्त्र धारण कर उत्तर की तरफ मुख कर बैठ जाइए.

अपने सामने एक चौकी की स्थापना करे और पीले कपड़े को बिछाकर उस पर गुरु या अपने इष्ट की स्थापना करे और एक माला जप करे.

अब एक तांबे की प्लेट ले और उस पर कुमकुम से “ह्रीं” लिखकर माँ ललिताम्बा यंत्र की स्थापना करे.

lalitamba yantra

अक्षत, धूप, दीप, चंदन, पुष्प आदि से विधिवत पूजन करे और दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प ले. संकल्प के दौरान अपना नाम, कुल और गौत्र का स्मरण करते हुए साधना सिद्धि का उदेश्य प्रकट करे और जल छोड़ दे.

मूंगे की माला ले और 35-45 मिनट तक निम्न मंत्र का जप पूरा करे.

ॐ ह्रीं ह्रीं ललिताम्बायै फट्

माँ ललिताम्बा साधना सिद्धि का अभ्यास 3 दिन का है और मंत्र जप समाप्ति के बाद माला और यंत्र को बहते हुए जल या कुँए में प्रवाहित कर दे.

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कलियुग में माँ ललिताम्बा साधना को करने का कारण

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हम अपनी लाइफ में किसी भी साधना की सिद्धि के लिए कई बार प्रयास करते है लेकिन सफलता नहीं मिलती है क्यों की साधक की अपनी कमियां, गुरु का ना होना या फिर पिछले जन्म के कर्म ऐसी कई वजह होती है जिनकी वजह से साधक को चाहकर भी सफलता नहीं मिलती है.

माँ ललिताम्बा ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों की स्वामिनी है और माँ का स्वरूप है जो साधक को साधना सिद्धि में सहायक है.

ललिताम्बा साधना सिद्धि  की इस एक साधना से साधक अपने भौतिक और आध्यातिक जीवन की समस्त कमियों से ऊपर उठता है और जो कुछ भी चाहता है उन्हें हासिल करता है.

जब साधक को अपने भूत और भविष्य का ज्ञान होता है तब वह बेहतर बनने की कोशिश कर सकता है.

शून्य सिद्धि, शत्रु शमन और त्रिकालदर्शी सिद्धि जैसी उच्च स्तर की साधना साधक को सहर्ष सिद्ध होती है और लाइफ में किसी चीज की कमी नहीं रहती है.

अगर आप यौवन की समस्या से जूझ रहे है तब भी आप इस साधना को कर सकते है. इस साधना को संपन्न करने वाले साधक को अपने अन्दर एक अपूर्व उर्जा का अहसास होना शुरू हो जाता है जो उसे आकर्षक बनाता है.

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माँ ललिताम्बा साधना सिद्धि और बिना गुरु के साधना में सफलता हासिल करना अंतिम शब्द

ऐसा माना जाता है की आज के युग में किसी भी साधना में सफलता हासिल करना आसान नहीं है खासकर बिना गुरु के तो आप इसमें सफलता हासिल ही नहीं कर सकते है.

ज्यादातर साधक जब इसकी शुरुआत करते है तब उनका बॉडी और माइंड के बीच किसी तरह का एलाइनमेंट नहीं होता है.

साधक का साधना की शुरुआत से पहले अपने बॉडी और माइंड के बीच कनेक्शन स्थापित करना जरुरी होता है. इसके बगैर वे ब्रह्माण्ड की अनंत उर्जा को अनुभव नहीं कर सकते है और ना ही उन्हें इसका फायदा मिलता है.

माँ ललिताम्बा साधना सिद्धि करने के पीछे साधक के कई उदेश्य हो सकते है लेकिन, इस एक साधना के सिद्ध होने के बाद साधक को अनंत सिद्धियाँ हासिल होती है.

अगर आपको गुरु की प्राप्ति नहीं हुई है तब भी आप माँ ललिताम्बा साधना सिद्धि का अभ्यास घर पर ही कर सकते है.

बिना गुरु के किसी साधना में सफलता हासिल करना है तो साधना से पहले 15 मिनट ध्यान का अभ्यास कर इस पर सिद्धि हासिल करे. जितना ज्यादा आप शून्य में रहेंगे आपको सिद्धियों का अनुभव होना शुरू हो जायेगा.

जब तक आप शून्य में रहने का अभ्यास नहीं करेंगे आपको अनुभव नहीं मिलेंगे और ये आप किसी भी साधना के दौरान अनुभव कर सकते है.

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